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  • रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता

    रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता


    नई दिल्ली।
    सोने (Gold) की रिकॉर्डतोड़ कीमतों (Record-Breaking Prices) ने भारत के करीब 7 लाख करोड़ रुपये के आभूषण बाजार के बुनियादी नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। पहली नजर में यह बड़ा विरोधाभास लगता है, लेकिन आम उपभोक्ता कम वजन का सोना (Low Weight Gold) खरीद रहा है, जबकि कारोबारियों की तिजोरियां रिकॉर्ड कमाई से भर रही हैं। यानी अब बाजार की वृद्धि ज्यादा ग्राम सोना बेचने से नहीं, बल्कि प्रति ग्राम अधिक वैल्यू निकालने से तय हो रही है।

    वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 17.1 फीसदी गिर गई, लेकिन खर्च की गई कुल रकम 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। इस बदलाव को भांपते हुए आभूषण कारोबारियों ने हल्के वजन, कम कैरेट, स्टड डायमंड्स और पुराने सोने की रीसाइक्लिंग को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है।


    ब्रांडेड जूलरी पर बढ़ रहा भरोसा :

    जीएसटी, अनिवार्य हॉलमार्किंग और पैन कार्ड नियमों ने असंगठित सुनारों के पारंपरिक बाजार को झटका दिया है। केयरएज के निदेशक अखिल गोयल के मुताबिक, पहले ग्राहक अपने खानदानी सुनार के व्यक्तिगत संबंध पर भरोसा करते थे। लेकिन अब संगठित ब्रांड्स ने इसकी जगह मानकीकृत शुद्धता, पारदर्शी बिलिंग, आसान बायबैक व डिजिटल डिस्कवरी का ऐसा मजबूत ढांचा खड़ा किया है, जो टियर-2 व टियर-3 शहरों में भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है।


    वजन घटा फिर भी बिल बढ़ा

    आंकड़े बताते हैं कि सोने की रिकॉर्ड कीमतों के कारण खरीदारों का व्यवहार और बाजार का ढांचा तेजी से बदल रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 15.4 फीसदी गिरकर 75.1 टन रह गई, लेकिन इसी अवधि में खर्च की गई कुल रकम 34.4 फीसदी के उछाल के साथ 1.13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वहीं, पूरे 2026 की पहली छमाही की बात करें तो सोने की मांग वजन में 17.1 फीसदी घटी, जबकि कुल खरीदारी की वैल्यू 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो यह साबित करता है कि उपभोक्ता अब बजट तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन वजन कम खरीद रहे हैं।

    इस बदलाव का सीधा फायदा संगठित और बड़े ब्रांड्स को मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाइटन की जूलरी आय में 43 फीसदी की वृद्धि हुई, जिसमें तनिष्क और कैरेटलेन में खरीदारों की संख्या दोहरे अंकों में बढ़ी। इसी तरह कल्याण ज्वैलर्स का समेकित राजस्व 46 फीसदी बढ़कर 10,589 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसमें कुल बिक्री का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा पुराने सोने की रीसाइक्लिंग से आया।

    खुदरा बाजार में भी बड़ा बदलाव आया है। सीबीआरई के आंकड़ों के अनुसार, कुल संगठित रिटेल लीजिंग में ज्वैलरी सेक्टर की हिस्सेदारी 2019 के मात्र 2 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 8 फीसदी हो गई है। 8,000 वर्ग फुट से बड़े एक्सपीरियंस सेंटर्स और मेगा शोरूम का दबदबा 50 फीसदी तक पहुंच चुका है।


    पुराना सोना बना ग्रोथ इंजन

    महंगे अंतरराष्ट्रीय आभूषणों से बचने के लिए कंपनियों ने भारतीय घरों की तिजोरियों में पड़े सोने को रिसाइकिल करने का नया मॉडल खड़ा किया है। कल्याण ज्वैलर्स के कार्यकारी निदेशक रमेश कल्याणरामन के अनुसार, मई में शुरू हुए शाइन विद इंडिया अभियान के बाद जून में कंपनी के कुल राजस्व में पुराने सोने के एक्सचेंज की हिस्सेदारी 55 से 60 फीसदी तक पहुंच गई है। कंपनियों को अब महंगा विदेशी सोना आयात करने के बजाय घरेलू ग्राहकों से ही कच्चा माल मिल रहा है, जिससे उनकी पूंजी की लागत घटी है और मुनाफा मार्जिन सुरक्षित हुआ है।


    आभूषण अब निवेश नहीं

    केयरएज रेटिंग्स और सीबीआरई की संयुक्त रिपोर्ट बताती है कि युवा पीढ़ी के बीच सोने की पारंपरिक 22 कैरेट वाली भारी जूलरी की जगह डेली वियर और स्टाइलिश गहनों ने ले ली है। सेनको गोल्ड और तनिष्क जैसे ब्रांड्स ने 9-कैरेट और 14-कैरेट में स्टडड डायमंड जूलरी पेश की है। जो ग्राहक 22 कैरेट के भारी सोने का सेट नहीं खरीद पा रहे, वे उसी बजट में हल्के 14 कैरेट सोने के साथ हीरे जड़े आकर्षक डिजाइन खरीद रहे हैं। सेनको ने लाइफस्टाइल ब्रांड सेनेस और पुरुषों के लिए 20,000 से एक लाख रुपये के टाइटेनियम गहनों का दायरा बढ़ाया है। युवा खरीदार अब गहनों को सिर्फ लॉकर में बंद रखने वाले निवेश के बजाय रोज पहनने वाले फैशन एक्सेसरी के रूप में देख रहे हैं।

