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  • सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव

    सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में ग्राम सभा ने धार्मिक गतिविधियों और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर कई फैसले लिए हैं। कोंटा जनपद पंचायत के तहत आने वाले इस गांव में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा की बैठक हुई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हितों और स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। ग्राम सभा ने कुल 12 प्रस्ताव पारित किए। इनमें ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों को चर्च बनाने, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक आयोजन करने तथा शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    ग्राम सभा की ओर से बाहरी पादरियों और ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। इसके लिए पुनपल्ली गांव में एक सूचना-पट्ट लगाया गया है, जिसमें धर्म परिवर्तन, प्रार्थना सभाओं और अन्य गतिविधियों के लिए पादरियों और ईसाई प्रचारकों के प्रवेश को प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर धर्म बदल चुके परिवारों के सदस्यों के शव दफनाने के लिए भी ग्राम सभा की जमीन नहीं दी जाएगी। ग्राम सभा ने तय किया है कि चर्च, प्रार्थना सभा, धार्मिक सभा और शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

    ग्राम सभा के फैसलों की जानकारी जनपद पंचायत सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता मड़कम भीमा ने दी। उन्होंने बताया कि विशेष ग्राम सभा में स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में ‘शांति और न्याय समिति’ के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके तहत यदि कोई बाहरी व्यक्ति धार्मिक प्रचार या ऐसी गतिविधियों के लिए गांव में आता है तो उसे सबसे पहले समिति को इसकी सूचना देनी होगी। ग्राम सभा ने स्थानीय स्तर पर विवादों से निपटने के लिए भी इस समिति की व्यवस्था की है।

    इन फैसलों में पेसा कानून का भी उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत पांचवीं अनुसूची वाले अनुसूचित क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के संशोधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और स्थानीय विरासत की रक्षा करना है।

    ग्राम सभा ने यह भी तय किया है कि उसके फैसलों से जुड़े किसी विवाद की स्थिति में संबंधित प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों को सूचित किया जाएगा और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। ग्रामीणों से ग्राम सभा के फैसलों और स्थानीय नियमों का सम्मान करने की अपील की गई है। इस फैसले के तहत विशेष रूप से ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों के लिए सामुदायिक जमीन के इस्तेमाल को लेकर प्रावधान किए गए हैं। सूचना-पट्ट के जरिए धार्मिक गतिविधियों और बाहरी प्रचारकों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी भी सार्वजनिक की गई है।

  • जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच बंगाल में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ा, सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया

    जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच बंगाल में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ा, सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के कई जिलों में घरों के भीतर आयोजित होने वाली ईसाई प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रार्थना सभाओं पर कथित हमले, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद ईसाई समूहों ने कुछ इलाकों में ऐसी बैठकें और लोगों से नियमित मुलाकात का सिलसिला फिलहाल रोक दिया है। दूसरी ओर, कुछ संगठनों ने इन गतिविधियों के दौरान जबरन धर्मांतरण किए जाने के आरोप लगाए हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक प्रार्थना निजी आस्था का विषय है, लेकिन जबरन धर्मांतरण की पुष्टि होने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    हावड़ा जिले के उलूबेरिया में 23 अगस्त को एक किराए के मकान में रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान विवाद की शुरुआत हुई। वहां करीब 60 पुरुष और महिलाएं मौजूद थे। पादरी मिथुन हाजरा के अनुसार, दोपहर करीब तीन बजे नारे लगाती हुई भीड़ मकान में पहुंची और वहां मौजूद लोगों पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया। इसके बाद कथित तौर पर मारपीट और तोड़फोड़ हुई।

    हाजरा ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी मारपीट की गई। प्रार्थना स्थल पर रखा साउंड सिस्टम, पोडियम, मेज, कुर्सियां और पंखे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पादरी और अन्य लोगों को वहां से सुरक्षित निकाला तथा उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद शिकायत दर्ज कराई गई। हावड़ा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने प्राथमिकी दर्ज होने और जांच जारी रहने की पुष्टि की है। इस मामले में उस समय तक किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी।

    ईसाई संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उलूबेरिया की घटना अकेली नहीं है। उनके अनुसार, 30 अगस्त को हावड़ा के जगतबल्लवपुर और उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज में भी घरों में चल रही प्रार्थना सभाओं के दौरान विवाद की घटनाएं सामने आईं। 25 अगस्त को हावड़ा के घुसुड़ी में आयोजित प्रार्थना सभा में कथित मारपीट की शिकायत सामने आई, जबकि 26 अगस्त को पूर्व मेदिनीपुर के चेक माइलपोस्ट गांव में पादरी और उनकी पत्नी के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया गया।

