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  • न्यायिक गरिमा और आचार संहिता पर उठे गंभीर सवाल: कार्यकाल के दौरान गैस एजेंसी चलाने के विवाद में घिरे पूर्व मुख्य न्यायाधीश

    न्यायिक गरिमा और आचार संहिता पर उठे गंभीर सवाल: कार्यकाल के दौरान गैस एजेंसी चलाने के विवाद में घिरे पूर्व मुख्य न्यायाधीश

    नई दिल्ली । देश की उच्च न्यायपालिका में संवैधानिक पदों पर आसीन न्यायाधीशों के लिए निर्धारित नैतिक आचार संहिता और नियमों की अनदेखी का एक अत्यंत संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और बाद में मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे चुके एक सेवानिवृत्त जस्टिस अपने लगभग 16 वर्षों के लंबे न्यायिक कार्यकाल के दौरान समानांतर रूप से एक एलपीजी गैस वितरण एजेंसी का संचालन भी करते रहे। इस पूरे मामले का आधिकारिक भंडाफोड़ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े एक डीलरशिप विवाद और एजेंसी के पूर्व प्रबंधक की विधवा द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई एक रिट याचिका के माध्यम से हुआ है, जिसने न्यायिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

    प्राप्त विवरणों और दस्तावेजों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ने वर्ष 1984 में संबंधित व्यक्ति को किचन फ्लेम के नाम से एक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप आवंटित की थी। स्थापित नियमों और अलिखित न्यायिक आचार संहिता के अनुसार, संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीशों के लिए यह अनिवार्य माना जाता है कि उनका सरकार, निजी पक्षों अथवा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक, व्यावसायिक या संविदात्मक संबंध नहीं होना चाहिए ताकि हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके बावजूद, संबंधित न्यायाधीश नवंबर 2024 में मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने तक इस व्यावसायिक गैस एजेंसी के वैधानिक मालिक बने रहे, जिसे प्रथम दृष्टया स्थापित सेवा नियमों और नैतिक मापदंडों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।

    अत्यंत महत्वपूर्ण न्यायिक पदों पर आसीन रहने के बावजूद इस व्यावसायिक समझौते को समय-समय पर नवीनीकृत भी कराया जाता रहा। संबंधित न्यायाधीश ने अस्सी के दशक के मध्य में एक अधिवक्ता के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी, जिसके बाद वर्ष 2008 में वे उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त हुए और वर्ष 2023 में पदोन्नत होकर मुख्य न्यायाधीश बने। इस पूरे सफर के दौरान गैस एजेंसी के अनुबंध को कई बार रिन्यू कराया गया, जिसकी वैधता वर्ष 2030 तक के लिए बढ़ा दी गई थी। तेल कंपनी के साथ हुए सबसे हालिया समझौते के आधिकारिक स्टाम्प पेपर पर संबंधित न्यायाधीश के हस्ताक्षर और तस्वीरें भी मौजूद पाई गईं, जो इस व्यावसायिक गतिविधि में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता को प्रमाणित करती हैं।

    इस पूरे गुत्थी का खुलासा तब हुआ जब उक्त गैस एजेंसी का कामकाज संभालने वाले पूर्व प्रबंधक की विधवा ने मालिकाना हक को अपने नाम पर स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली। इसी विधिक प्रक्रिया के दौरान दिसंबर 2025 में प्रशासन के पास एक आधिकारिक जनशिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि गैस एजेंसी के वास्तविक मालिक एक पूर्णकालिक न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे हैं। इस गंभीर शिकायत के आधार पर तेल कंपनी ने संबंधित पूर्व न्यायाधीश को लगातार कई कारण बताओ नोटिस जारी किए। कंपनी का स्पष्ट रुख था कि बिना पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी संवैधानिक पद पर रहते हुए व्यावसायिक एजेंसी चलाना नियमों का उल्लंघन है, इसलिए क्यों न इस आवंटन को रद्द कर दिया जाए।

    न्यायिक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी संबंधित व्यक्ति की ओर से तेल कंपनी द्वारा जारी किए गए किसी भी कारण बताओ नोटिस का कोई विधिक जवाब दाखिल नहीं किया गया। अंततः प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जुलाई के प्रथम सप्ताह में किचन फ्लेम नामक इस एलपीजी डीलरशिप के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद पीड़ित परिवार ने दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिनका तर्क है कि मूल आवंटनकर्ता की गलतियों और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण उन्हें बेवजह आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह पूरा मामला एक ऐसे समय में सामने आया है जब न्यायपालिका पहले से ही कुछ अन्य आंतरिक विवादों के कारण असहज स्थिति का सामना कर रही है, और इस नए घटनाक्रम ने न्यायिक शुचिता पर बहस को और तेज कर दिया है।

