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  • दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकित शर्मा हत्याकांड, अदालत ने फैसला 11 जून तक टाला

    दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकित शर्मा हत्याकांड, अदालत ने फैसला 11 जून तक टाला

    नई दिल्ली । वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 11 जून निर्धारित की है। अदालत को गुरुवार को इस मामले में निर्णय सुनाना था, लेकिन अब फैसला अगले सप्ताह सुनाया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद सभी पक्षों की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।

    अंकित शर्मा हत्याकांड दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल रहा है। यह मामला न केवल अपनी गंभीरता बल्कि इससे जुड़े आरोपों और लंबे न्यायिक प्रक्रिया के कारण भी लगातार चर्चा में बना रहा। मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपी न्यायालय के समक्ष पेश हैं, जिन पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    घटना फरवरी 2020 की है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव खजूरी खास क्षेत्र के एक नाले से बरामद किया गया था। उनकी मौत ने पूरे देश का ध्यान इस मामले की ओर खींचा था। इसके बाद पुलिस ने हत्या और दंगों से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

    अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी एक संगठित भीड़ और कथित साजिश का हिस्सा थे, जिसने दंगों के दौरान हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। जांच एजेंसियों ने अदालत के समक्ष विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री प्रस्तुत की है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे हैं।

    मार्च 2023 में अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इनमें हत्या, दंगा, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इसके बाद लंबे समय तक चली सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से प्रस्तुत किए।

    मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान यह केस कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। अदालतों में हुई सुनवाई, जमानत याचिकाओं और कानूनी बहसों ने इसे लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। इसी वजह से फैसले का इंतजार केवल संबंधित पक्षों को ही नहीं बल्कि कानूनी और राजनीतिक हलकों को भी है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाला फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य मामलों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। अदालत का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी तथ्यों के आधार पर होगा, जिसका सभी पक्षों को इंतजार है।

    फिलहाल अदालत द्वारा फैसला टाले जाने के बाद एक सप्ताह और प्रतीक्षा बढ़ गई है। अब 11 जून को कड़कड़डूमा कोर्ट इस बहुचर्चित मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। ऐसे में आगामी तारीख को लेकर सुरक्षा एजेंसियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों की नजरें अदालत की कार्यवाही पर बनी हुई हैं।

  • बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश के चर्चित युवा राजनीतिक नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उमर हादी ने दावा किया है कि उनके भाई की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कई प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों की भूमिका रही है।

    शरीफ उस्मान हादी वर्ष 2024 में हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उस आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ व्यापक जनसमर्थन हासिल किया था और देश की राजनीति को नई दिशा दी थी। हादी को सरकार विरोधी राजनीति के एक मुखर युवा नेता के रूप में देखा जाता था। उन्होंने बाद में इंकलाब मंच नामक राजनीतिक संगठन का गठन किया और संसदीय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सक्रिय प्रचार अभियान चला रहे थे।

    दिसंबर 2025 में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर घातक हमला हुआ था। ढाका में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन छह दिन तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने उस समय पूरे बांग्लादेश में राजनीतिक सुरक्षा और चुनावी हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    अब इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। ब्रिटेन में बांग्लादेश के राजनयिक के रूप में कार्यरत उमर हादी ने फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेशों में कहा कि उनके भाई की हत्या एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक व्यक्ति ने इस हमले की योजना तैयार की थी।

    उमर हादी ने यह भी दावा किया कि पूर्व अंतरिम सरकार के कुछ प्रभावशाली सलाहकारों तथा मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े कुछ सांसद और मंत्री भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत साक्ष्य साझा नहीं किया है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    अपने संदेश में उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों को कानून के दायरे में लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि इस हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह केवल एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।

    उमर हादी ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अपराधियों को संरक्षण मिलता रहा तो भविष्य में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व भी ऐसे खतरों से सुरक्षित नहीं रह पाएगा। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में हत्या की निष्पक्ष जांच और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है।

    फिलहाल संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस संवेदनशील प्रकरण से जुड़े सवालों का समाधान कर सकती है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और सरकार की प्रतिक्रिया पर पूरे मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    नई दिल्ली। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए चार कट्टरपंथी संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इस कार्रवाई में महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से जुड़े इन आरोपियों के तार सामने आए हैं।
    जांच में खुलासा हुआ है कि ये लोग देश में कथित ‘खिलाफत’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ के नाम पर आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहे थे।

    बड़े ठिकाने थे निशाने पर

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के निशाने पर राम मंदिर अयोध्या, संसद भवन और कई सैन्य प्रतिष्ठान थे। इनके पास से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की गई है।

