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  • एंटी करप्शन टीम की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते पकड़ा गया लम्भुआ तहसील का कानूनगो

    एंटी करप्शन टीम की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते पकड़ा गया लम्भुआ तहसील का कानूनगो

    सुलतानपुर । सुलतानपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है जहां एंटी करप्शन टीम ने लम्भुआ तहसील में तैनात कानूनगो राजित राम शर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया इस कार्रवाई से पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है

    मामला जमीन की पैमाइश से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है जहां एक पीड़ित अपनी भूमि की नाप जोख और पैमाइश के काम को लेकर तहसील कार्यालय पहुंचा था पीड़ित का आरोप है कि काम को आगे बढ़ाने के लिए कानूनगो द्वारा अवैध रूप से पैसों की मांग की गई और बिना रिश्वत के फाइल आगे न बढ़ाने की बात कही गई

    बताया जाता है कि शुरुआत में पीड़ित ने रिश्वत देने से इनकार किया लेकिन लगातार दबाव और काम अटकने की स्थिति के चलते वह मानसिक रूप से परेशान हो गया और अंत में उसे 12 हजार रुपये देने पर मजबूर होना पड़ा इसके बाद पीड़ित ने हिम्मत दिखाते हुए पूरी घटना की जानकारी एंटी करप्शन टीम को दे दी

    सूचना मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने योजना बनाकर जाल बिछाया और पीड़ित को तय समय और स्थान पर भेजा जहां पहले से टीम के सदस्य निगरानी में थे जैसे ही पीड़ित ने कानूनगो को रिश्वत की रकम सौंपी और उसने पैसे अपने हाथ में लिए वैसे ही टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही दबोच लिया

    गिरफ्तारी के दौरान टीम ने रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली जिससे आरोपी के खिलाफ आरोप और मजबूत हो गए हैं इस अचानक हुई कार्रवाई से तहसील परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया और अन्य कर्मचारी भी कुछ समय के लिए असहज स्थिति में नजर आए

    जानकारी के अनुसार गिरफ्तार कानूनगो राजित राम शर्मा का नाम पहले भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है और वह पूर्व में भी रिश्वतखोरी के आरोपों में पकड़ा जा चुका है इसके बावजूद उसकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं देखा गया जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं

    स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व विभाग में जमीन से जुड़े कामों को लेकर अक्सर भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती रही हैं और इस तरह की घटनाएं आम जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं फिलहाल एंटी करप्शन टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की विस्तृत जांच जारी है

  • भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त एक्शन, अधिकारी के घरों से नकदी और दस्तावेज मिलने के बाद तेज हुई जांच की रफ्तार

    भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त एक्शन, अधिकारी के घरों से नकदी और दस्तावेज मिलने के बाद तेज हुई जांच की रफ्तार


    नई दिल्ली। असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ा मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस को केंद्र में ला दिया है। जांच एजेंसियों द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब बड़े स्तर पर जांच और संभावित खुलासों की चर्चा भी तेज हो गई है। राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

    मामले की शुरुआत कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी से जुड़ी शिकायत के बाद हुई। शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाई और आवश्यक प्रक्रिया अपनाने के बाद कार्रवाई की। शुरुआती जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई, जिसके बाद घटनाक्रम ने बड़ा रूप ले लिया। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संबंधित व्यक्ति को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ने का दावा किया, जिसके बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया।

    गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और विभिन्न वित्तीय दस्तावेजों के मिलने की बात सामने आई। इसके बाद जांच एजेंसियां अब बरामद संपत्ति, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारियों की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए संपत्ति और आय के स्रोतों की विस्तृत जांच की जाएगी।

    प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सरकारी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखने की जरूरत को और मजबूत करती हैं। सरकारी विभागों में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर ऐसी कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे न केवल सिस्टम में अनुशासन का संदेश जाता है बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख भी सामने आता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। ऐसे मामलों में अक्सर वित्तीय लेनदेन, दस्तावेज और अन्य संबंधित कड़ियों की भी जांच की जाती है। इसी कारण जांच एजेंसियां मामले से जुड़े हर पहलू की पड़ताल करती हैं ताकि किसी संभावित नेटवर्क या अन्य संबद्ध पक्षों की भूमिका को भी समझा जा सके।

