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  • आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    अमरावती। आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने 100 शहरी निकायों में जारी चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है। वहीं, आयोग अब गुरुवार को इस पर फैसला करेगा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय दिया जाए या नहीं।

    मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री और जनसेना प्रमुख पवन कल्याण तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव ने संयुक्त बयान जारी कर चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान करने की बात कही। गठबंधन नेताओं ने कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने रोकी प्रक्रिया

    शहरी निकाय चुनावों को लेकर विवाद वाईएसआरसीपी की याचिका के बाद बढ़ा। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी करने की प्रक्रिया टालने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयोग ने राज्य के सभी 100 शहरी निकायों में चल रही चुनाव प्रक्रिया रोक दी।

    अब आयोग को यह तय करना है कि जिन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके, वहां नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए या नहीं। इस निर्णय पर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों की नजर बनी हुई है।

    एनडीए का आरोप, चुनाव रोकने की कोशिश कर रही YSRCP

    चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और पीवीएन माधव ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि गठबंधन सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने और स्थानीय निकायों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बयान में कहा गया, “हमने 2024 का चुनाव आंध्र प्रदेश के पुनर्निर्माण के वादे के साथ लड़ा था। लोगों ने हम पर भरोसा किया और गठबंधन को सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी। पिछले दो वर्षों में हमने कल्याण, विकास और सुशासन पर ध्यान दिया है। हमने लोगों का विश्वास बहाल किया है।”

    एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी शुरुआत से ही स्थानीय निकाय चुनावों को बाधित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का तत्काल कारण सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है। विपक्ष पर लगाए गए साजिश के आरोप एनडीए नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।

    स्थानीय निकायों के चुनाव को विकास के लिए बताया जरूरी

    एनडीए नेताओं ने कहा कि मजबूत स्थानीय निकाय राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, समय पर चुनाव होने से स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलती है और 16वें वित्त आयोग तथा केंद्र सरकार से मिलने वाली धनराशि से जुड़े प्रावधानों के लिहाज से भी चुनाव महत्वपूर्ण हैं।

    गठबंधन का कहना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

    पिछली सरकार के चुनावों को लेकर भी उठाए सवाल

    एनडीए नेताओं ने वाईएसआरसीपी की पिछली सरकार के दौरान हुए चुनावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य में हिंसा और धमकियों के कारण भय का माहौल बना था तथा विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

    बयान में गठबंधन नेताओं ने कहा कि वाईएसआरसीपी ने उस समय चुनावी जीत का जश्न मनाया, जबकि अब कानून के अनुसार चुनाव कराने की प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

    एनडीए में शामिल टीडीपी, जनसेना और भाजपा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपना भरोसा जताते हुए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में सहयोग देने की बात कही है।

    आयोग के अगले फैसले पर टिकी निगाहें

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर लगी रोक के बाद अब राज्य चुनाव आयोग के अगले फैसले का इंतजार है। खास तौर पर उन क्षेत्रों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने का मुद्दा महत्वपूर्ण है, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाए।

    आयोग का निर्णय आगे की चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। फिलहाल इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

  • केतन हत्याकांड में 'माही' की फर्जी पहचान से खुला बड़ा राज, आरोपियों ने AI से लेकर ऑनलाइन खोज तक रची थी पूरी साजिश

    केतन हत्याकांड में 'माही' की फर्जी पहचान से खुला बड़ा राज, आरोपियों ने AI से लेकर ऑनलाइन खोज तक रची थी पूरी साजिश


    नई दिल्ली । किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की पटकथा को भी पीछे छोड़ दे, ऐसी खौफनाक साजिश रचकर केतन अग्रवाल की हत्या करने के मामले में पुणे ग्रामीण पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में 5,053 पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इस विस्तृत चार्जशीट में पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया, उसके प्रेमी चेतन चौधरी और उनके दोस्त रितेश हांगे की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है। इस पूरे मर्डर केस की सबसे बड़ी और अहम कड़ी ‘माही’ नाम का वह फेक अकाउंट बना, जिसके जरिए केतन को सिया के जन्मदिन का सरप्राइज देने के बहाने लोहागढ़ किले पर बुलाया गया और फिर वहां उसे मौत के घाट उतार दिया गया।

    केतन को ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट से मैसेज में क्या?

