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  • शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके

    शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके


    शिवपुरी: शहर में नगर पालिका परिषद का सम्मेलन लंबे समय से नहीं होने के कारण विकास कार्यों की मंजूरी और प्रशासनिक फैसलों पर असर पड़ रहा है। नियमानुसार नगर पालिका का साधारण सम्मेलन प्रत्येक दो महीने में आयोजित किया जाना चाहिए, लेकिन शिवपुरी में पिछले सात महीनों से परिषद की बैठक नहीं हुई है। इस स्थिति में शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृति के इंतजार में हैं। नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सम्मेलन आयोजित करने के लिए एक-दूसरे को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं, लेकिन बैठक की तारीख अब तक तय नहीं हो सकी है।

    नगर पालिका में सम्मेलन नहीं होने की प्रमुख वजह अध्यक्ष और 20 से अधिक विरोधी पार्षदों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद बताया जा रहा है। पार्षदों और अध्यक्ष के बीच कुछ मुद्दों पर करीब दो साल से मतभेद हैं। परिषद की बैठकों के दौरान विरोधी पार्षदों के हंगामे और पहले हुए बहिष्कार के कारण भी बैठक आयोजित करने को लेकर मुश्किलें सामने आती रही हैं। इसी राजनीतिक खींचतान के बीच शहर के विकास से जुड़े प्रस्ताव लंबित हैं।

    नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौर जुलाई में पदस्थ हुए थे। उनके मुताबिक, परिषद सम्मेलन का एजेंडा तैयार कर लिया गया है और बैठक आयोजित करने के संबंध में अध्यक्ष को पत्र भी भेजे जा चुके हैं। उन्होंने जल्द सम्मेलन कराने की बात कही है। दूसरी ओर, नगर पालिका अध्यक्ष का कहना है कि वह सीएमओ को तीन बार पत्र लिखकर सम्मेलन आयोजित करने के लिए कह चुकी हैं। अध्यक्ष के अनुसार, एजेंडे के कुछ बिंदु भी निर्धारित किए जा चुके हैं और उनकी ओर से बैठक बुलाने में कोई बाधा नहीं है। इस तरह दोनों पक्ष सम्मेलन में देरी के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी बता रहे हैं।

    प्रस्तावित सम्मेलन में शहर की पेयजल व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। मड़ीखेड़ा और सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट के लिए तीन-तीन मोटरों की दरों को स्वीकृति देने का प्रस्ताव एजेंडे में रखा गया है। इनमें से एक फिल्टर प्लांट की तीन मोटरें आ चुकी हैं और अब उनके संबंध में नगर पालिका से स्वीकृति ली जानी है। इसके अतिरिक्त बस स्टैंड के संचालन के लिए ठेका देने से संबंधित प्रस्ताव भी विचार के लिए रखा गया है।

    वार्ड नंबर 29, 30 और 35 में पानी की टंकियों के निर्माण पर हुए व्यय से संबंधित प्रस्ताव भी सम्मेलन में शामिल किए जाने हैं। शहर में बाजार बैठक की वसूली, सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए दो नई जेसीबी मशीनों की खरीद तथा दो नए डंपर और एक पोकलेन मशीन खरीदने के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के मुद्दे भी लंबित एजेंडे का हिस्सा हैं। इन प्रस्तावों पर निर्णय होने से नगर पालिका के संसाधनों और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    इसके अलावा वर्ष 2026-27 में आयोजित होने वाले सिद्धेश्वर वाणगंगा मेले, गांधी पार्क मेले और अन्य मेलों के आयोजन पर भी परिषद में विचार किया जाना है। इन सभी प्रस्तावों पर निर्णय के लिए सम्मेलन आवश्यक है। नगर पालिका में कुछ कार्य बिना पूर्व स्वीकृति के किए जाने और बाद में उनकी मंजूरी लेने की स्थिति भी सामने आई है। इससे परिषद की नियमित बैठक और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    नगर पालिका परिषद के वर्तमान कार्यकाल में करीब दस महीने शेष बताए गए हैं। ऐसे में लंबित प्रस्तावों पर निर्णय लेने और विकास कार्यों को गति देने के लिए परिषद तथा पीआईसी की बैठकें समय पर आयोजित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में लगातार देरी जारी रहने पर शहर की पेयजल व्यवस्था, सफाई, परिवहन सुविधाओं और अन्य विकास योजनाओं से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अध्यक्ष और सीएमओ के बीच पत्राचार के बाद परिषद की बैठक कब आयोजित होती है और लंबित प्रस्तावों पर कब निर्णय लिया जाता है।

  • चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान जारी, उत्तर प्रदेश में दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत वोटिंग

    चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान जारी, उत्तर प्रदेश में दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत वोटिंग

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान जारी है। इन सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश में दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चारों राज्यों में हो रहे इस चुनाव को राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके परिणाम संबंधित क्षेत्रों में उनके संगठनात्मक प्रभाव और मतदाताओं के समर्थन का संकेत दे सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान कराया जा रहा है। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शाम चार बजे तक चलेगा। औरैया, हरदोई, जालौन, चित्रकूट और गौतमबुद्ध नगर सहित राज्य के 72 जिलों में मतदान की व्यवस्था की गई है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला प्रमुख है। कुछ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