  • होली से पहले LPG उपभोक्ताओं को लग सकता है झटका… 1 मार्च को अपडेट होंगे रेट

    होली से पहले LPG उपभोक्ताओं को लग सकता है झटका… 1 मार्च को अपडेट होंगे रेट


    नई दिल्ली।
    होली से पहले 1 मार्च को LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के रेट ( Price) अपडेट होंगे। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (Oil Marketing Companies) इस दिन नए रेट जारी करेंगी। पिछले 5 साल का ट्रेंड बताता है कि मार्च के महीने में घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट बढ़े ही हैं। कॉमरशियल सिलेंडर तो हर बार महंगा हुआ है, जबकि इस दौरान घरेलू एलपीजी सिलेंडर (Domestic LPG cylinder) के रेट मार्च में जब भी बदले, उपभोक्ताओं को झटका ही लगा है।

    अभी दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 853 रुपये, कोलकाता में 879 रुपये, मुंबई में 852.50 रुपये और चेन्नई में 868.50 रुपये में मिल रहा है। आंकड़े इंडियन ऑयल की वेबसाइट से लिए गए हैं। इसके अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 1740.50 रुपये, कोलकाता में 1844.50 रुपये, मुंबई में 1692 और चेन्नई में 1899.50 रुपये में बिक रहा है।


    घरेलू सिलेंडर के रेट का मार्च ट्रेंड

    पिछले 5 साल में तीन बार ही मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले। दो बार 1 मार्च को और एक बार 22 मार्च को। एक मार्च 2023 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर 50 रुपये महंगा हो गया। 6 जुलाई 2022 के बाद रेट में बदलाव हुआ था और दिल्ली में यह 50 रुपये बढ़कर 1103 रुपये पर पहुंच गया। 14 किलो वाले इस सिलेंडर के दाम कोलकाता में 1129, मुंबई में 1102.50 और चेन्नई में 1118.50 रुपये पर पहुंच गए।

    जबकि, साल 2022 में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट में बदलाव 22 मार्च को हुआ। इस दिन भी 50 रुपये का इजाफा हुआ। रेट में बदलाव 6 अक्टूबर 2021 के बाद हुआ था। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 949.50 रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह कोलकाता में 976, मुंबई में 949.50 और चेन्नई में 965.50 रुपये का हो गया। साल 2021 का मार्च भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका ही दिया। 1 मार्च 2021 को घरेलू एलपीजी सिलेंड दिल्ली में 25 रुपये महंगा होकर 819, कोलकाता में 845.50, मुंबई में 819 और चेन्नई में 835 रुपये का हो गया।


    पिछले 5 साल से मार्च महीने में क्या रहा कॉमर्शियल सिलेंडर का ट्रेंड
    मार्च 2025 में बढ़े थे सिलेंडर के दाम

    पिछले साल यानी 2025 में दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट में मामूली बढ़ोतरी हुई थी। एक फरवरी को 19 किलो वाला सिलेंडर यहां 1 फरवरी को 1797 रुपये में बिक रहा था, जो 1 मार्च 2025 को 6 रुपये बढ़कर 1803 रुपये का हो गया। कोलकाता में भी इतना ही महंगा होकर 1913, मुंबई में 1756 और चेन्नई मे 1965 रुपये का हो गया था।


    मार्च 2024 में दाम मामूली बढ़े

    साल 2024 में कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट में 26 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई। 1 मार्च 2024 को यह दिल्ली में 1795 और मुंबई में भी 26 रुपये बढ़कर 1749 रुपये का हो गया। जबकि, कोलकाता में 24 रुपये महंगा होकर 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर 1911 और चेन्नई में 24 रुपये ही बढ़कर 1961 रुपये का हो गया।


    2023 के मार्च में 108 रुपये तक महंगा हुआ सिलेंडर

    साल 2023 में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा। दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 105 रुपये महंगा होकर 2120, कोलकाता में 108 रुपये बढ़कर 2222 रुपये, मुंबई में 106 रुपये उछलकर 2072 रुपये और चेन्नई में 106 रुपये महंगा होकर 2268 रुपये पर पहुंच गए।


    2022 के मार्च में 100 रुपये से अधिक का झटका

    साल 2022 में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के रेट दो बार बदले। 1 मार्च को और 22 मार्च को। एक फरवरी 2022 के रेट की तुलना में 1 मार्च को कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम दिल्ली में 105 रुपये उछलकर 2012 रुपये, कोलकाता में 108 रुपये महंगा होकर 2095 रुपये पर पहुंच गए। मुंबई और चेन्नई में भी नीला सिलेंडर 106-106 रुपये महंगा हो गया। मुंबई में यह 1963 और चेन्नई में 2146 रुपये पर पहुंच गया।


    2021 के मार्च में 95 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर

    मार्च महीने में झटका साल 2021 में भी लगा। 1 मार्च 2021 को दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 95 रुपये बढ़कर 1614 रुपये पर पहुंच गए। कोलकाता में 98 रुपये बढ़े और 1681.50 रुपये पर पहुंच गए। मुंबई और चेन्नई में 96-96 रुपये बढ़े और क्रमश: 1564 और 1731 रुपये पर पहुंच गए।