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  • सियासी लड़ाई ने लिया पारिवारिक विवाद का रूप: इमरान मसूद के दामाद पर मारपीट के आरोप, शायान बोले मैदान में आकर लड़ो

    सियासी लड़ाई ने लिया पारिवारिक विवाद का रूप: इमरान मसूद के दामाद पर मारपीट के आरोप, शायान बोले मैदान में आकर लड़ो


    सहारनपुर सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के परिवार का राजनीतिक विवाद अब पारिवारिक कलह तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद परिवार के भीतर चल रही तनातनी खुलकर सामने आ गई है। शनिवार को इमरान मसूद के भतीजे हमजा नोमान मसूद ने फेसबुक लाइव के जरिए अपने बहनोई शायान मसूद और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। हमजा ने दावा किया कि उनकी बहन सुबिया मसूद के साथ मारपीट और गाली गलौज की गई तथा उन्हें घर से निकाल दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    हमजा नोमान मसूद का कहना है कि परिवार पिछले करीब पांच वर्षों से कई बातों को रिश्तेदारी और परिवार की प्रतिष्ठा के चलते नजरअंदाज करता रहा। उनका आरोप है कि उनकी बहन के साथ लगातार ज्यादती होती रही और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि चुप रहना संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास घर के भीतर हुई बातचीत से जुड़ी कई रिकॉर्डिंग और वीडियो मौजूद हैं। हमजा ने चेतावनी दी कि अगर विवाद आगे बढ़ता रहा तो वह इन रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक कर सकते हैं।

    हमजा ने राजनीतिक कारणों से भी अपनी बहन को परेशान किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि परिवार ने लंबे समय तक रिश्ते बचाने की कोशिश की लेकिन अब उनकी बहन और उसके छोटे बच्चे की जिम्मेदारी उनका परिवार उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शायान ने बच्चे की जरूरतों के लिए भी आर्थिक मदद नहीं की। हमजा ने कहा कि उनकी बहन को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है और परिवार उसके साथ मजबूती से खड़ा है।

    हमजा ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि उनके पास ऐसी बातचीत और रिकॉर्डिंग हैं जिनमें उन्हें और उनके चाचा इमरान मसूद को राजनीतिक रूप से रास्ते से हटाने जैसी बातें कही गईं। हालांकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई रिकॉर्डिंग पेश नहीं की है। उनका कहना है कि वह अब तक परिवार की गरिमा बनाए रखने के लिए चुप रहे लेकिन लगातार हो रही बयानबाजी के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    दूसरी तरफ शायान मसूद ने इन आरोपों के जवाब में इसे राजनीतिक विवाद से जोड़ते हुए हमजा को चुनौती दी। उनका कहना है कि अगर राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो राजनीतिक मैदान में आकर मुकाबला किया जाए। शायान ने कहा कि वह परिवार की निजी बातें सार्वजनिक करके विवाद को और बढ़ाना नहीं चाहते। उन्होंने दावा किया कि उनके पास भी बहुत कुछ कहने के लिए है लेकिन वह परिवार के भीतर की बातों को सार्वजनिक करना उचित नहीं समझते।

    दरअसल यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब शायान मसूद ने 20 अगस्त को कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। सपा में शामिल होने के बाद शायान ने इमरान मसूद की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भाजपा को हराने के लिए भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई जरूरी है और अखिलेश यादव के खिलाफ बोलने से भाजपा को फायदा पहुंचता है।

    अब शायान के सपा में जाने के बाद शुरू हुआ राजनीतिक मतभेद परिवार के निजी विवाद तक पहुंच गया है। एक तरफ शायान इसे राजनीतिक मुकाबला बता रहे हैं तो दूसरी तरफ हमजा परिवार के भीतर गंभीर आरोपों को सार्वजनिक कर रहे हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप और दावे सामने हैं और मामले में लगाए गए पारिवारिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

  • आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    प्रयागराज। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज से उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान का आगाज करेंगे। वह केपी इंटर कॉलेज मैदान में करीब दो घंटे तक छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के जरिए पूर्वांचल के युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की है। कार्यक्रम में प्रदेश के करीब 25 जिलों के शहर और जिला अध्यक्षों के साथ कांग्रेस के सभी छह सांसद और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

    राहुल गांधी शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक छात्रों से संवाद करेंगे। इस दौरान नीट, आरओ/आरआरओ समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब दो लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

