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  • धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा

    धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा


    नई दिल्ली ।
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेता है, तो वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन का प्रभाव भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत दर्ज आपराधिक मामलों पर नहीं पड़ेगा और ऐसे मामलों की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

    यह मामला एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा था, जिसमें महिला ने अपने रिश्तेदारों के खिलाफ मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। शिकायत में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं भी शामिल की गई थीं। विवाद की पृष्ठभूमि में परिवार के भीतर साथ रहने के दौरान स्वच्छता, पानी के उपयोग और घरेलू व्यवस्थाओं को लेकर मतभेद सामने आए थे।

    सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि विवाह के समय महिला ने अपने पति के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। उसने अपना नाम भी बदल लिया था और लंबे समय से मुस्लिम धर्म का पालन कर रही थी। इसी आधार पर अदालत के समक्ष यह कानूनी प्रश्न उठा कि क्या धर्म परिवर्तन के बाद भी वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संरक्षण की पात्र मानी जा सकती है।

    आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि यह मूल रूप से पारिवारिक और संपत्ति से जुड़ा विवाद है तथा अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते। वहीं सरकारी पक्ष ने भी सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति को एससी/एसटी अधिनियम के तहत मिलने वाला संरक्षण उपलब्ध नहीं रहता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।

    न्यायमूर्ति वृषाली वी. जोशी की एकल पीठ ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इस आधार पर अदालत ने आरोपियों को इस विशेष अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों से राहत प्रदान की। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि शिकायत में भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए अन्य आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और उनकी सुनवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी।

    अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि विशेष कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार और संरक्षण संबंधित वैधानिक प्रावधानों तथा न्यायालयों की स्थापित व्याख्याओं के अनुरूप ही निर्धारित किए जाते हैं। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि यदि किसी मामले में अन्य आपराधिक आरोप बनते हैं, तो केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर उन मामलों की सुनवाई समाप्त नहीं हो जाती।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दायरे और धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनी प्रभावों को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान संबंधित कानूनों की व्याख्या और न्यायिक दृष्टिकोण को समझने में सहायता मिलेगी, जबकि प्रत्येक मामले का अंतिम निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।

  • फेसबुक पर राकेश बनकर दोस्ती, असल में निकला फैजान; 24 वर्षीय युवती ने लव जिहाद, बलात्कार और धर्मांतरण के आरोपों में FIR दर्ज कराई

    फेसबुक पर राकेश बनकर दोस्ती, असल में निकला फैजान; 24 वर्षीय युवती ने लव जिहाद, बलात्कार और धर्मांतरण के आरोपों में FIR दर्ज कराई


    भोपाल। राजधानी में एक बार फिर लव जिहाद और दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। करोंद क्षेत्र की 24 वर्षीय युवती ने छोला थाने में आरोपी फैजान पुत्र रमजान के खिलाफ बलात्कार, धमकी, ब्लैकमेल और जबरन धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने बलात्कार के मामले में तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया है, जबकि लव जिहाद और धर्मांतरण के एंगल की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2022 में फेसबुक पर आरोपी ने खुद को राकेश कुशवाह बताकर दोस्ती की। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार और शारीरिक संबंधों में बदल गई। कुछ समय बाद महिला को पता चला कि आरोपी का असली नाम फैजान है और वह हिंदू नाम का उपयोग कर संपर्क कर रहा था। जब महिला ने दूरी बनाने की कोशिश की, तो आरोपी ने अपने भाई यूनुस के जरिए उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने यूनुस के खिलाफ पहले भी छोला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

    इस बीच, फैजान हत्या के एक अन्य मामले में जेल में था और दिसंबर 2025 में रिहाई के बाद फिर से महिला से संपर्क करने लगा। महिला के इनकार करने पर फैजान ने उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां दीं और जबरन बलात्कार किया। पीड़िता ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को फैजान महिला को जबरन कहीं ले जा रहा था, तभी जेल रोड पर एक होटल के पास दुकानदारों की मदद से वह बच निकली। इसके बाद बजरंग दल के सदस्यों की सहायता से महिला थाने पहुंची और पूरी घटना की शिकायत की।

    युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी ने लगातार ब्लैकमेल किया और उसे सोशल मीडिया पर भी परेशान किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 बलात्कार 506 आपराधिक धमकी 354 और अन्य संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

    लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के आरोपों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम गठित की है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी की तलाश में छापेमारी की जा रही है। पीड़िता ने सोशल मीडिया पर भी मदद की अपील की है, जबकि पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की गुहार लगाई है। इस घटना ने शहर में सुरक्षा और सोशल मीडिया पर पहचान छुपाकर संबंध बनाने के खतरों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • Greater Noida में बड़े पैमाने पर चल रहा धर्मांतरण का खेल… हिन्दुओं को लालच देकर बनाया जा रहा ईसाई

    Greater Noida में बड़े पैमाने पर चल रहा धर्मांतरण का खेल… हिन्दुओं को लालच देकर बनाया जा रहा ईसाई


    ग्रेटर नोएडा।
    गौतम बुद्ध नगर जिले (Gautam Buddha Nagar District) में धर्मांतरण (Conversion.) के लिए लोगों को प्रलोभन देकर उकसाने का मामला पिछले पन्द्रह साल से चल रहा है। दादरी (Dadri) से इसकी शुरुआत हुई जो धीरे-धीरे कस्बे से निकलकर शहर की ओर बढ़ रहा है। हिंदू संगठनों का कहना है कि पुलिस इसमें कार्रवाई करती है लेकिन, इसकी जड़ तक नहीं पहुंच पाती। इससे यह मामला अब बड़े स्तर पर पहुंच गया है।


    15 साल से चल रहा धर्मांतरण का रैकेट

    दादरी कस्बे के गौतमपुरी मोहल्ले में करीब पन्द्रह साल पहले ईसाई धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों को प्रलोभन देने के लिए रविवार को प्रार्थना सभा कराते थे। एक हिंदू संगठन से जुड़े पदाधिकारी ने बताया कि मोहल्ले में सार्वजनिक स्थल पर चोरी छिपे सभा आयोजित की जाती थी, लेकिन इस धर्मांतरण को लेकर लोग जागरुक नहीं थे। कोई विरोध भी नहीं करता था। एक लाख रुपये का प्रलोभन देकर धर्म के प्रति लोगों को उकसाया जाता था। उसे दौरान कुछ लोगों ने इसकी शिकायत भी की थी। पुलिस मौके पर पहुंचती थी। इसके बाद धर्म परिवर्तन कराने वाले लोग वहां से भाग जाते थे।


    सेक्टर डेल्टा दो में भी ऐसा मामला सामने आया था

    सेक्टर डेल्टा-2 में हिंदू परिवार की महिला को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच देने पहुंचीं महिलाओं समेत चार के खिलाफ केस दर्ज किया गया। सभी आरोपी घर में हिंदू परिवार की महिला को धन का लालच देकर धर्मांतरण का दबाव बना रहे थे।