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  • मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस

    मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस


    नई दिल्ली। Mayawati के लखनऊ स्थित आवास पर कांग्रेस के कुछ दलित नेताओं के पहुंचने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बिना किसी तय कार्यक्रम के पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को मायावती से मुलाकात नहीं मिल सकी, क्योंकि उनके आवास पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

    यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब यूपी की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन और समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं के इस अचानक दौरे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।

    क्या हुआ था पूरा मामला?
    कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के कुछ नेता लखनऊ में बैठक के बाद अचानक Mayawati से शिष्टाचार मुलाकात के लिए उनके आवास पहुंचे थे। हालांकि, यह मुलाकात पहले से तय नहीं थी, जिसके चलते उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

    प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने दावा किया कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी और इसका कोई राजनीतिक संदेश नहीं था। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस जारी कर दिया।

    राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूपी में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। कुछ ही घंटों पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने 2027 चुनाव को लेकर कांग्रेस के साथ सहयोग के संकेत दिए थे। ऐसे में इस घटना ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

    कांग्रेस की सफाई
    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक अचानक लिया गया शिष्टाचार निर्णय था और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को लेकर कोई संदेश देने जैसी बात पूरी तरह गलत है।

  • ओवैसी और कांग्रेस पर किरेन रिजिजू का तीखा बयान, अल्पसंख्यक राजनीति पर फिर छिड़ी बहस

    ओवैसी और कांग्रेस पर किरेन रिजिजू का तीखा बयान, अल्पसंख्यक राजनीति पर फिर छिड़ी बहस

    नई दिल्ली ।भारतीय राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है, जब केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री Kiren Rijiju ने एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi को लेकर एक बयान दिया, जिसने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। उनके बयान के केंद्र में न केवल ओवैसी रहे, बल्कि मुख्य विपक्षी दल Indian National Congress पर भी गंभीर आरोप लगाए गए।

    मामला तब सामने आया जब किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी करते हुए ओवैसी को देश के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में से एक बताया और साथ ही यह भी कहा कि वे लगातार मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की बात उठाते रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे “मुस्लिम लीग पार्टी” जैसा बताने की बात कही, जिससे राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

    रिजिजू के इस बयान के बाद देश की राजनीति में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। उन्होंने अपने विचारों में यह भी संकेत दिया कि भारत में अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर मुस्लिम समुदाय, अपनी जनसंख्या और स्थिति को लेकर किसी तरह की हीन भावना न रखें, क्योंकि देश का लोकतांत्रिक ढांचा सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है।

    अपने बयान के दौरान उन्होंने भारत की विविधता का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि देश में अलग-अलग धार्मिक समुदाय शांतिपूर्वक और सुरक्षित वातावरण में रहते हैं। उन्होंने पारसी समुदाय का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संख्या में होने के बावजूद यह समुदाय भी भारत में सुरक्षित और सम्मानित जीवन जी रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने यह तर्क देने की कोशिश की कि भारत में धार्मिक आधार पर भेदभाव की स्थिति नहीं है और सभी समुदायों को समान अवसर प्राप्त हैं।

    इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में विभिन्न दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। विपक्षी नेताओं ने इस टिप्पणी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आलोचना की है, जबकि समर्थक इसे एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं। इस मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश में अल्पसंख्यक राजनीति की दिशा और परिभाषा क्या होनी चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान चुनावी राजनीति के दौरान अक्सर चर्चा का केंद्र बन जाते हैं, जिससे जनमत पर भी प्रभाव पड़ता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि इस तरह की बयानबाजी से राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है।

    फिलहाल, किरेन रिजिजू के इस बयान ने न केवल सोशल मीडिया पर बहस को तेज कर दिया है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच भी नई बयानबाजी की शुरुआत कर दी है, जिसका असर आने वाले समय में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

  • राहुल गांधी का दो दिवसीय रायबरेली मेठी दौरा आज से, दिशा बैठक और जनता दर्शन कार्यक्रम

    राहुल गांधी का दो दिवसीय रायबरेली मेठी दौरा आज से, दिशा बैठक और जनता दर्शन कार्यक्रम


