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  • TVK शक्ति परीक्षण में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन से विजय सरकार मजबूत

    TVK शक्ति परीक्षण में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन से विजय सरकार मजबूत

    नई दिल्ली । तमिलनाडु विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा, जहां मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार ने शक्ति परीक्षण का सामना किया। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, मुख्यमंत्री ने औपचारिक रूप से विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया, जिसके बाद पूरे सदन का माहौल राजनीतिक हलचल से भर गया।

    इस शक्ति परीक्षण में कई राजनीतिक दलों की भूमिका निर्णायक रही। कांग्रेस, वाम दलों, वीसीके और आईयूएमएल जैसे सहयोगी दलों ने सरकार के पक्ष में समर्थन जताया, जिससे सत्ता पक्ष की स्थिति को मजबूती मिली। वहीं कुछ दलों ने मतदान में तटस्थ रुख अपनाया, जिससे राजनीतिक समीकरणों में संतुलन बना रहा।

    सदन में पट्टाली मक्कल काची ने मतदान से दूरी बनाने का फैसला किया, जिससे संख्या बल पर असर पड़ा। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी तटस्थ रहने का रुख अपनाया, जिससे इस शक्ति परीक्षण में विपक्ष की रणनीति अलग नजर आई।

    सरकार के पास मौजूदा आंकड़ों के अनुसार 107 विधायकों का समर्थन मौजूद था, जिसमें अध्यक्ष मतदान प्रक्रिया में शामिल नहीं होते। एक विधायक की स्थिति कानूनी कारणों से मतदान से बाहर रही, जिससे कुल संख्या पर प्रभाव पड़ा और बहुमत का गणित और जटिल हो गया।

    इसी बीच अन्नाद्रमुक के भीतर भी स्पष्ट विभाजन देखने को मिला। पार्टी के कुछ विधायकों ने सरकार के पक्ष में जाने का फैसला किया, जबकि बाकी ने विरोध का रुख अपनाया। इस आंतरिक मतभेद ने सदन की राजनीतिक तस्वीर को और अधिक जटिल बना दिया।

    दल-बदल कानून को लेकर भी सदन में चर्चाओं का दौर चलता रहा, क्योंकि कुछ विधायकों के रुख ने पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती खड़ी कर दी। इससे यह स्पष्ट हो गया कि आने वाले समय में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

  • तमिलनाडु में सत्ता समीकरण बदले, TVK के साथ आई कांग्रेस, भाजपा को दूर रखने की शर्त…

    तमिलनाडु में सत्ता समीकरण बदले, TVK के साथ आई कांग्रेस, भाजपा को दूर रखने की शर्त…

    नई दिल्ली।  तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिला है, जहां कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को सरकार गठन के लिए समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इस निर्णय के साथ राज्य की राजनीति में गठबंधन समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गठजोड़ों में दरार की स्थिति भी बन गई है।

    कांग्रेस द्वारा लिए गए इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह समर्थन कुछ शर्तों के साथ दिया गया है, जिसमें सबसे अहम शर्त यह है कि सरकार में किसी भी तरह की सांप्रदायिक ताकतों की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीति में नए गठबंधन की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।

    TVK ने हालिया राजनीतिक परिदृश्य में मजबूत प्रदर्शन करते हुए विधानसभा में उल्लेखनीय सीटें हासिल की हैं। पार्टी को 100 से अधिक सीटों पर सफलता मिली है, जिससे वह सरकार गठन की स्थिति में पहुंच गई है, लेकिन बहुमत के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस का समर्थन उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    इस नए राजनीतिक समीकरण का सबसे बड़ा असर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के पुराने गठबंधन पर पड़ता दिखाई दे रहा है। दोनों दल पिछले कई वर्षों से एक साथ राजनीति करते रहे हैं, लेकिन इस नए घटनाक्रम के बाद उनके रिश्तों में दूरी की स्थिति बनती नजर आ रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि औपचारिक तौर पर बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।

    कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जनता ने इस बार एक ऐसी सरकार के पक्ष में मतदान किया है जो धर्मनिरपेक्ष और विकासोन्मुख हो। इसी आधार पर TVK को समर्थन देने का निर्णय लिया गया है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका समर्थन तमिलनाडु में एक स्थिर और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित सरकार के गठन के लिए है।

    TVK की ओर से कांग्रेस से समर्थन की औपचारिक अपील की गई थी, जिसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर विचार किया और तमिलनाडु इकाई को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। राज्य इकाई और विधायक दल की बैठक के बाद इस समर्थन पर अंतिम मुहर लगाई गई।

    इस नए गठबंधन को केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भविष्य की राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर लोकसभा और राज्यसभा चुनावों तक इस गठबंधन का असर देखने की संभावना जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है, जहां पारंपरिक गठबंधन समीकरण बदलते दिखाई देंगे। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित हो सकती है।