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  • सुप्रीम कोर्ट में तीखी टिप्पणी से मचा विवाद, CJI सूर्यकांत ने युवाओं और एक्टिविस्ट्स पर कही बड़ी बात

    सुप्रीम कोर्ट में तीखी टिप्पणी से मचा विवाद, CJI सूर्यकांत ने युवाओं और एक्टिविस्ट्स पर कही बड़ी बात



    नई दिल्ली। सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कुछ युवाओं और एक्टिविस्ट्स को लेकर सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो न तो किसी पेशे में स्थिर होते हैं और न ही किसी जिम्मेदारी से जुड़े होते हैं, और बाद में वे विभिन्न मंचों से सिस्टम की आलोचना करने लगते हैं।

    यह टिप्पणी उस समय आई जब जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच एक याचिकाकर्ता की सीनियर एडवोकेट बनने की मांग पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आचरण और सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की गई भाषा पर भी सवाल उठाए।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि कुछ लोग बिना स्थायी पेशे या जिम्मेदारी के अलग-अलग मंचों पर सक्रिय होकर सिस्टम पर लगातार हमला करते हैं। हालांकि अदालत की टिप्पणी को लेकर अब बहस भी शुरू हो गई है और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा कोई स्टेटस सिंबल नहीं है, बल्कि यह योग्यता, अनुभव और पेशेवर योगदान के आधार पर दिया जाने वाला सम्मान है। बेंच ने कहा कि इस पद को पाने के लिए प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है और इसे केवल प्रतिष्ठा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इस पूरे मामले के बाद न्यायिक भाषा और सार्वजनिक टिप्पणियों की मर्यादा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

  • अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    नई दिल्ली ।
    सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई एक बार फिर हुई, जिसमें अब अगली तारीख 21 मई 2026 तय कर दी गई है। यह मामला कई साल पुराने उस बयान से जुड़ा बताया जाता है, जो कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित टिप्पणी से संबंधित है। इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। इसी वजह से अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित कर दी। यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है और समय-समय पर इसकी सुनवाई होती रही है।

    इस केस में वादी पक्ष की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि वे कोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। वकील की ओर से यह भी कहा गया कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी की आवाज का नमूना जांच के लिए देने की बात शामिल थी। इस फैसले के बाद भी मामला आगे बढ़ता रहा और अब अदालत ने वादी पक्ष को अपनी दलीलों के लिए अंतिम मौका भी दिया है।

    यह पूरा मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों को मजबूती से पेश कर रहे हैं। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

  • राजेंद्र भारती केस: दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब 15 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

    राजेंद्र भारती केस: दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब 15 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई


    दतिया। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित सहकारिता बैंक भ्रष्टाचार मामले में नया मोड़ आया है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई को स्थगित कर दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। मंगलवार को निर्धारित सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए अगली तारीख पर पेश होने के निर्देश दिए हैं।

    निचली अदालत के फैसले को दी गई चुनौती
    गौरतलब है कि एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी थी। इसी फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने हाईकोर्ट का रुख किया है।

    सियासत में तेज हुआ टकराव

    मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और अदालत का निर्णय सर्वोपरि है।

    सदस्यता बहाली पर टिकी नजरें
    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हाईकोर्ट से राहत मिलने पर राजेंद्र भारती की सदस्यता बहाल हो पाएगी। फिलहाल राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें 15 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।

  • दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली

    दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली


    दिल्ली। उच्च न्यायालय में एक अनोखी घटना सामने आई, जब एक वरिष्ठ वकील सुनवाई के दौरान अपने मुँह पर लाल रंग की टेप लगाकर अदालत कक्ष में पहुँचे। इस असामान्य घटना को देखकर न्यायाधीशों ने कड़ी नाराज़गी जताई और मामले की अगली सुनवाई को जनवरी 2026 तक के लिए टाल दिया। वकील का कहना था कि वह अपने साथ हुई पिछली सुनवाई की घटना के विरोध में ऐसा कर रहे थे, जहाँ उन्हें बीच में ही बोलने से रोक दिया गया था।

    यह घटना 1 दिसंबर की है। अदालत उस समय अवमानना से जुड़े एक मामले और उससे संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसे नंद किशोर नामक व्यक्ति ने दायर किया था। लगभग 25 वर्ष से अधिक समय तक कानूनी सेवा में रहे अधिवक्ता आर. के. सैनी टेप लगाकर अदालत में उपस्थित हुए। उन्हें इस रूप में देखकर न्यायाधीशों को पहले तो यह लगा कि शायद उन्हें किसी प्रकार की चोट लगी है, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।

    सुनवाई कर रही पीठ में न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अनीश दयाल शामिल थे। दोनों न्यायाधीशों ने सैनी से टेप लगाने का कारण पूछा। इस पर सैनी ने कहा कि यह उनका प्रतीकात्मक विरोध है। उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी दलीलें पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया था और उन्हें बीच में ही रोक दिया गया था। इसी कारण वह अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए इस तरह उपस्थित हुए हैं।

    वकील का यह जवाब सुनकर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि सैनी का यह आचरण अत्यंत अनुचित है और एक अनुभवी वकील से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में उन्हें इसलिए रोका गया था क्योंकि उनकी दलीलें बहुत लंबी और दोहराव वाली थीं, और न्यायालय को दूसरे पक्ष की बात भी सुननी थी। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी भी पक्ष को चुप कराना नहीं था, बल्कि सुनवाई को संतुलित और न्यायसंगत बनाए रखना था।

    न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस तरह का व्यवहार अदालत की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि एक वरिष्ठ वकील, जिनके पास 25 वर्ष से अधिक का अनुभव है, उनसे अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी कि यदि वह चाहती तो सैनी के खिलाफ कड़े आदेश जारी कर सकती थी, परंतु उसने ऐसा न करने का निर्णय लिया है। अदालत ने इस घटना को अदालत की कार्यवाही के रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के व्यवहार पर अंकुश लगाया जा सके।

    घटना के बाद अदालत ने मुख्य मामले को आगे बढ़ाने के बजाय अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2026 निर्धारित कर दी। न्यायालय का मानना था कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से सुनवाई के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटक जाता है।

    इस पूरे प्रकरण ने न्यायालय कक्ष में बैठे अन्य लोगों को भी आश्चर्य में डाल दिया। वकील द्वारा अपनाई गई इस शैली को कुछ लोगों ने अनुचित बताया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति का तरीका कहा। हालांकि, न्यायालय ने अपने स्पष्ट रुख से यह संदेश दिया कि अदालत अनुशासनहीनता को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगी।

    यह घटना न्यायालय की गरिमा, वकीलों के आचरण और न्यायिक प्रक्रिया में मर्यादा के महत्व को एक बार फिर उजागर करती है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार का असंवेदनशील या अनुचित प्रदर्शन अदालत की पवित्रता को प्रभावित करता है और इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।