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  • रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा में बेकाबू बल्कर ने बस को मारी जोरदार टक्कर, पांच की मौत और 20 से अधिक घायल

    रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 39 पर बुधवार शाम तेज रफ्तार बल्कर ने यात्रियों से भरी बस को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हादसे पर दुख व्यक्त कर मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।

    पुलिस के अनुसार, हादसा गुढ़ थाना क्षेत्र में बदवार बस स्टैंड के पास बुधवार शाम करीब 5 बजे हुआ। रीवा से सीधी जा रही पवन ट्रेवल्स की बस क्रमांक एमपी 19-पी 1501 को सीधी से रीवा की ओर आ रहे बल्कर (क्रमांक एनएल 01 एआई 9213) ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बल्कर पलट गया, जबकि बस सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के वक्त बस में करीब 30 यात्री सवार थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बस में फंसे यात्रियों और अन्य घायलों को बाहर निकाला गया।

    जानकारी मिलते ही रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक गुरु करण सिंह मौके पर पहुंचे, साथ ही रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा एवं सीधी सांसद राजेश मिश्रा मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने खबर लिखे जाने तक हादसे में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 20 से अधिक यात्रियों के घायल होने की जानकारी दी है। गंभीर घायलों को उपचार के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुढ़ में जारी है। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इनमें एक 6 साल का मासूम बच्चा भी शामिल है।अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों के उपचार में जुटी हुई है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के समय बारिश हो रही थी। सड़क पर काफी फिसलन थी। बल्कर तेज रफ्तार में था। फिसलन के कारण ड्राइवर वाहन को कंट्रोल नहीं कर पाया और बस को टक्कर मार दी। घायल यात्री पुनीत शुक्ला (30) निवासी ग्राम बघोर (जिला सीधी) ने बताया कि बस में करीब 25 से 30 यात्री सवार थे। बल्कर अचानक अपनी साइड छोड़कर विपरीत दिशा में आ गया और बस को सामने से टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे प्रशासन और पुलिस की टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के बाद रीवा-सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। प्रशासन की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं।

    रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। हादसे के बाद एक तीन साल की एक बच्ची लापता है। उसकी मां हादसे में घायल हुई है और फिलहाल वह कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। कलेक्टर के अनुसार, आशंका है कि बच्ची गड्ढे में दबी हो सकती है। गड्ढा ज्यादा गहरा नहीं है, लेकिन उसमें दलदल है। रेस्क्यू टीम बच्ची की तलाश में जुटी है। फिलहाल बच्ची के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के लापता होने की जानकारी नहीं है।

    इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर दुख जताया है और दिवंगतों की आत्मा को शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स के माध्यम से मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा घायलों को 1-1 लाख रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की जा रही है।

    वहीं, पुलिस प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर बल्कर के विपरीत दिशा में आने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। बस के परमिट सहित वाहन से जुड़े अन्य दस्तावेज और बिंदुओं की भी प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है। 
  • US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट

    US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट


    वाशिंगटन।
    अमेरिका-ईरान युद्ध (America-Iran War) का सबसे विवादास्पद मोर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है. तेहरान और वाशिंगटन दोनों इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना दबदबा जता रहे हैं, लेकिन शिपिंग डेटा फर्म (Shipping data firm) ने दावा किया है कि होर्मुज पर ईरान (Iran) का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है. ट्रैकिंग फर्म केपलर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में 80 फीसदी से ज्यादा जहाजों ने ईरानी मार्ग को छोड़कर अमेरिका द्वारा अधिकृत ओमान रूट का रुख किया है।

    ट्रैकिंग फर्म केपलर (Kpler) के शिपिंग डेटा के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले 80 फीसदी से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने पिछले दो हफ्तों में ईरान के मार्ग को छोड़कर ओमान की ओर वाले रूट का इस्तेमाल किया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत इस समुद्री रास्ते का ईरान कड़ा विरोध करता रहा है. अमेरिकी नौसेना बलों की मौजूदगी और सुरक्षा के भरोसे जहाज ईरानी हमलों के जोखिम के बावजूद ओमान के तटवर्ती रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं. इस बड़े बदलाव से इस रणनीतिक जलमार्ग पर तेहरान का दबदबा आंशिक रूप से कमजोर होता दिख रहा है।


    ओमान रूट पर शिफ्ट हुए जहाज

    केपलर के क्रूड ऑयल एनालिसिस प्रमुख हुमायूं फलकशाही के अनुसार, आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि ईरान ने जलडमरूमध्य पर से कम से कम आंशिक नियंत्रण खो दिया है. एक महीने पहले तक ओमान वाले रूट पर न के बराबर शिपिंग गतिविधि देखी जा रही थी. ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क यानी टोल वसूलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जहाजों द्वारा ईरानी रूट से बचने के कारण तेहरान के लिए टोल लागू करना बेहद मुश्किल हो गया है।


    ज्यादातर देश नहीं देना चाहते टैक्स

    पिकरिंग एनर्जी पार्टनर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी डैन पिकरिंग के मुताबिक मिडिल ईस्ट के अधिकांश लोग या पक्ष ईरान को टोल टैक्स नहीं देना चाहते हैं और न ही वे ऐसा कर रहे हैं. हालांकि, ईरान अभी-भी जहाजों को धमकाने और शिपिंग को बाधित करने की क्षमता रखता है. इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ने कमर्शियल ट्रैफिक को एक सुरक्षित और वैकल्पिक रास्ता दे दिया है।

    VLCC से ट्रांसफर हो रहा है कच्चा तेल
    तनाव के बीच खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों ने भी कच्चे तेल के परिवहन का तरीका बदल दिया है. कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने फारस की खाड़ी से होर्मुज के रास्ते तेल निकालने के लिए वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) किराए पर लिए हैं. इसके बाद कच्चे तेल को ओमान की खाड़ी में खतरे के क्षेत्र से बाहर अन्य टैंकरों में ट्रांसफर किया जा रहा है।


