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  • कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    नई दिल्ली । राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नवीनतम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। प्रतिवेदन में स्वास्थ्य सेवाओं, प्राकृतिक आपदा राहत वितरण तथा बजटीय आवंटन के निष्पादन में कई स्तरों पर पाई गई कमियों को रेखांकित किया गया है। महामारी के संवेदनशील दौर में उपलब्ध कराए गए संसाधनों के पूर्ण उपयोग न होने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में अनुपालन की अनिमितताओं पर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    लेखा परीक्षा रिपोर्ट के मुख्य अंशों के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा निर्धारित समय सीमा तक अप्रयुक्त पड़ा रहा। वैश्विक महामारी के समय उपलब्ध कराए गए महत्वपूर्ण चिकित्सा संसाधनों, जैसे ऑक्सीजन संयंत्रों और सघन चिकित्सा इकाई उपकरणों के कई केंद्रों पर चालू न होने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के उपरांत राहत राशि के पुनरावृत्त वितरण के मामले भी सामने आए हैं, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। इन निष्कर्षों ने आपदा प्रबंधन और लाभार्थी सत्यापन प्रणालियों की दक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रतिवेदन में औद्योगिक विकास हेतु भूमि आवंटन और विभिन्न राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी प्रक्रियागत त्रुटियों की ओर संकेत किया गया है। निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन न होने से हुए वित्तीय नुकसान के साथ-साथ राज्य के समग्र राजकोषीय घाटे और बढ़ते ऋण भार को लेकर चिंता जताई गई है। बजट के एक बड़े हिस्से का वर्ष के अंत तक बिना खर्च हुए रह जाना और अतिरिक्त व्यय के लिए आवश्यक विधायी स्वीकृतियों के लंबित रहने को वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से गंभीर माना जा रहा है।

    संसदीय पटल पर रिपोर्ट की प्रति रखे जाने के उपरांत मुख्य विपक्षी दल ने इन निष्कर्षों को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कड़े दंडात्मक कदमों की मांग की है। विपक्षी प्रतिनिधियों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में पाई गई यह ढिलाई राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए अधिकांश बिंदु प्रक्रियागत और तकनीकी प्रकृति के हैं, जिन पर विभागीय समीक्षा के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले

    आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले


    नई दिल्‍ली । आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले सामने आने के बाद बिहार में भी मामले सामने आ रहे हैं. बिहार के भागलपुर जिले में एक 65 साल के बुजुर्ग और उनकी 35 साल की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. दोनों को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल यानी जेएलएनएमसीएच में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है. अस्पताल अधीक्षक एचपी दुबे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. शुरुआत में दुबे ने दूसरे मरीज को बुजुर्ग की पत्नी बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि वह उनकी बेटी हैं.

    अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक बुजुर्ग की तबीयत 15 जुलाई को बिगड़ी थी. शुरुआत में उनका इलाज एक निजी क्लिनिक में हुआ, लेकिन कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर उन्हें जेएलएनएमसीएच रेफर किया गया.

    रविवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और आरटी-पीसीआर जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद जब उनके संपर्क में आए लोगों की जांच की गई तो उनकी बेटी भी पॉजिटिव पाई गईं.

    अस्पताल अधीक्षक दुबे ने बताया कि दोनों मरीजों को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया है और डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी हालत पर नजर रख रही है और इलाज कर रही है. उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है और जिला कार्यक्रम प्रबंधक को निर्देश दिया गया है कि दोनों मरीजों के आसपास रहने वाले लोगों की भी जांच कराई जाए.

    भागलपुर जिला प्रशासन ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर दोनों पॉजिटिव मामलों की पुष्टि की है. जेएलएनएमसीएच के मेडिसिन विभाग के प्रमुख राजकमल चौधरी ने कहा कि दोनों मरीजों की हालत स्थिर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें लेकिन घबराएं नहीं. प्रशासन ने कहा कि सही सावधानी और समय पर इलाज से कोरोना के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.