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  • घर खरीदारों के लिए बढ़ सकती है इंतजार की घड़ी, वैश्विक संकट के असर से लाखों मकानों की डिलीवरी पर मंडराया खतरा

    घर खरीदारों के लिए बढ़ सकती है इंतजार की घड़ी, वैश्विक संकट के असर से लाखों मकानों की डिलीवरी पर मंडराया खतरा


    नई दिल्ली ।
    देश का रियल एस्टेट क्षेत्र वर्ष 2026 में एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में लॉन्च की गई बड़ी आवासीय परियोजनाएं अब अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच चुकी हैं और लाखों घर खरीदार अपने सपनों के घर का कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों ने इस उम्मीद के सामने नई अनिश्चितताएं खड़ी कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब केवल ऊर्जा और व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। यदि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है, जिससे कई परियोजनाओं की डिलीवरी तय समय पर नहीं हो पाएगी।

    देश के सात प्रमुख महानगरों में इस वर्ष बड़ी संख्या में आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। इनमें दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े आवासीय बाजार शामिल हैं। इन शहरों में हजारों परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं और डेवलपर्स खरीदारों को समय पर घर सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

    विशेष रूप से मुंबई महानगर क्षेत्र और पुणे को लेकर अधिक चिंता जताई जा रही है। इन दोनों शहरों में सबसे अधिक आवासीय इकाइयों की डिलीवरी प्रस्तावित है। ऐसे में यदि निर्माण सामग्री की उपलब्धता प्रभावित होती है या लागत में तेज वृद्धि होती है, तो इन बाजारों पर सबसे पहले असर देखने को मिल सकता है। बड़ी परियोजनाओं की संख्या अधिक होने के कारण यहां किसी भी प्रकार की देरी का प्रभाव हजारों परिवारों तक पहुंच सकता है।

    दक्षिण भारत के प्रमुख शहर भी इससे अछूते नहीं हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में भी बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। यदि सप्लाई चेन में व्यवधान बना रहता है, तो इन शहरों में भी परियोजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर उन खरीदारों पर होगा जो लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं।

    रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण क्षेत्र स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, मशीनरी और परिवहन सेवाओं पर काफी हद तक निर्भर करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतों में वृद्धि होने पर इन सभी क्षेत्रों की लागत बढ़ जाती है। जब निर्माण लागत बढ़ती है तो परियोजनाओं के बजट और समयसीमा दोनों प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि डेवलपर्स मौजूदा परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

    हालांकि उद्योग जगत का मानना है कि वर्तमान स्थिति महामारी काल जैसी नहीं है। आज डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है और परियोजना प्रबंधन में तकनीक का उपयोग भी बढ़ा है। इसके बावजूद वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लंबे समय तक बने रहने वाले संकट से निर्माण क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू नियामकीय व्यवस्था भी है। रेरा जैसे नियमों के कारण डेवलपर्स पर तय समय में परियोजनाएं पूरी करने का दबाव रहता है। यदि लागत बढ़ती है या सप्लाई बाधित होती है, तो समयसीमा का पालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में रियल एस्टेट क्षेत्र की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों और आपूर्ति व्यवस्था की स्थिरता पर निर्भर करेगी।

  • इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जायेगा। जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उनके निवास पर भेंट करने आए इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न ग्रामों के किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर और उज्जैन के किसान प्रतिनिधियों ने इंदौर उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर लेन मार्ग का निर्माण कार्य किसानों के हित में करने के निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रूपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जायेगा। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।