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  • दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक

    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक


    भोपाल।
    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मंगलवार को मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक देर रात तक धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी उनके साथ धरने में शामिल हैं।

    मंगलवार को जीतू पटवारी लोकभवन के सामने धरने पर बैठे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वहां से हटाकर वाहन में बैठा लिया। कुछ देर बाद वे सीधे विधानसभा पहुंचे और धरना दे रहे विधायकों का समर्थन किया।

    दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी प्रदेश में प्रदर्शन किया।

    विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना जारी

    मंगलवार को शाम तक विधानसभा की कार्यवाही के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। कुछ विधायक विरोध जताने के लिए फर्श पर भी लेट गए। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने धरना खत्म कराने की कोशिश की लेकिन विधायक नहीं माने। बाद में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बातचीत के लिए पहुंचे। इस दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से तीखी बहस हुई और कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की।

    भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन समेत कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन, रैली और नारेबाजी की। कुछ जगह चक्काजाम और पुलिस से धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। देर रात तक अधिकांश जिलों में प्रदर्शन समाप्त हो गए, जबकि विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का धरना जारी है।

  • राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अलर्ट, 62 विधायक स्पेशल फ्लाइट से बेंगलुरु रवाना

    राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अलर्ट, 62 विधायक स्पेशल फ्लाइट से बेंगलुरु रवाना


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। भाजपा द्वारा तीसरी राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार उतारे जाने के बाद चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। इसी बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने अपने सभी 62 विधायकों को कर्नाटक भेजने का निर्णय लिया है, जहां वे मतदान तक पार्टी के संपर्क और निगरानी में रहेंगे।

    मंगलवार को कांग्रेस विधायक भोपाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर एकत्रित हुए। इसके बाद सभी विधायक अपनी-अपनी गाड़ियों से एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें विशेष विमान के जरिए बेंगलुरु रवाना किया गया। कांग्रेस ने इसके लिए 72 सीटों वाला विशेष विमान बुक किया है। दिलचस्प बात यह रही कि कई विधायक अपने परिवार के सदस्यों के साथ भी इस यात्रा पर निकले, जिससे एयरपोर्ट पर अलग ही माहौल देखने को मिला।

    राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने महेश केवट को मैदान में उतारा है। इसी वजह से राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर दोनों दल सतर्क नजर आ रहे हैं।

    एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और पार्टी को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने विधायकों की चिंता नहीं है, बल्कि भाजपा को अपने विधायकों को संभालकर रखना चाहिए। सिंघार ने दावा किया कि कांग्रेस को 62 वोटों से भी अधिक समर्थन मिल सकता है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी।

    उन्होंने विधायक निर्मला सप्रे को लेकर भी टिप्पणी की। सिंघार ने कहा कि यदि उन्हें अपनी विधानसभा सदस्यता बनाए रखनी है तो कांग्रेस का समर्थन करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि निर्मला सप्रे हाल की पार्टी बैठकों में शामिल नहीं हुई हैं, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

    कांग्रेस की यह सतर्कता वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम से भी जुड़ी हुई मानी जा रही है। उस समय ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कई विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार गिर गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए कांग्रेस इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है।

    वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के 64 विधायक हैं, लेकिन न्यायालय के आदेश के चलते एक विधायक मतदान के पात्र नहीं हैं। वहीं कुछ विधायकों की गतिविधियों को लेकर भी पार्टी सतर्क है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में हर वोट महत्वपूर्ण हो सकता है और इसी कारण कांग्रेस अपने विधायकों को पार्टी शासित राज्य में रखकर किसी भी संभावित राजनीतिक घटनाक्रम से बचना चाहती है।

    इस बीच भोपाल एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और विधायकों की मौजूदगी ने राजनीतिक सरगर्मियां और बढ़ा दीं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी एयरपोर्ट पहुंचे, जबकि तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश गौड़ ने उनसे मुलाकात की। आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में और भी दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।