    चार्जशीट में किए गए खुलासे के मुताबिक, जब हत्या की पिछली तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं, तब सिया और चेतन के दोस्त रितेश हांगे ने केतन को फंसाने के लिए एक नया डिजिटल जाल बिछाया। आरोपियों ने अपनी एक परिचित लड़की की तस्वीर का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर ‘माही’ नाम से एक फर्जी अकाउंट बनाया। इसके बाद 18 जून को इसी ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट से केतन के मोबाइल पर एक मैसेज भेजा गया। मैसेज में लिखा था, “मैं सिया की खास दोस्त माही बोल रही हूं। हमें लोहागढ़ किले पर सिया का जन्मदिन मनाना है और उसे एक बहुत बड़ा सरप्राइज देना है। तुम सिया को लेकर चुपचाप किले पर आ जाओ।”

    बेहद सीधे और भोले-भाले स्वभाव का केतन इस फेक अकाउंट और सरप्राइज पार्टी के मैसेज को पूरी तरह सच मान बैठा। वह बिना किसी शक-शुब्हे के बेहद खुशी-खुशी सिया को साथ लेकर लोहागढ़ किले की ओर निकल पड़ा। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस सरप्राइज पार्टी के नाम पर उसे बुलाया जा रहा है, वह दरअसल उसकी हत्या का तयशुदा डेथ-ट्रैप है।

    पुणे में हत्या, आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा

    पूर्व नियोजित प्लान के तहत आरोपी चेतन चौधरी पहले से ही किले के एग्जिट रूट से होकर ऊपर पहुंच चुका था और किले के मंदिर में घात लगाकर केतन के आने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही केतन और सिया वहां पहुंचे, सिया ने आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा कर दिया। इसके बाद जब केतन बेखबर होकर गहरी खाई के ठीक किनारे खड़ा था, तभी पीछे से सिया ने उसके कंधे पर और चेतन ने उसके पैर पर पूरी ताकत से धक्का दे दिया। केतन संभल पाता या खुद को संभाल पाता, उससे पहले ही चेतन ने उसे लात मारकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में धकेल दिया। इस हादसे में मौके पर ही केतन की मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने उस ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया।

    पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून को हत्या हुई थी। पुलिस ने मंगेतर सिया, कथित प्रेमी चेतन और एक अन्य शख्स रितेश हांगे को गिरफ्तार किया है। केतन को लोहागढ़ किले से धक्का देकर मौत के घाट उतारा गया। ‘माही’ नाम से बनाए गए एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट का इस्तेमाल हुआ, वारदात के बाद अकाउंट डिलीट किया।

    महाराष्ट्र की वडगांव मावल अदालत में दायर आरोपपत्र में संदेशों, तस्वीरों, मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और तकनीकी विश्लेषण प्रमाण पत्र, पांच प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सहित कई ठोस सबूत हैं। हत्याकांड को अंजाम देने से पहले सिया ने पिछले साल मार्च में लोहागढ़ में हुई ऐसी एक अन्य घटना के बारे में ऑनलाइन जानकारी भी जुटाई। आरोपियों ने केतन की हत्या से पहले मर्डर से संबंधित फिल्में देखीं, ऑनलाइन खोजबीन के लिए एआई टूल चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। पुलिस से बचने के तरीकों पर पॉडकास्ट भी सुने।