    अमेठी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज से दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली और अमेठी पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे कई कार्यक्रमों में भाग लेने केसाथ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। उनके दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने व्यापक तैयारियां कर ली हैं और स्थानीय स्तर पर उत्साह का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार राहुल गांधी सबसे पहले फुरसतगंज एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से वे जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक में रायबरेली जिले में चल रहे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की समीक्षाकी जाएगी। साथ ही अधिकारियों के साथ विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा भी की जाएगी। बैठक के बाद राहुल गांधी रायबरेली में ही रुकेंगे और शाम को भुएमऊ गेस्ट हाउसमें रात्रि प्रवास करेंगे।

    अपने दौरे के दूसरे दिन वे अमेठी पहुंचेंगे। यहां नैना रिसॉर्ट मेंकांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें पार्टी के विभिन्न फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी, ब्लॉक और जिला स्तर के नेता तथा वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल होंगे।दौरे के दौरान राहुल गांधी जनता दर्शनकार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में वे आम लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उन्हें समाधान का भरोसा देंगे।

    कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने बताया कि राहुल गांधी के दौरे को लेकर पार्टीकार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है और पार्टी स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

  • गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड मामला संसद में गूंजा, कांग्रेस ने की सोशल मीडिया को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग

    गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड मामला संसद में गूंजा, कांग्रेस ने की सोशल मीडिया को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग


    नई दिल्ली। कांग्रेस ने शुक्रवार को राज्यसभा में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई और केंद्र सरकार से इसके लिए ठोस और पारदर्शी नीति बनाने का आग्रह किया। सांसदों ने ऑनलाइन झूठ, अफवाह और धमकियों के फैलाव पर सवाल उठाए और इस पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

    कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने गाजियाबाद में हाल ही में तीन युवतियों की मौत का हवाला देते हुए कहा कि सोशल मीडिया आज सबसे प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोई भी बिना रोक-टोक सामग्री साझा कर सकता है, जिससे किसी की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।

    राजीव शुक्ला ने कहा, “एक बार पोस्ट वायरल हो जाए, तो झूठी जानकारी हटाना लगभग असंभव हो जाता है। न प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी लेता है और न लेखक सामने आता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि गाजियाबाद की तीन लड़कियों की मानसिक स्थिति पर सोशल मीडिया की अफवाहों और कंटेंट का नकारात्मक असर पड़ा।

    सोशल मीडिया पर जवाबदेही की आवश्यकता:
    सांसद ने कहा कि जहां हथियार और जहर नियंत्रित करने वाले कड़े कानून हैं, वहीं सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने वालों के लिए कोई स्पष्ट जवाबदेही नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि एक पारदर्शी सोशल मीडिया पॉलिसी बनाई जाए, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करे और गलत जानकारी फैलाने वालों को जिम्मेदार ठहराए।

    गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड:
    इस हफ्ते गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि वे कोरियन गेम्स और डिजिटल कंटेंट की आदत में थीं। इस घटना ने बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी।

    सरकार के मौजूदा नियम:
    हाल के वर्षों में सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट नियंत्रित करने के लिए कई नियम बनाए हैं, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021। ये प्लेटफॉर्म्स के लिए शिकायत निवारण, ट्रेसबिलिटी अनुरोध, लोकल नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और समय सीमा में कंटेंट हटाने जैसी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हैं।

    फिर भी, पूरे ऑनलाइन स्पेस को रेगुलेट करने वाली व्यापक सोशल मीडिया पॉलिसी नहीं है। कांग्रेस ने इसे आवश्यक बताते हुए कहा कि झूठ, अफवाह और ऑनलाइन धमकियों के फैलाव को रोकने के लिए तुरंत ठोस नीति बनाना जरूरी है।

  • राम विरोधी है कांग्रेस तेज प्रताप यादव ने तोड़ा चुप्पी, महिलाओं और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की उठाई मांग

    राम विरोधी है कांग्रेस तेज प्रताप यादव ने तोड़ा चुप्पी, महिलाओं और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की उठाई मांग


