Tag: Congress Organization

  • यूपी कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, आराधना मिश्रा मोना प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

    यूपी कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, आराधना मिश्रा मोना प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बदलाव किया है। आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष, इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और देवेंद्र निषाद तथा आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। नई टीम में ब्राह्मण, महिला, मुस्लिम, ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व को जगह दी गई है। कांग्रेस के इस संगठनात्मक बदलाव को अलग-अलग सामाजिक समूहों को साथ जोड़ने और प्रदेश में अपने सामाजिक आधार के विस्तार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    आराधना मिश्रा मोना प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुकी हैं और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वह 2019 से उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता थीं। उनकी नियुक्ति के साथ करीब डेढ़ दशक बाद प्रदेश संगठन की कमान किसी महिला को सौंपी गई है। इससे पहले रीता बहुगुणा जोशी 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रही थीं। मोना की नियुक्ति का एक पहलू समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के संबंधों से भी जुड़ा है। दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की राजनीति के रास्ते पर हैं, लेकिन सीट बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर आगे बातचीत महत्वपूर्ण होगी।

    इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन पर भी जोर दिया गया है। सहारनपुर से सांसद मसूद कांग्रेस के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हैं। वहीं देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए जाने से संगठन के शीर्ष स्तर पर ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व सामने आया है। राजेंद्र पाल गौतम को पहले ही उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव बनाया जा चुका है। इस तरह नई संगठनात्मक संरचना में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ब्राह्मण और महिला नेतृत्व को आगे किया गया है, जबकि इमरान मसूद, देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद के जरिए अन्य सामाजिक समूहों को भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस के लिए ब्राह्मण समुदाय कभी पारंपरिक सामाजिक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ पार्टी ने इस वर्ग को संगठन के शीर्ष स्तर पर प्रतिनिधित्व दिया है। वहीं महिला नेतृत्व के जरिए आधी आबादी तक पहुंच बनाने की कोशिश भी दिखाई देती है। प्रमोद तिवारी का रामपुर खास क्षेत्र में लंबे समय से राजनीतिक आधार रहा है। वह इस सीट से नौ बार विधायक रह चुके हैं और आराधना मिश्रा भी इसी सीट से लगातार तीन चुनाव जीत चुकी हैं। विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस की नई टीम को केवल संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी एक तरफ गठबंधन में अपनी भूमिका बनाए रखने और दूसरी तरफ अपना स्वतंत्र सामाजिक और राजनीतिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे का अंतिम स्वरूप अभी तय होना बाकी है।

    कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने संगठनात्मक बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि आराधना मिश्रा अनुभवी नेता हैं और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि महिला होने के नाते वह आधी आबादी से जुड़े मुद्दों को बेहतर ढंग से समझती हैं और उनके नेतृत्व में प्रदेश संगठन को नई गति मिलेगी। अवस्थी के मुताबिक, नई टीम के साथ कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज करेगी और पार्टी प्रदेश में सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगी। वहीं, संगठन के सामने सामाजिक प्रतिनिधित्व को जमीनी राजनीतिक समर्थन में बदलने, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के साथ पारंपरिक मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती भी रहेगी।

  • दतिया में चुनावी शतरंज बिछी, बीजेपी-कांग्रेस की तैयारी तेज; दामोदर यादव बन सकते हैं गेमचेंजर

    दतिया में चुनावी शतरंज बिछी, बीजेपी-कांग्रेस की तैयारी तेज; दामोदर यादव बन सकते हैं गेमचेंजर


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को नई ऊर्जा दे दी है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी ने अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। चुनाव आयोग को 2 अक्टूबर 2026 तक उपचुनाव कराना है, ऐसे में राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।

    भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पूरी तरह चुनावी मोर्चा संभाले हुए हैं। पिछले दो महीनों से वे दतिया क्षेत्र में सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के प्रयासों में जुटे हैं। यादव, पाल, क्षत्रिय सहित विभिन्न समाजों के लोगों को भाजपा से जोड़ने के लिए लगातार सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। मई महीने के दौरान कई चरणों में अलग-अलग वर्गों के लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा उपचुनाव से पहले अपने पारंपरिक और नए सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    डॉ. मिश्रा ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाजपा की विकासवादी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को जनता का विश्वास मिलने का दावा किया है। लगातार हो रही सदस्यता गतिविधियों को भाजपा की चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि उपचुनाव होता है तो पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।

    वहीं कांग्रेस की रणनीति संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने पर केंद्रित है। पार्टी ने दतिया विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक, मंडलम और बूथ स्तर तक बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर की तैयारियों के निर्देश दिए जा रहे हैं। 2 जून को प्रस्तावित बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

    हालांकि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट चयन को लेकर है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिशों में लगे हैं। दूसरी ओर पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी मजबूत दावेदार के रूप में सामने आए हैं। नायक का तर्क है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी हित में त्याग किया था, इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा कई अन्य नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

    कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है ताकि उपचुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सके।

    इधर आजाद समाज पार्टी भी दतिया में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगी है। पार्टी नेता दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों, जनसंपर्क अभियानों और कार्यकर्ता बैठकों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता उनकी पार्टी से जुड़ रहे हैं। पार्टी ने उन्हें संभावित उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुकाबला भले ही भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा दिखाई दे रहा हो, लेकिन आजाद समाज पार्टी की सक्रियता चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। खासकर यदि दामोदर यादव कुछ खास सामाजिक वर्गों और असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफल रहते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय रंग ले सकता है।

    उधर निर्वाचन आयोग ने भी उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दतिया में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर भी चुनावी तैयारियां गति पकड़ रही हैं।

    दतिया उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में प्रभाव और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे इस चुनाव की दिशा तय करेंगे।

  • मंडला दौरे पर अजय सिंह राहुल का बयान: एकजुटता से ही मिलेगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सफलता

    मंडला दौरे पर अजय सिंह राहुल का बयान: एकजुटता से ही मिलेगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सफलता


    नई दिल्ली । मंडला में शनिवार शाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल पहुंचे। यह दौरा प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। वे इन दिनों पूरे मध्य प्रदेश का दौरा कर पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करने की कोशिश में जुटे हैं।
    मंडला पहुंचने पर उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात की और संगठन की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि यदि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करें तो आगामी चुनावों में पार्टी की जीत पूरी तरह सुनिश्चित है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी राजनीतिक दल में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन चुनाव के समय एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
    अजय सिंह राहुल ने अपने संबोधन में संगठन की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि कई कार्यकर्ता लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हो गए हैं या उपेक्षा महसूस कर रहे हैं, ऐसे सभी लोगों को फिर से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आधार मजबूत है, जरूरत सिर्फ उसे सही दिशा देने की है।
    अपने बयान में उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई भी दल स्थायी रूप से सत्ता में नहीं रहता और समय हमेशा बदलता है। उन्होंने भाजपा को अहंकार से बचने की सलाह देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि सत्ता का संतुलन कभी भी बदल सकता है।
    इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव का उदाहरण देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए, हालांकि इन बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
    इस दौरान मंडला में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले, निवास विधायक चैनसिंह वरकड़े और केवलारी विधायक रजनीश सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी ने संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पार्टी को सक्रिय करने पर सहमति जताई।