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  • हड़ताल के बीच धार्मिक रास्ता अपनाया, सतना में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का सुंदरकांड पाठ

    हड़ताल के बीच धार्मिक रास्ता अपनाया, सतना में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का सुंदरकांड पाठ


    मध्य प्रदेश । सतना जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान कर्मचारियों ने विरोध को आध्यात्मिक रूप देते हुए भगवान श्रीराम और बजरंगबली की आराधना के साथ सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। इसके बाद सद्बुद्धि यज्ञ किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन को “सद्बुद्धि” देने और लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की प्रार्थना की।

    सामूहिक प्रार्थना और बड़ी भागीदारी
    इस कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल हुए। वातावरण में भक्ति और मांगों को लेकर गंभीरता—दोनों का मिश्रण देखने को मिला। कर्मचारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उनके अधिकार, सम्मानजनक भविष्य और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर है।

    कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    आंदोलनरत कर्मचारियों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:
    नियमितीकरण का लाभ देना
    एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा लागू करना
    हर साल 10% वेतन वृद्धि
    महंगाई भत्ता (DA) देना
    CHO के वेतन में PBI समायोजन
    वेतन विसंगतियों का पुनः परीक्षण
    समान कार्य के लिए समान वेतन
    सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा

     सरकार से समाधान की उम्मीद
    कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार सकारात्मक निर्णय लेकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हजारों परिवारों को राहत देगी।

    आंदोलन का शांतिपूर्ण स्वरूप
    पूरे कार्यक्रम में कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। सुंदरकांड और यज्ञ के माध्यम से उन्होंने समाधान की दिशा में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की।

  • स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे

    स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर, संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे


    कटनी  कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को कर्मचारियों ने कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

    यह ज्ञापन मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में अधीक्षक भू-अभिलेख अधिकारी को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    कर्मचारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारी वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना काल से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक उन्होंने लगातार जिम्मेदारी निभाई, जिसके चलते मध्य प्रदेश को कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी मिले। बावजूद इसके सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।

    संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पूर्व में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और अब वे आंदोलन के लिए मजबूर हो गए हैं।

    ज्ञापन में कर्मचारियों ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत कर्मचारियों को एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की मांग भी की गई है।

    कर्मचारियों ने अन्य राज्यों की तर्ज पर हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता यानी डीए देने, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों यानी CHO के वेतन में पीबीआई का समायोजन करने और पहले की तरह इंडिकेटर व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई है।

    संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो 2 जून से प्रदेशभर में सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

    कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि हड़ताल शुरू होती है तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। फिलहाल ज्ञापन के बाद अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।