    सुपारी किलरों से भी संपर्क

    पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि केतन को रास्ते से हटाने की साजिश मार्च 2026 से ही रची जा रही थी। शुरुआत में तीनों आरोपियों ने तय किया था कि केतन की हत्या नहीं करनी है, बल्कि उसे जिंदगी भर के लिए ‘अपाहिज’ बना देना है। इसके लिए उन्होंने दूसरे राज्यों के कुछ सुपारी किलरों से भी संपर्क साधा था। हालांकि, बाद में आरोपियों को डर लगा कि अगर बाहर का कोई अपराधी पकड़ा गया तो उनका भांडा फोड़ हो जाएगा। खास बात यह है कि आरोपियों ने जिन लोगों से संपर्क किया था, उनमें से एक व्यक्ति अब इस केस में पुलिस का मुख्य गवाह बन गया है।

    एआई का इस्तेमाल और हत्या के लिए ठिकाने की तलाश

    जब बाहर से सुपारी देने का प्लान फेल हो गया, तो मई के महीने में सिया, चेतन और रितेश ने फैसला किया कि वे खुद ही इस कांटे को रास्ते से निकालेंगे। पुलिस के चंगुल से कैसे बचना है और सबूतों को कैसे मिटाना है, इसके लिए आरोपियों ने चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया, क्राइम पॉडकास्ट सुने, कई मर्डर फिल्में देखीं और मेघालय के चर्चित ‘सोनम केस’ का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने लोनावला के टाइगर पॉइंट समेत कई पहाड़ी इलाकों की बाकायदा रेकी की। उन्होंने देखा कि टाइगर पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसलिए आखिरकार उन्होंने ‘लोहागढ़’ किले को चुना। दरअसल, मार्च 2025 में लोहागढ़ किले पर एक युवती की गिरकर मौत हो चुकी थी। आरोपियों का हिसाब था कि वे पुलिस और लोगों के सामने यह झूठी कहानी गढ़ देंगे कि ‘सेल्फी लेते वक्त केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया।’

    केतन की बाली ट्रिप कैसे रद्द हुई?

    6 जून को केतन और सिया प्री-वेडिंग शूट के लिए सीधे ‘बाली’ जाने वाले थे। लेकिन वहां जाने से ठीक पहले 4 जून को भी सिया ने केतन को लोहागढ़ ले जाकर ठिकाने लगाने की कोशिश की थी, हालांकि वह प्रयास नाकाम रहा। इसके बाद 6 जून को जब वे मुंबई के लिए निकले, तो रास्ते में खालापुर के एक कैफे के वॉशरूम में सिया ने चुपके से केतन का पासपोर्ट फाड़कर फ्लश कर दिया। पासपोर्ट नष्ट होने के कारण केतन की बाली ट्रिप रद्द हो गई और आरोपियों के लिए लोहागढ़ में मर्डर करने का रास्ता एक बार फिर साफ हो गया।

  • केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच का बड़ा खुलासा, पहले दुर्घटना दिखाकर अपाहिज बनाने की थी साजिश; बाद में हत्या की योजना का आरोप

    केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच का बड़ा खुलासा, पहले दुर्घटना दिखाकर अपाहिज बनाने की थी साजिश; बाद में हत्या की योजना का आरोप

    नई दिल्ली । पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कथित साजिश शुरुआत से हत्या की नहीं थी। पुलिस का दावा है कि पहले ऐसी योजना बनाई गई थी, जिसमें केतन अग्रवाल को एक सुनियोजित दुर्घटना के माध्यम से स्थायी रूप से गंभीर रूप से घायल या दिव्यांग बनाया जाए, ताकि उनकी प्रस्तावित शादी और विदेश यात्रा स्वाभाविक रूप से रद्द हो सके। बाद में कथित रूप से इस योजना को बदलकर हत्या की साजिश तैयार की गई।

    पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ऐसे तरीके की तलाश में थे जिससे पूरी घटना एक सामान्य दुर्घटना प्रतीत हो और किसी पर संदेह न जाए। इसी उद्देश्य से सड़क हादसे, लूटपाट जैसी परिस्थितियां पैदा करने और गंभीर चोट पहुंचाने जैसे विकल्पों पर विचार किए जाने का दावा किया गया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस योजना का उद्देश्य पीड़ित को लंबे समय तक सामान्य जीवन जीने में असमर्थ बनाना था।

