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  • शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    मध्य प्रदेश । के शिवपुरी जिले में बीआरसीसी और एपीसी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में प्रस्तावित काउंसलिंग के जरिए 12 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से मिले नए निर्देशों के बाद फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लग गई है। निर्देशों के अनुसार, संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण होने तक नियुक्ति की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा।

    जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार के अनुसार, शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में काउंसलिंग होनी थी। इसके बाद परीक्षा के परिणाम के आधार पर रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। हालांकि, राज्य स्तर से मिले नए दिशा-निर्देशों के कारण तय कार्यक्रम को रोकना पड़ा है।

    यह मामला सहायक परियोजना समन्वयक यानी एपीसी और बीआरसीसी पदों पर नियोजन से जुड़ा है। राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने न्यायालय के निर्णय और उसके अनुपालन को लेकर कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें उच्च प्रभार और कूलिंग पीरियड से संबंधित प्रावधानों के तहत आवेदकों को परीक्षा में शामिल करने के न्यायालयीन निर्देशों का उल्लेख किया गया है।

    इन निर्देशों के अनुपालन में शिवपुरी जिले में 16 याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल किया गया था। योजना के अनुसार, परीक्षा परिणाम के आधार पर 30 अक्टूबर को होने वाली काउंसलिंग के बाद नियुक्ति से संबंधित अगली प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन नियुक्तियों से जुड़े न्यायालयीन मामलों के चलते अब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि काउंसलिंग की अगली तारीख कब निर्धारित की जाएगी।

    राज्य शिक्षा केंद्र ने अपने नए निर्देशों में न्यायालयीन प्रकरणों से निपटने के लिए जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को कहा है। जिन जिलों में नियुक्ति से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित हैं, वहां संबंधित याचिका के अनुसार एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाना है। इस अधिकारी को प्रकरण से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में जवाबदावा प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जवाबदावा तत्काल प्रस्तुत किया जाए और न्यायालय से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया जाए। इसका उद्देश्य लंबित प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष संबंधित पक्ष का जवाब समय पर प्रस्तुत करना है। राज्य शिक्षा केंद्र ने उन जिलों के लिए भी स्थिति स्पष्ट की है, जहां इस प्रकार के न्यायालयीन प्रकरण नहीं हैं। ऐसे जिलों में 2 सितंबर 2026 को जारी पूर्व पत्र के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जानी है।

    ये निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह की ओर से 29 अक्टूबर को जारी किए गए। इसके बाद शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय न्यायालयीन मामलों से संबंधित निर्देशों के पालन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    दफेदार सिंह सिकरवार ने बताया कि नए आदेश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी, इसका पता आगे की स्थिति स्पष्ट होने पर ही चलेगा। फिलहाल जिला स्तर पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और निर्देशों के अनुपालन की तैयारी की जा रही है। ऐसे में 12 पदों पर चयन की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को काउंसलिंग और नियुक्ति के लिए नई तारीख घोषित होने तक इंतजार करना होगा।

  • NEET UG-2026 में सीट छोड़ने पर 2 लाख की एग्जिट पेनल्टी हटाने की मांग, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    NEET UG-2026 में सीट छोड़ने पर 2 लाख की एग्जिट पेनल्टी हटाने की मांग, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    मध्य प्रदेश: में NEET UG-2026 की एमबीबीएस काउंसलिंग में आवंटित सीट छोड़ने पर लगाई गई 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। पटवारी ने सरकार से इस पेनल्टी को वापस लेने और विद्यार्थियों से पहले ही वसूली जा चुकी अतिरिक्त राशि लौटाने की मांग की है।

    पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि 3 सितंबर 2026 के राउंड-2 नोटिस में सीट छोड़ने पर 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी का प्रावधान किया गया। उनके अनुसार यह व्यवस्था पहले जारी की गई रूल बुक के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि रूल बुक में राउंड-2 तक आवंटित सीट छोड़ने की स्थिति में केवल प्रवेश शुल्क देय होने की जानकारी दी गई थी। विद्यार्थियों ने इसी नियम पुस्तिका के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।

    पटवारी ने कहा कि उसी समय ऑल इंडिया एमसीसी सहित अन्य राज्यों की मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रियाएं भी चल रही थीं। एमसीसी के राउंड-2 सीट आवंटन का कार्यक्रम 11 सितंबर को होना था, जबकि मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने फ्री एग्जिट की अंतिम तारीख 3 और 4 सितंबर निर्धारित कर दी थी।

    उनके अनुसार इस समय-सीमा के कारण विद्यार्थियों को एमसीसी के राउंड-2 परिणाम और सीट अपग्रेड होने की संभावनाओं की जानकारी मिले बिना ही मध्य प्रदेश में मिली सीट को छोड़ने या उसे बनाए रखने का अंतिम निर्णय लेना पड़ा। पटवारी ने इसे विद्यार्थियों के लिए परेशानी वाली स्थिति बताते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों की स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया।

    पटवारी ने यह भी कहा कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी अन्य काउंसलिंग व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है। उनके अनुसार एमसीसी की व्यवस्था में अधिकतम 10 हजार रुपये तक का नुकसान होता है। उन्होंने मांग की कि काउंसलिंग के पहले राउंड से ही सभी नियम स्पष्ट रूप से विद्यार्थियों के सामने रखे जाने चाहिए।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके बीच में नियमों में बदलाव विद्यार्थियों के लिए परेशानी पैदा करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि NEET UG की पुनः परीक्षा और काउंसलिंग में हुई देरी से विद्यार्थी पहले ही प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सीट छोड़ने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला प्रावधान उनके लिए आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।

    पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को वापस लेने के साथ इसे स्थगित किया जाए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त 2026 की रूल बुक में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विद्यार्थियों की देयता केवल प्रवेश शुल्क तक सीमित रखी जानी चाहिए।

    उन्होंने पहले से वसूली गई अतिरिक्त राशि विद्यार्थियों को वापस करने की मांग भी की। इसके अलावा राउंड-2 की प्रक्रिया पूरी होने से पहले आवंटित सीट छोड़ने के लिए विद्यार्थियों को उचित समय-सीमा उपलब्ध कराने की बात कही।

    पटवारी ने भविष्य में काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले नियमों में बदलाव नहीं करने की मांग भी मुख्यमंत्री के सामने रखी है। उनका कहना है कि काउंसलिंग से जुड़े सभी नियम प्रक्रिया शुरू होने से पहले स्पष्ट होने चाहिए, ताकि विद्यार्थी उपलब्ध विकल्पों और अलग-अलग काउंसलिंग के परिणामों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकें।

  • द स्पिरिट हंटर्स: मन, ऊर्जा और चेतना को जोड़कर हीलिंग की एक नई समग्र पहल

    द स्पिरिट हंटर्स: मन, ऊर्जा और चेतना को जोड़कर हीलिंग की एक नई समग्र पहल


    नई दिल्ली । उपचार की प्रक्रिया हमेशा केवल दवाओं, मशीनों या तय तकनीकों तक सीमित नहीं रही है। समय के साथ यह समझ गहरी होती गई है कि कई मानसिक और भावनात्मक समस्याओं की जड़ व्यक्ति के मन, भावनाओं और ऊर्जा के स्तर पर छिपी होती है। इसी सोच से जन्मी है द स्पिरिट हंटर्स नामक पहल, जो उपचार को एक समग्र और संवेदनशील दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करती है।द स्पिरिट हंटर्स उन लोगों के लिए एक सुरक्षित और सहज स्पेस उपलब्ध कराता है, जो मानसिक तनाव, भावनात्मक उलझन, भीतर के भय या ऐसे अनुभवों से गुजर रहे होते हैं, जिन्हें वे स्वयं भी स्पष्ट शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। यहाँ उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर तुरंत पहुँचना नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्थिति को गहराई, धैर्य और समझ के साथ सुनना और समझना है। यह मंच जजमेंट-फ्री माहौल में व्यक्ति को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर देता है।

    इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता उपचार को देखने का उसका अलग नजरिया है। द स्पिरिट हंटर्स का मानना है कि हर व्यक्ति की समस्या अलग होती है इसलिए उसका समाधान भी एक जैसा नहीं हो सकता। यहाँ किसी तय ढाँचे या फॉर्मूले के बजाय व्यक्ति के अनुभव, मानसिक स्थिति और ऊर्जा संतुलन को ध्यान में रखकर मार्गदर्शन दिया जाता है। उपचार प्रक्रिया में मानसिक और भावनात्मक बातचीत ऊर्जा संतुलन से जुड़े सेशन्स, अवचेतन मन को समझने की तकनीकें और असहज या नकारात्मक प्रभावों की पहचान जैसे पहलू शामिल होते हैं। यह तरीका व्यक्ति को केवल तात्कालिक राहत नहीं देता, बल्कि आत्म-समझ और आंतरिक स्पष्टता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है।

    द स्पिरिट हंटर्स में ऊर्जा और आध्यात्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा मार्गदर्शन अंकिता के. द्वारा संभाला जाता है। उनका फोकस लोगों को उनकी आंतरिक ऊर्जा से दोबारा जोड़ने पर रहता है, ताकि वे अपने भीतर चल रहे असंतुलन को पहचान सकें। उनका दृष्टिकोण डर अंधविश्वास या रहस्य पर आधारित नहीं, बल्कि शांति संतुलन और आत्मिक स्थिरता पर केंद्रित है। कई मामलों में यह मार्गदर्शन व्यक्ति को भावनात्मक रूप से हल्का महसूस कराने और उलझे हुए विचारों को स्पष्ट करने में सहायक साबित होता है।वहीं मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक पक्ष को संतुलित करने का कार्य डॉ. अक्षय के. वी. करते हैं। मनोविज्ञान और काउंसलिंग की पृष्ठभूमि के साथ उनका दृष्टिकोण व्यक्ति के मन में चल रही प्रक्रियाओं को समझने और उन्हें व्यावहारिक तरीके से सुलझाने पर केंद्रित रहता है। इससे उपचार की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित स्थिर और ज़मीनी बनती है।

    द स्पिरिट हंटर्स की खास बात यह है कि यहाँ विज्ञान और अध्यात्म को एक-दूसरे से अलग नहीं बल्कि पूरक के रूप में देखा जाता है। मानसिक समझ ऊर्जा और चेतना की संवेदनशीलता, व्यवहारिक मार्गदर्शन और गहराई से सुनने की प्रक्रिया ये सभी पहलू मिलकर व्यक्ति को संतुलित सहयोग प्रदान करते हैं। आज के तेज़ और दबाव भरे जीवन में जहाँ लोग अपनी समस्याओं को समझने और व्यक्त करने में भी कठिनाई महसूस करते हैं द स्पिरिट हंटर्स एक ऐसे हीलिंग स्पेस के रूप में उभरता है जहाँ बिना जल्दबाज़ी के सुना जाए और बिना जजमेंट के समझा जाए। यह पहल इस विचार को आगे बढ़ाती है कि उपचार केवल समस्या को ठीक करना नहीं बल्कि व्यक्ति को अपने भीतर संतुलन स्पष्टता और शांति की ओर ले जाना है।