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  • मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा

    मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को कांग्रेस विधायक दल ने राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए और जनहित के मुद्दों को सदन में जोरदार तरीके से पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें सरकार और प्रधानमंत्री की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख है, लेकिन प्रदेशवासियों की वास्तविक समस्याओं और पीड़ा को उचित जगह नहीं मिली।
    उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में हुई दु:खद घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही से 35 निर्दोष लोगों की जान गई। उन्होंने पूछा कि क्या उन परिवारों का दर्द और उनके सवाल इस सदन के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल इस मामले को गंभीरता से उठाएगा और जिम्मेदारों को चिन्हित करने की मांग करेगा।

    मीडिया से बातचीत में उमंग सिंघार ने कहा कि बजट केवल घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रदेश की जमीनी हकीकत को उजागर करने का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने बढ़ते प्रदेश कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, ताकि जनता को आर्थिक स्थिति की पारदर्शी जानकारी मिल सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायक दल बजट में की गई घोषणाओं और उनकी जमीनी वास्तविकता के बीच के अंतर को सदन में सामने लाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने दोहराया कि वह लगातार जनता के मुद्दों को उठाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी।

  • स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा

    स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल पीने से हुई मौतों का मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन चुका है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ सैयद नासिर हुसैन ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाकर केंद्र सरकार से सीधे जवाब मांगे हैं। इससे इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता मॉडल पर नई बहस शुरू हो गई है।

    राज्यसभा में पूछे गए प्रश्नों में यह स्पष्ट रूप से जानना चाहा गया है कि किन परिस्थितियों में शहर की सीवरेज और जल वितरण प्रणाली विफल हुई और कैसे दूषित सीवरेज का पानी पीने योग्य जल लाइनों में मिल गया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या केंद्र सरकार को जनवरी 2026 में भागीरथपुरा में हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की जानकारी है। इन सवालों के जवाब जल शक्ति मंत्री द्वारा 2 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दिए जाएंगे।

    इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर दौरे के दौरान इस पूरे प्रकरण को संसद में उठाने की घोषणा की थी। वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी साफ कर दिया है कि 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है कि सरकार को संसद और विधानसभा दोनों मंचों पर घेरकर जवाबदेह बनाया जाए।राज्यसभा में सवाल सूचीबद्ध होते ही इंदौर नगर निगम और प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। जल शक्ति मंत्रालय ने बिंदुवार जानकारी मांगी है जिसके चलते नगर निगम को सभी रिपोर्ट और तथ्य सरकार को भेजने पड़े हैं। यह प्रश्न राज्यसभा प्रश्न संख्या एस 1137 के तहत दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि जवाबों में किसी भी तरह की चूक इंदौर की स्वच्छ शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।

    यह मामला पहले से ही मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है जहां नगर निगम और प्रशासन को कड़ी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है। अब संसद में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह प्रकरण केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोलता है।

    कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि विधानसभा में यह पूछा जाएगा कि दूषित पानी से हुई मौतों की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस का दावा है कि यह मुद्दा सरकार की कार्यशैली और जवाबदेही की असल तस्वीर जनता के सामने लाएगा।