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  • भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत करों से राजस्व में वृद्धि

    भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत करों से राजस्व में वृद्धि

    नई दिल्ली ।भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 14 अक्टूबर तक पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस दौरान कॉरपोरेट टैक्स, गैर-कॉरपोरेट टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) से होने वाली प्राप्तियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। जारी आंकड़ों के अनुसार, कर रिफंड को घटाने के बाद प्राप्त शुद्ध राजस्व में यह वृद्धि सामने आई है।

    रिफंड से पहले सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी बढ़ोतरी हुई। चालू वित्त वर्ष में 14 अक्टूबर तक यह 14.89 प्रतिशत बढ़कर 16.03 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.95 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस तरह सकल संग्रह में सालाना आधार पर उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।

    इस अवधि में करदाताओं को जारी किए गए रिफंड की राशि भी बढ़ी। पिछले वर्ष की समान अवधि में 2.13 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए थे, जबकि चालू वित्त वर्ष में यह रकम बढ़कर 2.65 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसमें सालाना आधार पर 24.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिफंड को समायोजित करने के बाद ही शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह का आंकड़ा निकाला जाता है।

    कॉरपोरेट टैक्स के शुद्ध संग्रह में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। चालू वित्त वर्ष में 14 अक्टूबर तक यह राशि बढ़कर 5.99 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 4.97 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह हुआ था। इस आंकड़े से दोनों अवधियों के बीच कॉरपोरेट कर राजस्व में वृद्धि का संकेत मिलता है।

    गैर-कॉरपोरेट करों के शुद्ध संग्रह में भी इजाफा हुआ। इस श्रेणी में व्यक्तियों और अन्य गैर-कॉरपोरेट इकाइयों की ओर से चुकाए गए कर शामिल हैं। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह संग्रह 6.54 लाख करोड़ रुपये था, जो चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 6.92 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स से प्राप्त शुद्ध राजस्व में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि दर्ज की गई। एसटीटी का शुद्ध संग्रह पिछले वर्ष के 30,901.81 करोड़ रुपये से बढ़कर 46,840.43 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, अन्य करों की श्रेणी में शुद्ध संग्रह नकारात्मक रहा। यह एक वर्ष पहले के 282.39 करोड़ रुपये से घटकर माइनस 1.64 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    सकल संग्रह के आंकड़ों पर नजर डालें तो कॉरपोरेट कर प्राप्तियां पिछले वर्ष की समान अवधि के 6.44 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.53 लाख करोड़ रुपये हो गईं। इसी तरह सकल गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह 7.20 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.03 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सकल एसटीटी संग्रह भी 30,901.81 करोड़ रुपये से बढ़कर 46,840.43 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, अन्य करों का सकल संग्रह 301.22 करोड़ रुपये से घटकर 18.87 करोड़ रुपये रह गया।

    प्रत्यक्ष कर संग्रह में कंपनियों के अलावा व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ), फर्मों, एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स (एओपी), बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स (बीओआई), स्थानीय निकायों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्तियों द्वारा चुकाए गए कर भी शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष के आंकड़े 14 अक्टूबर तक की अवधि के हैं और इनकी तुलना पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि से की गई है।
  • भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा

    भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा


    नई दिल्ली ।
    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रदर्शन बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि ने कंपनियों के समग्र मुनाफे को मजबूती दी। हालांकि तेल विपणन कंपनियों को ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के कारण दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन से कुल आय पर इसका प्रभाव काफी हद तक संतुलित हो गया।

    तिमाही नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यदि तेल विपणन कंपनियों को अलग कर दिया जाए तो भारतीय कंपनियों की आय में सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद अधिकांश कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है और परिचालन स्तर पर बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है।

    प्रमुख क्षेत्रों में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का रहा, जहां आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। धातु क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 11 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे समग्र कॉरपोरेट आय को मजबूती मिली।

    अब तक अपने तिमाही परिणाम घोषित करने वाली निफ्टी की कई प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। औसतन कंपनियों के मुनाफे में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विश्लेषकों का अनुमान इससे काफी कम था। बड़ी संख्या में कंपनियां अपने अनुमानित लाभ से बेहतर नतीजे देने में सफल रहीं, जबकि अपेक्षाकृत कम कंपनियों के परिणाम अनुमान से कमजोर रहे।

    हालांकि सभी क्षेत्रों की स्थिति समान नहीं रही। तेल विपणन कंपनियों के अलावा सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों पर लागत और मांग से जुड़ी चुनौतियों का असर देखने को मिला। विशेष रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बनाया, जिससे इन क्षेत्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर देखें तो बड़ी कंपनियों ने स्थिर प्रदर्शन करते हुए अपनी आय में वृद्धि दर्ज की। दूसरी ओर मिड-कैप कंपनियों के समग्र आंकड़ों में गिरावट दिखाई दी, जिसका प्रमुख कारण तेल विपणन कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन रहा। हालांकि इन कंपनियों को अलग करने पर मिड-कैप श्रेणी की अधिकांश कंपनियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि व्यापक स्तर पर कारोबार की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है।

    स्मॉल-कैप कंपनियों ने इस तिमाही में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। इन कंपनियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें वित्तीय क्षेत्र की मजबूती और अनुकूल तुलनात्मक आधार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों में भी कारोबारी गतिविधियां बेहतर हो रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पहली तिमाही के मजबूत नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि आने वाले महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और पूंजी बाजार में बढ़ती गतिविधियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बावजूद मौजूदा तिमाही के परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती का सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।