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  • उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन में चल रहे विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने नीलगंगा रोड क्षेत्र में पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को देखते हुए शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर आवागमन को सुगम बनाना और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान इन कार्यों की प्रगति और उनकी गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को देखा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन शहर के मध्य स्थित बाबा महाकाल के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण शहर के विकास और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस मार्ग के चौड़ीकरण से स्थानीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ आने वाले समय में श्रद्धालुओं के आवागमन को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में प्रमुख मार्गों का विकास और उनका बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। चौड़े और व्यवस्थित मार्ग श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाने में मदद करेंगे और उज्जैन आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने में भी भूमिका निभाएंगे।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों से संबंधित अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि काम केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए लगातार निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण और अन्य अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाने की दिशा में कई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इनका उद्देश्य आयोजन के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना है।

    मुख्यमंत्री ने मार्ग चौड़ीकरण के लिए प्रशासन के साथ स्वेच्छा से सहयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने सहयोग करने वाले लोगों का हृदय से अभिनंदन करते हुए कहा कि विकास कार्यों में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। शहर के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में नागरिक सहयोग की भूमिका को उन्होंने सराहा।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित नजर रखने और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार काम पूरा कराने पर जोर दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण कार्यों के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

    सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन में अधोसंरचना विकास पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सड़क, मार्ग चौड़ीकरण और अन्य सुविधाओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण का उद्देश्य भी चल रहे कार्यों की स्थिति जानना और उन्हें तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ाना रहा।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों के सामने निर्माण कार्यों को समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है। उज्जैन में जारी विकास कार्यों से आने वाले समय में शहर की यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • इंसानी कचरे से बने बायोचार से मजबूत होगा कंक्रीट, रिसर्च में इमारतों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ने का दावा

    इंसानी कचरे से बने बायोचार से मजबूत होगा कंक्रीट, रिसर्च में इमारतों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ने का दावा

    नई दिल्ली । वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो आने वाले समय में निर्माण उद्योग (Construction Industry) का चेहरा बदल सकती है। ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित एक हालिया स्टडी के अनुसार, सेप्टिक टैंकों और सैनिटेशन सिस्टम से मिलने वाले इंसानी कचरे को प्रोसेस करके ‘बायोचार’ बनाया गया है। इस बायोचार का इस्तेमाल कंक्रीट में सीमेंट की जगह आंशिक रूप से (Partial Replacement) किया जा सकता है, जिससे इमारतें न केवल अधिक मजबूत बनेंगी, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा पहुंचेगा।

    वैज्ञानिकों ने पाया है कि ट्रीट किए गए मल के कचरे से बना मटीरियल कंक्रीट में सीमेंट की जगह कुछ हद तक इस्तेमाल किया जा सकता है और सही मात्रा में मिलाने पर यह कंक्रीट की मज़बूती को काफ़ी बढ़ा सकता है। ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में छपी इस रिसर्च में मल के कचरे (सेप्टिक टैंक और सैनिटेशन सिस्टम से इकट्ठा किया गया ट्रीट किया हुआ इंसानी कचरा) से बने बायोचार का कंक्रीट में सीमेंट के आंशिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावनाओं को परखा गया। खास ट्रीटमेंट प्लांट मल के कचरे को इकट्ठा करते हैं और उसे प्रोसेस करते हैं।

    रिसर्चर ने इस मटीरियल को बायोचार (कार्बन से भरपूर पदार्थ) में बदला और इसे कंक्रीट में मिलाकर देखा कि क्या इससे कंस्ट्रक्शन मटीरियल ज़्यादा मज़बूत और टिकाऊ बन सकता है। नतीजे चौंकाने वाले थे। जिस कंक्रीट में सीमेंट की जगह 10% बायोचार (मल के कचरे से बना) मिलाया गया था, उसमें 91 दिनों की क्योरिंग (पकने की प्रक्रिया) के बाद कंप्रेसिव स्ट्रेंथ में 21% और फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ में 42% की बढ़ोतरी देखी गई।

    कंप्रेसिव स्ट्रेंथ यह बताती है कि कंक्रीट कितना दबाव झेल सकता है, जबकि फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ यह बताती है कि वह मुड़ने और टूटने (क्रैकिंग) का कितना अच्छा मुकाबला कर सकता है। रिसर्चर ने बायोचार की अलग-अलग मात्राओं का टेस्ट किया और कई गुणों की जांच की, जिनमें मज़बूती, पानी सोखने की क्षमता, पोरॉसिटी (छिद्रों की मात्रा) और सूखने पर सिकुड़न (drying shrinkage) शामिल हैं।