    देशभर में पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जागरूकता और सख्ती दोनों बढ़ी हैं। विभिन्न राज्यों में जांच एजेंसियां लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए हैं और शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी कर रही हैं। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास मजबूत करना और सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना माना जाता है।

    फिलहाल इस मामले ने असम में प्रशासनिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जांच एजेंसियां अब मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटी हुई हैं और आने वाले समय में इससे जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

  • फिलीपींस की सियासत में बड़ा भूचाल: उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते पर महाभियोग, जानिए पूरा मामला

    फिलीपींस की सियासत में बड़ा भूचाल: उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते पर महाभियोग, जानिए पूरा मामला



    नई दिल्ली। फिलीपींस की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश की उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते के खिलाफ प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने भारी बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब यह मामला सीनेट में जाएगा, जहां उनके राजनीतिक भविष्य पर अंतिम फैसला होगा।

    क्या है पूरा मामला?
    सारा दुतेर्ते पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, संपत्ति के गलत स्रोत और राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस तथा उनके परिवार को कथित धमकी देने जैसे आरोप शामिल हैं। इन आरोपों ने फिलीपींस की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच टकराव गहरा गया है।

    प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान में 255 सांसदों ने महाभियोग के पक्ष में वोट दिया, जबकि केवल 26 सांसदों ने विरोध किया। 9 सांसद मतदान से अनुपस्थित रहे। यह स्पष्ट करता है कि निचले सदन में इस प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला है।

    किन आरोपों में घिरी हैं उपराष्ट्रपति?
    सारा दुतेर्ते पर आरोप है कि उन्होंने उपराष्ट्रपति कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय के गोपनीय फंड (Confidential Funds) का गलत इस्तेमाल किया। इसके साथ ही उन पर वित्तीय पारदर्शिता न रखने और संदिग्ध संपत्ति अर्जित करने के भी आरोप हैं।

    सबसे गंभीर आरोपों में एक यह भी है कि उन्होंने एक सार्वजनिक बयान में कथित तौर पर राष्ट्रपति मार्कोस, उनकी पत्नी और संसद अध्यक्ष के खिलाफ हिंसक धमकी जैसी बात कही थी। इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया था।

    अब आगे क्या होगा?
    महाभियोग प्रस्ताव अब सीनेट को भेजा जाएगा। सीनेट इस मामले में ट्रिब्यूनल के रूप में कार्य करेगी और आरोपों की गहराई से जांच करेगी। यदि सीनेट उन्हें दोषी ठहराती है, तो सारा दुतेर्ते को अपने पद से हटाया जा सकता है और राजनीतिक प्रतिबंध भी लग सकते हैं।

    सारा दुतेर्ते फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की बेटी हैं और देश की राजनीति में एक मजबूत चेहरा मानी जाती हैं। उनके खिलाफ पहले भी महाभियोग लाने की कोशिश हुई थी, लेकिन संवैधानिक कारणों से वह मामला आगे नहीं बढ़ सका था।

    राजनीतिक तनाव क्यों बढ़ा?
    यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक भी माना जा रहा है। राष्ट्रपति मार्कोस और दुतेर्ते परिवार के बीच पहले से ही राजनीतिक मतभेद रहे हैं। महाभियोग के बाद यह टकराव और तेज हो गया है, जिससे देश की राजनीति में अस्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
    सारा दुतेर्ते के खिलाफ महाभियोग फिलीपींस की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अब सभी की नजरें सीनेट ट्रायल पर हैं, जहां तय होगा कि वे पद पर बनी रहेंगी या उन्हें हटना पड़ेगा। यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

  • मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम

    मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी ने जल संसाधन विभाग में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, 15 दिन में कार्रवाई का अल्टीमेटम



    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को जल संसाधन विभाग (WRD) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर केवल ‘ठेकेदारी और कमीशन’ का खेल चल रहा है। उन्होंने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस सबूतों के साथ CBI के पास जाएगी।

    पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार इसे ‘कृषि वर्ष’ कह रही है, जबकि यह ‘कमीशन वर्ष’ है। कल ही सरकार ने 5800 करोड़ का कर्ज लिया है, लेकिन पैसा किसानों के पास नहीं, बल्कि चहेते ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।”

