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  • राज्यसभा नामांकन विवाद पर जबलपुर में कांग्रेस का धरना, भाजपा और निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    राज्यसभा नामांकन विवाद पर जबलपुर में कांग्रेस का धरना, भाजपा और निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल


    मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में जारी विवाद अब सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में बुधवार को जबलपुर तहसील कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधीवादी तरीके से धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्टी के नगर और ग्रामीण संगठन से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    दोपहर 12 बजे शुरू हुआ यह धरना शाम तक जारी रहा। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और निर्वाचन आयोग के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। कार्यक्रम में कांग्रेस के नगर अध्यक्ष, ग्रामीण अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। धरना स्थल पर पार्टी नेताओं ने संबोधन करते हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।

    कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने सभा को संबोधित करते हुए भाजपा और राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन लंबे समय से सामाजिक और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं, लेकिन उनके नामांकन को निरस्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है। घनघोरिया ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को लोकतंत्र और राजनीतिक शुचिता के खिलाफ मानती है।

    अपने संबोधन में कांग्रेस विधायक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक परंपराओं का सम्मान नहीं कर रहा है। घनघोरिया ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के पास राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त समर्थन था और राजनीतिक परंपरा के अनुसार विपक्ष को प्रतिनिधित्व मिलने का अवसर दिया जाना चाहिए था।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान विपक्ष को कमजोर करने के प्रयास किए गए। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और इन पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में उठाते रहेंगे।

    धरना-प्रदर्शन में मौजूद कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का कहना है कि नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले को लेकर पार्टी कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी। वहीं पार्टी नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्पन्न यह विवाद प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कांग्रेस इस फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बता रही है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों की वैधता और नियमों को लेकर बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल जबलपुर में हुए इस धरना-प्रदर्शन ने राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप


    मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को उज्जैन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौन प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी ने नामांकन निरस्त किए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक बताया।

    उज्जैन के टॉवर चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस मौन प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। दोपहर एक बजे शुरू हुए कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष रवि राय, कांग्रेस नेता अजित सिंह, महिला कांग्रेस, सेवा दल, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, आईटी सेल, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी, पार्षद और अन्य संगठनात्मक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया। नेताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि होती है तथा किसी भी उम्मीदवार के नामांकन से जुड़े निर्णयों में सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से न केवल पार्टी के उम्मीदवार को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया गया, बल्कि कांग्रेस के विधायकों के मतदान अधिकार भी प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि नामांकन पत्र में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत कमी थी तो उसे नियमानुसार दूर करने का अवसर दिया जा सकता था।

    कांग्रेस नेता अजित सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन निरस्त किए जाने के पीछे सुनियोजित प्रयास हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रदर्शनकारियों ने डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो पार्टी आगे भी विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से विरोध दर्ज कराएगी।

    राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं और नियमों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

    फिलहाल उज्जैन में हुआ यह मौन प्रदर्शन कांग्रेस के उस व्यापक विरोध अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके माध्यम से पार्टी नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा रही है।

  • राज्यसभा चुनाव पर सियासी संग्राम तेज: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग के दरवाजे

    राज्यसभा चुनाव पर सियासी संग्राम तेज: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग के दरवाजे


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आ गया जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार करार दिया है। इस फैसले के विरोध में पार्टी ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक व्यापक आंदोलन शुरू कर दिया है और अब मामला सीधे चुनाव आयोग के समक्ष पहुंच गया है
    बुधवार को भोपाल में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास शुरू किया। वहीं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गणवेश टांगकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते कार्यालय का मुख्य गेट बंद रखा गया था, जिसके बाद कार्यकर्ता विरोध दर्ज कर लौट गए।

    इधर दिल्ली में कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा, मीनाक्षी नटराजन, मोहम्मद अली खान और उमर होडा शामिल हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नामांकन निरस्त करने का निर्णय न केवल पक्षपातपूर्ण है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

    दरअसल, भाजपा ने आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी छिपाई है। इसी आधार पर उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। चुनाव अधिकारियों ने आपत्ति को उचित मानते हुए नामांकन रद्द कर दिया। कांग्रेस का तर्क है कि यह मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा है और इसका चुनावी हलफनामे में उल्लेख अनिवार्य नहीं था।

    तेलंगाना से कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संबंधित मामले में नोटिस मिलने पर मीनाक्षी नटराजन पहले ही जवाब दे चुकी थीं। उन्होंने दलील दी कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत निजी शिकायतों का जवाब देना नागरिक का अधिकार है और ऐसी शिकायतों को आपराधिक मामला मानकर चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करना आवश्यक नहीं है। रेड्डी ने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम से यह आशंका पैदा होती है कि चुनाव आयोग किसी प्रकार के दबाव में काम कर रहा है।

    राज्यसभा चुनाव के इस विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस जहां इसे “लोकतंत्र की हत्या” और “सीट चोरी” बता रही है, वहीं भाजपा चुनाव आयोग के फैसले को नियमों के अनुरूप बता रही है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई और कांग्रेस की शिकायत पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं, जो राज्यसभा चुनाव की दिशा और राजनीतिक माहौल दोनों को प्रभावित कर सकता है।