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  • 16 साल पुराने मालेगांव ब्लास्ट मामले में राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुना अहम फैसला

    16 साल पुराने मालेगांव ब्लास्ट मामले में राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुना अहम फैसला


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मालेगांव (Malegaon Blast) में साल 2006 में हुए बम धमाकों के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है जहां Bombay High Court ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है यह फैसला करीब सत्रह साल बाद आया है जिससे यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और लोगों की नजरें इस पर टिक गई हैं।

    17 साल पुराने Malegaon Blast केस में सबूतों की कमी, कोर्ट ने आरोपियों को दी राहत—अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी किया गया इस मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और कई बार जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे

    यह घटना आठ सितंबर 2006 को हुई थी जब मालेगांव में सिलसिलेवार धमाके हुए थे इन धमाकों में करीब पैंतालीस लोगों की मौत हो गई थी जबकि सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे घटना के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियों ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया और बाद में आरोपपत्र दाखिल किया गया हालांकि अदालत में पेश किए गए सबूत आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माने गए

    2006 धमाके में 45 लोगों की गई थी जान, जांच पर उठे सवाल—फैसले के बाद एक बार फिर जांच प्रक्रिया पर बहस तेज हो गई है कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाना गंभीर सवाल खड़े करता है वहीं पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला निराशाजनक माना जा रहा है क्योंकि उन्हें न्याय की उम्मीद थी

    इस निर्णय ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित कर दिया है अब देखना होगा कि आगे इस मामले में कोई नई कानूनी पहल होती है या नहीं फिलहाल इस फैसले के साथ ही यह पुराना मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है और देश भर में इस पर चर्चा जारी है

  • हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 5 लाख से ज्यादा संविदा कर्मियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन

    हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 5 लाख से ज्यादा संविदा कर्मियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में वर्षों से काम कर रहे संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और स्थाई कर्मचारियों जैसी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट के इस आदेश से प्रदेश के 5 लाख से अधिक कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

     10 साल से ज्यादा सेवा वालों को मिलेगा लाभ

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी 10 साल या उससे अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें स्थाई श्रेणी के लाभ से वंचित करने का कोई ठोस कारण नहीं है। ऐसे कर्मचारियों को वर्गीकरण (classification) और उससे जुड़े लाभ मिलना चाहिए।

    न्यूनतम वेतन देना जरूरी

    हाईकोर्ट ने कहा कि आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को कम वेतन देना अनुचित है। वर्तमान में कई आउटसोर्स कर्मचारियों को सिर्फ 8 से 10 हजार रुपए तक वेतन मिल रहा है, जबकि उसी पद पर नियमित कर्मचारियों को इससे दोगुना या ज्यादा वेतन मिलता है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी श्रेणियों के कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए।

     कितने कर्मचारी होंगे प्रभावित

    प्रदेश में करीब:

    2.5 लाख संविदा कर्मचारी
    1.5 लाख बिजली कंपनियों में आउटसोर्स कर्मचारी
    1 लाख अन्य विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी
    12 हजार अंशकालिक कर्मचारी

    यानी कुल मिलाकर 5 लाख से ज्यादा कर्मचारी इस फैसले से प्रभावित होंगे।

    सरकार को भी दी नसीहत

    कोर्ट ने यह भी माना कि सरकार हर साल इन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखती है, जिससे साफ है कि उनकी जरूरत बनी हुई है। ऐसे में उन्हें आर्थिक न्याय, सम्मानजनक जीवन और पर्याप्त वेतन देना जरूरी है।

    नर्सिंग भर्ती पर भी अहम टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर भी सवाल उठे। कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए पुरुष अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने की अनुमति दे दी है। हालांकि उनका अंतिम चयन कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

     आगे क्या होगा?

    अब राज्य सरकार को कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नीति में बदलाव करना होगा। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ सरकारी व्यवस्था में भी स्थिरता आने की उम्मीद है।