Tag: Consumer Rights

  • ऑनलाइन शॉपिंग में बड़ी लापरवाही iPhone की जगह मिला Beard Oil उपभोक्ता अदालत ने Flipkart को सुनाया बड़ा फैसला

    ऑनलाइन शॉपिंग में बड़ी लापरवाही iPhone की जगह मिला Beard Oil उपभोक्ता अदालत ने Flipkart को सुनाया बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । ऑनलाइन शॉपिंग आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। घर बैठे महंगे स्मार्टफोन से लेकर घरेलू सामान तक आसानी से ऑर्डर किए जा सकते हैं। हालांकि कई बार ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जो ग्राहकों के भरोसे को झटका देती हैं। मुंबई में सामने आया एक ऐसा ही मामला अब चर्चा का विषय बन गया है जहां एक ग्राहक ने लाखों रुपये का प्रीमियम स्मार्टफोन मंगाया लेकिन पार्सल खोलने पर उसमें दाढ़ी बढ़ाने वाला तेल निकला। मामला उपभोक्ता अदालत तक पहुंचा और अदालत ने ग्राहक के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

    जानकारी के अनुसार मुंबई के एक ग्राहक ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Flipkart से लगभग एक लाख ग्यारह हजार रुपये की कीमत वाला iPhone 14 Pro खरीदा था। ग्राहक को उम्मीद थी कि उसे नया स्मार्टफोन मिलेगा लेकिन जब उसने डिलीवरी के बाद पैकेट खोला तो उसके अंदर iPhone की जगह Beard Growth Oil मौजूद था। महंगे स्मार्टफोन के स्थान पर पूरी तरह अलग उत्पाद मिलने से ग्राहक हैरान रह गया।

    घटना के बाद ग्राहक ने सबसे पहले ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता से शिकायत की लेकिन उसे संतोषजनक समाधान नहीं मिला। कई बार संपर्क करने के बावजूद समस्या का निपटारा नहीं होने पर ग्राहक ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्याय की मांग की।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ग्राहक ने निर्धारित राशि का पूरा भुगतान किया था और सही उत्पाद की डिलीवरी सुनिश्चित करना विक्रेता और ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म दोनों की जिम्मेदारी थी। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस केवल बिक्री का माध्यम होने का दावा कर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता क्योंकि ग्राहक का लेनदेन उसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरा हुआ है।

    उपभोक्ता अदालत ने अपने फैसले में Flipkart को ग्राहक की जमा राशि वापस करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने मुआवजे और मुकदमे के खर्च के रूप में अतिरिक्त सत्तर हजार रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया। अदालत ने यह भी माना कि ग्राहक की शिकायतों का उचित समाधान न करना सेवा में स्पष्ट कमी का मामला है।

    अदालत ने विक्रेता को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ग्राहक की बार बार की गई शिकायतों के बावजूद सही उत्पाद उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही प्रभावी समाधान दिया गया। इसलिए ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता दोनों को संयुक्त रूप से जवाबदेह माना गया।

    यह फैसला ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। यदि किसी ग्राहक को ऑर्डर से अलग सामान मिलता है या शिकायत का समाधान नहीं किया जाता तो वह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना ई कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारी है और लापरवाही की स्थिति में उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

    ऑनलाइन शॉपिंग करते समय ग्राहकों को भी कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। महंगे उत्पादों की डिलीवरी लेते समय पैकेज की स्थिति जांचें यदि संभव हो तो अनबॉक्सिंग का वीडियो रिकॉर्ड करें और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराएं। इससे विवाद की स्थिति में जरूरी साक्ष्य उपलब्ध रहते हैं।

    यह मामला याद दिलाता है कि डिजिटल खरीदारी जितनी सुविधाजनक है उतनी ही सतर्कता भी मांगती है। वहीं उपभोक्ता अदालत का यह फैसला ई कॉमर्स कंपनियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि ग्राहक सेवा और सही डिलीवरी में लापरवाही की कीमत उन्हें चुकानी पड़ सकती है।

