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  • सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बदला आतंकियों का गेमप्लान, कश्मीर में दबाव बढ़ने के बाद गुजरात और राजस्थान के आर्थिक प्रतिष्ठान निशाने पर

    सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बदला आतंकियों का गेमप्लान, कश्मीर में दबाव बढ़ने के बाद गुजरात और राजस्थान के आर्थिक प्रतिष्ठान निशाने पर

    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा के सामने आतंकवाद का स्वरूप लगातार बदलता नजर आ रहा है। लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर तक सीमित रहने वाली आतंकी गतिविधियों के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों पर भी विशेष नजर बनाए हुए हैं। हाल के दिनों में एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद सुरक्षा तंत्र ने सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकवादी संगठन केवल पारंपरिक संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय देश के आर्थिक और औद्योगिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की मंशा से नई रणनीतियों पर काम कर सकते हैं। इसी कारण महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, गुजरात और राजस्थान की भौगोलिक स्थिति उन्हें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। दोनों राज्यों की सीमाएं पाकिस्तान से जुड़ी होने के कारण यहां लगातार निगरानी रखी जाती है। इसके अलावा इन राज्यों में देश के कई बड़े औद्योगिक केंद्र, ऊर्जा परियोजनाएं, परिवहन नेटवर्क और बंदरगाह स्थित हैं। यदि ऐसे किसी महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने का प्रयास होता है, तो उसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के माहौल पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां इन क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा दायरे में रखकर लगातार निगरानी कर रही हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि आतंकवादी संगठनों की रणनीति समय के साथ बदली है। पहले जहां उनका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा करना और सुरक्षा बलों को चुनौती देना होता था, वहीं अब देश के महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक ढांचों को संभावित लक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है। पश्चिमी भारत के बड़े बंदरगाह, पेट्रोलियम रिफाइनरी, ऊर्जा परियोजनाएं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। इसी दिशा में तटीय निगरानी, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    इतिहास भी इस बात का संकेत देता है कि देश के आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों को पहले भी आतंकवादी निशाना बनाने का प्रयास कर चुके हैं। अतीत में बड़े आतंकी हमलों के बाद तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को काफी मजबूत किया गया था। वर्तमान समय में सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग भी है। जांच एजेंसियां इस संभावना पर भी नजर रख रही हैं कि संदिग्ध नेटवर्क सामान्य उपयोग की वस्तुओं का अलग-अलग स्थानों से संग्रह कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर से बचने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए साइबर निगरानी, वित्तीय लेनदेन की जांच और तकनीकी खुफिया तंत्र को भी लगातार सशक्त बनाया जा रहा है।

    उभरते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं। सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है, जबकि महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, ऊर्जा केंद्रों, बंदरगाहों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और खुफिया संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के जरिए संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने और उन्हें विफल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी खुफिया तंत्र और नागरिकों की सतर्कता के संयुक्त प्रयास से ही बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

  • पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की अहम बैठक, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग बढ़ाने का साझा संकल्प

    पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की अहम बैठक, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग बढ़ाने का साझा संकल्प


    नई दिल्ली ।
    भारत और न्यूजीलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देते हुए आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ सहयोग को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय शांति, स्थिरता और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    वार्ता के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद सहित किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियों को वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए ऐसे अपराधों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने हाल के आतंकी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे अपराधों के जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाना और उन्हें शीघ्र दंड दिलाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

    संयुक्त बयान में आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराते हुए आतंकवादी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और ऑनलाइन गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सूचना साझा करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और संस्थागत समन्वय को मजबूत करना आवश्यक है। इसी दिशा में आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह के गठन के लिए हुए समझौते का भी स्वागत किया गया, जिससे दोनों देशों की एजेंसियों के बीच नियमित संवाद और सूचना आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।

    बैठक में साइबर सुरक्षा और डिजिटल क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां भी प्रमुख विषय रहीं। दोनों देशों ने साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा और नई तकनीकों से उत्पन्न जोखिमों का संयुक्त रूप से सामना करने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही वित्तीय अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के विरुद्ध कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया। दोनों पक्षों ने नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और संबंधित एजेंसियों के बीच औपचारिक सहयोग व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति जताई।

