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  • बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो न करें इग्नोर… भारी पड़ सकती है ये गलतियां

    बदलते मौसम में बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो न करें इग्नोर… भारी पड़ सकती है ये गलतियां


    नई दिल्ली।
    क्या हर बार मौसम बदलते (Weather Changes) ही आप भी बीमार (Sick) हो जाते हैं? पहले गला खराब, दो दिन बाद सर्दी-जुकाम (Cold and cough) और फिर बुखार। बीमारी ठीक हुई तो कुछ दिन बाद दोबारा वही परेशानी। अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसे सिर्फ बदलते मौसम का असर मानकर इग्नोर करने की गलती न करें।

    जब बात बार-बार होने वाली बीमारियों की आती है तो हम अक्सर मान लेते हैं कि ये इम्युनिटी (Immunity) कमजोर होने की वजह से हो रहा है। ये सच भी है लेकिन हर बार बीमार पड़ने की वजह कमजोर इम्युनिटी ही हो, ऐसा भी जरूरी नहीं है।

    हमारी रोज की कुछ आदतें भी बीमारी का रास्ता खोल सकती हैं। मसलन रात में देर तक जागना, अच्छी नींद न लेना, खाना समय पर न खाना, डाइट में जरूरी पोषक तत्वों की कमी शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ये सभी आपके बार-बार बीमार होने के पीछे के साइलेंट कारण हो सकते हैं।

    डॉक्टर कहते हैं, जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू का दौर चल रहा है, ऐसे में लोगों को बुखार, सर्दी-जुकाम होना सामान्य है। पर अगर आप हर एक-दो महीने में इन समस्याओं का शिकार हो रहे हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाने की जरूरत है। एक बार मुड़कर अपनी आदतों की तरफ भी देखिए, कहीं गलती यहां तो नहीं हो रही है?


    कहीं आपकी नींद तो खराब नहीं रहती?

    अगर आप लगातार कम सो रहे हैं तो सबसे पहले इसी आदत को सुधारने की जरूरत है। नींद सिर्फ थकान दूर नहीं करती है, ये शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रक्रिया में भी भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी और पर्याप्त नींद शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचाव में मदद करती है।

    रोज देर रात तक मोबाइल चलाना या ऑफिस का काम करना और अलग-अलग समय पर सोना आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। वयस्कों के लिए आम तौर पर कम से कम 8-9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है।


    डाइट में जरूरी पोषक तत्व हैं या नहीं?

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डाइट का संतुलित होना जरूरी है। फल-सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन-फाइबर जैसे पोषक तत्वों को अपने आहार का हिस्सा जरूर बनाएं। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए पोषण से भरपूर संतुलित भोजन बहुत जरूरी है। अगर आपकी डाइट ज्यादातर पैकेज्ड फूड, तला-भुना खाना या बहुत ज्यादा मीठे पेय पर निर्भर है तो इसमें बदलाव जरूरी है। घर का बना खाना और रोजाना मौसमी फल खाना आपको कई बीमारियों से बचाए रखने में मदद कर सकता है।


    हाथों की साफ-सफाई का रखते हैं ध्यान?

    ऑफिस (Office), स्कूल, भीड़भाड़ वाली जगहों या घर में किसी बीमार व्यक्ति (Sick person) के संपर्क में रहने पर भी संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बार-बार बीमार पड़ने का कारण हमेशा शरीर की कमजोरी नहीं होती। आप कितनी बार संक्रमण के संपर्क में आते हैं, यह भी मायने रखता है।

    हाथों (Hand hygiene) को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना संक्रमण फैलने से रोकने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। हाथ धोने से कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण कम किया जा सकता है।


    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको बार-बार संक्रमण हो रहा है या मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियां संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हाई ब्लड शुगर के शिकार लोगों में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित हो जाती है, ये आपमें बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।

    डायबिटीज के शुरुआती स्थिति में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते हैं इसलिए इसका देर से पता चल पाता है। इसलिए समय रहते जांच से शरीर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। समय पर डॉक्टरी सलाह आपमें बीमारी का कारण पता लगाने और बार-बार होने वाली समस्याओं को रोकने में मददगार हो सकती है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा

    ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

    महंगे तेल ने बढ़ाया आयात खर्च
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। जून महीने में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    इसके अलावा खाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में भारत का कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।

    निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे पर नहीं लगी लगाम
    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि जून में निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात करीब 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की विदेशी मांग मजबूत रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार सुधार देखा गया, वहीं हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, आयात में हुई तेज वृद्धि के मुकाबले निर्यात की रफ्तार कम रही, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ गया।

    आम लोगों पर क्या हो सकता है असर?
    व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    आगे की चुनौती और सरकार की रणनीति
    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल ऊंचा बना रह सकता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है।

    हालांकि, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैश्विक बाजार की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।