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  • यूपी में समग्र शिक्षा के संविदा कर्मियों का मानदेय 25% बढ़ेगा, 11,902.85 करोड़ का बजट मंजूर

    यूपी में समग्र शिक्षा के संविदा कर्मियों का मानदेय 25% बढ़ेगा, 11,902.85 करोड़ का बजट मंजूर


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समग्र शिक्षा के तहत सेवा प्रदाता के माध्यम से काम कर रहे संविदा कर्मियों के मानदेय में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और समग्र शिक्षा की स्वीकृत कार्ययोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की गई।

    राज्य परियोजना कार्यालय के साथ समग्र शिक्षा (प्रारंभिक शिक्षा) और समग्र शिक्षा (माध्यमिक) के जिला परियोजना कार्यालयों में सेवा प्रदाता के जरिए कार्यरत कार्मिकों के मानदेय में यह वृद्धि होगी। बैठक में बताया गया कि इन कर्मचारियों के मानदेय में वर्ष 2020 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी।

    यूनिफॉर्म की रकम का उसी काम में इस्तेमाल हो

    मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के जरिए अभिभावकों को दी जा रही राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हो। अभिभावकों को इसके लिए जागरूक करने के साथ बच्चों को तय यूनिफॉर्म में स्कूल भेजना भी सुनिश्चित करने को कहा गया।

    उन्होंने सरकारी स्कूलों में मौजूद स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही उपलब्ध तकनीकी उपकरणों और अन्य संसाधनों का अधिकतम एवं प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    पढ़ाई के साथ खेल और प्रयोगशालाओं पर फोकस

    एसपी गोयल ने कहा कि विद्यार्थियों के विकास को केवल कक्षा में होने वाली पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाए।

    उन्होंने शासकीय विद्यालयों की भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान की प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने और विद्यार्थियों से उनका नियमित व प्रभावी उपयोग कराने के निर्देश दिए।

    2025-26 में 92.46% बजट खर्च

    बैठक में समग्र शिक्षा के वित्तीय उपयोग की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि वर्ष 2025-26 में बजट के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों के बाद 9,425.21 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह उपलब्ध कुल धनराशि का 92.46 प्रतिशत था। इसके मुकाबले वर्ष 2024-25 में उपलब्ध धनराशि का 69.60 प्रतिशत ही खर्च हो सका था।

    वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड ने समग्र शिक्षा के तहत 11,902.85 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इस राशि का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सघन और लक्षित प्रयास करने के निर्देश दिए।

    बाल वाटिका से कक्षा-2 तक निपुण भारत पर जोर

    बैठक में निपुण भारत मिशन की प्रगति की भी जानकारी दी गई। इसके तहत बाल वाटिका से कक्षा-2 तक के विद्यार्थियों की बुनियादी भाषायी और गणतीय क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    परिषदीय विद्यालयों में इस पहल को कक्षा-3 से 5 तक भी विस्तारित किया गया है। इन कक्षाओं के लिए हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण विषयों में सीखने के लक्ष्य तय किए गए हैं।

    टाटा टेक्नोलॉजी और यास्कावा के साथ एमओयू

    बैठक में बताया गया कि मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद ड्रीम लैब की स्थापना के लिए टाटा टेक्नोलॉजी, जापानी कंपनी यास्कावा और अन्य उद्योग समूहों के साथ विभाग की ओर से एमओयू किया जा चुका है। वहीं, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के स्कूल सेफ्टी ऑडिट के लिए कार्यदायी संस्था का चयन भी पूरा हो गया है।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण संयुक्ता समद्दार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • 3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक

    3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक


    भोपाल । मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से काम कर रहे अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर सरकार और भाजपा संगठन के सामने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। स्कूलों छात्रावासों पंचायतों अस्पतालों और नगरीय निकायों समेत अलग अलग विभागों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों कर्मचारी 7 सितंबर को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। कर्मचारी संगठन का कहना है कि वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को वर्ष 2003 में किए गए उस वादे की याद दिलाएंगे जिसमें अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने की बात कही गई थी। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरना अनशन में बदला जा सकता है।

    अस्थायी आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा की ओर से भाजपा संगठन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर लड़ा गया था। संगठन के मुताबिक उस समय तत्कालीन भाजपा नेता उमा भारती ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। प्रदेशभर में यात्राएं कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा भी किया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि उस समय से अब तक करीब 23 साल बीत चुके हैं लेकिन उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    कर्मचारी नेताओं के मुताबिक सरकारी विभागों के नियमित कर्मचारियों की तरह ही अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। स्कूलों और छात्रावासों में सफाई खाना बनाने और भृत्य के काम से लेकर पंचायतों में चौकीदारी नल जल व्यवस्था अस्पतालों में विभिन्न सेवाओं नगरीय निकायों में सफाई और टैक्स वसूली जैसे काम भी इन कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय या वेतन मिलने का आरोप संगठन ने लगाया है।

    मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि 2003 में अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3 हजार रुपए मिलते थे जबकि आज भी कई कर्मचारियों को महज 4 से 5 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। इसी तरह पंचायतों के चौकीदार और नल जल कर्मचारी उस समय करीब 2 हजार रुपए पाते थे और वर्तमान में भी कई कर्मचारियों का भुगतान 2 से 3 हजार रुपए के आसपास होने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि 23 साल में महंगाई कई गुना बढ़ गई लेकिन हजारों कर्मचारियों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

    कर्मचारी नेताओं ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से अस्थायी कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने की घोषणा का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि यह घोषणा भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी। अब संगठन सरकार द्वारा निर्धारित 12,425 रुपए न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहा है।

    कर्मचारी संगठन ने आंदोलन को दो चरणों में रखने की जानकारी दी है। स्कूलों छात्रावासों और विभिन्न विभागों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारी 7 सितंबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर अपनी मांग रखेंगे जबकि ग्राम पंचायतों के चौकीदार नल जल चालक और अन्य कर्मचारी 8 सितंबर को संगठन के सामने अपनी बात रखेंगे। कर्मचारियों ने सरकार के 1.62 लाख रुपए प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारी बेहद कम मासिक आय में काम कर रहे हैं तो उनके जीवन यापन और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    अब कर्मचारियों की नजर 7 और 8 सितंबर को होने वाले प्रदर्शन पर है। संगठन का कहना है कि वह सरकार से केवल आश्वासन नहीं बल्कि न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहता है। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।