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  • ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद

    ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय हालातों को देखते हुए देशवासियों से संयमित जीवनशैली अपनाने की बात कही थी, उस पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग अपनाने, एक साल तक विदेश यात्रा सीमित करने, सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने जैसी अपीलें की थीं। उनका कहना था कि इससे देश की ऊर्जा खपत घटेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।

    इस अपील के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि देश पहले ही कोरोना महामारी के आर्थिक झटकों से उबर रहा है और आम जनता अभी भी रोज़गार और महंगाई के दबाव में जी रही है। ऐसे में सरकार को केवल संयम की अपील करने के बजाय लोगों को वास्तविक आर्थिक राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    मायावती ने अपने बयान में कहा कि देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोग पहले ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और उनके पास अब और ज्यादा आर्थिक बोझ सहने की क्षमता नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के कारण आर्थिक स्थिति और बिगड़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ेगा।

    उन्होंने कोरोना काल को याद करते हुए कहा कि उस समय भी जनता ने भारी कठिनाइयों का सामना किया था और आज भी उसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह केवल सुझाव या अपील देने के बजाय गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ठोस आर्थिक सहायता और राहत योजनाएं लागू करे।

    पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य ऊर्जा बचत और आयात पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर संयम और संसाधनों के बेहतर उपयोग से आर्थिक दबाव को कम किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर इस मुद्दे ने एक बार फिर से देश में आर्थिक नीतियों और जनता पर पड़ने वाले असर को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, जहां एक ओर सरकार संयम और बचत पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष गरीब और मध्यम वर्ग की वास्तविक स्थिति को केंद्र में रखकर राहत की मांग कर रहा है।