  • काला हिरण' फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी

    काला हिरण' फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी

    नई दिल्ली। फिल्म उद्योग में वास्तविक और चर्चित आपराधिक मामलों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर शुरू हुआ आंतरिक घमासान अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है। अभिनेता सलमान खान से जुड़े चर्चित ब्लैकबक कानूनी मामले से प्रेरित इस आगामी फिल्म के मुख्य कलाकार गोविंद नामदेव और फिल्म के निर्माता अमित जानी के बीच सीधा वैचारिक और कानूनी टकराव पैदा हो गया है। अभिनेता गोविंद नामदेव ने हाल ही में सार्वजनिक मंच पर यह बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि उन्हें फिल्म की वास्तविक पटकथा और संदर्भ के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। अभिनेता के अनुसार, यदि उन्हें पहले से इस बात का भान होता कि यह पूरी फिल्म सलमान खान की छवि के विपरीत और उनके खिलाफ केंद्रित है, तो वह कभी भी इस परियोजना का हिस्सा नहीं बनते।

    इस गंभीर और एकतरफा आरोप के सार्वजनिक होते ही फिल्म के निर्माता अमित जानी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अभिनेता के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। निर्माता ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि किसी भी अनुभवी और वरिष्ठ अभिनेता के साथ बिना लिखित पटकथा के तीन-चार दिनों तक लगातार अदालत के दृश्यों की शूटिंग करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। प्रोडक्शन हाउस का स्पष्ट तर्क है कि फिल्म का शीर्षक ही ‘काला हिरण’ है, जो सीधे तौर पर वर्ष 1998 से लेकर 2018 तक जोधपुर की निचली और उच्च अदालतों में चले ऐतिहासिक मुकदमे की याद दिलाता है। ऐसे में यह कहना कि कलाकार को विषय की गहराई और संदर्भ की जानकारी नहीं थी, पूरी तरह से असत्य और हास्यास्पद है।

    निर्माता ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया कि गोविंद नामदेव फिल्म में मुख्य सरकारी वकील की भूमिका निभा रहे हैं, जो अयान खान नामक चरित्र के खिलाफ अदालती पैरवी कर रहा है। शूटिंग के दौरान अभिनेता ने स्वयं कई जटिल कानूनी और प्रासंगिक संवाद बोले हैं, जिसमें जीप पर लगे खून के धब्बे और टायरों में फंसे हिरण के बालों जैसे संवेदनशील विवरणों का जिरह के दौरान उल्लेख शामिल है। प्रोडक्शन हाउस के अनुसार, सेट पर बिना किसी दबाव या गनपॉइंट के पूरी स्वेच्छा से किए गए काम को अब साक्षात्कार के माध्यम से धोखे का नाम दिया जा रहा है, जो कि केवल एक बड़े सुपरस्टार को खुश करने और उद्योग में अपने संबंधों को बचाने की एक कमजोर कोशिश मात्र है।

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब निर्माता अमित जानी ने दोनों पक्षों के बीच हस्ताक्षरित कानूनी अनुबंध का खुलासा किया। निर्माता के दावों के अनुसार, गोविंद नामदेव ने न केवल इस वर्तमान फिल्म के लिए बल्कि भविष्य में बनने वाले इसके दूसरे भाग के लिए भी बकायदा कानूनी एग्रीमेंट साइन किया था। अब सार्वजनिक रूप से इस तरह के विरोधाभासी बयान देना न केवल उस कानूनी अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन है, बल्कि इससे प्रोडक्शन हाउस की बाजार साख और फिल्म की व्यावसायिक छवि को भी भारी वित्तीय और नैतिक नुकसान पहुंचा है।

    इस विवाद के बाद प्रोडक्शन हाउस ने अब रक्षात्मक रुख छोड़कर पूरी तरह से आक्रामक कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया है। फिल्म निर्माता ने स्पष्ट किया है कि वे इस अनुबंध उल्लंघन और मानहानि के मामले को लेकर बहुत जल्द कानूनी नोटिस जारी करने जा रहे हैं। इस मामले की आधिकारिक सुनवाई और जांच के लिए अभिनेता को नोएडा की जिला अदालत में आकर अपना जवाब दाखिल करना होगा। सिनेमा जगत के विश्लेषकों का मानना है कि इस आंतरिक कलह और आने वाले कानूनी नोटिस के बाद फिल्म के समय पर प्रदर्शन और इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल और अधिक गहरे हो गए हैं।

  • टॉप-10 की रेस में शामिल होने वाले एकमात्र अंग्रेज खिलाड़ी बने हैरी केन..