    ट्रांसपोंडर बंद करने का जोखिम

    ईरानी हमलों के खतरे से बचने के लिए कई तेल टैंकरों ने अतिरिक्त कदम उठाए हैं. इन टैंकरों ने कई हफ्तों तक अपने ट्रांसपोंडर (पहचान सिग्नल) बंद रखे हैं. इससे ‘डार्क ट्रैफिक’ पैदा हो रहा है, जिससे पारंपरिक शिपिंग ट्रैकर्स के लिए तेल की वास्तविक आवाजाही का सटीक आकलन लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. हालांकि, सैटेलाइट इमेजरी के जरिए कुछ जहाजों का पता लगाया जा सकता है.


    क्या है ट्रंप का दावा

    उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना के संचालन के चलते इस जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है. ट्रंप ने होर्मुज का नक्शा साझा करते हुए इसे ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ तक घोषित करने की इच्छा जताई।

    वहीं, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि एक हफ्ते में होर्मुज और परिवर्तित मार्गों से तेल की ढुलाई करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही जो युद्ध पूर्व के 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन के करीब है. हालांकि, जमीनी हालात दोनों देशों के दावों से अलग हैं. ईरान के लगातार हमले और युद्ध पूर्व स्तर से कम तेल प्रवाह ये साबित करता है कि अमेरिका का भी इस जलमार्ग पर पूरी तरह अनियंत्रित कब्जा नहीं है. वहीं, दूसरी ओर जहाजों का ओमान रूट चुनना ये दर्शाता है कि ईरान भी अपनी शर्तों को मनवाने में संघर्ष कर रहा है।


    ईरान-ओमान की सीधी बातचीत से US नाखुश

    बता दें कि तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सीधी बातचीत चल रही है. दोनों देश होर्मुज के साथ बॉर्डर साझा करते हैं. ये वार्ता बिना किसी प्रत्यक्ष अमेरिकी भागीदारी के हो रही है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप खुश नहीं हैं. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि न तो ईरान और न ही अमेरिका इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण का दावा कर सकते हैं।

  • ट्रंप का समुद्री मार्ग पर नियंत्रण का दावा…. बोले- होर्मुज में अमेरिका ने खड़ी की स्टील की दीवार

    ट्रंप का समुद्री मार्ग पर नियंत्रण का दावा…. बोले- होर्मुज में अमेरिका ने खड़ी की स्टील की दीवार


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा है कि अल्लाह का शुक्र है कि अमेरिका (America) ने होर्मुज समुद्री मार्ग (Strait of Hormuz Maritime Route) में स्टील की दीवार खड़ी कर दी है और आगे भी उसे बरकरार रखेगा। उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा किया है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने अमेरिकी नौसेना की इस कार्रवाई की सफलता की तारीफ की और दावा किया कि इसे “स्टील की दीवार” बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता।

    ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि अमेरिका इस अहम जल मार्ग को कंट्रोल करता है, जो मिडिल ईस्ट से तेल-गैस और दूसरी चीज़ों के निर्यात के के लिए ज़रूरी है। दूसरी तरफ ईरान ने ट्रंप के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। दरअसल, ईरान होर्मुज जलमार्ग में एक टोल सिस्टम लागू करना चाहता है। इसीलिए उसने कई बार उन जहाज़ों पर हमला किया है। ईरान का कहना है कि वह 28 फरवरी को ट्रंप द्वारा शुरू किए गए युद्ध के जवाब में उसके पसंदीदा रास्ते को रोक रहा है।


    ईरान को कीमत चुकानी होगी

    इस बीच, ट्रंप ने होर्मुज पर नियंत्रण का दावा करते हुए कहा कि अगर ईरान स्थिति बदलने की कोशिश करता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा पूरा नियंत्रण है। उनका इसपर कोई नियंत्रण नहीं। हम उसे चला रहे हैं। अगर ईरान कभी कुछ करने की कोशिश करता है तो उसे ‘उड़ा दिया’ जायेगा।” उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय मजबूत स्थिति में है और दावा किया कि ईरान ने क्षेत्र में अपना पिछला प्रभाव खो दिया है। ट्रंप ने कहा, “अभी हमारी स्थिति बहुत अच्छी है। हमारे सामने एक ऐसा देश है जो 50 वर्षों से मध्य पूर्व में दबंग बना हुआ था… अब वह पश्चिम एशिया का दबंग नहीं रहा।”


    अमेरिका और ईरान में अंतिम समझौता नहीं

    गौरतलब है कि फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र में जारी तनाव के बीच उनकी इस तरह की टिप्पणियां आई हैं। अमेरिका और ईरान अब तक टकराव खत्म करने के लिए किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी व्यवधानों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के एक बड़े हिस्से की कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गुजरती है।


    ईरानी मीडिया क्या कह रहा

    ईरान के सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के हवाले से कहा है कि 28 फरवरी, 2026 तक यह जलमार्ग खुला रहा था। उन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों की भी आलोचना की। बघाई ने कहा, “यह नहीं भूलना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति और उसके साथ जो कुछ हुआ, वह अमेरिका और इजरायली शासन की सैन्य आक्रामकता के कारण हुआ है, जो अब भी जारी है। जहां तक ईरान द्वारा शर्तें रखे जाने के दावों का सवाल है, उन्हें यह मामला अपनी ही सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।” रणनीतिक जलमार्ग को लेकर तनाव अब भी संघर्ष का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस बीच, तेहरान और ओमान के बीच इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही के लिए व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत जारी है।