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  • अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    नई दिल्ली । अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने मुंद्रा में समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड यानी खाली कंटेनर यार्ड शुरू करने की घोषणा की है। इस सुविधा के साथ एकीकृत वेयरहाउसिंग व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। कंपनी का उद्देश्य कंटेनर प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने के साथ आयात और निर्यात से जुड़ी लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

    प्रस्तावित यार्ड में खाली कंटेनरों के पूरे जीवनचक्र से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें कंटेनरों का भंडारण, रखरखाव, निरीक्षण और निर्यातकों तथा कंटेनर फ्रेट स्टेशनों तक उनकी आवाजाही शामिल होगी। कंपनी के अनुसार, एक ही व्यवस्था के तहत इन सेवाओं के उपलब्ध होने से कंटेनरों के संचालन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

    यह पहल कंपनी की एंबिशन 2031 रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत अदाणी पोर्ट्स अपने कंटेनर संचालन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी अगले पांच वर्षों में अपने नेटवर्क में 60 लाख टीईयू से अधिक अतिरिक्त कंटेनर हैंडलिंग क्षमता जोड़ने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इसमें मुंद्रा पोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

    कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विनी गुप्ता के अनुसार, मुंद्रा में स्थापित किया जा रहा समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड कंटेनर इकोसिस्टम की दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा। इसके संचालन में कंपनी के साथ साझेदार, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और शिपिंग लाइनें भी भूमिका निभा सकती हैं।

    इस सुविधा से कंटेनरों के टर्नअराउंड टाइम को कम करने और उनकी अनावश्यक आवाजाही घटाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, कंटेनरों के बेहतर प्रबंधन से लॉजिस्टिक्स लागत को अनुकूलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि ऐसी सुविधाएं व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    मुंद्रा पोर्ट पहले से ही देश के कंटेनर कारोबार में प्रमुख स्थान रखता है। वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत के कंटेनर बाजार में अदाणी पोर्ट्स की हिस्सेदारी 45.5 प्रतिशत बताई गई है। अकेले मुंद्रा पोर्ट देश के करीब 35 प्रतिशत कंटेनर व्यापार को संभालता है। इस वजह से इसे भारत का सबसे बड़ा कंटेनर हैंडलिंग बंदरगाह माना जाता है।

    कंपनी के मुताबिक, मुंद्रा में हर साल लगभग 16 लाख टीईयू खाली कंटेनरों का प्रबंधन किया जाता है। इस बड़े परिचालन आधार को देखते हुए समर्पित यार्ड की स्थापना से खाली कंटेनरों के भंडारण और आवाजाही के प्रबंधन को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

    अदाणी पोर्ट्स ने कहा कि यह पहल प्रौद्योगिकी आधारित और अधिक कुशल लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित करने की सरकारी दिशा के अनुरूप है। कंपनी इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मान रही है।

    वर्तमान में एपीएसईजेड 16 रणनीतिक रूप से स्थित बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करता है। कंपनी के पास 136 जहाजों का विविध समुद्री बेड़ा और एकीकृत लॉजिस्टिक्स क्षमता है। इसकी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 653 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और भारत के कुल बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक एक अरब टन थ्रूपुट हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

  • किचन में कांच के बर्तनों का इस्तेमाल बनाता है सामान व्यवस्थित, स्टोरेज से सफाई तक मिलते हैं ये आठ आसान फायदे

    किचन में कांच के बर्तनों का इस्तेमाल बनाता है सामान व्यवस्थित, स्टोरेज से सफाई तक मिलते हैं ये आठ आसान फायदे

    नई दिल्ली ।किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों का चुनाव केवल उनकी खूबसूरती के आधार पर नहीं किया जाता। रोजमर्रा के कामों में ऐसे बर्तन अधिक उपयोगी माने जाते हैं, जिन्हें साफ रखना आसान हो और जिनमें खाद्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके। इसी वजह से आजकल कई घरों में प्लास्टिक और स्टील के साथ कांच के कंटेनर, जार, बाउल और सर्विंग डिश भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

    कांच के बर्तनों की सबसे खास बात उनकी पारदर्शिता है। कंटेनर के अंदर रखी दाल, मसाले, ड्राई फ्रूट्स या अन्य खाद्य सामग्री बाहर से दिखाई देती है। इससे सामान पहचानने के लिए बार बार डिब्बे खोलने की जरूरत नहीं पड़ती और जरूरत की चीज आसानी से ढूंढी जा सकती है।

    कांच की चिकनी सतह के कारण इसे साफ करना भी अपेक्षाकृत आसान होता है। सही तरीके से सफाई करने पर खाद्य पदार्थों के दाग और अवशेष हटाए जा सकते हैं। हालांकि, सफाई के दौरान कांच के बर्तन को गिरने या तेज झटके से बचाना जरूरी होता है।

    कांच की सतह आमतौर पर नॉन पोरस होती है, इसलिए यह कई तरह की तेज गंध को प्लास्टिक जैसी कुछ सामग्रियों की तुलना में कम सोखता है। मसालेदार भोजन, सॉस या अन्य सुगंध वाली चीजें रखने के बाद भी उचित सफाई के साथ कंटेनर को दोबारा इस्तेमाल करना सुविधाजनक हो सकता है।

    ग्लास कंटेनर बचे हुए खाने, फलों, ड्राई फूड और अन्य खाद्य पदार्थों के भंडारण के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। कुछ विशेष ग्लास कंटेनर फ्रिज या फ्रीजर में इस्तेमाल के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि, किसी भी कांच के बर्तन को कम या ज्यादा तापमान में रखने से पहले उसके इस्तेमाल संबंधी निर्देश देखना जरूरी है।

    कांच के बर्तन केवल स्टोरेज तक सीमित नहीं हैं। ग्लास बाउल और सर्विंग डिश में सलाद, मिठाई और रंगीन व्यंजन आकर्षक दिखाई देते हैं। पारदर्शी बर्तन में भोजन का रंग और उसकी प्रस्तुति साफ नजर आती है, जिससे खाने की मेज पर भी बेहतर लुक मिल सकता है।

    उपयुक्त ग्लास कंटेनर कई कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार एक ही बर्तन में खाना स्टोर करने, सर्व करने और कुछ मामलों में गर्म करने की सुविधा मिल सकती है। इससे अलग अलग कामों के लिए अतिरिक्त बर्तनों की जरूरत कम हो सकती है।

    पारदर्शी कांच में रखी खाद्य सामग्री का रंग और मात्रा भी आसानी से दिखाई देती है। इससे यह पता लगाने में सुविधा होती है कि कंटेनर में कितना सामान बचा है और उसे दोबारा कब भरने की जरूरत पड़ेगी। इस तरह किचन की सामग्री को व्यवस्थित रखना आसान हो सकता है।

    एक जैसे ग्लास जार और कंटेनर किचन की शेल्फ को साफ और व्यवस्थित रूप दे सकते हैं। खासकर छोटे किचन में अलग अलग सामान को पारदर्शी कंटेनरों में रखने से उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरी सामग्री आसानी से दिखाई देती रहती है।

    हालांकि, कांच के बर्तनों का इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है। गर्म ग्लासवेयर को अचानक ठंडे पानी या बहुत ठंडी सतह पर रखने से बचना चाहिए, क्योंकि तापमान में तेज बदलाव से कुछ प्रकार के कांच टूट सकते हैं। माइक्रोवेव, ओवन या फ्रीजर में रखने से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंटेनर उसके लिए उपयुक्त है या नहीं।