    पांच प्रमुख आरोप
    टेंडर सिंडिकेट और गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा: पटवारी ने कहा कि बड़े टेंडरों में केवल फलोदी और गुप्ता कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियां ही दिखाई देती हैं। यह रोटेशन सिस्टम है, जिसमें कभी एक कंपनी L1 (सबसे कम बोली) बनती है और कभी दूसरी। प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई है।

    दुबई कनेक्शन और मनी ट्रेल: पटवारी ने नौशाद और अश्विन नाटू का जिक्र किया। आरोप लगाया कि इनके माध्यम से मंत्रियों के रिश्तेदारों का दुबई में साझा व्यवसाय है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।

    फर्जी बैंक गारंटी का महाघोटाला: विभाग में फर्जी बैंक गारंटी जमा कर ठेकेदार करोड़ों का एडवांस ले रहे हैं। जल निगम में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बावजूद e-BG सिस्टम लागू नहीं किया गया।

    भाजपा कार्यालय और केन-बेतवा लिंक: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका उस नागार्जुन कंपनी को दिया गया है जो भाजपा का दफ्तर बना रही है। पटवारी ने कहा, “पार्टी दफ्तर बनाओ, कमीशन दो और फिर मर्जी से काम करो या लटका दो।”

    तकनीकी धोखाधड़ी: जमीन पर सस्ते HDPE पाइप डाले गए और कागजों में महंगे DI पाइप दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकलवाया गया।

    पटवारी ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं और क्या सरकार विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराएगी।

    पटवारी ने कहा कि यदि 15 दिन में स्वतंत्र ऑडिट और जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ CBI जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिंचाई के रकबे का सरकारी आंकड़ा झूठा है और कांग्रेस खुद इसका सत्यापन कर सच सामने लाएगी।

  • भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा

    भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) मंगलवार को जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (Corruption Perceptions Index.-CPI) 2025 में 182 देशों और क्षेत्रों में से 91वें स्थान पर पहुंच गया। यह पिछली रैंकिंग की तुलना में पांच स्थान बेहतर है। वैश्विक गैर-सरकारी संगठन (Global Non-Governmental Organizations) ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) के नवीनतम सीपीआई के अनुसार, भारत का स्कोर पिछले साल की तुलना में एक अंक बढ़ा है। वहीं, उसकी रैंक बेहतर हुई है। बर्लिन स्थित भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया प्रशांत इलाके में भ्रष्टाचार विरोधी प्रगति की वृद्धि धीमी रही है। वजह, कई देशों में पिछले साल जनता का गुस्सा देखा गया।


    दुनिया के हर हिस्से में खतरा

    2025 भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक दिखाता है कि भ्रष्टाचार दुनिया के हर हिस्से में एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हालांकि इसकी प्रगति की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि नेताओं को सत्ता के दुरुपयोग और इस गिरावट को प्रेरित करने वाले व्यापक कारकों, जैसे लोकतांत्रिक जांच और संतुलन की वापसी और स्वतंत्र नागरिक समाज पर हमलों से निपटने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें आगे कहा गया है कि दुनिया भर में सरकार विरोधी प्रदर्शन यह दिखाते हैं कि लोग अक्षम नेतृत्व से उकता चुके हैं। यह लोग अब सुधार की मांग कर रहे हैं।


    पत्रकारों के लिए खतरनाक

    सीपीआई दुनिया के 182 देशों और क्षेत्रों को उनके सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अनुमानित स्तर के अनुसार रैंक करता है। परिणाम जीरो (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (बहुत साफ) के पैमाने पर दिए जाते हैं। रिपोर्ट में भारत को उन देशों में भी सूचीबद्ध किया गया है जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब पत्रकारों पर भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए हमला किया जाता है या उन्हें मार दिया जाता है, तो सत्ता को प्रभावी ढंग से जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता और भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। 2012 से, वैश्विक स्तर पर गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है। इन हत्याओं में से 90 फीसदी से अधिक उन देशों में हुई हैं, जहां भ्रष्टाचार सूचकांक 50 से कम है। इनमें ब्राजील (35), भारत (39), मैक्सिको (27), पाकिस्तान (28) और इराक (28) शामिल हैं। यह विशेष रूप से उन पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करते हैं।


    भ्रष्टाचार की कीमत

    रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 के बाद से 31 देशों ने अपने भ्रष्टाचार के स्तर में काफी कमी की है। बाकी इस समस्या से निपटने में विफल रहे हैं। इस अवधि के दौरान या तो वह स्थिर रहे हैं या बदतर हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक औसत गिरकर 42 के नए निचले स्तर पर आ गया है, जबकि दो-तिहाई से अधिक देश 50 से नीचे स्कोर कर रहे हैं। लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार के कारण अस्पताल की सुविधाओं में कमी आती है। बाढ़ से निपटने की क्षमता पर असर पड़ता है। कुल मिलाकर यह युवाओं के सपनों पर खत्म कर देता है। इस सूचकांक में डेनमार्क 89 प्वॉइंट्स के साथ टॉप पर है। वह फिनलैंड और सिंगापुर से आगे है। वहीं, दक्षिण सूडान और सोमालिया की हालत भ्रष्टाचार के मामले में काफी खराब है। दोनों के नौ-नौ प्वॉइंट्स हैं। इनके बाद वेनेजुएला है।

  • शी जिनपिंग का बड़ा कदम: सेना में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, 200,000 अधिकारियों पर गिरी गाज

    शी जिनपिंग का बड़ा कदम: सेना में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, 200,000 अधिकारियों पर गिरी गाज


    नई दिल्ली । चीन के रक्षा मंत्रालय ने देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जनरल झांग योउशिया और जनरल लियू झेनली के खिलाफ जांच शुरू की गई है। झांग पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैंजो आमतौर पर भ्रष्टाचार मामलों में इस्तेमाल होती है।

    75 साल के झांगसेंट्रल मिलिट्री कमीशन CMC के उपाध्यक्ष और पोलितब्यूरो के सदस्य रहे हैं। CMC सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नियंत्रण में काम करती है। झांग ने 1968 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जॉइन की थी और वे वरिष्ठ अधिकारी थे जिनके पास असली युद्ध का अनुभव था। उन्हें तय उम्र से आगे पद पर बनाए रखना शी के भरोसे को दर्शाता था।

    पिछले साल अक्टूबर में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने सेना के 9 बड़े जनरलों को सस्पेंड किया था। विशेषज्ञ इसे दशकों में सेना का सबसे बड़ा सफाई अभियान मानते हैं। इसके बाद 200,000 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के लिए कार्रवाई की गई है।

    शी जिनपिंग ने बार-बार कहा है कि भ्रष्टाचार पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हालांकि आलोचक मानते हैं कि यह अभियान केवल सुधार के लिए नहींबल्कि सत्ता को मजबूत करने और विरोधियों को हटाने का जरिया भी है। इस कार्रवाई को सेना को अनुशासित और शी के प्रति वफादार बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

  • खरगोन: टंट्या मामा मूर्ति विवाद में बड़ी गाज, दो इंजीनियर निलंबित; भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनों ने ही खोला मोर्चा

    खरगोन: टंट्या मामा मूर्ति विवाद में बड़ी गाज, दो इंजीनियर निलंबित; भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनों ने ही खोला मोर्चा


    खरगोन । क्रांतिकारी आदिवासी नायक जननायक टंट्या मामा भील की मूर्ति स्थापना को लेकर उपजा विवाद अब शासन की कड़ी कार्रवाई और राजनीतिक घमासान में तब्दील हो चुका है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए खरगोन नगरपालिका में पदस्थ दो इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बिस्टान नाका चौराहे पर स्थापित की गई मूर्ति में बरती गई भारी अनियमितताओं और लापरवाही के चलते की गई है।

    शासन की सख्त कार्रवाई

    नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जारी आदेश के तहत सहायक यंत्री मनीष महाजन और उपयंत्री जितेन्द्र मेढ़ा को निलंबित किया गया है। विभाग ने माना है कि मूर्ति स्थापना की प्रक्रिया में इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर चूक की और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया।