    स्वराज भवन में नेताओं के साथ करेंगे मंथन
    छात्र संवाद कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी अपने पैतृक आवास स्वराज भवन पहुंचेंगे। यहां वह करीब ढाई घंटे रुकेंगे। इस दौरान पार्टी के सांसदों, विधायकों, प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। कांग्रेस ने प्रयागराज को चुनने के पीछे यहां मौजूद बड़ी छात्र आबादी को भी अहम वजह माना है। राजस्थान और उत्तराखंड के बाद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत प्रयागराज में यह आयोजन किया जा रहा है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है प्रयागराज
    प्रयागराज में करीब दो लाख छात्र अलग-अलग डेलीगेसियों और हॉस्टलों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें आधे से ज्यादा युवा पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नजर इस बड़े युवा वर्ग पर है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय लंबे समय से देश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसके अलावा मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों में भी देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं।

    पॉप सिंगर लश्करी और MC अल्ताफ देंगे प्रस्तुति
    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक और सांगीतिक प्रस्तुतियों से होगी। जेन-जी की पसंद को ध्यान में रखते हुए पॉप सिंगर लश्करी और एमसी अल्ताफ को प्रस्तुति के लिए बुलाया गया है। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम में किसी तरह का राजनीतिक भाषण नहीं होगा। राहुल गांधी सीधे छात्रों से संवाद करेंगे और उनके सामने रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

  • दतिया की राजनीति में हलचल, BJP-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल बन सकता है उपचुनाव

    दतिया की राजनीति में हलचल, BJP-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल बन सकता है उपचुनाव


    मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा सीट रिक्त होने के बाद संभावित उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर पूर्व गृहमंत्री Narottam Mishra अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए सामाजिक समीकरण साध रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर जनता का एक बड़ा वर्ग भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज नजर आ रहा है।

    उपचुनाव का इंतजार, 14 जुलाई पर टिकी निगाहें
    दतिया में इन दिनों चौराहों, बाजारों और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित विधानसभा उपचुनाव की है। हालांकि अभी चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि चुनाव आयोग की नजर 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे हुए हैं।

    2023 की हार का बोझ अब भी नरोत्तम मिश्रा के साथ
    दतिया की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नरोत्तम मिश्रा अपनी पिछली हार की भरपाई कर पाएंगे? 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसई क्षेत्र में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलना उनकी हार की बड़ी वजह बना। भाजपा को उम्मीद थी कि 2018 की तरह अंतिम चरणों में वोटों का बड़ा अंतर उनके पक्ष में जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक हार के पीछे केवल विपक्ष की ताकत नहीं, बल्कि संगठन के भीतर की निष्क्रियता, कार्यकर्ताओं का अति आत्मविश्वास और जनता की नाराजगी भी जिम्मेदार रही। कई लोगों का कहना है कि विकास कार्य होने के बावजूद कुछ स्थानीय समस्याओं का समाधान समय पर नहीं होने से असंतोष बढ़ा।

    अब मिश्रा लगातार सामाजिक सम्मेलन, समाज प्रमुखों से मुलाकात और कार्यकर्ताओं के संपर्क अभियान के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजेंद्र भारती के कार्यकाल पर जनता की मिली-जुली राय

    वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में Rajendra Bharti का कार्यकाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

    स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि वे जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए। कई लोगों का आरोप है कि वे आम जनता से दूर रहे और क्षेत्रीय विकास को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी।

    हालांकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रशासनिक असहयोग और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कई विकास कार्य कराए। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया।

    कांग्रेस में टिकट को लेकर बढ़ी खींचतान
    उपचुनाव से पहले कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक एकजुटता बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, पिछले चुनाव में दावेदारी छोड़ चुके अवधेश नायक भी खुद को मजबूत उम्मीदवार मान रहे हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं। हाल ही में Rahul Gandhi से हुई मुलाकातों और संभावित दावेदारों की सक्रियता ने कांग्रेस के भीतर प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से गुटबाजी से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उम्मीदवार का चयन सर्वे और जीत की संभावना के आधार पर होगा।

    आजाद समाज पार्टी भी बना रही मजबूत जमीन
    दतिया के संभावित चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में आजाद समाज पार्टी भी सक्रिय है। दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यादव मतदाताओं का बड़ा हिस्सा उनके साथ जाता है तो इसका सीधा असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों उनके प्रभाव को गंभीरता से देख रही हैं।

    जातीय समीकरण बन सकते हैं चुनाव का निर्णायक फैक्टर
    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल विकास या स्थानीय मुद्दों पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यादव, कुशवाहा और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या यहां निर्णायक मानी जाती है। अलग-अलग दल इन वर्गों को साधने के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं। भाजपा जहां सामाजिक सम्मेलनों के जरिए विभिन्न समुदायों तक पहुंच रही है, वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने में जुटी है।

