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  • TISS दीक्षांत समारोह में बड़ा बदलाव, CJI सूर्यकांत की जगह डॉ. सीएस प्रमेश होंगे 22 अगस्त को मुख्य अतिथि

    TISS दीक्षांत समारोह में बड़ा बदलाव, CJI सूर्यकांत की जगह डॉ. सीएस प्रमेश होंगे 22 अगस्त को मुख्य अतिथि

    नई दिल्ली । मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने 86वें दीक्षांत समारोह के लिए मुख्य अतिथि के रूप में किए गए बदलाव की जानकारी दी है। 22 अगस्त को आयोजित होने वाले समारोह में अब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मुख्य अतिथि नहीं होंगे। उनकी जगह टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सीएस प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब हाल के दिनों में CJI को लेकर हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में छात्रों के विरोध का मामला चर्चा में रहा है।

    TISS के दीक्षांत समारोह के लिए पहले CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्हें समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित भी करना था। हालांकि अब संस्थान ने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए डॉ. सीएस प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया है। डॉ. प्रमेश टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक होने के साथ मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर में थोरैसिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष भी हैं।

    TISS का यह दीक्षांत समारोह पहले 2 अगस्त को आयोजित किया जाना था, लेकिन आयोजन से ठीक दो दिन पहले इसे स्थगित कर दिया गया था। संस्थान ने उस समय अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देते हुए कार्यक्रम को टालने का फैसला किया था। संस्थान के अनुसार, उस समय छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आमंत्रित अतिथियों की सुरक्षा के साथ सामान्य कैंपस गतिविधियों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता थी।

    कार्यक्रम स्थगित किए जाने के बाद CJI सूर्यकांत की संभावित मौजूदगी को लेकर कैंपस में विरोध की आशंका भी सामने आई थी। इसके बाद अब 22 अगस्त के कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि बदलने का निर्णय लिया गया है। हालांकि संस्थान की ओर से बदलाव के पीछे किसी एक कारण को औपचारिक रूप से अंतिम आधार के रूप में नहीं बताया गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में NALSAR का विवाद भी महत्वपूर्ण है। हैदराबाद स्थित इस प्रमुख विधि विश्वविद्यालय में CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी। शुरुआत में करीब 70 छात्रों के विरोध से शुरू हुआ मामला बाद में 450 से अधिक छात्रों तक पहुंच गया था।

    छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र देकर निमंत्रण वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पूरे 2026 बैच के छात्रों के वकील के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद CJI सूर्यकांत ने छात्रों को अपनी बात रखने के अधिकार पर जोर दिया और दंडात्मक कार्रवाई से बचने की बात कही।

    इसके बाद संबंधित निर्देश वापस ले लिया गया और विवाद कुछ हद तक शांत हुआ। CJI सूर्यकांत ने बाद में यह भी स्पष्ट किया था कि उन्होंने NALSAR के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था। ऐसे में उनके समारोह में शामिल होने का प्रश्न भी नहीं उठता था।

    TISS के मामले में मुख्य अतिथि के बदलाव ने उच्च शिक्षा संस्थानों में दीक्षांत समारोहों के आयोजन, कैंपस वातावरण और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल 22 अगस्त के समारोह में डॉ. सीएस प्रमेश विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे और दीक्षांत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाएंगे।

  • CJI सूर्यकांत के बयान के बाद भी NALSAR विवाद जारी, NLSIU छात्रों ने दीक्षांत समारोह में उनके आमंत्रण पर जताई आपत्ति

    CJI सूर्यकांत के बयान के बाद भी NALSAR विवाद जारी, NLSIU छात्रों ने दीक्षांत समारोह में उनके आमंत्रण पर जताई आपत्ति


    नई दिल्ली । 
    भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बयान और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के विवादित आदेश को वापस लिए जाने के बावजूद NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से जुड़ा विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अब नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी इस मामले में NALSAR के विद्यार्थियों के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने CJI सूर्यकांत और BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को आगामी दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने को लेकर आपत्ति जताई है।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों ने CJI के प्रस्तावित कैंपस दौरे को लेकर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद BCI ने 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। आदेश में राज्य बार काउंसिलों को अगले निर्देश तक इन छात्रों का नामांकन नहीं करने को कहा गया था।