    टॉप-10 की रेस में शामिल होने वाले एकमात्र अंग्रेज खिलाड़ी बने हैरी केन..

    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े महाकुंभ, फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत से पहले मैदान पर उतरने वाले दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की वित्तीय संपत्तियों का एक बड़ा खुलासा हुआ है। खेल के मैदान पर विश्व कप की चमचमाती ट्रॉफी जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने वाले ये अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मैदान से बाहर आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। हाल ही में जारी की गई एक वैश्विक सूची के अनुसार, क्लब फुटबॉल, भारी-भरकम विज्ञापन अनुबंधों और दूरदर्शी निजी व्यावसायिक निवेशों के दम पर इन खेल सितारों ने अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया है।

    इस सूची के वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। रोनाल्डो की कुल अनुमानित संपत्ति अब एक अरब पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 12,773 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े के करीब पहुंच चुकी है। सऊदी अरब के प्रतिष्ठित क्लब अल-नस्र के साथ हुआ उनका सालाना 173 मिलियन पाउंड का करार उनकी कमाई का मुख्य जरिया है। इसके अतिरिक्त, रोनाल्डो ने खेल से इतर होटल श्रृंखला, अत्याधुनिक जिम, खुद के फैशन ब्रांड और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर अपनी वित्तीय स्थिति को बेहद मजबूत किया है।

    इस धनकुबेर सूची में दूसरे स्थान पर अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाने वाले कप्तान लियोनल मेसी का नाम शामिल है। मेसी की कुल अनुमानित नेटवर्थ 742 मिलियन पाउंड यानी करीब 9,476 करोड़ रुपये आंकी गई है। अमेरिकी क्लब इंटर मियामी से मिलने वाले वेतन के अलावा वैश्विक खेल ब्रांड एडिडास सहित कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ उनकी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी उनकी इस विशाल कमाई का एक बड़ा आधार है। वहीं, ब्राजील के स्टार फारवर्ड नेमार इस फेहरिस्त में 334 मिलियन पाउंड (लगभग 4,266 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से बने हुए हैं। बार्सिलोना और पीएसजी के बाद अब अल-हिलाल क्लब से मिलने वाले पैसों और दुनिया के सबसे महंगे जूता ब्रांड के साथ उनके विज्ञापन सौदे ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है।

    फ्रांस के युवा सनसनी किलियन एमबाप्पे इस सूची में चौथे स्थान पर काबिज हैं। स्पेनिश जाइंट रियल मैड्रिड के साथ हुए उनके नए अनुबंध और नाइकी व हबलोट जैसे लग्जरी ब्रांडों के साथ एंडोर्समेंट के चलते उनकी नेटवर्थ 186 मिलियन पाउंड (करीब 2,376 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी सूची में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र खिलाड़ी उनके कप्तान हैरी केन हैं। जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख के लिए खेलने वाले हैरी केन 110 मिलियन पाउंड (लगभग 1,405 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ पांचवें स्थान पर हैं।

    सूची के निचले आधे हिस्से की बात करें तो मिस्र के स्टार मोहम्मद सलाह 104 मिलियन पाउंड के साथ छठे स्थान पर हैं, जिन्हें लिवरपूल क्लब से प्रति सप्ताह करीब चार लाख पाउंड का भारी-भरकम वेतन मिलता है। उनके बाद दक्षिण कोरिया के सोन ह्युंग-मिन (74 मिलियन पाउंड) सातवें और अल्जीरिया के रियाद महरेज (63 मिलियन पाउंड) आठवें स्थान पर हैं। नॉर्वे के युवा गोल मशीन एरलिंग हालैंड और कोलंबिया के जेम्स रोड्रिगेज दोनों ही 59-59 मिलियन पाउंड (लगभग 754 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ क्रमशः नौवें और दसवें स्थान पर मौजूद हैं। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि आधुनिक युग में फुटबॉल केवल एक खेल मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा वैश्विक बिजनेस मॉडल बन चुका है।