    पूर्व बर्धमान जिले के सहानगर में 14 अगस्त को अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद हुआ। चर्च के प्रभारी पादरी सैमुअल हेम्ब्रम के अनुसार, कुछ लोगों ने दफन स्थल से संबंधित दस्तावेज मांगे और अंतिम संस्कार रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दफनाए जाने के बाद शव को कब्र से बाहर निकाल दिया गया और बाद में दूसरे कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार करना पड़ा।

    पूर्व बर्धमान की पुलिस अधीक्षक पुष्पा ने बताया कि मृत महिला स्थानीय निवासी नहीं थी और स्थानीय लोगों ने दफन स्थल को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका दावा था कि संबंधित जमीन निजी है और कब्रिस्तान नहीं है। पुलिस जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है। शोक मनाने आए लोगों के साथ मारपीट के आरोप की भी स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

    हिंदू संगठन सिंघा वाहिनी के अध्यक्ष देबदत्त माझी ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पैसे का लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। वहीं राज्य के आदिवासी विकास और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा कि प्रार्थना करना व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में जबरन धर्मांतरण साबित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की बात कही। टीएमसी प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी ने भाजपा पर डर की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि उन्हें इन घटनाओं की जानकारी नहीं है और उन्होंने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

  • जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    मध्य प्रदेश:  जबलपुर स्थित सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर मंगलवार को विवाद खड़ा हो गया। कुछ कर्मचारियों द्वारा स्कूल प्रबंधन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोप लगाए जाने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता स्कूल परिसर पहुंच गए। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और विरोध हुआ, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

    विवाद उस समय सामने आया जब स्कूल के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें नौकरी बनाए रखने के लिए धर्म बदलने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए, लेकिन धर्म परिवर्तन से इनकार करने के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।

    इन आरोपों की जानकारी सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान परिसर में लगे कुछ बैनर और पोस्टर भी क्षतिग्रस्त किए गए तथा बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।

    प्रदर्शन में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को डर और लालच के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।

    दूसरी ओर, शिकायत करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार किया, जिसके बाद उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी पक्षों से प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा

    धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा


    नई दिल्ली ।
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेता है, तो वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन का प्रभाव भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत दर्ज आपराधिक मामलों पर नहीं पड़ेगा और ऐसे मामलों की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

    यह मामला एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा था, जिसमें महिला ने अपने रिश्तेदारों के खिलाफ मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। शिकायत में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं भी शामिल की गई थीं। विवाद की पृष्ठभूमि में परिवार के भीतर साथ रहने के दौरान स्वच्छता, पानी के उपयोग और घरेलू व्यवस्थाओं को लेकर मतभेद सामने आए थे।

    सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि विवाह के समय महिला ने अपने पति के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। उसने अपना नाम भी बदल लिया था और लंबे समय से मुस्लिम धर्म का पालन कर रही थी। इसी आधार पर अदालत के समक्ष यह कानूनी प्रश्न उठा कि क्या धर्म परिवर्तन के बाद भी वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संरक्षण की पात्र मानी जा सकती है।

    आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि यह मूल रूप से पारिवारिक और संपत्ति से जुड़ा विवाद है तथा अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते। वहीं सरकारी पक्ष ने भी सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति को एससी/एसटी अधिनियम के तहत मिलने वाला संरक्षण उपलब्ध नहीं रहता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।

    न्यायमूर्ति वृषाली वी. जोशी की एकल पीठ ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इस आधार पर अदालत ने आरोपियों को इस विशेष अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों से राहत प्रदान की। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि शिकायत में भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए अन्य आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और उनकी सुनवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी।

    अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि विशेष कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार और संरक्षण संबंधित वैधानिक प्रावधानों तथा न्यायालयों की स्थापित व्याख्याओं के अनुरूप ही निर्धारित किए जाते हैं। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि यदि किसी मामले में अन्य आपराधिक आरोप बनते हैं, तो केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर उन मामलों की सुनवाई समाप्त नहीं हो जाती।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दायरे और धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनी प्रभावों को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान संबंधित कानूनों की व्याख्या और न्यायिक दृष्टिकोण को समझने में सहायता मिलेगी, जबकि प्रत्येक मामले का अंतिम निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।

  • फेसबुक पर राकेश बनकर दोस्ती, असल में निकला फैजान; 24 वर्षीय युवती ने लव जिहाद, बलात्कार और धर्मांतरण के आरोपों में FIR दर्ज कराई