    मामला सामने आने के बाद व्यापक प्रतिक्रिया हुई और कुछ ही समय में BCI ने अपना आदेश वापस ले लिया। इसके बाद 14 अगस्त को CJI सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह उनके और छात्रों के बीच की बातचीत है। उन्होंने छात्रों के विरोध के अधिकार पर भी जोर दिया और BCI के कदम पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी।

    इसके बावजूद NALSAR के छात्रों के समर्थन में अब NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों का बयान सामने आया है। 15 अगस्त को जारी इस बयान पर 2026 बैच के 165 स्नातक छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें BCI की ओर से NALSAR के खिलाफ की गई कार्रवाई की आलोचना की गई है।

    छात्रों का कहना है कि भले ही BCI ने नामांकन रोकने और जांच से संबंधित कार्रवाई समाप्त कर दी हो, लेकिन किसी वैधानिक संस्था द्वारा विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई शुरू किया जाना गंभीर विषय है। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्रों के विरोध के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।

    NLSIU से जुड़े छात्रों और पूर्व छात्रों ने यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है। ऐसे में उनका मानना है कि जिन छात्रों के साथ विवाद हुआ, उनके प्रति कथित तौर पर कठोर रुख अपनाने वाले लोगों को उसी समारोह में डिग्री प्रदान करने के लिए आमंत्रित करना उचित नहीं होगा।

    बयान में BCI से NALSAR के छात्रों और फैकल्टी से बिना शर्त माफी मांगने की मांग भी की गई है। छात्रों ने कहा कि विरोध और अपनी बात रखने के अधिकार को किसी संस्थागत कार्रवाई के डर से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे मामलों का असर केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश के दूसरे छात्रों और नागरिकों तक भी संदेश पहुंचता है।

    NLSIU के छात्रों ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर भी आपत्ति जताई है। साथ ही उन्होंने NALSAR के उस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग का समर्थन किया है, जिसके तहत CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जाना प्रस्तावित है।

    फिलहाल BCI का पूर्व आदेश वापस लिया जा चुका है और CJI भी छात्रों के साथ संवाद के अधिकार की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद छात्रों और पूर्व छात्रों की नई प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि संस्थागत अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने को लेकर विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।

  • राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई


    उत्तर प्रदेश । मेरठ स्थित Chaudhary Charan Singh University के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल Anandiben Patel ने विश्वविद्यालयों में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि कई विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में बाहर से आने वाले खाने के जरिए ड्रग्स की सप्लाई हो रही है और परिसर के बाहर शराब की बोतलें भी मिली हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह कई कुलपतियों और हॉस्टल प्रबंधन को तस्वीरें भी दिखा चुकी हैं।

    समारोह में राज्यपाल ने 199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को खत्म कर देता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

    राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने लगभग 15 विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों का निरीक्षण किया है, जहां कई चिंताजनक स्थितियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि चार पीढ़ियों से उनके परिवार में चाय तक नहीं पी जाती, जबकि आज के कई युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की अपील की।

    अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी विषय की पूरी जानकारी के केवल भीड़ का हिस्सा बन जाना उचित नहीं है। विद्यार्थियों को देशहित, संविधान और महापुरुषों के विचारों को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।

    राज्यपाल ने बेटियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में लगभग 75 प्रतिशत स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और समाज को उनके प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए।

    उन्होंने शिक्षकों से भी शोध और लेखन पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया। उनका कहना था कि लंबे समय तक अध्यापन करने वाले शिक्षकों को अधिक पुस्तकें और शोध कार्य प्रकाशित करने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को बेहतर शैक्षणिक सामग्री मिल सके।

    राज्यपाल ने अपने हालिया रेल सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रेलवे ट्रैक के आसपास गंदगी और जलभराव की तस्वीरें संबंधित अधिकारियों को भेजने के बाद सफाई कराई गई। साथ ही उन्होंने युवाओं से अंतरिक्ष विज्ञान, नई तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि देश के वैज्ञानिक और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