    जनता का संदेश साफ: केवल वादे नहीं, काम चाहिए
    दतिया के राजनीतिक माहौल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर दोनों प्रमुख दलों के प्रति असंतोष दिखाई देता है। कई नागरिकों का कहना है कि वे अब केवल राजनीतिक दावों से प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि उम्मीदवार की पहुंच, जवाबदेही और क्षेत्रीय विकास के आधार पर निर्णय लेंगे। यही कारण है कि संभावित उपचुनाव में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को हासिल करने की चुनौती भी होगा।

  • राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा Meenakshi Natarajan को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार प्रत्याशी रह चुके Naresh Gyanchandani ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए पार्टी नेतृत्व को बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी से गंभीर चूक हुई है और इससे क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है।

    सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
    नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को आगाह किया था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार का चयन बेहद सावधानी से किया जाए। उनका दावा है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के सामने क्रॉस वोटिंग की चुनौती बनी हुई है और ऐसे समय में उम्मीदवार चयन को लेकर व्यापक सहमति जरूरी थी। ज्ञानचंदानी ने लिखा कि यदि किसी ऐसे नेता को उम्मीदवार बनाया जाता, जिसकी संगठन और विधायकों पर मजबूत पकड़ हो, तो पार्टी की सीट अधिक सुरक्षित रहती।

    दिग्विजय सिंह के पक्ष में खुली पैरवी
    अपने बयान में ज्ञानचंदानी ने स्पष्ट रूप से Digvijaya Singh का नाम लेते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाता तो कांग्रेस की सीट पूरी तरह सुरक्षित रहती। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह का प्रदेश के विधायकों और संगठन पर प्रभाव है, जिससे किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की आशंका कम हो सकती थी। ज्ञानचंदानी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें लंबे समय से दिग्विजय सिंह समर्थक नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनका खुला विरोध कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नए संकेत दे रहा है।

    कांग्रेस के भीतर बढ़ी हलचल
    मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच असहमति की चर्चाएं पहले से चल रही थीं, लेकिन अब पहली बार किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक मंच पर फैसले का विरोध किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष के सार्वजनिक होने से नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है।

    बीजेपी ने साधा निशाना
    कांग्रेस में उभरे इस विवाद पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी Ashish Agrawal ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर तंज कसते हुए कहा कि अंतर्कलह और गुटबाजी कांग्रेस की पुरानी पहचान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के अपने नेता ही शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं और क्रॉस वोटिंग की आशंका जता रहे हैं, तो यह कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत है। भाजपा ने इसे संगठनात्मक कमजोरी बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला भी बोला।

    राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
    मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस जहां अपने उम्मीदवार के पक्ष में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर से उठ रहे विरोध के स्वर नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल हो पाती है।

  • राजनीति गरमाई: राहुल गांधी ने फिर दोहराया मोदी सरकार पर दावा, SP-BSP-RJD को लेकर भी की टिप्पणी

    राजनीति गरमाई: राहुल गांधी ने फिर दोहराया मोदी सरकार पर दावा, SP-BSP-RJD को लेकर भी की टिप्पणी


    नई दिल्ली । दिल्ली में कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की एक बड़ी रणनीतिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें देशभर से सैकड़ों प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में Rahul Gandhi मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक का एजेंडा दलित समाज में कांग्रेस की पकड़ मजबूत करना और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर रणनीति तैयार करना था।

    इसी दौरान Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि “मोदी जी एक साल में जाने वाले हैं।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। बीजेपी ने इस टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

    बैठक में कांग्रेस नेताओं ने यह भी चर्चा की कि अगर 1980 और 1990 के दशक में दलित समुदाय पर अधिक ध्यान दिया गया होता, तो क्षेत्रीय दल इतने मजबूत नहीं बनते। इस संदर्भ में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों की राजनीति पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी सामने आई।

    कांग्रेस की इस बैठक में सामाजिक न्याय, दलित भागीदारी और संगठन विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां दलित समुदाय की भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा।

    Rajendra Pal Gautam ने भी बैठक में कहा कि दलितों पर अत्याचार, सामाजिक न्याय और कांग्रेस की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

    वहीं, Bharatiya Janata Party ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह स्थिर और मजबूत है। बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया और कहा कि सरकार को कोई चुनौती नहीं दे सकता।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति एक बार फिर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गई है, जहां सत्ता और विपक्ष दोनों अपने-अपने दावे मजबूत करने में जुटे हैं।

  • सोनिया गांधी हेल्थ अपडेट एंटीबायोटिक पर इलाज जारी डॉक्टर बोले स्थिति नियंत्रण में

