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  • सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही। राजस्थान के सिरोही में नगर परिषद सभापति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर विवाद जारी है। पार्टी के नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से तीन पार्षदों और एक पार्षद पति को हटा दिया गया है। इनमें गीता पुरोहित, प्रवीण राठौड़, गौरव प्रजापत और धनपत सिंह शामिल हैं। इस घटनाक्रम को सभापति चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को अपेक्षा से कम वोट मिलने के बाद उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने अब तक किसी पार्षद के क्रॉस वोटिंग करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    सिरोही नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। सितंबर 2026 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के खाते में 10 सीटें आई थीं। दो वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए चुनाव हुआ। कांग्रेस ने रितु जैन को और भाजपा ने पूजा माली को उम्मीदवार बनाया था। मतदान में रितु जैन को 30 वोट मिले, जबकि पूजा माली को केवल 5 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस ने 25 वोटों के अंतर से सभापति पद पर जीत हासिल की। बाद में कांग्रेस के ईश्वर सिंह उपसभापति पद पर निर्विरोध चुने गए और नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।

    भाजपा के 10 पार्षदों के मुकाबले पार्टी उम्मीदवार को केवल पांच वोट मिलने के बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जाने लगी। नतीजों के आधार पर यह सवाल उठा कि क्या भाजपा के कुछ पार्षदों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, सभापति चुनाव में मतदान गोपनीय होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किस पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया। पार्टी के भीतर संदेह और असंतोष के बीच बुधवार देर रात चार लोगों को नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया। फिलहाल उनके खिलाफ पार्टी से निष्कासन या किसी पद से हटाने का आदेश सामने नहीं आया है।

    इस विवाद में गौरव प्रजापत का नाम भी चर्चा में है। सभापति चुनाव के बाद भाजपा के पांच पार्षद सारणेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने हाथ में जल लेकर पार्टी के प्रति वफादार रहने और सभापति पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन करने की कसम खाई थी। इन पार्षदों में गौरव प्रजापत का नाम भी बताया गया था। अब उन्हें भी व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद मंदिर में ली गई कसम का मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, गौरव प्रजापत के क्रॉस वोटिंग करने की पुष्टि नहीं हुई है।

    व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद पार्षद प्रवीण राठौड़ ने संगठन के सभी पदों और जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से ईमानदारी के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे थे और संगठन की ओर से दी गई जिम्मेदारियां निभाते रहे। नगर परिषद चुनाव के बाद पार्टी में हुए घटनाक्रम से उन्हें दुख पहुंचा है। उनके अनुसार, अब पहले की तरह सम्मान और भरोसे के साथ काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सऐप के माध्यम से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भेजा है। राठौड़ ने संगठन के पद छोड़े हैं, लेकिन पार्षद पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

    सिरोही भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी ने कहा कि उन्हें पार्षदों को व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कुछ पार्षदों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं और संगठन इन शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी पार्षद का इस्तीफा नहीं मिला है। इस बीच जिले के अन्य निकायों में भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा है। पिंडवाड़ा में उपसभापति और शिवगंज में सभापति चुनाव के दौरान दूसरी पार्टी को एक-एक वोट मिलने की बात सामने आई है। आबूरोड में सभापति चुनाव में भाजपा को 27 और कांग्रेस को 13 वोट मिले थे, जबकि उपसभापति चुनाव में भाजपा के वोट घटकर 22 और कांग्रेस के बढ़कर 18 हो गए। हालांकि, इन मामलों में भी संबंधित मतदाताओं की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। सिरोही में सभापति चुनाव से पहले रितु जैन के नामांकन पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों उम्मीदवार मैदान में रहे और रितु जैन चुनाव जीत गईं।

  • महाराष्ट्रः मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके

    महाराष्ट्रः मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में पंचायत और नगर निकाय चुनाव (Panchayat and Municipal Elections) अब खत्म हो चुके हैं। चुनावों के खत्म होने के बाद ठाकरे बंधुओं की पार्टियों के बीच में एक बार फिर से तनाव देखने को मिल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए। हालांकि, उद्धव गुट (Uddhav Group) और भाजपा की तरफ से इन आरोपों को खारिज कर दिया गया है।

    महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच उस समय से तनातनी चल रही है जब कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद, शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के समर्थन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी महापौर चुन लिया गया।

    राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष देशपांडे ने उद्धव गुट को आड़े हाथों लिया। कल्याण डोंबिवली स्थानीय निकाय में मनसे नेताओं द्वारा शिवसेना शिंदे गुट का समर्थन करने पर संजय राउत द्वारा की गई आलोचना का जिक्र कते हुए उन्होंने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही आचरण माना जाता है लेकिन जब मनसे ऐसा करती है तो उसे गलत ठहराया जाता है। देशपांडे ने दावा किया, “चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के प्रत्येक पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, इसके अलावा अन्य प्रस्ताव भी दिए गए। एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।”

    मुंबई में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण हासिल करने से नहीं रोक सके। शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे पार्षदों को धन मिलने के आरोप का प्रमाण पेश कर दें तो वह इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर शिवसेना (उबाठा) नेतृत्व का अपमान करने का भी आरोप लगाया।

    देशपांडे ने संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के दौरान क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया था या उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा और यह शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है। इसी बीच, संजय राउत ने बृहस्पतिवार को मुंबई में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की। राउत ने संवाददाताओं से कहा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है और उसे स्थानीय शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के साथ अधिक गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी।