Tag: Corruption Investigation

  • यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप, गोरखपुर में कर्मचारी निलंबित, लखनऊ में 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित

    यूपी के विकास प्राधिकरणों में रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप, गोरखपुर में कर्मचारी निलंबित, लखनऊ में 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास कराने और निर्माण संबंधी कामों में रिश्वत मांगने के आरोपों को लेकर कार्रवाई शुरू हो गई है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने आरोपी लिपिक निर्मल सिंह को निलंबित कर दिया है। वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वायरल ऑडियो और वीडियो में सामने आए आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इन कार्रवाइयों के बाद अब जांच रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हैं। अधिकारियों के मुताबिक जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    गोरखपुर विकास प्राधिकरण में लिपिक निर्मल सिंह के खिलाफ कार्रवाई 20 अक्टूबर को दैनिक भास्कर में स्टिंग ऑपरेशन प्रकाशित होने के बाद की गई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि नक्शा पास कराने और निर्माण संबंधी कामों के लिए लोगों से पैसे मांगे जाते थे। मामले का संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने निर्मल सिंह को निलंबित कर दिया और आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। विशेष कार्याधिकारी संजीव कुमार दीक्षित को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आरोपों की समीक्षा होगी और नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आरोपी लिपिक को लेकर अलग से आरोपपत्र जारी करने की भी तैयारी है।

    निर्मल सिंह गोरखपुर विकास प्राधिकरण में मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पर आया था और कर्मचारी संयुक्त परिषद का अध्यक्ष भी रह चुका है। उस पर आरोप है कि वह अधिकारियों से नजदीकी और संगठन में अपनी सक्रियता का इस्तेमाल कर नक्शा पास कराने अवैध निर्माण से जुड़े कामों और आवासीय योजनाओं में फ्लैट आवंटन के नाम पर लोगों से पैसे लेता था। इसके अलावा पत्रकारपुरम और वसुंधरा एन्क्लेव में करीबियों के नाम पर फ्लैट लेकर मुनाफे में बेचने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    दूसरी ओर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भी अपने अधिकारी और कर्मचारी से जुड़े वायरल ऑडियो वीडियो की जांच शुरू कर दी है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने 21 अक्टूबर को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। कमेटी में प्रभारी अधिकारी अधिष्ठान ओएसडी आईटी देवांश त्रिवेदी अधिशासी अभियंता मनोज सागर और लेखाधिकारी विनोद श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। विनोद श्रीवास्तव को सदस्य संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। जांच में जूनियर इंजीनियर राहुल प्रताप विश्वकर्मा और जोनल अधिकारी मान सिंह से जुड़े वायरल ऑडियो वीडियो की पड़ताल की जाएगी।

    दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने विकास प्राधिकरणों में कथित रिश्वतखोरी और निर्माण संबंधी अनियमितताओं की पड़ताल के लिए खुफिया कैमरे से बातचीत रिकॉर्ड की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि नक्शा और निर्माण संबंधी काम कराने के बदले पैसे मांगने की बातचीत सामने आई। इसके बाद यह सवाल उठा कि नियमों के तहत होने वाले सरकारी कामों के लिए आवेदकों से कथित तौर पर रकम क्यों मांगी जा रही है और ऐसी गतिविधियों पर विभागीय निगरानी कितनी प्रभावी है।

    अब दोनों प्राधिकरणों की जांच कमेटियों के सामने वायरल रिकॉर्डिंग की सत्यता और बातचीत की परिस्थितियों की जांच करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह पता लगाना होगा कि क्या किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगी गई और क्या इस मामले में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल हैं। फिलहाल गोरखपुर में निलंबन और लखनऊ में जांच की कार्रवाई की गई है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।

  • हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला

    हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला


    इंदौर । मध्य प्रदेश में आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीम ने बुधवार सुबह करीब 6 बजे इंदौर और देवास में एक साथ 15 ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में हेड कॉन्स्टेबल के पास करीब 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने का अनुमान सामने आया है। लोकायुक्त के अनुसार यह संपत्ति उनकी आंकी गई आय से करीब 223 प्रतिशत अधिक है। फिलहाल टीम बैंक खातों निवेश संपत्तियों और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    फिरोज खान वर्तमान में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में ड्राइवर के पद पर पदस्थ हैं। इससे पहले वह देवास के औद्योगिक थाने और बागली में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी करीब 20 साल की सरकारी सेवा बताई जा रही है। लोकायुक्त के मुताबिक वेतन के रूप में उनकी आय करीब 75 लाख रुपये आंकी गई है। अन्य स्रोतों से होने वाली आय को जोड़कर कुल आय लगभग 1.93 करोड़ रुपये मानी गई है। इसके मुकाबले शुरुआती जांच में 6.26 करोड़ रुपये की संपत्ति का अनुमान सामने आने के बाद मामले की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

    प्रारंभिक जांच में फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग नाम की फर्म होने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त के अनुसार इस फर्म के खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। वहीं उनकी परिचित रोशनी वर्मा द्वारा रोशनी सेल्स एंड सर्विस नाम से फर्म संचालित किए जाने की जानकारी भी मिली है। जमीनों की खरीद में कथित भूमिका सामने आने के बाद रोशनी वर्मा को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की फर्म के माध्यम से रियल एस्टेट में निवेश किए जाने की जानकारी की भी जांच की जा रही है।

    जांच में इंदौर जिले की सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़े सौदे का मामला भी सामने आया है। इस जमीन को लेकर शिकायतकर्ता के बेटे और उसके पिता के बीच विवाद बताया गया है। आरोप है कि इस विवाद का फायदा उठाकर फिरोज खान ने अपनी परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर शिकायतकर्ता के पिता से कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करवाया। लोकायुक्त की टीम इस सौदे से संबंधित दस्तावेजों और भूमिका की पड़ताल कर रही है।

    कार्रवाई के दौरान देवास में 11 और इंदौर में चार ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। इनमें मकान फ्लैट कृषि भूमि प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। देवास के आदर्श नगर सहित कई कॉलोनियों में संपत्तियों की जांच की जा रही है। इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में रोशनी वर्मा के निवास के अलावा स्कीम नंबर 94 के मनोरमा अपार्टमेंट और श्रीनगर कॉलोनी के श्रीदेवी अपार्टमेंट स्थित फ्लैट भी जांच के दायरे में हैं। स्कीम नंबर 94 स्थित बड़े बंगले के निचले हिस्से को किराए पर दिए जाने और उससे आय मिलने की जानकारी भी जांच में शामिल है। वीआईपी नंबर 9000 वाली स्कॉर्पियो की भी पड़ताल की जा रही है।

    लोकायुक्त की टीम बैंक खातों फर्मों के वित्तीय लेन-देन निवेश और संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार तलाशी पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और शुरुआती आंकड़ों के आधार पर संपत्ति तथा आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है।