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  • IIT इंदौर का 14वां दीक्षांत समारोह 27 जून को: इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. सिवन करेंगे अध्यक्षता, प्रो. अभय करांदिकर होंगे मुख्य अतिथि

    IIT इंदौर का 14वां दीक्षांत समारोह 27 जून को: इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. सिवन करेंगे अध्यक्षता, प्रो. अभय करांदिकर होंगे मुख्य अतिथि


    मध्य प्रदेश। देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर अपने 14वें दीक्षांत समारोह के आयोजन की तैयारियों में जुट गया है। संस्थान का यह बहुप्रतीक्षित समारोह 27 जून 2026 (शनिवार) को आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां और प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

    आईआईटी इंदौर प्रशासन के अनुसार इस वर्ष के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य तथा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के पूर्व सचिव प्रो. अभय करांदिकर होंगे। वहीं समारोह की अध्यक्षता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन और आईआईटी इंदौर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के वर्तमान चेयरपर्सन डॉ. के. सिवन करेंगे।

    दोपहर 2:30 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के निदेशक के स्वागत संबोधन और वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुति के साथ होगी। इसके बाद बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन डॉ. के. सिवन विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रो. अभय करांदिकर का दीक्षांत भाषण होगा, जिसमें वे विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के संबंध में मार्गदर्शन देंगे।

    समारोह के दौरान स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और अन्य प्रतिष्ठित सम्मान भी दिए जाएंगे। संस्थान की परंपरा के अनुसार डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सामूहिक रूप से शपथ ग्रहण करेंगे और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेंगे।

    आईआईटी इंदौर ने समारोह में शामिल होने वाले अभिभावकों, शोधकर्ताओं और अन्य अतिथियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की है। संस्थान ने इंदौर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से सीधे कैंपस तक पहुंचने के लिए डिजिटल क्यूआर कोड आधारित नेविगेशन सुविधा उपलब्ध कराई है। इससे बाहरी राज्यों और अन्य देशों से आने वाले मेहमानों को संस्थान तक पहुंचने में आसानी होगी।

    जो लोग किसी कारणवश समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकेंगे, उनके लिए भी संस्थान ने विशेष व्यवस्था की है। दीक्षांत समारोह का सीधा प्रसारण आईआईटी इंदौर की आधिकारिक वेबसाइट पर किया जाएगा। दर्शक दोपहर 2:30 बजे से लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से पूरे कार्यक्रम को देख सकेंगे।

    आईआईटी इंदौर का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, शोध और उपलब्धियों का उत्सव भी माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी संस्थान को उम्मीद है कि यहां से निकलने वाले युवा देश और दुनिया में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।

  • चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश

    चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश


    नई दिल्ली। चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में नवम दीक्षा समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें कुल 2377 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर दिव्यांग विद्यार्थियों की उपलब्धियों की विशेष सराहना की गई और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को प्रेरणादायक बताया गया।

    समारोह में 140 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 6 विद्यार्थियों को कुलाधिपति पदक तथा 50 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने की।

    मुख्य अतिथि नरेंद्र कश्यप ने दिव्यांग विद्यार्थियों की मेहनत और सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय समाज में प्रेरणा का केंद्र बन रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

    इस अवसर पर सुहास एलवाई और अजीत कुमार को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।

    अपने संबोधन में रामभद्राचार्य ने कहा कि सच्ची दीक्षा वही है, जो व्यक्ति को केवल ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि उसे राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित भी करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण को अपनाने का आह्वान किया।