    क्या है पूरा विवाद करोड़ों की मंजूरी, कौड़ियों की मूर्ति

    विवाद की जड़ मूर्ति के निर्माण में हुआ कथित भ्रष्टाचार है। नगरपालिका की प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल PIC ने टंट्या मामा की भव्य कांस्य या पत्थर की मूर्ति के लिए 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी। लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से महज 75 हजार से 1 लाख रुपये की सस्ती की मूर्ति स्थापित कर दी। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, आदिवासी समाज और राजनीतिक गलियारों में आक्रोश फैल गया।

    भाजपा पार्षदों का सद्बुद्धि यज्ञ और मोर्चा

    हैरान करने वाली बात यह है कि खरगोन नगरपालिका में भाजपा का ही परिषद अध्यक्ष छाया जोशी है, लेकिन अब भाजपा पार्षदों ने ही अपनी ही परिषद के अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रोलिंग का डर भाजपा पार्षदों का कहना है कि इस भ्रष्टाचार के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है। विरोध का तरीका: पार्षद भागीरथ बड़ोले के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने गांधी प्रतिमा पर ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ किया और अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर FIR दर्ज करने की मांग की।

    कांग्रेस का अल्टीमेटम और चक्का जाम की चेतावनी

    कांग्रेस इस मुद्दे पर और अधिक हमलावर हो गई है। जिला अध्यक्ष रवि नायक ने इसे आदिवासी अस्मिता का अपमान बताते हुए प्रशासन के 45 दिनों के आश्वासन को ठुकरा दिया है। उन्होंने 26 जनवरी 2026 से 60 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में भव्य धातु की मूर्ति स्थापित नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।

    अब आगे क्या

    नगरपालिका ने अपनी गलती सुधारने के प्रयास शुरू कर दिए हैं नया टेंडर 19 जनवरी 2026 को धातु की नई मूर्ति के लिए ई-टेंडर जारी किया गया है। समय सीमा 2 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर 45 दिनों के भीतर नई मूर्ति स्थापित करने का दावा किया गया है।

  • हिंदुत्व मामले पर कांग्रेस का उपवास पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बीजेपी पर हमला रोशनपुरा में शंकराचार्य की पूजा करेंगे

    हिंदुत्व मामले पर कांग्रेस का उपवास पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बीजेपी पर हमला रोशनपुरा में शंकराचार्य की पूजा करेंगे

    भोपाल से शिखिल ब्यौहार की रिपोर्ट मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के रोशनपुरा उपवास और शंकराचार्य पूजा कार्यक्रम का ऐलान किया उन्होंने कहा कि 24 जनवरी को कांग्रेस एक दिन उपवास रखेगी और शंकराचार्य की पूजा करेगी इस अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता साधु संत सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी मौजूद रहेंगे पीसी शर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने कभी यह नहीं पूछा कि शंकराचार्य कौन हैं लेकिन बीजेपी की सरकार ने ऐसा अपमान किया शिष्यों के साथ मारपीट की गई और हिंदुओं की भावनाओं का ठेस पहुंचाई गई उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी के मणिकर्णिका घाट को भी तहस नहस किया गया और मोक्ष की जगह को भी उजाड़ दिया गया उन्होंने कहा कि भोपाल में गौ माता का अपमान हुआ और गौमाता काटी जा रही है

    पूर्व मंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार रावणी तत्वों की तरह कार्य कर रही है और यह लोग कभी राम के पदचिन्हों पर नहीं चल सकते उन्होंने अयोध्या की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे होने पर कहा कि मुझे वहां जाना पड़ा और सरकार को सद्बुद्धि की जरूरत है उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार व्याप्त है सड़क धसने के मामलों में ठेकेदारों पर कार्रवाई होती है लेकिन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती और सीएम हेल्पलाइन भी पूरी तरह असहाय हो गई है उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में हर जगह भ्रष्टाचार और मनमानी फैली हुई है