    सोनिया गांधी हेल्थ अपडेट एंटीबायोटिक पर इलाज जारी डॉक्टर बोले स्थिति नियंत्रण में

    नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें नई दिल्ली स्थित Sir Ganga Ram Hospital में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। ताजा जानकारी के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने राहत की सांस ली है।

    अस्पताल के चेयरमैन डॉ अजय स्वरूप ने जानकारी देते हुए बताया कि सोनिया गांधी की स्थिति नियंत्रण में है और डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत खराब होने के पीछे पेट और यूरिन से जुड़ा संक्रमण हो सकता है जिसकी जांच की जा रही है। फिलहाल उन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं और सभी जरूरी मेडिकल टेस्ट भी किए जा रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी को मंगलवार देर शाम अस्पताल लाया गया था। उनकी उम्र और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते इसलिए उन्हें निगरानी में रखा गया है। गौरतलब है कि सोनिया गांधी को पहले से अस्थमा की समस्या है और वह नियमित रूप से चेकअप के लिए इसी अस्पताल में आती रही हैं।

    इस बीच उनके बेटे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी मां की तबीयत को देखते हुए केरल का दौरा रद्द कर दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केरल के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं। सोनिया गांधी की तबीयत को लेकर पूरे गांधी परिवार की चिंता साफ नजर आ रही है।

    राजनीतिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है। संसद में आज ईरान और अमेरिका से जुड़े मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के बड़े नेता शामिल नहीं हो सके। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी संसद में नजर नहीं आए। उनकी जगह पार्टी की ओर से लोकसभा सांसद तारिक अनवर और राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक को बैठक में भेजा गया है।

    गौरतलब है कि गांधी परिवार का गंगाराम अस्पताल पर काफी भरोसा रहा है। यही वजह है कि परिवार के कई महत्वपूर्ण मेडिकल मामलों का इलाज यहीं कराया गया है। प्रियंका गांधी के बच्चों का जन्म भी इसी अस्पताल में हुआ था।

    फिलहाल डॉक्टरों की टीम सोनिया गांधी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में उनकी सेहत को लेकर और अपडेट सामने आ सकते हैं। उनके समर्थक और कांग्रेस कार्यकर्ता जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • 19 दिसंबर को बदलेगा देश का प्रधानमंत्री? पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से सियासी हलचल

    19 दिसंबर को बदलेगा देश का प्रधानमंत्री? पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से सियासी हलचल


    नई दिल्‍ली । देश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि 19 दिसंबर को भारत को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है, और इस बार प्रधानमंत्री मराठी समुदाय से होगा। यह बयान उन्होंने पिंपरी-चिंचवड़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने इसी महीने यह दावा दूसरी बार दोहराया है। इससे पहले सांगली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी उन्होंने इसी तरह की बात कही थी। चव्हाण का कहना है कि वे लंबे समय तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में काम कर चुके हैं और दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों को गहराई से समझते हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया, जिससे उनके बयान पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    अमेरिका की घटनाओं से जोड़ा भारत का राजनीतिक भविष्य
    अपने बयान में चव्हाण ने अमेरिका की हालिया राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में एक व्यक्ति द्वारा कई बड़े नेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किए गए हैं, जिनके खुलासे जल्द होने वाले हैं। चव्हाण के अनुसार, अमेरिका में प्रस्तावित एक नए कानून के तहत 19 दिसंबर को कई बड़े नाम सार्वजनिक किए जा सकते हैं, जिसका असर वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं पता कि वे नेता कौन हैं, लेकिन इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

    एपस्टीन फाइल्स का हवाला
    पृथ्वीराज चव्हाण ने अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन फाइल्स का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन फाइल्स के सामने आने से अमेरिका की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हो गया है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति भी इससे प्रभावित हुई है। हाल ही में डेमोक्रेटिक समिति द्वारा ट्रंप और एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

    भाजपा ने दावे को बताया अफवाह
    पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका की किसी भी घटना का भारत की सरकार या प्रधानमंत्री से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इस तरह की बातें जानबूझकर फैलाई जा रही अफवाहें हैं।

    भाजपा का आरोप है कि मराठी प्रधानमंत्री बनने और सत्ता परिवर्तन के दावे देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हैं। पार्टी ने साफ कहा है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और ऐसे बयानों का कोई आधार नहीं है।

    फिलहाल, पृथ्वीराज चव्हाण के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जहां कांग्रेस समर्थक इसे संभावित बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे निराधार बयानबाजी मान रही है। अब सभी की निगाहें 19 दिसंबर पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि यह दावा महज राजनीतिक बयान था या इसके पीछे कोई बड़ा घटनाक्रम छिपा है।