    दिल्ली में की थी रेकी

    जांच में सामने आया है कि एक आरोपी सोशल मीडिया के जरिए ग्रुप बनाकर कट्टर विचारधारा से जुड़ी चर्चाएं करता था। इसी प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की योजना साझा की जा रही थी।

    बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 में आरोपी ने दिल्ली आकर लाल किला और इंडिया गेट की रेकी भी की थी।

    क्राउडफंडिंग से जुटा रहे थे पैसे

    जांच एजेंसियों के अनुसार, मॉड्यूल के कुछ सदस्य रिमोट कंट्रोल से चलने वाले IED तैयार करने के लिए स्थानीय स्तर पर सामान जुटा रहे थे। वहीं एक अन्य आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को हथियार और विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए उकसा रहा था।
    क्राउडफंडिंग के लिए बैंक अकाउंट और QR कोड भी साझा किए जा रहे थे।

    सोहेल के मोबाइल से खुला राज

    इस पूरे नेटवर्क में बिहार के कटिहार जिले का एक युवक सोहेल भी शामिल बताया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया।
    जांच में उसका मोबाइल सबसे बड़ा सबूत बना। कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और चैट्स की फॉरेंसिक जांच में कई संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं।

    कटिहार के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर पहले सोहेल को स्थानीय स्तर पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। उसके मोबाइल की वैज्ञानिक जांच के बाद उसे दिल्ली बुलाया गया, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया।

    गांव और परिवार पर निगरानी

    पुलिस अब आरोपी के गांव और उसके संपर्क में आने वाले लोगों पर भी नजर रख रही है। जांच एजेंसियां बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, सोहेल पेशे से प्लंबर है और उसकी गतिविधियां लंबे समय से संदिग्ध बताई जा रही थीं।

    कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत

    फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। एजेंसियां अब इनके संभावित नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।

    कुल मिलाकर, समय रहते इस साजिश का खुलासा होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

  • ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल

    ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना है, जिससे बंगालियों को परेशान किया जाएगा।

    परिसीमन के जरिए राज्य विभाजन का आरोप
    बांकुरा जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से राज्य के कुछ हिस्सों का दूसरे राज्यों में विलय किया जा सकता है।

    केंद्रीय बलों पर महिलाओं के अपमान का आरोप
    मुख्यमंत्री ने चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

    टीएमसी सरकार गिराने के लिए ‘1000 करोड़ की साजिश’ का दावा
    ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाजपा नेताओं से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की बात सामने आई है।

    SIR को बताया ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’
    मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को हाल के समय का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो केंद्र के सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सत्ता परिवर्तन का दावा
    ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि 2026 में केंद्र सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। इसके बाद नई सरकार जनहित में फैसले लेगी और मौजूदा नीतियों में बदलाव किया जाएगा।

  • बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी

    बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के बक्सर (Buxar) से पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में सेंध पहुंचाने और हमले की साजिश में शामिल युवक अमन तिवारी (Aman Tiwari) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके लैपटॉप से विदेशी(दुश्मन देशों की) एजेंसियों को मैसेज भेजने का सबूत मिले हैं। उसकी गिरफ्तारी सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव से हुई है। इस मामले में पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। जिसमें सिमरी के युवक के लैपटॉप से मैसेज मिला।

    पुलिस के अनुसार रुपये की चाहत में सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव निवासी अमन तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था। गुप्त सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हुई। पुलिस के अनुसार बुधवार की दोपहर अमन किसी के घर पूजा कराने के लिए अपने पिता को छोड़ घर लौटा था। जिस वक्त वह घर में खाना खा रहा था‌ ठीक उसी वक्त पुलिस पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। एसपी शुभम आर्य ने बताया कि अमन के साथ तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के बाद दो को छोड़ दिया गया जबकि सबूत मिलने के बाद अमन को गिरफ्तार कर लिया गया।

    एसपी ने कहा कि पीएम से संबंधित कोई मैसेज हैक नहीं हुआ है। अमन काफी समय से विदेशी एजेंसियों के संपर्क में था। रुपये के डिमांड के साथ अंतराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था कि वह पीएम की सुरक्षा को हानि पहुंचा सकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से संपर्क कर गोपनीय जानकारी के बदले रुपये की मांग कर रहा था। उसके मोबाइल और लैपटॉप को पुलिस ने जब्त कर खंगाला, तो रुपये के डिमांड से संबंधित मैसेज मिला।

    एसपी ने बताया कि अमन तिवारी ने वर्ष 2021 में कोलकाता एयरपोर्ट को उड़ाने की धमकी दी थी। इस मामले में कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद गुरुवार को पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस के अनुसार आरोपित के घर से लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।

