नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और मजबूत करते हुए जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के माध्यम से इन सभी के नाम अधिनियम की चौथी अनुसूची में शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल अधिकांश व्यक्ति पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय बताए गए हैं। इन पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने, आतंकियों की भर्ती करने, प्रशिक्षण देने, हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति कराने, घुसपैठ में सहायता देने तथा ड्रोन के माध्यम से हथियार भेजने जैसे गंभीर आरोप हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ये सभी विभिन्न आतंकी संगठनों के संचालन और विस्तार में अलग-अलग भूमिकाएं निभाते रहे हैं।
सरकार का मानना है कि UAPA के तहत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने से उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो जाती है। इससे संबंधित एजेंसियों को आतंकवादी गतिविधियों के वित्तीय, लॉजिस्टिक और परिचालन नेटवर्क पर कार्रवाई करने में भी सहायता मिलती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझा करने की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलती है।
अधिसूचना में शामिल कई व्यक्तियों पर सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों की साजिश, सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ, हथियारों की आपूर्ति तथा भारत में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल को सहायता उपलब्ध कराने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ व्यक्तियों के बारे में यह भी कहा गया है कि वे लंबे समय से पाकिस्तान में रहकर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के लिए संचालन, भर्ती और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में ऐसे व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है जिन पर ड्रोन के माध्यम से हथियार और गोला-बारूद भारत भेजने, आतंकी हमलों की योजना तैयार करने तथा युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ने का आरोप है। इसके अलावा कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनके विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से संपर्क होने का दावा किया गया है।
सरकार लगातार आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती तंत्र और सीमा पार से संचालित आतंकी ढांचे के खिलाफ बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसी नीति के तहत समय-समय पर प्रतिबंधित संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती रही है। हालिया निर्णय को भी उसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाले संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।



