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  • क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर

    क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक कथित स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त के अधिकारियों और कर्मचारियों पर जांच प्रभावित करने, क्लीनचिट दिलाने और मामलों को कमजोर करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए हैं। इस खुलासे ने प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में से एक की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय के एक टेक्नीशियन ने कथित तौर पर दावा किया कि डीएसपी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से जांच में राहत दिलाई जा सकती है। आरोप है कि एक मामले में क्लीनचिट दिलाने के लिए 3 लाख रुपये और अन्य स्तरों पर अलग-अलग रकम की मांग की गई। स्टिंग में शामिल बातचीत में एक महिला डीएसपी द्वारा कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि “चोरी सब करते हैं, जो पकड़ाया वही चोर होता है”, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।

    कथित बातचीत के दौरान अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया, नोटिस, वॉयस सैंपल और दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा की। आरोप है कि जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी और ट्रांसक्रिप्ट तक उपलब्ध कराने की पेशकश की गई। इतना ही नहीं, कथित तौर पर पैसे नहीं मिलने पर संबंधित पक्ष पर दबाव बनाने और जांच प्रभावित करने जैसी बातें भी सामने आईं।

    मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि लोकायुक्त द्वारा प्रस्तुत खात्मा रिपोर्टों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच विशेष अदालत ने लोकायुक्त की ओर से पेश की गई कई खात्मा रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने जांच में कमियां, अधूरे साक्ष्य और आवश्यक गवाहों के बयान दर्ज न किए जाने जैसी खामियों की ओर संकेत किया।

    आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में ट्रैप कार्रवाई की संख्या बढ़ी है, लेकिन दोषसिद्धि के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे जांच की गुणवत्ता और अभियोजन की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्था पर ही ऐसे आरोप लगते हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।

    हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या लोकायुक्त संगठन की ओर से अंतिम और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने और सक्षम एजेंसियों द्वारा तथ्यों की पुष्टि होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

  • लापरवाही या भ्रष्टाचार ,लोकायुक्त की कार्रवाई से हिला शिक्षा विभाग, DEO सहित कई पर मामला दर्ज

    लापरवाही या भ्रष्टाचार ,लोकायुक्त की कार्रवाई से हिला शिक्षा विभाग, DEO सहित कई पर मामला दर्ज


    सिंगरौली । सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग में सामने आए करोड़ों रुपए के कथित घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है लंबे समय से चल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद अब लोकायुक्त ने सख्त कदम उठाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी समेत कई जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया है इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है

    पूरा मामला शिक्षा विभाग में विभिन्न मदों में की गई भारी भरकम खरीदी से जुड़ा है शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए पद का दुरुपयोग किया और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया जांच में सामने आया कि जिले की 558 शालाओं के लिए स्वच्छता और कीटाणुशोधन सामग्री की खरीदी की गई जिस पर करीब 97 लाख 67 हजार रुपए खर्च किए गए इसके अलावा 19 विद्यालयों के लिए वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित करने के नाम पर लगभग 4 करोड़ 68 लाख रुपए खर्च किए गए

    यही नहीं 61 विद्यालयों में विद्युत व्यवस्था उपकरण और सामान्य मरम्मत सामग्री की खरीदी पर भी करीब 3 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च किए गए इन सभी खर्चों में टेंडर प्रक्रिया स्वीकृति और भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठे दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि कई जगहों पर निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की कमी रही

    लोकायुक्त रीवा की टीम ने 15 अप्रैल 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली पहुंचकर कार्रवाई की और खरीदी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए इन दस्तावेजों में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कागजात स्वीकृति आदेश सप्लाई रिकॉर्ड बिल और भुगतान संबंधी फाइलें शामिल हैं इन सभी दस्तावेजों के आधार पर अब पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस स्तर पर और किस तरह से अनियमितताएं की गईं

    इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सूर्यभान सिंह सहायक संचालक शिक्षा राजधर साकेत जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल और सहायक परियोजना समन्वयक वित्त छविलाल सिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है

    लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान प्रारंभिक रूप से अनियमितताएं सामने आई हैं जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई है अब जब्त किए गए दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की परत दर परत जांच की जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके

    इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा यह मामला आने वाले समय में और बड़े खुलासों की ओर इशारा कर रहा है और पूरे प्रदेश की नजर अब इस जांच पर टिकी हुई है

  • शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार, 18 स्कूलों में बिना निर्माण करोड़ों का भुगतान, बीईओ सहित 22 आरोपी

    शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार, 18 स्कूलों में बिना निर्माण करोड़ों का भुगतान, बीईओ सहित 22 आरोपी

    मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में स्कूल निर्माण कार्यों में 4 करोड़ 37 लाख रुपये के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि 18 स्कूलों में साइकिल स्टैंड पार्किंग और मरम्मत जैसे लघु निर्माण कार्यों के नाम पर राशि जारी कर दी गई लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया। कागजों में काम पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया और पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए। मामले में तत्कालीन बीईओ 17 प्राचार्य 3 फर्म संचालकों और एक बाबू समेत कुल 22 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।

    जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल से रामनगर की 22 स्कूलों के लिए निर्माण मद में राशि स्वीकृत हुई थी। संबंधित प्राचार्यों ने महाकाल ट्रेडर्स सतना रुद्र इंटरप्राइजेज मैहर और वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर भोपाल को वर्क ऑर्डर जारी किए। आरोप है कि बिना निर्माण कराए ही फर्मों को अग्रिम भुगतान कर दिया गया और कागजों में कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया।

    घोटाले का खुलासा तब हुआ जब सुलखमा विद्यालय में बिना काम भुगतान की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुई। शिकायत के बाद कलेक्टर मैहर के निर्देश पर एसडीएम रामनगर शिव प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में जांच समिति गठित की गई। जांच में 18 स्कूलों में मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं पाया गया जबकि करोड़ों रुपये का भुगतान हो चुका था। इसे शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाला गंभीर अपराध माना गया।

    एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी बीईओ राजेश द्विवेदी ने रामनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बीएनएस की धारा 316(2) 316(5) 61(2) और 318(2) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों में महाकाल ट्रेडर्स के संचालक शुभम नायक रुद्र इंटरप्राइजेज के संचालक संजीव रजक और वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालक लकी को भी शामिल किया गया है।

    जिन 18 स्कूलों में भुगतान हुआ उनमें शासकीय हाईस्कूल बडवार मनकहरी गोविंदपुर देवरा मोलहाई सुलखमा मड़वार समेत अन्य विद्यालय शामिल हैं। प्रत्येक विद्यालय को लगभग 22 से 28 लाख रुपये तक की राशि जारी की गई। जांच में पाया गया कि कहीं साइकिल स्टैंड नहीं बना तो कहीं मरम्मत कार्य का कोई चिन्ह तक नहीं मिला।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर रीवा और संयुक्त संचालक द्वारा संबंधित अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद रामनगर थाना पुलिस विस्तृत जांच में जुटी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।यह मामला शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिन स्कूलों में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित होनी थीं वहां कागजों में निर्माण दिखाकर राशि निकाल ली गई। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और शासन की राशि की वसूली भी की जाएगी।

  • बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप

    बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप


    जबलपुर । भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेंट्रल जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में घिरे सेंट्रल जीएसटी के पूर्व अधीक्षक सोमेन गोस्वामी को विभाग ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। यह फैसला उस बहुचर्चित मामले के बाद लिया गया है, जिसमें सीबीआई ने साल 2023 में उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

    दरअसल, यह पूरा मामला राजस्थान के एक कारोबारी त्रिलोकचंद से जुड़ा है, जिनकी पान मसाला फैक्ट्री को सीजीएसटी विभाग ने सील कर दिया था। फैक्ट्री को दोबारा खोलने के एवज में कारोबारी से 35 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इस डील के तहत 25 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सीबीआई ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और CGST के चार अधिकारियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था।

    सीबीआई की विस्तृत जांच में सामने आया कि तत्कालीन अधीक्षक सोमेन गोस्वामी न सिर्फ रिश्वतखोरी में शामिल थे, बल्कि उनके पास आय से 155 प्रतिशत अधिक संपत्ति भी पाई गई। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग से मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई, जिसका नतीजा अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के रूप में सामने आया है।

    सोमेन गोस्वामी के साथ इस मामले में सहायक अधीक्षक कपिल काम्बले, इंस्पेक्टर प्रदीप हजारी, विकास गुप्ता और वीरेंद्र जैन को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इन सभी पर रिश्वत मांगने और सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे। फिलहाल विभागीय सूत्रों का कहना है कि इन अन्य अधिकारियों पर भी आने वाले समय में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    अनिवार्य सेवानिवृत्ति को सरकारी सेवा में एक बड़ी सजा माना जाता है, क्योंकि इसमें अधिकारी को समय से पहले सेवा से हटा दिया जाता है और उसकी छवि पर स्थायी दाग लग जाता है। विभाग का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश जाएगा और सरकारी महकमे में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    इस पूरे मामले के सामने आने के बाद यह एक बार फिर साबित हुआ है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जांच एजेंसियां और विभाग अब ज्यादा सख्ती बरत रहे हैं। वहीं, व्यापारियों और आम जनता के बीच यह कार्रवाई एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

    फिलहाल सीबीआई की जांच प्रक्रिया जारी है और आय से अधिक संपत्ति के मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।