  • बेंगलुरु कैफे में ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ का सनसनीखेज बिल, लेमनेड पर भी 5% अतिरिक्त शुल्क, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    बेंगलुरु कैफे में ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ का सनसनीखेज बिल, लेमनेड पर भी 5% अतिरिक्त शुल्क, सोशल मीडिया पर मचा बवाल



    नई दिल्ली। बेंगलुरु के थियो कैफे का एक बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने लोगों का ध्यान रेस्टोरेंट बिलिंग प्रैक्टिस और बढ़ती लागत की तरफ खींचा है। इस बिल में दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज जोड़ा गया, जो ग्राहकों के लिए चौंकाने वाला रहा। ग्राहक ने दो मिंट लेमनेड ऑर्डर किए, जिनकी कीमत 179 रुपये प्रत्येक थी। कुल सबटोटल 358 रुपये बनी, जिसमें पहले 5% डिस्काउंट (17.90 रुपये) लागू किया गया। इसके बाद स्टैंडर्ड GST (CGST 2.5% + SGST 2.5%) जोड़ा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिल में अतिरिक्त 5% गैस क्राइसिस चार्ज (17.01 रुपये) भी शामिल किया गया, जिससे अंतिम बिल 374 रुपये तक पहुंच गया।

    सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
    सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बिल पर जमकर मज़ाक उड़ाया। कई ने टिप्पणी की कि “लेमनेड बनाने में कौन सी गैस लगी?” और “शायद लेमनेड को फिज़्जी बनाया गया होगा।” कुछ ने इसे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक प्रथा बताते हुए चेताया कि यदि ऐसे चार्ज अनिवार्य हैं, तो 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। अन्य यूजर्स ने कहा कि यदि यह वैकल्पिक होता, तो ग्राहक इसे समझ सकते थे, लेकिन अनिवार्य चार्ज अधिकारहीन और अनुचित माना जा रहा है।

    पृष्ठभूमि: LPG संकट और बढ़ती लागत
    देश के कई हिस्सों में LPG सिलेंडर की कमी ने रेस्टोरेंट्स और कैफे की लागत बढ़ा दी है। बेंगलुरु में भी कई स्थानों पर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे होटल और कैफे ग्राहकों से अलग से गैस चार्ज वसूल रहे हैं। हालांकि लेमनेड जैसी ड्रिंक आमतौर पर गैस पर नहीं बनाई जाती, लेकिन बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कुछ कैफे ने गैस क्राइसिस चार्ज लागू किया।

    मिश्रित प्रतिक्रिया और बहस
    कुछ लोगों ने कैफे का समर्थन किया, कहा कि गैस की कमी में यह समझदारी भरा कदम हो सकता है। वहीं, अधिकांश यूजर्स ने इसे ग्राहक हित और पारदर्शिता के खिलाफ बताया। सोशल मीडिया पर यह घटना कंज्यूमर राइट्स, बिलिंग पारदर्शिता, महंगाई और व्यवसाय की चुनौतियों पर बहस छेड़ने का कारण बनी है।

    बेंगलुरु के थियो कैफे ने दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज लगाया।

    बिल की कुल राशि 374 रुपये तक पहुंची, जिसमें डिस्काउंट और GST शामिल हैं।

    सोशल मीडिया पर इसे अनुचित व्यापारिक प्रथा और मज़ाक बताया गया।

    बढ़ती LPG कमी और लागत ने रेस्टोरेंट्स को नए चार्ज लगाने पर मजबूर किया।

    घटना ने कंज्यूमर राइट्स और बिलिंग पारदर्शिता पर बहस को जन्म दिया।

    इस तरह, बेंगलुरु की यह घटना दिखाती है कि महंगाई, गैस संकट और सप्लाई चेन की चुनौतियाँ आम ग्राहकों तक कैसे सीधे असर डाल रही हैं, और व्यवसायों को अपने बिलिंग मॉडल में बदलाव करने पर मजबूर कर रही हैं।