    पीसी शर्मा ने SIR में कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल की कार्रवाई का जिक्र किया उन्होंने कहा कि 7 नंबर फॉर्म हटा रहे हैं और बीजेपी कार्यालय से फर्म के जरिए अल्पसंख्यकों को जबरन फॉर्म दिए जा रहे हैं आदिवासी के नाम काटे जा रहे हैं उन्होंने आरोप लगाया कि पहले फर्जीवाड़े से चुनाव जीते गए अब नाम जबरन काटने का काम किया जा रहा है कांग्रेस इस मामले में कड़ा एक्शन लेगीइसके अलावा उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ जारी जमानती वारंट का भी जिक्र किया और कहा कि पुलिस को उनका पता नहीं मिल रहा है उन्होंने यह संकेत दिया कि बीजेपी की सरकार राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपना रही है पीसी शर्मा ने कहा कि हार जीत राजनीति में होती है लेकिन हिंदुओं की भावनाओं का अपमान किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है

    पूर्व मंत्री ने प्रेस वार्ता में प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही की ओर भी ध्यान आकर्षित किया उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ढांचा और कानून व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है और आम जनता को सरकारी मदद नहीं मिल रहीकांग्रेस के उपवास और शंकराचार्य पूजा कार्यक्रम को लेकर शहर भर में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है और नेताओं और साधु संतों के शामिल होने से इसे और अधिक जोर मिलने की संभावना है

  • मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”

    मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”



    नई दिल्ली। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनकी गतिविधियां छुपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि “किसके यहां क्या पक रहा है, सब मालूम है”, इसलिए सभी अधिकारियों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    सीएस जैन ने यह भी कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री के पास भी पहुंची हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि अधिकारी जल्द ही अपनी कार्यशैली सुधारें।

    यह चेतावनी उन्होंने सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सीएस जैन ने कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की और टॉप थ्री तथा बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधारने का निर्देश दिया। बैठक में पुलिस और अन्य विभागों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    साथ ही नाबालिग बालिकाओं के गुम होने पर उनकी तलाश के लिए चलाए जा रहे मुस्कान अभियान की प्रगति भी ली गई, जिसमें बताया गया कि अब तक 1900 से अधिक बालिकाओं को बरामद किया गया है। जन जागरूकता अभियान में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप थ्री जिलों में शामिल रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम थ्री जिलों में रहे।

    कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तारीखों को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए कई बार तारीख बदलती रही। सीएस अनुराग जैन ने पिछले माह 31 दिसंबर को बैठक की तारीख तय की थी, फिर इसे 5 जनवरी कर दिया गया। फिर भी कॉन्फ्रेंस समय पर नहीं हो सकी और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करने का निर्णय लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह भी संभव नहीं हो पाया। अंततः यह बैठक चौथी बार तय तारीख पर ही हो सकी।

  • नारायणपुर महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों की खरीदी, प्राचार्य समेत पांच निलंबित

    नारायणपुर महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों की खरीदी, प्राचार्य समेत पांच निलंबित


    रायपुर । छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के महिला कॉलेज में पीएम-उषा फंड से बिना टेंडर के करोड़ों रुपये की खरीदी करने का मामला सामने आया है जिसे लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। इस वित्तीय अनियमितता और खरीदी नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में कॉलेज के प्राचार्य और तीन सहायक प्राध्यापकों समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला महासमुंद जिले के बाद सामने आया है, जहां भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई गई थीं। अब नारायणपुर जिले में भी बिना निविदा टेंडर प्रक्रिया अपनाए पीएम-उषा फंड से खरीदी की गई है जिससे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
    क्या है पूरा मामला
    नारायणपुर जिले के नवीन वीरांगना रमोतिन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय में पीएम उषा फंड से खरीदी किए गए उपकरणों और सामग्रियों को लेकर सवाल उठ रहे थे। नियमों के अनुसार, जब सरकारी फंड से किसी प्रकार की खरीदारी होती है तो टेंडर प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह से नजरअंदाज की गई। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेन्द्र कुमार पटेल और सहायक प्राध्यापकों भूषण जय गोयल, किशोर कुमार कोठारी, हरीश चंद बैद और नोहर राम को निलंबित कर दिया है। विभाग ने इन आरोपियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू करने का फैसला किया है।

    उच्च शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

    उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि विभाग लगातार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी फंड का सही उपयोग हो और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सभी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं। यह मामला उन लाखों छात्रों और शिक्षकों के लिए एक बड़ा संदेश है जिनका भविष्य सरकारी योजनाओं और फंड्स पर निर्भर करता है। इसके अलावा इससे यह भी साबित होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी तरह के गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।