    जांच में यह भी सामने आया है कि बाद के चरण में आरोपियों ने कथित तौर पर हत्या की योजना पर काम शुरू किया। पुलिस के अनुसार, घटना को दुर्घटना का रूप देने के लिए विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि कई संभावित स्थानों का जायजा लेने के बाद अंततः एक स्थान को वारदात के लिए चुना गया। पुलिस इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, लोकेशन डेटा और अन्य तकनीकी प्रमाणों की भी जांच कर रही है।

    जांच अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों की गतिविधियों और आपसी बातचीत से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य भी उनके हाथ लगे हैं। इनमें कथित इंटरनेट सर्च, मोबाइल फोन से प्राप्त जानकारी और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड शामिल हैं। पुलिस इन सभी पहलुओं की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला स्पष्ट की जा सके और अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।

    पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान यह भी पता चला है कि घटना से पहले कई बार संबंधित स्थानों पर जाकर परिस्थितियों का आकलन किया गया था। आरोप है कि संभावित योजना को सफल बनाने के लिए कथित तौर पर कई बार रेकी की गई और अलग-अलग परिस्थितियों का परीक्षण किया गया। हालांकि इन सभी दावों की पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

    इस मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है और पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष एवं त्वरित जांच की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच होनी चाहिए और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े प्रत्येक पहलू की वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से जांच की जा रही है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां सभी उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी और उसी आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकित शर्मा हत्याकांड, अदालत ने फैसला 11 जून तक टाला

    दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकित शर्मा हत्याकांड, अदालत ने फैसला 11 जून तक टाला

    नई दिल्ली । वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 11 जून निर्धारित की है। अदालत को गुरुवार को इस मामले में निर्णय सुनाना था, लेकिन अब फैसला अगले सप्ताह सुनाया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद सभी पक्षों की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।

    अंकित शर्मा हत्याकांड दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल रहा है। यह मामला न केवल अपनी गंभीरता बल्कि इससे जुड़े आरोपों और लंबे न्यायिक प्रक्रिया के कारण भी लगातार चर्चा में बना रहा। मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपी न्यायालय के समक्ष पेश हैं, जिन पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    घटना फरवरी 2020 की है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव खजूरी खास क्षेत्र के एक नाले से बरामद किया गया था। उनकी मौत ने पूरे देश का ध्यान इस मामले की ओर खींचा था। इसके बाद पुलिस ने हत्या और दंगों से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

    अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी एक संगठित भीड़ और कथित साजिश का हिस्सा थे, जिसने दंगों के दौरान हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। जांच एजेंसियों ने अदालत के समक्ष विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री प्रस्तुत की है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे हैं।

    मार्च 2023 में अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इनमें हत्या, दंगा, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इसके बाद लंबे समय तक चली सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से प्रस्तुत किए।

    मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान यह केस कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। अदालतों में हुई सुनवाई, जमानत याचिकाओं और कानूनी बहसों ने इसे लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। इसी वजह से फैसले का इंतजार केवल संबंधित पक्षों को ही नहीं बल्कि कानूनी और राजनीतिक हलकों को भी है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाला फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य मामलों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। अदालत का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी तथ्यों के आधार पर होगा, जिसका सभी पक्षों को इंतजार है।

    फिलहाल अदालत द्वारा फैसला टाले जाने के बाद एक सप्ताह और प्रतीक्षा बढ़ गई है। अब 11 जून को कड़कड़डूमा कोर्ट इस बहुचर्चित मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। ऐसे में आगामी तारीख को लेकर सुरक्षा एजेंसियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों की नजरें अदालत की कार्यवाही पर बनी हुई हैं।

  • बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश के चर्चित युवा राजनीतिक नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उमर हादी ने दावा किया है कि उनके भाई की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कई प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों की भूमिका रही है।