    नतीजों से पता चला कि सीमेंट की जगह 5% से 10% तक बायोचार का इस्तेमाल करने से कंक्रीट की परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है। 15% बायोचार मिलाने पर, 28 दिनों के बाद पानी सोखने की क्षमता और पोरॉसिटी पारंपरिक कंक्रीट के बराबर ही पाई गई। यह मटीरियल समय के साथ स्थिर भी रहा। 120 दिनों के बाद, 10% बायोचार वाले मोर्टार में सूखने पर सिकुड़न साधारण पोर्टलैंड सीमेंट मोर्टार जैसी ही देखी गई, जिससे पता चलता है कि यह मटीरियल लंबे समय तक अपना आकार और स्थिरता बनाए रख सकता है।

    स्टडी में यह भी पाया गया कि जैसे-जैसे बायोचार की मात्रा बढ़ाई गई, कंक्रीट के नमूनों में भारी धातुओं की मात्रा कम होती गई, जिससे पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों के रिसने (leaching) की संभावना कम हो सकती है।

    इस रिसर्च से पर्यावरण को दोहरा फ़ायदा हो सकता है: ट्रीट किए गए इंसानी कचरे का उपयोगी इस्तेमाल और कंक्रीट में सीमेंट की ज़रूरत में कमी। सीमेंट बनाने में बहुत ज़्यादा ऊर्जा लगती है और यह दुनिया भर में कार्बन उत्सर्जन का एक बड़ा कारण है। हालांकि, निर्माण कार्य में मल-कीचड़ से बने बायोचार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले और रिसर्च और असल दुनिया में टेस्टिंग की ज़रूरत होगी। लेकिन यह स्टडी बताती है कि भविष्य की इमारतें कुछ हद तक उस चीज़ से बन सकती हैं जिसे हम आज फ्लश करके बहा देते हैं।

  • घर खरीदारों के लिए बढ़ सकती है इंतजार की घड़ी, वैश्विक संकट के असर से लाखों मकानों की डिलीवरी पर मंडराया खतरा

    घर खरीदारों के लिए बढ़ सकती है इंतजार की घड़ी, वैश्विक संकट के असर से लाखों मकानों की डिलीवरी पर मंडराया खतरा


    नई दिल्ली ।
    देश का रियल एस्टेट क्षेत्र वर्ष 2026 में एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में लॉन्च की गई बड़ी आवासीय परियोजनाएं अब अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच चुकी हैं और लाखों घर खरीदार अपने सपनों के घर का कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों ने इस उम्मीद के सामने नई अनिश्चितताएं खड़ी कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब केवल ऊर्जा और व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। यदि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है, जिससे कई परियोजनाओं की डिलीवरी तय समय पर नहीं हो पाएगी।

    देश के सात प्रमुख महानगरों में इस वर्ष बड़ी संख्या में आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। इनमें दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े आवासीय बाजार शामिल हैं। इन शहरों में हजारों परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं और डेवलपर्स खरीदारों को समय पर घर सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

    विशेष रूप से मुंबई महानगर क्षेत्र और पुणे को लेकर अधिक चिंता जताई जा रही है। इन दोनों शहरों में सबसे अधिक आवासीय इकाइयों की डिलीवरी प्रस्तावित है। ऐसे में यदि निर्माण सामग्री की उपलब्धता प्रभावित होती है या लागत में तेज वृद्धि होती है, तो इन बाजारों पर सबसे पहले असर देखने को मिल सकता है। बड़ी परियोजनाओं की संख्या अधिक होने के कारण यहां किसी भी प्रकार की देरी का प्रभाव हजारों परिवारों तक पहुंच सकता है।

    दक्षिण भारत के प्रमुख शहर भी इससे अछूते नहीं हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में भी बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। यदि सप्लाई चेन में व्यवधान बना रहता है, तो इन शहरों में भी परियोजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर उन खरीदारों पर होगा जो लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं।

    रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण क्षेत्र स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, मशीनरी और परिवहन सेवाओं पर काफी हद तक निर्भर करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतों में वृद्धि होने पर इन सभी क्षेत्रों की लागत बढ़ जाती है। जब निर्माण लागत बढ़ती है तो परियोजनाओं के बजट और समयसीमा दोनों प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि डेवलपर्स मौजूदा परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

    हालांकि उद्योग जगत का मानना है कि वर्तमान स्थिति महामारी काल जैसी नहीं है। आज डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है और परियोजना प्रबंधन में तकनीक का उपयोग भी बढ़ा है। इसके बावजूद वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लंबे समय तक बने रहने वाले संकट से निर्माण क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू नियामकीय व्यवस्था भी है। रेरा जैसे नियमों के कारण डेवलपर्स पर तय समय में परियोजनाएं पूरी करने का दबाव रहता है। यदि लागत बढ़ती है या सप्लाई बाधित होती है, तो समयसीमा का पालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में रियल एस्टेट क्षेत्र की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों और आपूर्ति व्यवस्था की स्थिरता पर निर्भर करेगी।

  • इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जायेगा। जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उनके निवास पर भेंट करने आए इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न ग्रामों के किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर और उज्जैन के किसान प्रतिनिधियों ने इंदौर उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर लेन मार्ग का निर्माण कार्य किसानों के हित में करने के निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रूपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जायेगा। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।