    उत्तर प्रदेश की सीटों में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर विशेष ध्यान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र से जुड़ी इस सीट पर भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति के तहत सक्रियता बढ़ाई है। वहीं समाजवादी पार्टी ने शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी है। पार्टी की ओर से मानदेय, पुरानी पेंशन योजना और सेवा सुरक्षा जैसे विषय उठाए गए हैं। स्थानीय असंतोष और बागी उम्मीदवारों की भूमिका भी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।

    बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। पटना स्नातक सीट पर राजनीतिक गतिविधियों पर खास नजर है। यहां जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी नीरज कुमार के मुकाबले को लेकर चर्चा है। खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, विधायक अनंत सिंह द्वारा जन सुराज के उम्मीदवार का समर्थन किए जाने से चुनावी माहौल प्रभावित हुआ है।

    महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें औरंगाबाद, पुणे और नागपुर के तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा अमरावती और पुणे के दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। राज्य में महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच मुकाबला है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन सीटों पर कुल 182 उम्मीदवार मैदान में हैं और दस लाख से अधिक मतदाता मतदान के पात्र हैं।

    कर्नाटक में चार सीटों पर मतदान कराया जा रहा है। इनमें कर्नाटक दक्षिण-पूर्व और कर्नाटक पश्चिम के दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा कर्नाटक उत्तर-पूर्व और बेंगलुरु के दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। यहां सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    चारों राज्यों में मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से कराया जा रहा है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता वरीयता क्रम के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करते हैं। मतदान केंद्रों पर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन और कैमरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में समाजवादी पार्टी ने प्रशासनिक पक्षपात की आशंका जताई है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    मतदान पूरा होने के बाद मतपेटियों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना होगी और चारों राज्यों की संबंधित सीटों के परिणाम घोषित किए जाएंगे। नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच किस दल और उम्मीदवार को कितना समर्थन मिला है।

  • जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की तारीख बदली, अब 8 अक्टूबर को होगी बैठक; अनुपालन और टैक्स सुधारों पर चर्चा की उम्मीद

    जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की तारीख बदली, अब 8 अक्टूबर को होगी बैठक; अनुपालन और टैक्स सुधारों पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली ।जीएसटी परिषद की प्रस्तावित 57वीं बैठक की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले यह बैठक 7 अक्टूबर को होने वाली थी, लेकिन अब इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 8 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। जीएसटी परिषद सचिवालय ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर बैठक की तारीख बदले जाने की जानकारी दी है। ज्ञापन के अनुसार, अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण बैठक को पुनर्निर्धारित किया गया है। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी और इसमें केंद्र तथा राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए जीएसटी अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से कई प्रक्रिया संबंधी सुधारों पर चर्चा होने की उम्मीद है। परिषद पंजीकरण, रिटर्न और रिफंड की मौजूदा प्रक्रियाओं में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही जीएसटी विवादों के समाधान को सरल बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रवाह को बेहतर करने से संबंधित सुधारों पर भी चर्चा हो सकती है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य कर अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है।

    इन सुधारों को जीएसटी परिषद की कानून समिति की व्यापक सिफारिशों से भी जोड़ा गया है। समिति ने जीएसटी कानूनों को सरल बनाने के विभिन्न उपायों की समीक्षा की है। इसके अलावा जानबूझकर कर चोरी करने और अनजाने में कर का भुगतान नहीं कर पाने वाले मामलों के बीच अंतर करने के तरीकों पर भी विचार किया गया है। परिषद की बैठक में इन सिफारिशों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है।

    मौजूदा जीएसटी व्यवस्था के तहत केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 में गिरफ्तारी से संबंधित प्रावधान हैं। इसके तहत आयुक्त किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं, यदि उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि संबंधित व्यक्ति ने धारा 132 में निर्दिष्ट अपराध किए हैं। इन अपराधों में कर चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े कुछ मामले भी शामिल हैं। जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रिया संबंधी बदलावों के साथ इन प्रावधानों से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हो सकती है।

    परिषद कारोबारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाने के उपायों पर भी विचार कर सकती है। इसमें ई-कॉमर्स के माध्यम से आपूर्ति करने वाले कारोबारी भी शामिल हैं। पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड प्राप्त करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का उद्देश्य कारोबारियों के लिए कर संबंधी औपचारिकताओं को आसान करना है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि जीएसटी सुधारों का अगला चरण अनुपालन को आसान बनाने और रिफंड प्रक्रिया में सुधार करने पर केंद्रित होगा। उनके अनुसार, इन सुधारों से कारोबारियों का निवेश करने और अपने कारोबार का विस्तार करने का भरोसा बढ़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि जीएसटी सुधारों के अगले चरण में पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवाद समाधान और इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।

    जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक मूल रूप से 12 सितंबर को आयोजित होनी थी। हालांकि, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण बैठक को 7 अक्टूबर तक टाल दिया गया था। अब तारीख में दूसरी बार बदलाव किया गया है और बैठक 8 अक्टूबर को होगी। बैठक में प्रस्तावित कर सुधारों और अनुपालन से जुड़े उपायों पर आगे की दिशा तय किए जाने की उम्मीद है।

  • GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    नई दिल्ली : GST कानून लागू होने के करीब नौ साल बाद सरकार टैक्स व्यवस्था में एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत GST अधिकारियों को मिली सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति हटाई जा सकती है। इस मुद्दे पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारी मौजूदा व्यवस्था के तहत सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए GST कानून में संशोधन करना होगा और सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने ला सकती है।

    GST कानून 2016 में संविधान के 101वें संशोधन के साथ अस्तित्व में आया था और 2017 में इसे लागू किया गया। मौजूदा कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों में गिरफ्तारी का प्रावधान है। इनमें फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामले शामिल हैं। CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है। इसके लिए संबंधित अधिकारी के पास यह मानने का पर्याप्त आधार होना जरूरी है कि व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है।

    सरकार ने वर्ष 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि केवल कानून में गिरफ्तारी की अनुमति होने के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। कार्रवाई से पहले मामले की गंभीरता, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। अब प्रस्तावित बदलाव को लेकर चर्चा का एक प्रमुख कारण टैक्स अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतें बताई जा रही हैं।

    पिछले करीब आठ से नौ महीनों से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा चलने की बात कही गई है। कारोबारियों और कंपनियों की ओर से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई जाती रही है। विशेष रूप से कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं। सरकार ऐसा बदलाव चाहती है जिससे गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई जारी रहे, लेकिन कारोबारियों के बीच अनावश्यक डर की स्थिति न बने।

    GST कानून के तहत गिरफ्तारी के इस्तेमाल के आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच GST अपराधों के 72,393 मामले दर्ज हुए और केंद्रीय GST अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़ा केवल केंद्रीय GST फॉर्मेशन से संबंधित है। इसमें राज्य GST अधिकारियों की ओर से की गई गिरफ्तारियां शामिल नहीं हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई जारी रखने की बात है, लेकिन GST अधिकारी स्वयं गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगे। ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है। गंभीर और जानबूझकर किए गए फ्रॉड के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    अब 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर नजर है। बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो GST कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी और सरकार इसे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। फिलहाल GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त नहीं हुई है। यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम स्थिति GST काउंसिल की चर्चा, सरकार के फैसले तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

  • कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने दिया इस्तीफा, बोले- कांग्रेस ने क्यों हटाया इसकी जानकारी नहीं

    कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने दिया इस्तीफा, बोले- कांग्रेस ने क्यों हटाया इसकी जानकारी नहीं


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। होरत्ती ने कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि उनसे पद छोड़ने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कांग्रेस सरकार ने उनसे इस्तीफा क्यों मांगा। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    बसवराज होरत्ती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं पता कि कांग्रेस सरकार ने उनसे इस्तीफा देने के लिए क्यों कहा। उन्होंने बताया कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। होरत्ती ने कहा कि वह सम्मानपूर्वक अपने पद से हटना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बिना किसी विवाद के इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम से उन्हें काफी दुख पहुंचा है।

    इससे पहले होरत्ती ने संकेत दिया था कि अगर उन्होंने पद छोड़ने से इनकार किया तो डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। उन्होंने कहा था कि सत्ताधारी दल चाहता है कि वह पद से हट जाएं। मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें इस संबंध में जानकारी दी गई थी। होरत्ती के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उनसे फोन पर दो बार बातचीत की और व्यक्तिगत मुलाकात के दौरान बताया कि पार्टी आलाकमान ने उनसे इस्तीफा मांगने का निर्देश दिया है।

    होरत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने उन्हें बताया कि उन्हें हटाने का फैसला पार्टी हाईकमान का है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। लेकिन जब यह राय बन गई कि उन्हें अब इस पद पर नहीं रहना चाहिए तो उन्होंने पद पर बने रहना उचित नहीं समझा।

    बसवराज होरत्ती ने कहा कि वह सदन में इस मुद्दे को उठाने के बाद इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब किसी पद को लेकर सहमति नहीं रहती तो जिम्मेदारी के साथ फैसला लेना जरूरी होता है।

    वहीं, इस घटनाक्रम के पीछे कांग्रेस संगठन की नई रणनीति को भी देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक में विधान परिषद के चेयरमैन पद के लिए सलीम अहमद और डिप्टी चेयरमैन पद के लिए उमाश्री के नाम को मंजूरी दी है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए जीएस पाटिल और डिप्टी स्पीकर पद के लिए एएस पोन्नाना के नामों पर भी सहमति दी गई है।

    बसवराज होरत्ती लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और विधान परिषद में उनका लंबा अनुभव रहा है। उनके इस्तीफे के बाद अब परिषद के नए अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बदलाव को लेकर अभी विस्तृत कारण सामने नहीं रखा गया है। दूसरी ओर, होरत्ती के बयान ने इस पूरे मामले को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में इस बदलाव का असर देखने को मिल सकता है।