    फेसबुक पर राकेश बनकर दोस्ती, असल में निकला फैजान; 24 वर्षीय युवती ने लव जिहाद, बलात्कार और धर्मांतरण के आरोपों में FIR दर्ज कराई


    भोपाल। राजधानी में एक बार फिर लव जिहाद और दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। करोंद क्षेत्र की 24 वर्षीय युवती ने छोला थाने में आरोपी फैजान पुत्र रमजान के खिलाफ बलात्कार, धमकी, ब्लैकमेल और जबरन धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने बलात्कार के मामले में तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया है, जबकि लव जिहाद और धर्मांतरण के एंगल की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2022 में फेसबुक पर आरोपी ने खुद को राकेश कुशवाह बताकर दोस्ती की। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार और शारीरिक संबंधों में बदल गई। कुछ समय बाद महिला को पता चला कि आरोपी का असली नाम फैजान है और वह हिंदू नाम का उपयोग कर संपर्क कर रहा था। जब महिला ने दूरी बनाने की कोशिश की, तो आरोपी ने अपने भाई यूनुस के जरिए उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने यूनुस के खिलाफ पहले भी छोला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

    इस बीच, फैजान हत्या के एक अन्य मामले में जेल में था और दिसंबर 2025 में रिहाई के बाद फिर से महिला से संपर्क करने लगा। महिला के इनकार करने पर फैजान ने उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां दीं और जबरन बलात्कार किया। पीड़िता ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को फैजान महिला को जबरन कहीं ले जा रहा था, तभी जेल रोड पर एक होटल के पास दुकानदारों की मदद से वह बच निकली। इसके बाद बजरंग दल के सदस्यों की सहायता से महिला थाने पहुंची और पूरी घटना की शिकायत की।

    युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी ने लगातार ब्लैकमेल किया और उसे सोशल मीडिया पर भी परेशान किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 बलात्कार 506 आपराधिक धमकी 354 और अन्य संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

    लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के आरोपों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम गठित की है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी की तलाश में छापेमारी की जा रही है। पीड़िता ने सोशल मीडिया पर भी मदद की अपील की है, जबकि पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की गुहार लगाई है। इस घटना ने शहर में सुरक्षा और सोशल मीडिया पर पहचान छुपाकर संबंध बनाने के खतरों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • Greater Noida में बड़े पैमाने पर चल रहा धर्मांतरण का खेल… हिन्दुओं को लालच देकर बनाया जा रहा ईसाई

    Greater Noida में बड़े पैमाने पर चल रहा धर्मांतरण का खेल… हिन्दुओं को लालच देकर बनाया जा रहा ईसाई


    ग्रेटर नोएडा।
    गौतम बुद्ध नगर जिले (Gautam Buddha Nagar District) में धर्मांतरण (Conversion.) के लिए लोगों को प्रलोभन देकर उकसाने का मामला पिछले पन्द्रह साल से चल रहा है। दादरी (Dadri) से इसकी शुरुआत हुई जो धीरे-धीरे कस्बे से निकलकर शहर की ओर बढ़ रहा है। हिंदू संगठनों का कहना है कि पुलिस इसमें कार्रवाई करती है लेकिन, इसकी जड़ तक नहीं पहुंच पाती। इससे यह मामला अब बड़े स्तर पर पहुंच गया है।


    15 साल से चल रहा धर्मांतरण का रैकेट

    दादरी कस्बे के गौतमपुरी मोहल्ले में करीब पन्द्रह साल पहले ईसाई धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों को प्रलोभन देने के लिए रविवार को प्रार्थना सभा कराते थे। एक हिंदू संगठन से जुड़े पदाधिकारी ने बताया कि मोहल्ले में सार्वजनिक स्थल पर चोरी छिपे सभा आयोजित की जाती थी, लेकिन इस धर्मांतरण को लेकर लोग जागरुक नहीं थे। कोई विरोध भी नहीं करता था। एक लाख रुपये का प्रलोभन देकर धर्म के प्रति लोगों को उकसाया जाता था। उसे दौरान कुछ लोगों ने इसकी शिकायत भी की थी। पुलिस मौके पर पहुंचती थी। इसके बाद धर्म परिवर्तन कराने वाले लोग वहां से भाग जाते थे।


    सेक्टर डेल्टा दो में भी ऐसा मामला सामने आया था

    सेक्टर डेल्टा-2 में हिंदू परिवार की महिला को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच देने पहुंचीं महिलाओं समेत चार के खिलाफ केस दर्ज किया गया। सभी आरोपी घर में हिंदू परिवार की महिला को धन का लालच देकर धर्मांतरण का दबाव बना रहे थे।