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  • आगरा में नाला निर्माण के दौरान मिट्टी की ढाय गिरी, 3 मजदूर दबे, 2 की मौत, ठेकेदार की हालत गंभीर

    आगरा में नाला निर्माण के दौरान मिट्टी की ढाय गिरी, 3 मजदूर दबे, 2 की मौत, ठेकेदार की हालत गंभीर

    आगरा। सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर नाला निर्माण के दौरान अचानक मिट्टी की ढाय गिरने से बड़ा हादसा हो गया। मिट्टी के नीचे तीन मजदूर दब गए। पुलिस और राहत टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने विकास और सुशील को मृत घोषित कर दिया। वहीं ठेकेदार अनुज की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    शटरिंग प्लेट की वेल्डिंग के दौरान हादसा
    हादसा सिकंदरा थाना क्षेत्र के औद्योगिक इलाके में सब्जी मंडी के पास पेट्रोल पंप के बगल में हुआ। यहां नाला निर्माण का काम चल रहा था और मजदूर नाले की दीवार बनाने के लिए शटरिंग की प्लेट की वेल्डिंग कर रहे थे।

    इसी दौरान अचानक मिट्टी की ढाय भरभराकर मजदूरों के ऊपर गिर गई। कुछ ही पल में तीन मजदूर मिट्टी में दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    तीनों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा
    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। काफी मशक्कत के बाद मिट्टी में दबे तीनों लोगों को बाहर निकाला गया। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, हादसे में विकास पुत्र राजेंद्र (22) और सुशील की मौत हो गई। वहीं अनुज पुत्र जयपाल (30), निवासी मुजफ्फरनगर, गंभीर रूप से घायल है।

    अनुज ठेकेदार, साथ में काम कर रहे थे 7 मजदूर
    पुलिस के अनुसार अनुज ठेकेदार है और उसके साथ सात मजदूर काम कर रहे थे। नाले की दीवार के निर्माण के लिए शटरिंग की प्लेट की वेल्डिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान मिट्टी की ढाय गिरने से यह हादसा हुआ। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

  • छत और छज्जे की ढलाई के दौरान बड़ा हादसा, शटरिंग गिरने से 3 की मौत; मजदूरों ने मांगा 50 लाख मुआवजा

    छत और छज्जे की ढलाई के दौरान बड़ा हादसा, शटरिंग गिरने से 3 की मौत; मजदूरों ने मांगा 50 लाख मुआवजा


    मथुरा । मथुरा के वृंदावन में निर्माणाधीन मॉल में शुक्रवार सुबह हुए दर्दनाक हादसे ने निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रुक्मणी विहार इलाके में निर्माणाधीन ओमेक्स मॉल में सुबह करीब सात बजे छत और छज्जे की ढलाई के दौरान अचानक शटरिंग और निर्माण सामग्री भरभराकर नीचे आ गिरी। हादसे के समय कुछ मजदूर नाइट शिफ्ट के बाद निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। अचानक हुए इस हादसे में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल पुलिस तथा राहत दल को सूचना दी गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन फायर ब्रिगेड और बचाव दल मौके पर पहुंचा। मलबे को हटाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। शुरुआती कार्रवाई में एक मजदूर का शव मौके से बाहर निकाला गया जबकि तीन मजदूर घायल अवस्था में मिले। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया लेकिन इलाज के दौरान दो और मजदूरों ने दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में मृतकों की संख्या तीन हो गई है। एक मजदूर का इलाज अभी जारी है और उसकी हालत को लेकर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है।

    पुलिस के मुताबिक मृतकों में एक मजदूर नेपाल का रहने वाला था जबकि दो मजदूर पश्चिम बंगाल से संबंधित थे। मृतक की पहचान नेपाल के कैलाली जिले के सिमरी निवासी करीब 40 वर्षीय शिवराम के रूप में हुई है। उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान पश्चिम बंगाल के कूचबिहार निवासी रफीउल और आलम ने भी दम तोड़ दिया। पश्चिम बंगाल के ही एक अन्य मजदूर दिलबार का इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलने के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शटरिंग किस वजह से गिरी और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। निर्माण स्थल पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री और ढांचे की मजबूती की भी जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    मृतक शिवराम के परिवार की ओर से न्याय की मांग उठाई गई है। उनकी भतीजी मनीषा के मुताबिक शिवराम कुछ दिन पहले ही काम के लिए मथुरा आए थे। परिवार का कहना है कि निर्माण स्थल पर लंबे समय से काम चल रहा था लेकिन हादसे ने उनका सब कुछ छीन लिया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    वहीं निर्माण स्थल पर काम कर रहे अन्य मजदूरों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाता तो इस तरह का हादसा शायद टाला जा सकता था। मजदूरों ने मृतकों के परिवारों के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी रखी है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    मॉल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि हादसे के समय चार से पांच मजदूर ही मौके पर काम कर रहे थे। प्रबंधन के अनुसार छज्जे का निर्माण करते समय अचानक शटरिंग गिर गई और हादसा हो गया। हादसा किस तकनीकी कारण से हुआ इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है और पोस्टमॉर्टम तथा अन्य कानूनी प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में मजदूरों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • निर्माणाधीन बिल्डिंग में हादसा या लापरवाही? टाइल्स कारीगर की मौत के बाद उठे कई सवाल

    निर्माणाधीन बिल्डिंग में हादसा या लापरवाही? टाइल्स कारीगर की मौत के बाद उठे कई सवाल


    मध्य प्रदेश । इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में 32 वर्षीय टाइल्स कारीगर की मौत हो गई। निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम के दौरान तीसरी मंजिल से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल हुए युवक को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों ने मृतक के साथ काम करने वाले साथियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार गोलू बड़ोले पुत्र राजाराम बड़ोले, जो देवास नाका स्थित वृंदावन कॉलोनी में रहकर टाइल्स लगाने का काम करता था, रविवार रात लसूड़िया क्षेत्र की एक निर्माणाधीन इमारत में कार्य कर रहा था। बताया जा रहा है कि काम के दौरान वह तीसरी मंजिल पर मौजूद था। इसी दौरान सीढ़ियों के बीच बनी खाली जगह से उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गया। गिरने से उसे गंभीर चोटें आईं।

    घटना के बाद उसके साथ काम कर रहे मजदूरों ने परिजनों को सूचना दी। देर रात उसका भाई अजय उसे लेकर एमवाय अस्पताल पहुंचा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    मृतक के भाई अजय ने घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हादसा रात करीब 10 बजे हुआ था, लेकिन परिवार को इसकी जानकारी लगभग दो घंटे बाद दी गई। अगर समय पर सूचना मिल जाती और घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। परिजनों का आरोप है कि साथियों ने हादसे के बाद तत्परता नहीं दिखाई और इसी लापरवाही के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।

    परिवार के अनुसार गोलू मूल रूप से खरगोन जिले के एक गांव का निवासी था। वह रविवार को ही गांव से इंदौर लौटा था और वापस आने के बाद सीधे अपने काम पर चला गया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। परिवार में उसके चार भाई हैं और उसकी अचानक मौत से पूरे परिवार में शोक का माहौल है।

    घटना की जानकारी मिलते ही लसूड़िया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और घायल को समय पर चिकित्सा सहायता क्यों नहीं मिली। पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मर्ग कायम कर लिया गया है और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।

    इस घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।