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  • UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    सहारनपुर। सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने से हड़कंप मच गया है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी का खुलासा महज 4.30 लाख रुपये की कमी से हुआ। आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजी गई रकम की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक की टीम ने करेंसी चेस्ट की जांच शुरू की, जिसमें एक-एक नोट की पड़ताल के दौरान नकली नोटों का बड़ा जखीरा सामने आया।

    11.50 करोड़ रुपये भेजे गए थे जयपुर

    सहारनपुर में पीएनबी की करीब 72 शाखाएं हैं और दो करेंसी चेस्ट संचालित होते हैं। इनमें एक घंटाघर के पास सोफिया मार्केट और दूसरा गंगोह में है। 5 अगस्त से सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजे गए थे। इसमें सड़े-गले और कटे-फटे नोट भी शामिल थे।

    जयपुर में जमा रकम की जांच के दौरान अधिकारियों को 4,30,900 रुपये की कमी मिली। इसकी जानकारी मेरठ कार्यालय को दी गई। इसके बाद बैंक मुख्यालय से टीम सहारनपुर पहुंची और करेंसी चेस्ट में रखी रकम की जांच शुरू की गई।

    पहले मिले ₹7.40 करोड़ के नकली नोट

    जांच टीम ने करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की बारीकी से जांच शुरू की। शुरुआती पड़ताल में करीब 7.40 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने की जानकारी सामने आई। जांच आगे बढ़ी तो नकली नोटों की संख्या और रकम भी बढ़ती गई।

    बैंक की टीम के मुताबिक, सोमवार देर रात तक करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने का दावा किया गया है। जांच अभी जारी है, इसलिए रकम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    4-5 दिन से चल रही नोटों की जांच

    करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की जांच पिछले चार-पांच दिनों से चल रही है। मेरठ और दिल्ली स्थित बैंक मुख्यालय से पहुंची टीमें एक-एक नोट की पड़ताल कर रही हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी मिलने के बाद बैंक के स्थानीय अधिकारियों से लेकर मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।

    करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे नकली नोट?

    इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नकली करेंसी बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे। बैंक में रकम जमा होने से पहले नोटों की जांच की जाती है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली नोटों के बंडलों में नकली नोट किस स्तर पर शामिल हुए और वे करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।

    बड़े नेटवर्क की आशंका भी

    करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के बाद किसी बड़े नेटवर्क की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट कहां तैयार किए गए, इनमें किस तरह के कागज और स्याही का इस्तेमाल हुआ और इन्हें असली नोटों के बीच किस स्तर पर मिलाया गया।

    तीन अधिकारी निलंबित, हाउसकीपर हटाया

    पीएनबी की मुख्य बैंक प्रबंधक निशा सिंह के मुताबिक, करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय से टीम भेजी गई है और जांच जारी है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि पार्ट टाइम हाउसकीपर को हटा दिया गया है।

    जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

  • इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक धराया 40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद

    इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक धराया 40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद


    इंदौर । इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने की एक कोशिश ने जाली करेंसी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। एक युवक रेस्टोरेंट में नकली नोट देकर भुगतान करने पहुंचा था लेकिन संचालक की सतर्कता के कारण उसकी चालाकी सफल नहीं हो सकी। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके दो साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से 40 हजार रुपये के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से नकली नोट तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने की कोशिश कर रहा था।

    गांधी नगर थाना पुलिस के अनुसार 25 जून को राजनगर स्थित सांवरिया रेस्टोरेंट पर संचालक यशवंत यादव मौजूद थे। इसी दौरान दीपक नाम का युवक वहां पहुंचा और भुगतान के लिए 200 रुपये का नोट दिया। नोट को देखते ही संचालक को उस पर शक हुआ। उन्होंने कर्मचारियों की मदद से युवक को वहीं रोक लिया और तत्काल पुलिस को सूचना दी।

    पुलिस पूछताछ में दीपक ने अपने साथी संजय का नाम बताया। इसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए संजय और उसके साथी रवि को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से 40 हजार रुपये के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन जब्त की गई। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने नकली नोट बाजार में चलाए हैं और इनके संपर्क में कौन कौन लोग थे।

    जांच में सामने आया कि दीपक और संजय पहले एक शराब दुकान पर सेल्समैन के रूप में साथ काम करते थे। वहीं दोनों की पहचान हुई थी। इसी दौरान संजय ने दीपक को बताया था कि उसका एक परिचित बिल्कुल असली जैसे दिखने वाले नकली नोट तैयार करता है। कुछ समय बाद दीपक ने नौकरी छोड़ दी और ट्रक ड्राइवर बन गया जबकि संजय इंदौर आ गया। बाद में दोनों के बीच फिर संपर्क हुआ और नकली नोटों के कारोबार की योजना बनाई गई।

    पुलिस के अनुसार दोनों के बीच ऐसा सौदा तय हुआ था जिसमें एक हजार रुपये देने पर चार हजार रुपये के नकली नोट उपलब्ध कराए जाते थे। दीपक पहली बार ही नकली नोट लेकर उन्हें बाजार में चलाने निकला था लेकिन रेस्टोरेंट संचालक की सतर्कता के कारण वह पकड़ा गया और पूरा मामला सामने आ गया।

    जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी संजय के खिलाफ पहले से ही एसटीएफ में नकली नोटों से जुड़े दो मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं और नकली नोट तैयार करने का सामान कहां से लाया जाता था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों को इस नेटवर्क के जरिए जाली करेंसी उपलब्ध कराई गई। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।