    नई दिल्ली । तेज प्रताप यादव ने यह बयान केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह के उस बयान के जवाब में दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी अधिनियम’ करने का विरोध किया। तेज प्रताप ने पत्रकारों से कहा गिरिराज जी बिल्कुल सही कह रहे हैं। कांग्रेस राम विरोधी है। उनके नेता अपने माथे पर तिलक नहीं लगाते ऐसा करना चाहिए।

    हालांकि तेज प्रताप यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी जातियों समुदायों और धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा हिंदू मुस्लिम सिख और ईसाई सभी भाई हैं। किसी भी धर्म या जाति का अपमान नहीं होना चाहिए। मेरा आरोप केवल कांग्रेस के रवैये और उसके नेताओं के कार्यों पर है।

    बिहार महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी पर कार्रवाई की मांग

    तेज प्रताप यादव ने उत्तराखंड की मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा बिहार की महिलाओं के खिलाफ की गई टिप्पणी पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अपमानजनक बयान देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। तेज प्रताप ने सवाल उठाया वे किससे माफी मांगेंगे? क्या बिहार की बेटियों ने उन्हें माफ कर दिया है उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल माफी पर्याप्त नहीं है बल्कि ऐसे व्यक्तियों को बिहार आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी।

    तेज प्रताप यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी के खिलाफ राम कृष्ण और महादेव के अपमान के आरोप और महिलाओं के सम्मान को लेकर उठाए गए मुद्दे आगामी राजनीतिक चर्चाओं में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनका कहना है कि धर्म और संस्कृति का सम्मान हर राजनीतिक दल और नागरिक की जिम्मेदारी है और इसे नजरअंदाज करना स्वीकार्य नहीं। तेज प्रताप का यह रुख न केवल कांग्रेस पर निशाना है बल्कि यह समाज और राजनीति में सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता बनाए रखने की दिशा में भी एक संदेश है।

  • राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता नाना पाटोले द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से किए जाने पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इस बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को उन्होंने इसे न केवल हास्यास्पद बयान बताया बल्कि कांग्रेस पार्टी के राम के प्रति रुख पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से जुड़ा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेस ने हमेशा बाधाएं खड़ी कीं और कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए। ऐसे में राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है।उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए। निरुपम के अनुसार कांग्रेस पार्टी के आचरण और उसके नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए उनकी तुलना भगवान राम से नहीं बल्कि रावण से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा राम के नाम को बदनाम मत कीजिए। जिन लोगों का आचरण राम के आदर्शों से मेल नहीं खाता वे ऐसी तुलना करने के अधिकारी नहीं हैं।

    दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को कांग्रेस नेता नाना पाटोले से राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में पाटोले ने कहा था कि कांग्रेस भगवान राम का काम कर रही है और राहुल गांधी शोषितों पीड़ितों और वंचितों के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो भगवान राम ने किया था। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी देशभर में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब वे अयोध्या जाएंगे तो राम मंदिर में प्रार्थना करेंगे।नाना पाटोले ने यह भी दावा किया कि जब रामलला के मंदिर के ताले बंद थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें खुलवाने का आदेश दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नाना पाटोले राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से जोड़कर विवादों में आए हों। इससे पहले अक्टूबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी और भगवान राम के नाम को जोड़ते हुए बयान दिया था जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया था।उस समय पाटोले ने सफाई देते हुए कहा था कि कांग्रेस राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से नहीं करती बल्कि यह केवल एक संयोग है कि दोनों के नामआर अक्षर से शुरू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवान राम शंकराचार्य और राहुल गांधी की यात्राओं में समानता बताना तुलना नहीं है।

    हालांकि भाजपा नेताओं ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया था। भाजपा नेता सीआर केशवन ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नाना पाटोले से सवाल किया था कि राहुल गांधी अब तक अयोध्या राम मंदिर क्यों नहीं गए।अब एक बार फिर इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और राहुल गांधी कांग्रेस तथा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है।