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  • राजनांदगांव-कलमना सेक्शन पर 14 ट्रेनें रद्द, निर्माण कार्य के चलते यात्रियों को अलर्ट

    राजनांदगांव-कलमना सेक्शन पर 14 ट्रेनें रद्द, निर्माण कार्य के चलते यात्रियों को अलर्ट


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने राजनांदगांव-कलमना रेल सेक्शन में तीसरी लाइन जोड़ने के निर्माण कार्य के कारण 24 जनवरी से 31 जनवरी तक कुल 14 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। यह कदम भविष्य में ट्रेन की रफ्तार बढ़ाने, भीड़ कम करने और ट्रैफिक सिस्टम बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।

    रेलवे ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक करें। कुछ डेमू और मेमू ट्रेनें अपने तय स्टेशन तक नहीं पहुंचेंगी और रास्ते में ही समाप्त हो जाएंगी। यह सलाह आखिरी मिनट की परेशानी और समय की बर्बादी से बचाने के लिए दी गई है।

    कौन सी ट्रेनें प्रभावित हैं:
    58817 तुमसर रोड–पैसेंजर
    58816 तिरोडी–तुमसर रोड पैसेंजर
    58815 इतवारी–तिरोडी पैसेंजर
    58818 तिरोडी–तुमसर रोड पैसेंजर
    68715 बालाघाट–इतवारी–तिरोडी मेमू
    68714 इतवारी–बालाघाट मेमू
    68741 दुर्ग–गोंदिया मेमू
    68742 गोंदिया–दुर्ग मेमू
    68743 गोंदिया–इतवारी मेमू
    68744 इतवारी–गोंदिया मेमू
    68711 डोंगरगढ़–गोंदिया मेमू
    68712 गोंदिया–डोंगरगढ़ मेमू
    68713 गोंदिया–इतवारी मेमू
    68716 इतवारी–गोंदिया मेमू

    रेलवे ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है ताकि भविष्य में ट्रैफिक सुचारू रहे और यात्रा का समय कम हो। विशेष रूप से छोटे कस्बों के यात्रियों, दफ्तर जाने वाले लोगों और छात्रों को अपने सफर की योजना पहले से बनाकर चलने की सलाह दी गई है।

  • इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद

    इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद


    इंदौर।
    इंदौर और धार के बीच नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना के तहत 17 साल के लंबे इंतजार के बाद 2026 में पहली बार ट्रेन चलने की संभावना जताई जा रही है। इस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2008 में किया गया था और इसके बाद से ही इस पर काम जारी था। अब रेलवे विभाग का दावा है कि मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो सकती है। हालांकिनिर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखते हुए इसे लेकर कुछ संशय भी बना हुआ हैऔर हो सकता है कि इस योजना में छह महीने की और देरी हो।
    इस परियोजना के तहत कुल 204.76 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बनाई जा रही हैजो इंदौर से दाहोद तक फैली हुई है। इस परियोजना के हिस्से के तौर पर इंदौर से टीही 21 किमी और दाहोद से कटवारा 11.30 किमी खंड का निर्माण पहले ही शुरू हो चुका है। इस रूट पर ट्रेन सेवा की शुरुआत से न केवल इंदौर और धार के बीच यात्रा का समय घटेगाबल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्र धार में पहली बार रेलवे सेवा का लाभ भी मिलेगा।

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 तक इस परियोजना के तहत टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। टनल का निर्माण इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हिस्सा हैजिसके कारण पहले ही निर्माण कार्य में देरी हुई है। रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों ने इस काम को प्राथमिकता दी है और इसके लिए एक टाइमलाइन तय कर काम किया जा रहा हैजिसमें हर दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूदपरियोजना की गति को देखकर ऐसा लगता है कि ट्रेन सेवा में और कुछ समय की देरी हो सकती है।

    इस रेलवे परियोजना का महत्व सिर्फ इस क्षेत्र के लिए नहींबल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए बहुत बड़ा है। इंदौर और धार के बीच यात्रा के समय में बड़ी कमी आएगीजिससे व्यापारपरिवहन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ हीआदिवासी क्षेत्रों में रेलवे सेवा का विस्तार स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसरों की संभावनाएं खोलेगा। इस रेलवे परियोजना से इंदौर के साथ ही धारझाबुआऔर आसपास के क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज हो सकती है।

    हालांकिपरियोजना की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि रेलवे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और किसी भी प्रकार की और देरी न हो। टनल निर्माण के अलावाट्रैकस्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समय पर व्यवस्था की जानी जरूरी हैताकि ट्रेन सेवा बिना किसी परेशानी के शुरू हो सके। इस परियोजना में देरी के कारण पहले ही लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा हैलेकिन अगर यह समय पर पूरी होती है तो यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।

    कुल मिलाकरइंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा का आरंभ इस क्षेत्र की यात्रा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बादअगर यह परियोजना समय पर पूरी होती हैतो यह न केवल मध्य प्रदेश के लिएबल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकती हैजहां लंबी देरी के बावजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।