    अमन की गिरफ्तारी के बाद उसके गांव में गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। युवक की करतूत से सभी ग्रामीण हैरान नजर आ रहे हैं। एसपी ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अमन के संपर्क में और कौन कौन लोग हैं और उसका संपर्क किन एजेंसियों से हैं। अमन का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। उसकी नजह में और कौन-कौन वीआईपी हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

  • जीतू पटवारी आधी रात को विधानसभा पहुंचे, बोले-BJP के इशारे पर हो रही MLA की सदस्यता खत्म करने की साजिश

    जीतू पटवारी आधी रात को विधानसभा पहुंचे, बोले-BJP के इशारे पर हो रही MLA की सदस्यता खत्म करने की साजिश


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Madhya Pradesh Congress President Jitu Patwari) गुरुवार देर रात करीब 10 बजे अचानक विधानसभा सचिवालय (Assembly Secretariat) पहुंच गए. उनके यहां पहुंचने से हड़कंप मच गया. जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती (Congress MLA Rajendra Bharti) की सदस्यता समाप्त करने के लिए साजिशन रात में विधानसभा सचिवालय खोला गया है।

    दरअसल जीतू पटवारी ने एक वीडियो जारी किया है. जिसमें वो रात करीब 10 बजे मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे और विधानसभा के मुख्य सचिव के कमरे में चले गए. कमरे में विधानसभा के मुख्य सचिव के सामने पूर्व विधायक पीसी शर्मा (PC Sharma) पहले से ही बैठे हुए थे. जाते ही जीतू पटवारी विधानसभा के मुख्य सचिव से पूछते नज़र आ रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी के विधायक के पास तो कोर्ट का स्टे है और इस वक्त रात में विधानसभा सचिवालय खोलने का क्या औचित्य है?

    हालांकि यह बातचीत ज़्यादा लंबी नहीं चली क्योंकि विधानसभा के मुख्य सचिव थोड़ी देर बाद ही कार से रवाना हो गए. इसके बाद जीतू पटवारी विधानसभा से बाहर निकले और आरोप लगाया कि ‘कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने के लिए बीजेपी के इशारे पर रात को विधानसभा सचिवालय खोला गया।


    जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर लगाया ये आरोप

    जीतू पटवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि ‘ मोहन सरकार की हठधर्मिता एवं अलोकतांत्रिक रवैये पर जब प्रदेश कांग्रेस ने आपत्ति उठाई तो पूरा तंत्र निरुत्तर हो गया. स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में कार्यरत विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों और अधिकारियों का यह रवैया अस्वीकार्य है. हम बीजेपी की इस राजनीतिक गुंडागर्दी और विधानसभा सचिवालय के दुरुपयोग की कड़ी निंदा करते हैं. कांग्रेस राजनीतिक दुर्भावना की इस लड़ाई को पूरी ताकत से लड़ेगी।

  • J&K और पंजाब को दहलाने की थी साजिश….. अलग-अलग स्थानों पर मिली संदिग्ध IED, बढ़ाई सुरक्षा

    J&K और पंजाब को दहलाने की थी साजिश….. अलग-अलग स्थानों पर मिली संदिग्ध IED, बढ़ाई सुरक्षा


    चंडीगढ़/पंजाब
    । जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) और पंजाब (Punjab) में सुरक्षा एजेंसियों (Security Agencies.) ने अलग-अलग स्थानों पर संदिग्ध आईईडी (IED) मिलने के बाद सतर्कता बढ़ा दी है। दोनों घटनाओं के बाद इलाकों को घेरकर यातायात रोका गया और बम निरोधक दस्तों ने विस्फोटकों को निष्क्रिय किया। सबसे पहले जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिला में शनिवार को गांदरबल–सफापोरा रोड पर संदिग्ध आईईडी मिलने से हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने तुरंत क्षेत्र को घेर लिया और एहतियातन यातायात रोक दिया।


    बम निरोधक दस्ते ने नष्ट किया

    बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर इसे सुरक्षित तरीके से नष्ट किया। घाटी में आतंकवादी अक्सर वीआईपी, सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों के काफिलों को निशाना बनाने के लिए सड़कों किनारे आईईडी लगाने की कोशिश करते रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए सेना और अर्धसैनिक बल नियमित रूप से सुबह गश्त कर मार्गों की जांच करते हैं। आईईडी वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती माने जाते हैं। इन्हें सामान्य औद्योगिक रसायनों या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से तैयार किया जा सकता है, जिससे इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इनका आकार छोटे पैकेट से लेकर वाहन-आधारित बड़े विस्फोटक तक हो सकता है।


    पंजाब में पुलिस चौकी के पास रखे बैग में मिला आईईडी

    उधर, पंजाब के अमृतसर ग्रामीण क्षेत्र के रैया इलाके में एक पुलिस चौकी के पास बैग में रखा आईईडी बरामद किया गया। सुहैल कासिम मीर ने बताया कि पुलिस ने तुरंत क्षेत्र को सील कर बम निरोधक दस्ते की मदद से विस्फोटक निष्क्रिय किया। इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। अब तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, जबकि पुलिस संदिग्धों की पहचान कर आगे की जांच में जुटी है।

  • नेपाल में हुई चीन-पाक की Secret Meeting…. भारत के खिलाफ साजिश रोडमैप किया तैयार

    नेपाल में हुई चीन-पाक की Secret Meeting…. भारत के खिलाफ साजिश रोडमैप किया तैयार


    बीजिंग।
    नेपाल (Nepal) की राजधानी काठमांडो के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले रिहायशी इलाके बालुवाटार में 16 फरवरी को पाकिस्तान और चीन के अधिकारियों (Pakistani and Chinese officials) की एक सीक्रेट बैठक (Secret Meeting) आयोजित की गई। इस बैठक में चीन और पाकिस्तान के आला अधिकारी मौजूद थे। खास बात यह रही कि इस बैठक में नेपाल स्थित पाकिस्तान दूतावास में तैनात पाकिस्तानी डिफेंस अटैची कर्नल हफीज उर रहमान भी शामिल हुए।

    इस बैठक में भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के नाम पर साजिश का एक रोडमैप तैयार किया गया। इसके लिए बाकायदा चीन और पाकिस्तान में नेपाल के स्थानीय पत्रकारों से लेकर समाजसेवियों व दक्षिणी नेपाल के मधेशिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों को चिन्हित कर टास्क देने की पूरी योजना बनाई गई। केंद्रीय खुफिया एजेंसी को लगातार मिल रहे इनपुट के आधार पर इस बात के पुख्ता प्रमाण मिल चुके हैं कि भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए चीन और पाकिस्तान नेपाल की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान और चीन के सात प्रमुख अधिकारी शामिल थे। तकरीबन पौने दो घंटे चली इस बैठक में चीन की ओर से भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का जिक्र किया गया। बैठक 20 फरवरी को मनाए जाने वाले अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर माहौल खराब करने के लिए की गई थी। इसके लिए बाकायदा चीन ने 23 स्थानीय लोगों का चयन किया था।


    एक्सचेंज प्रोग्राम की आड़ में भड़काने की योजना

    इस योजना के तहत नेपाल के उन लोगों को चयनित किया गया था जो कि चीन के अलग-अलग हिस्सों में बीते दो वर्षों के दौरान यात्रा करके आए थे। हालांकि यह बात अलग है चीन और पाकिस्तान की बड़ी साजिश जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तवांग को अपना हिस्सा बताने का नैरेटिव सेट करने की थी पूरी तरह फ्लॉप हो गई। इसमें योजना यह बनाई गई थी कि नेपाल के इन 23 लोगों में से कुछ लोगों को भारत भेजा जाएगा। अभी भी इसमें से 14 लोगों को नॉर्थ ईस्ट जाकर पूरी जानकारियां इकट्ठा करने के लिए भेजने की योजना बनाई जा रही है।

    केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर इस बात की भी पुष्टि हुई है कि इस पूरी योजना के पीछे चीन के चेंगदू स्थित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पश्चिमी थिएटर कमान के कुछ अधिकारियों की पूरी साजिश थी। दरअसल दिसंबर 2024 से चीन ने नेपाल के ललितपुर और कीर्तिपुर में अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धरोहरों के साथ अपनी भाषा के प्रचार के लिए दो केंद्र स्थापित किए हैं।


    अब तक हो चुकीं कई बैठकें

    सूत्रों के मुताबिक बीते कुछ समय से चीन और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच में काठमांडू में लगातार कई बैठकें आयोजित की जा चुकी है। इसमें कई बैठकें तो ऐसी भी आयोजित हुई हैं जिसमें दूतावास के कार्यक्रमों के बहाने पकिस्तान की आईएसआई से जुड़े अधिकारी भी नेपाल पहुंचे। पिछले सोमवार को आयोजित हुई इस बैठक में पकिस्तान के डिफेंस अटैची समेत दूतावास के तीन प्रमुख अधिकारी भी शामिल थे।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान के अधिकारियों ने चीनी अधिकारियों के साथ बलूचिस्तान में हो रहे विद्रोह और उसके चलते पाकिस्तान में चीन की ओर से चलाई जाने वाले प्रोजेक्ट की पूरी रिपोर्ट की चर्चा की गई।