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  • पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: देश ने याद किए पीड़ित, पीएम मोदी ने दिया सख्त संदेश

    पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: देश ने याद किए पीड़ित, पीएम मोदी ने दिया सख्त संदेश


    नई दिल्ली ।  पहलगाम आतंकी हमले को एक वर्ष पूरा होने पर देशभर में पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दर्दनाक घटना ने जम्मू कश्मीर के शांत माने जाने वाले पर्यटन स्थल को अचानक हिंसा और दहशत के केंद्र में बदल दिया था। बरसी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीड़ितों को याद करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत रुख को दोहराया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह घटना केवल एक आतंकी हमला नहीं थी, बल्कि देश की आत्मा पर लगा ऐसा घाव है जिसे समय भी आसानी से भर नहीं सकता।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने झुकने वाला नहीं है और देश की एकता तथा संकल्प शक्ति ऐसे समय में और मजबूत होती है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है। यह संदेश ऐसे समय आया जब देश इस घटना की पहली बरसी पर उन सभी लोगों को याद कर रहा था जिन्होंने अपनी जान गंवाई थी।

    यह हमला 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम क्षेत्र में हुआ था, जब बड़ी संख्या में पर्यटक वहां मौजूद थे। अचानक हुए इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक शामिल थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और घाटी में पर्यटन गतिविधियों पर भी इसका गहरा असर पड़ा था। उस समय की भयावह स्थिति और उसके बाद का माहौल लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहा।

    सुरक्षा एजेंसियों की जांच में इस हमले के पीछे एक आतंकी संगठन से जुड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी, जो सीमा पार स्थित संरचनाओं से जुड़ा बताया गया। जांच में यह भी संकेत मिले कि यह हमला पूर्व नियोजित था और इसका उद्देश्य क्षेत्र में भय और अस्थिरता पैदा करना था। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए गए।

    हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान चलाया था, जिसके तहत सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई को रणनीतिक और सीमित उद्देश्य वाला बताया गया था, जिसका लक्ष्य केवल आतंकी ढांचे को कमजोर करना था। इस कदम ने यह संदेश दिया कि देश अब किसी भी आतंकी घटना का जवाब अधिक संगठित और निर्णायक तरीके से देगा।

    पहलगाम की इस घटना की बरसी पर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने मौन रखकर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। यह दिन केवल एक स्मरण नहीं रहा, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक भी बना जिसमें आतंकवाद के खिलाफ निरंतर संघर्ष और सतर्कता की आवश्यकता को दोहराया गया। स्थानीय लोगों के लिए यह दिन आज भी उस भयावह अनुभव की याद दिलाता है जिसने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया था।

    यह बरसी इस बात की भी याद दिलाती है कि सुरक्षा और शांति केवल एक घटना के बाद की प्रतिक्रिया नहीं हो सकती, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें समाज, सरकार और सुरक्षा व्यवस्था सभी की साझा भूमिका होती है। पहलगाम की घटना ने देश को यह संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लंबी है और इसमें एकजुटता सबसे बड़ी ताकत है।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर शौर्य चक्र से हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।

    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन के स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।

    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई।सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है। पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।

    यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है। सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव के और इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर मिला शौर्य चक्र, हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
    शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।
    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन का स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।
    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई है।
    सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।
    पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है।सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव केऔर इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।