    शरीफ उस्मान हादी वर्ष 2024 में हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उस आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ व्यापक जनसमर्थन हासिल किया था और देश की राजनीति को नई दिशा दी थी। हादी को सरकार विरोधी राजनीति के एक मुखर युवा नेता के रूप में देखा जाता था। उन्होंने बाद में इंकलाब मंच नामक राजनीतिक संगठन का गठन किया और संसदीय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सक्रिय प्रचार अभियान चला रहे थे।

    दिसंबर 2025 में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर घातक हमला हुआ था। ढाका में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन छह दिन तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने उस समय पूरे बांग्लादेश में राजनीतिक सुरक्षा और चुनावी हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    अब इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। ब्रिटेन में बांग्लादेश के राजनयिक के रूप में कार्यरत उमर हादी ने फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेशों में कहा कि उनके भाई की हत्या एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक व्यक्ति ने इस हमले की योजना तैयार की थी।

    उमर हादी ने यह भी दावा किया कि पूर्व अंतरिम सरकार के कुछ प्रभावशाली सलाहकारों तथा मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े कुछ सांसद और मंत्री भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत साक्ष्य साझा नहीं किया है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    अपने संदेश में उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों को कानून के दायरे में लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि इस हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह केवल एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।

    उमर हादी ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अपराधियों को संरक्षण मिलता रहा तो भविष्य में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व भी ऐसे खतरों से सुरक्षित नहीं रह पाएगा। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में हत्या की निष्पक्ष जांच और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है।

    फिलहाल संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस संवेदनशील प्रकरण से जुड़े सवालों का समाधान कर सकती है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और सरकार की प्रतिक्रिया पर पूरे मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    राम मंदिर और संसद भवन को निशाना बनाने की साजिश नाकाम, दिग्ध गिरफ्तार

    नई दिल्ली। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए चार कट्टरपंथी संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इस कार्रवाई में महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से जुड़े इन आरोपियों के तार सामने आए हैं।
    जांच में खुलासा हुआ है कि ये लोग देश में कथित ‘खिलाफत’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ के नाम पर आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहे थे।

    बड़े ठिकाने थे निशाने पर

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के निशाने पर राम मंदिर अयोध्या, संसद भवन और कई सैन्य प्रतिष्ठान थे। इनके पास से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की गई है।

    दिल्ली में की थी रेकी

    जांच में सामने आया है कि एक आरोपी सोशल मीडिया के जरिए ग्रुप बनाकर कट्टर विचारधारा से जुड़ी चर्चाएं करता था। इसी प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की योजना साझा की जा रही थी।

    बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 में आरोपी ने दिल्ली आकर लाल किला और इंडिया गेट की रेकी भी की थी।

    क्राउडफंडिंग से जुटा रहे थे पैसे

    जांच एजेंसियों के अनुसार, मॉड्यूल के कुछ सदस्य रिमोट कंट्रोल से चलने वाले IED तैयार करने के लिए स्थानीय स्तर पर सामान जुटा रहे थे। वहीं एक अन्य आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को हथियार और विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए उकसा रहा था।
    क्राउडफंडिंग के लिए बैंक अकाउंट और QR कोड भी साझा किए जा रहे थे।

    सोहेल के मोबाइल से खुला राज

    इस पूरे नेटवर्क में बिहार के कटिहार जिले का एक युवक सोहेल भी शामिल बताया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया।
    जांच में उसका मोबाइल सबसे बड़ा सबूत बना। कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और चैट्स की फॉरेंसिक जांच में कई संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं।

    कटिहार के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर पहले सोहेल को स्थानीय स्तर पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। उसके मोबाइल की वैज्ञानिक जांच के बाद उसे दिल्ली बुलाया गया, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया।

    गांव और परिवार पर निगरानी

    पुलिस अब आरोपी के गांव और उसके संपर्क में आने वाले लोगों पर भी नजर रख रही है। जांच एजेंसियां बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, सोहेल पेशे से प्लंबर है और उसकी गतिविधियां लंबे समय से संदिग्ध बताई जा रही थीं।

    कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत

    फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। एजेंसियां अब इनके संभावित नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।

    कुल मिलाकर, समय रहते इस साजिश का खुलासा होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

  • ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल

    ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना है, जिससे बंगालियों को परेशान किया जाएगा।

    परिसीमन के जरिए राज्य विभाजन का आरोप
    बांकुरा जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से राज्य के कुछ हिस्सों का दूसरे राज्यों में विलय किया जा सकता है।

    केंद्रीय बलों पर महिलाओं के अपमान का आरोप
    मुख्यमंत्री ने चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

    टीएमसी सरकार गिराने के लिए ‘1000 करोड़ की साजिश’ का दावा
    ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाजपा नेताओं से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की बात सामने आई है।

    SIR को बताया ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’
    मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को हाल के समय का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो केंद्र के सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सत्ता परिवर्तन का दावा
    ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि 2026 में केंद्र सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। इसके बाद नई सरकार जनहित में फैसले लेगी और मौजूदा नीतियों में बदलाव किया जाएगा।

  • बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी

    बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के बक्सर (Buxar) से पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में सेंध पहुंचाने और हमले की साजिश में शामिल युवक अमन तिवारी (Aman Tiwari) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके लैपटॉप से विदेशी(दुश्मन देशों की) एजेंसियों को मैसेज भेजने का सबूत मिले हैं। उसकी गिरफ्तारी सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव से हुई है। इस मामले में पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। जिसमें सिमरी के युवक के लैपटॉप से मैसेज मिला।

    पुलिस के अनुसार रुपये की चाहत में सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव निवासी अमन तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था। गुप्त सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हुई। पुलिस के अनुसार बुधवार की दोपहर अमन किसी के घर पूजा कराने के लिए अपने पिता को छोड़ घर लौटा था। जिस वक्त वह घर में खाना खा रहा था‌ ठीक उसी वक्त पुलिस पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। एसपी शुभम आर्य ने बताया कि अमन के साथ तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के बाद दो को छोड़ दिया गया जबकि सबूत मिलने के बाद अमन को गिरफ्तार कर लिया गया।

    एसपी ने कहा कि पीएम से संबंधित कोई मैसेज हैक नहीं हुआ है। अमन काफी समय से विदेशी एजेंसियों के संपर्क में था। रुपये के डिमांड के साथ अंतराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था कि वह पीएम की सुरक्षा को हानि पहुंचा सकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से संपर्क कर गोपनीय जानकारी के बदले रुपये की मांग कर रहा था। उसके मोबाइल और लैपटॉप को पुलिस ने जब्त कर खंगाला, तो रुपये के डिमांड से संबंधित मैसेज मिला।

    एसपी ने बताया कि अमन तिवारी ने वर्ष 2021 में कोलकाता एयरपोर्ट को उड़ाने की धमकी दी थी। इस मामले में कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद गुरुवार को पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस के अनुसार आरोपित के घर से लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।

    अमन की गिरफ्तारी के बाद उसके गांव में गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। युवक की करतूत से सभी ग्रामीण हैरान नजर आ रहे हैं। एसपी ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अमन के संपर्क में और कौन कौन लोग हैं और उसका संपर्क किन एजेंसियों से हैं। अमन का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। उसकी नजह में और कौन-कौन वीआईपी हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

  • जीतू पटवारी आधी रात को विधानसभा पहुंचे, बोले-BJP के इशारे पर हो रही MLA की सदस्यता खत्म करने की साजिश

    जीतू पटवारी आधी रात को विधानसभा पहुंचे, बोले-BJP के इशारे पर हो रही MLA की सदस्यता खत्म करने की साजिश


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Madhya Pradesh Congress President Jitu Patwari) गुरुवार देर रात करीब 10 बजे अचानक विधानसभा सचिवालय (Assembly Secretariat) पहुंच गए. उनके यहां पहुंचने से हड़कंप मच गया. जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती (Congress MLA Rajendra Bharti) की सदस्यता समाप्त करने के लिए साजिशन रात में विधानसभा सचिवालय खोला गया है।

    दरअसल जीतू पटवारी ने एक वीडियो जारी किया है. जिसमें वो रात करीब 10 बजे मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे और विधानसभा के मुख्य सचिव के कमरे में चले गए. कमरे में विधानसभा के मुख्य सचिव के सामने पूर्व विधायक पीसी शर्मा (PC Sharma) पहले से ही बैठे हुए थे. जाते ही जीतू पटवारी विधानसभा के मुख्य सचिव से पूछते नज़र आ रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी के विधायक के पास तो कोर्ट का स्टे है और इस वक्त रात में विधानसभा सचिवालय खोलने का क्या औचित्य है?