  • उच्च शिक्षा संस्थानों में बड़ा बदलाव, डिग्री प्रमाणपत्रों पर ‘India’ की जगह ‘Bharat’ लिखने का फैसला लागू

    उच्च शिक्षा संस्थानों में बड़ा बदलाव, डिग्री प्रमाणपत्रों पर ‘India’ की जगह ‘Bharat’ लिखने का फैसला लागू

    नई दिल्ली । देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों ने शैक्षणिक दस्तावेजों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए डिग्री, मार्कशीट और अन्य प्रमाणपत्रों पर ‘India’ शब्द के स्थान पर ‘Bharat’ का उपयोग करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद उच्च शिक्षा जगत में नई बहस शुरू हो गई है और इसे राष्ट्रीय पहचान तथा सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस बदलाव का प्रभाव सबसे पहले विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में दिखाई देगा, जहां विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली नई डिग्रियों और प्रमाणपत्रों पर ‘भारत’ शब्द अंकित होगा। संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय संस्थागत प्रस्तावों और कार्यकारिणी परिषदों की स्वीकृति के बाद लिया गया है। इसके तहत हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा में तैयार किए जाने वाले दस्तावेजों में भी आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं।

    विश्वविद्यालयों का तर्क है कि देश का आधिकारिक और ऐतिहासिक नाम ‘भारत’ है, इसलिए शैक्षणिक दस्तावेजों में उसी नाम का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना गया है। कुछ शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इससे भारतीय पहचान और सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त किया जा सकेगा। इसी सोच के आधार पर कई संस्थानों ने अपने दस्तावेजों के प्रारूप में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि यह पहल केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के कई विश्वविद्यालय भी इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। विभिन्न संस्थानों ने अपने-अपने स्तर पर प्रस्ताव पारित कर नए प्रारूप को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ विश्वविद्यालयों ने दावा किया है कि उन्होंने इस परिवर्तन को सबसे पहले अपनाने की पहल की थी और अब अन्य संस्थान भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इस निर्णय के समर्थन में यह तर्क भी दिया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हाल के वर्षों में ‘भारत’ शब्द के उपयोग को अधिक प्रमुखता मिली है। समर्थकों का मानना है कि जब आधिकारिक और राजनयिक अवसरों पर ‘भारत’ का प्रयोग किया जा सकता है, तो शैक्षणिक दस्तावेजों में भी उसी नाम का उपयोग किया जाना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि इससे देश की ऐतिहासिक पहचान और संवैधानिक भावना को मजबूती मिलेगी।

    हालांकि इस विषय पर अलग-अलग मत भी सामने आ रहे हैं। कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि ‘India’ और ‘Bharat’ दोनों ही नाम संवैधानिक रूप से मान्य हैं और लंबे समय से समान रूप से उपयोग में रहे हैं। ऐसे में किसी एक नाम को प्राथमिकता देने का निर्णय प्रशासनिक और संस्थागत नीति का विषय हो सकता है। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे सांस्कृतिक और भाषाई पहचान से जुड़ा स्वाभाविक परिवर्तन मान रहे हैं।

    उच्च शिक्षा क्षेत्र में यह बदलाव केवल शब्द परिवर्तन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पहचान, परंपरा और प्रशासनिक दृष्टिकोण के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यदि अधिक विश्वविद्यालय इस पहल को अपनाते हैं, तो देशभर के लाखों विद्यार्थियों को जारी होने वाले शैक्षणिक दस्तावेजों का स्वरूप भी बदलता नजर आ सकता है।

    फिलहाल कई विश्वविद्यालयों में नई डिग्रियों और प्रमाणपत्रों के प्रारूप तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही दीक्षांत समारोहों और आगामी शैक्षणिक सत्रों में जारी होने वाले दस्तावेजों पर ‘भारत’ शब्द के उपयोग को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। यह बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है और इसके दूरगामी प्रभावों पर भी नजर रखी जा रही है।