    प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को साझा प्राथमिकता बताते हुए स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी क्षेत्रीय व्यवस्था के समर्थन को दोहराया। दोनों नेताओं ने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए तथा समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन वैश्विक व्यापार एवं सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप किए जाने पर भी बल दिया।

    दोनों देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय मंचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करते हुए पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान क्षेत्रीय मंच और अन्य क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के माध्यम से सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापक सहमति से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, साइबर सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी तथा दोनों देश बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकेंगे।

  • शोपियां में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर गनी मारा गया, चार दिन बाद मिला शव

    शोपियां में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर गनी मारा गया, चार दिन बाद मिला शव


    नई दिल्ली
    । जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर गनी को मार गिराया गया। मुठभेड़ के कुछ दिनों बाद चलाए गए व्यापक तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई को दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शोपियां के सैदपोरा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस, राष्ट्रीय राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। घने बागानों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच आधुनिक निगरानी उपकरणों की सहायता से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।

    अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया। इसके बाद पूरे क्षेत्र को घेरकर तलाशी और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया। इसी दौरान गोलीबारी हुई, जिसका सुरक्षा बलों ने जवाब दिया। बाद में इलाके की विस्तृत तलाशी के दौरान एक शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जाकिर गनी के रूप में की गई। घटनास्थल से हथियार और अन्य सैन्य सामग्री भी बरामद होने की पुष्टि हुई।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जाकिर गनी लंबे समय से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था और वह कई आतंकी अभियानों में शामिल माना जाता था। उसकी मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही थीं। संयुक्त अभियान के जरिए उसे निष्क्रिय करना आतंकवाद विरोधी प्रयासों की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

    शोपियां जिला लंबे समय से आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के कारण संवेदनशील क्षेत्र रहा है। दक्षिण कश्मीर का यह इलाका अपने घने बागानों, जंगलों और दुर्गम भूभाग के कारण आतंकवादियों के लिए छिपने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का मार्ग माना जाता रहा है। यही वजह है कि सुरक्षा बल यहां लगातार तलाशी अभियान और निगरानी अभियान चलाते रहते हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए सुरक्षा बलों ने कई बड़े अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के दौरान अनेक वांछित आतंकवादी मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार दबाव बनाए रखने से स्थानीय आतंकी नेटवर्क कमजोर हुआ है और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है।

    अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अभी भी तलाशी अभियान जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। सुरक्षा बल आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बनाए हुए हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान आतंकवादी संगठनों की नेतृत्व क्षमता और परिचालन ढांचे को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार खुफिया समन्वय, आधुनिक तकनीक और संयुक्त सुरक्षा अभियानों के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

  • आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी कार्रवाई, जैश-लश्कर से जुड़े 23 आतंकियों को UAPA के तहत घोषित किया व्यक्तिगत आतंकवादी

    आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी कार्रवाई, जैश-लश्कर से जुड़े 23 आतंकियों को UAPA के तहत घोषित किया व्यक्तिगत आतंकवादी


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और मजबूत करते हुए जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के माध्यम से इन सभी के नाम अधिनियम की चौथी अनुसूची में शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल अधिकांश व्यक्ति पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय बताए गए हैं। इन पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने, आतंकियों की भर्ती करने, प्रशिक्षण देने, हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति कराने, घुसपैठ में सहायता देने तथा ड्रोन के माध्यम से हथियार भेजने जैसे गंभीर आरोप हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ये सभी विभिन्न आतंकी संगठनों के संचालन और विस्तार में अलग-अलग भूमिकाएं निभाते रहे हैं।

    सरकार का मानना है कि UAPA के तहत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने से उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो जाती है। इससे संबंधित एजेंसियों को आतंकवादी गतिविधियों के वित्तीय, लॉजिस्टिक और परिचालन नेटवर्क पर कार्रवाई करने में भी सहायता मिलती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझा करने की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलती है।

    अधिसूचना में शामिल कई व्यक्तियों पर सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों की साजिश, सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ, हथियारों की आपूर्ति तथा भारत में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल को सहायता उपलब्ध कराने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ व्यक्तियों के बारे में यह भी कहा गया है कि वे लंबे समय से पाकिस्तान में रहकर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के लिए संचालन, भर्ती और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।

    गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में ऐसे व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है जिन पर ड्रोन के माध्यम से हथियार और गोला-बारूद भारत भेजने, आतंकी हमलों की योजना तैयार करने तथा युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ने का आरोप है। इसके अलावा कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनके विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से संपर्क होने का दावा किया गया है।

    सरकार लगातार आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती तंत्र और सीमा पार से संचालित आतंकी ढांचे के खिलाफ बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसी नीति के तहत समय-समय पर प्रतिबंधित संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। हालिया निर्णय को भी उसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाले संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

  • दिल्ली में बड़े आतंकी हमले की साजिश नाकाम, ISI से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क का भंडाफोड़, चार आरोपी हथियारों समेत गिरफ्तार

    दिल्ली में बड़े आतंकी हमले की साजिश नाकाम, ISI से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क का भंडाफोड़, चार आरोपी हथियारों समेत गिरफ्तार


    नई दिल्ली।
    राजधानी दिल्ली में संभावित आतंकी साजिश को समय रहते विफल करते हुए पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े बताए जा रहे एक संदिग्ध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें तीन पंजाब और एक दिल्ली से पकड़ा गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में हिंसक वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विदेशी हथियार, जिंदा कारतूस और कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए संदिग्ध एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जो सीमा पार बैठे संचालकों के संपर्क में रहकर गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को राजधानी में संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने और हमले की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इस नेटवर्क की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद समन्वित कार्रवाई की गई।

    पूछताछ के दौरान सामने आया कि नेटवर्क का एक प्रमुख सदस्य पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजी जाने वाली हथियारों और मादक पदार्थों की खेप प्राप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाता था। जांच में यह भी पता चला कि विदेशी नंबरों के माध्यम से सीमा पार मौजूद संचालकों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाता था। पुलिस अब इन संचार माध्यमों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल का विश्लेषण कर नेटवर्क की पूरी श्रृंखला तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में कानून के शिकंजे में आ चुके हैं। पुलिस का मानना है कि संगठित अपराध, हथियारों की तस्करी और आतंकी गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की जाएगी। इसी आधार पर विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके।

    दिल्ली से गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, उसे राजधानी के धार्मिक स्थलों, पुलिस थानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा उसे दिल्ली में फायरिंग जैसी वारदात को अंजाम देने के निर्देश मिलने के संकेत भी मिले हैं। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि साजिश कितनी व्यापक थी और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आतंक से संबंधित प्रावधानों, हथियार रखने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि बरामद हथियारों की उत्पत्ति, वित्तीय लेनदेन, सीमा पार संपर्क और डिजिटल नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे प्रकरण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्प्रभावी बनाया जा सके।

  • G7 से लौटते ही अमित शाह से मिले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर हुई अहम चर्चा

    G7 से लौटते ही अमित शाह से मिले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर हुई अहम चर्चा


    नई दिल्ली ।
    फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन से लौटने के तुरंत बाद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई मुलाकात ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। दोनों नेताओं के बीच हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां, सीमा पार अपराध, आतंकवाद और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दे दोनों देशों के एजेंडे में प्रमुख स्थान रखते हैं।

    बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति, सीमा सुरक्षा को प्रभावी बनाने और संगठित अपराधों पर कार्रवाई जैसे विषय बातचीत के केंद्र में रहे। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में लोकतांत्रिक देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और खुफिया समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

    चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर भी केंद्रित रहा। दोनों देशों ने ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया। हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मादक पदार्थों की तस्करी को देखते हुए भारत और अमेरिका दोनों इस मुद्दे को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहे हैं। इसी संदर्भ में सीमा प्रबंधन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

    बैठक में अपराधियों के प्रत्यर्पण और कानूनी सहयोग से जुड़े विषय भी शामिल रहे। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पार अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए न्यायिक और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। इससे दोनों देशों में कानून के शासन को मजबूत करने और अपराधियों को न्याय के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।

    इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह G7 शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद हुई है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई थी। उस बैठक में व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि सर्जियो गोर और अमित शाह की बैठक उसी व्यापक संवाद की निरंतरता का हिस्सा है।

    भारत लौटने के बाद सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए दोनों देशों के संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने संकेत दिया कि हालिया उच्चस्तरीय वार्ताओं से कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं और दोनों देश भविष्य में भी विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के संबंध अब केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता जैसे विषय दोनों देशों की साझेदारी के प्रमुख आधार बन चुके हैं। ऐसे में उच्चस्तरीय बैठकों और लगातार संवाद को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक मुद्दों पर भी नई प्रगति देखने को मिल सकती है। इसी दिशा में आगे की वार्ताओं को गति देने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों के भारत दौरे की संभावना भी जताई जा रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी भी दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई है।

    भारत और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते संवाद और सहयोग को देखते हुए यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दोनों देशों की प्राथमिकताओं में समानता और साझा रणनीतिक हित भविष्य में इस साझेदारी को और मजबूत बना सकते हैं।

  • भारत-उज्बेकिस्तान का ‘डस्टलिक’ युद्धाभ्यास संपन्न, आतंकवाद-रोधी क्षमता में दिखा दमदार समन्वय

    भारत-उज्बेकिस्तान का ‘डस्टलिक’ युद्धाभ्यास संपन्न, आतंकवाद-रोधी क्षमता में दिखा दमदार समन्वय


    नई दिल्ली। 
    भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित सातवां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह अभ्यास उज्बेकिस्तान में दोनों देशों की सेनाओं के बीच रणनीतिक तालमेल और सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। इस दौरान सैनिकों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करते हुए तेज और सटीक कार्रवाई का प्रदर्शन किया। आतंकवाद-रोधी अभियानों को केंद्र में रखते हुए विभिन्न आधुनिक सैन्य तकनीकों और रणनीतियों का गहन अभ्यास किया गया, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और अधिक सुदृढ़ हुआ।
    अभ्यास के दौरान जवानों ने दुश्मन के ठिकानों की पहचान, निगरानी और उन पर सटीक कार्रवाई करने की रणनीतियों को व्यवहार में उतारा। आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ड्रोन और मानव रहित उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया गया। इसके साथ ही युद्धक्षेत्र में घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने और उन्हें तत्काल सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया का भी विशेष अभ्यास किया गया। इन गतिविधियों ने सैनिकों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ उनके बीच आपसी तालमेल को भी बेहतर बनाया।

    इस सैन्य अभ्यास में पर्वतीय और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन चलाने की विशेष ट्रेनिंग दी गई। सैनिकों ने रस्सियों के सहारे उतरने, ऊंचाई वाले इलाकों में तेजी से मूवमेंट करने और स्नाइपर ऑपरेशन जैसी जटिल चुनौतियों का सामना किया। इसके अलावा रॉकेट हमलों और जवाबी कार्रवाई का भी अभ्यास किया गया, जिससे उनकी युद्धक क्षमता और रणनीतिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। संयुक्त रूप से योजनाएं बनाकर उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की क्षमता भी इस अभ्यास के माध्यम से विकसित हुई।

    अभ्यास का एक महत्वपूर्ण पहलू अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई की रणनीतियों को मजबूत करना रहा। सैनिकों ने आतंकवादी ठिकानों में घुसकर कार्रवाई करने, तलाशी अभियान चलाने और छापेमारी जैसी तकनीकों का अभ्यास किया। इससे वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त ऑपरेशन को अधिक प्रभावी और सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इस तरह के अभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं के बीच साथ मिलकर काम करने की क्षमता और अधिक बेहतर होती है, जिससे भविष्य में किसी भी चुनौती का सामना संयुक्त रूप से किया जा सकेगा।

    समापन के अवसर पर इस अभ्यास को दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला बताया गया। ‘डस्टलिक’ ने न केवल सैन्य साझेदारी को मजबूत किया है, बल्कि भविष्य में संयुक्त मिशनों को अधिक कुशलता और प्रभावशीलता के साथ अंजाम देने की क्षमता भी विकसित की है। यह अभ्यास इस बात का संकेत है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में दोनों देश आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।