    हालांकि यह बातचीत ज़्यादा लंबी नहीं चली क्योंकि विधानसभा के मुख्य सचिव थोड़ी देर बाद ही कार से रवाना हो गए. इसके बाद जीतू पटवारी विधानसभा से बाहर निकले और आरोप लगाया कि ‘कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने के लिए बीजेपी के इशारे पर रात को विधानसभा सचिवालय खोला गया।


    जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर लगाया ये आरोप

    जीतू पटवारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि ‘ मोहन सरकार की हठधर्मिता एवं अलोकतांत्रिक रवैये पर जब प्रदेश कांग्रेस ने आपत्ति उठाई तो पूरा तंत्र निरुत्तर हो गया. स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में कार्यरत विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों और अधिकारियों का यह रवैया अस्वीकार्य है. हम बीजेपी की इस राजनीतिक गुंडागर्दी और विधानसभा सचिवालय के दुरुपयोग की कड़ी निंदा करते हैं. कांग्रेस राजनीतिक दुर्भावना की इस लड़ाई को पूरी ताकत से लड़ेगी।

  • J&K और पंजाब को दहलाने की थी साजिश….. अलग-अलग स्थानों पर मिली संदिग्ध IED, बढ़ाई सुरक्षा

    J&K और पंजाब को दहलाने की थी साजिश….. अलग-अलग स्थानों पर मिली संदिग्ध IED, बढ़ाई सुरक्षा


    चंडीगढ़/पंजाब
    । जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) और पंजाब (Punjab) में सुरक्षा एजेंसियों (Security Agencies.) ने अलग-अलग स्थानों पर संदिग्ध आईईडी (IED) मिलने के बाद सतर्कता बढ़ा दी है। दोनों घटनाओं के बाद इलाकों को घेरकर यातायात रोका गया और बम निरोधक दस्तों ने विस्फोटकों को निष्क्रिय किया। सबसे पहले जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिला में शनिवार को गांदरबल–सफापोरा रोड पर संदिग्ध आईईडी मिलने से हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने तुरंत क्षेत्र को घेर लिया और एहतियातन यातायात रोक दिया।


    बम निरोधक दस्ते ने नष्ट किया

    बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर इसे सुरक्षित तरीके से नष्ट किया। घाटी में आतंकवादी अक्सर वीआईपी, सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों के काफिलों को निशाना बनाने के लिए सड़कों किनारे आईईडी लगाने की कोशिश करते रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए सेना और अर्धसैनिक बल नियमित रूप से सुबह गश्त कर मार्गों की जांच करते हैं। आईईडी वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती माने जाते हैं। इन्हें सामान्य औद्योगिक रसायनों या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से तैयार किया जा सकता है, जिससे इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इनका आकार छोटे पैकेट से लेकर वाहन-आधारित बड़े विस्फोटक तक हो सकता है।


    पंजाब में पुलिस चौकी के पास रखे बैग में मिला आईईडी

    उधर, पंजाब के अमृतसर ग्रामीण क्षेत्र के रैया इलाके में एक पुलिस चौकी के पास बैग में रखा आईईडी बरामद किया गया। सुहैल कासिम मीर ने बताया कि पुलिस ने तुरंत क्षेत्र को सील कर बम निरोधक दस्ते की मदद से विस्फोटक निष्क्रिय किया। इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। अब तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, जबकि पुलिस संदिग्धों की पहचान कर आगे की जांच में जुटी है।