Tag: court verdict india

  • ट्विशा केस से फिर गरमाई कानूनी दुनिया: पूर्व जज की गिरफ्तारी और पुराने फैसले पर चर्चा तेज

    ट्विशा केस से फिर गरमाई कानूनी दुनिया: पूर्व जज की गिरफ्तारी और पुराने फैसले पर चर्चा तेज


    भोपाल  भोपाल में एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई के बाद पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को गिरफ्तार कर स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद न्यायिक जगत में हलचल तेज हो गई है।

    गिरफ्तारी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस फैसले को लेकर हो रही है, जो उन्होंने फरवरी 2023 में भोपाल के चर्चित फैज कुरैशी हत्याकांड में सुनाया था। उस मामले में अदालत ने आरोपी शफीक कुरैशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

    कोर्ट का फैसला क्यों बना चर्चा का केंद्र
    फैसले में अदालत ने स्पष्ट कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। सुनवाई के दौरान पेश किए गए प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपने बयानों से पलट गए थे। किसी भी गवाह ने अदालत में यह स्वीकार नहीं किया कि उसने आरोपी को वारदात करते देखा।

    इसके अलावा, पुलिस द्वारा प्रस्तुत जब्ती और जांच संबंधी साक्ष्यों पर भी सवाल उठे। अदालत ने माना कि केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य और पुलिस बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एफएसएल रिपोर्ट भी आरोपी की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सकी थी।

    जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नई बहस
    वर्तमान में ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई की जांच जारी है। इसी क्रम में पूर्व जज और उनके परिवार पर कार्रवाई ने न्यायिक व्यवस्था और पुराने मामलों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने रिमांड मंजूर की है और आगे की जांच जारी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल कानूनी हलकों में बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां जांच एजेंसियां मामले को गंभीर बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने फैसलों की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।

    ट्विशा केस ने बढ़ाई संवेदनशीलता
    ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। मामले में ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया है। जांच अभी विभिन्न कोणों से जारी है। इसी बीच पूर्व जज की गिरफ्तारी और पुराने फैसले की दोबारा चर्चा ने मामले को और अधिक संवेदनशील और जटिल बना दिया है।

  • सोशल मीडिया पोस्ट पर बड़ा फैसला: शाजापुर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 2 साल की सजा दी

    सोशल मीडिया पोस्ट पर बड़ा फैसला: शाजापुर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 2 साल की सजा दी


    शाजापुर । शाजापुर जिले की न्यायालय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट डालने के मामले में आरोपी मोहसिन (पिता मुबारिक, निवासी ज्योति नगर, शाजापुर) को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। आरोपी ने फेसबुक पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट साझा की थी, जिसे राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने वाला माना गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, शाजापुर ने मंगलवार दोपहर सुनवाई के बाद आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया और सजा का आदेश दिया।

    धाराओं के तहत अलग-अलग सजा और जुर्माना
    कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 153-बी के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा 505(1)(बी) के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67-ए के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

    2019 में दर्ज हुई थी शिकायत
    जिला मीडिया सेल प्रभारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि यह मामला 16 फरवरी 2019 का है। उस समय फरियादी रोहित राठौर ने थाना कोतवाली शाजापुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि ‘मोहसिन लाला’ नाम की फेसबुक आईडी से यह विवादित पोस्ट डाली गई थी। फरियादी ने पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपा था, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई।

    राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने का आरोप
    शिकायत में यह भी कहा गया था कि इस तरह की पोस्ट से लोगों की राष्ट्रीय भावनाएं आहत हुईं और समाज में तनाव की स्थिति पैदा होने की आशंका थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर इसे न्यायालय में प्रस्तुत किया था।

    कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
    न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी प्रतीक श्रीवास्तव और तुलसी मानकर द्वारा की गई। यह फैसला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • अदालत से शमी को क्लीन चिट, चेक बाउंस मामले में फैसला आया पक्ष में

    अदालत से शमी को क्लीन चिट, चेक बाउंस मामले में फैसला आया पक्ष में


    नई दिल्ली। । भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को एक लंबे समय से चल रहे कानूनी मामले में बड़ी राहत मिली है। चेक बाउंस से जुड़े चार साल पुराने केस में अलीपुर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह मामला उनकी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां द्वारा दर्ज कराया गया था।

    मामले के अनुसार हसीन जहां ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद शमी ने घरेलू खर्च के लिए उन्हें 1 लाख रुपये का चेक दिया था, जो बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया था। इसी आधार पर उन्होंने अदालत का रुख किया और शमी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

    बुधवार को अलीपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, जहां अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर शमी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। फैसले के बाद शमी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें पहले से भरोसा था कि न्याय उनके पक्ष में आएगा, क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया था।

    शमी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने हर स्थिति को हमेशा ईमानदारी से संभाला है और जो भी वित्तीय जिम्मेदारियां थीं, उन्हें पूरा किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए मैदान के अंदर और बाहर दोनों ही जगह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।

    गौरतलब है कि मोहम्मद शमी फिलहाल आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स की ओर से खेल रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वह अपने निजी जीवन और कानूनी विवादों को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं।

    इस मामले के साथ-साथ शमी और हसीन जहां के बीच भरण-पोषण और गुजारा भत्ते को लेकर कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार शमी अपनी पत्नी को प्रति माह 1.5 लाख रुपये और बेटी के भरण-पोषण के लिए 2.5 लाख रुपये का भुगतान कर रहे हैं।

    वहीं हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए यह दलील दी है कि यह राशि पर्याप्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शमी और पश्चिम बंगाल सरकार दोनों को नोटिस जारी किया है और मामले की सुनवाई जारी है।

  • भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश, क्षेत्र में बढ़ी हलचल

    भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश, क्षेत्र में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में आज हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्थल माना है और हिंदू पक्ष की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

    कोर्ट का अहम फैसला
    हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों और एएसआई (ASI) रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा केंद्र और देवी वाग्देवी (सरस्वती) से संबंधित मंदिर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्थान पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता ऐतिहासिक रूप से बनी रही है।

     फैसले की प्रमुख बातें
    भोजशाला परिसर को मंदिर स्वरूप माना गया
    हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया गया
    ASI को परिसर का प्रशासनिक नियंत्रण जारी रखने का निर्देश
    केंद्र सरकार और ASI को प्रबंधन और धार्मिक स्वरूप से जुड़े निर्णय लेने होंगे
    विवादित स्थल 1958 अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक बना रहेगा

     ASI रिपोर्ट का हवाल
    कोर्ट ने अपने फैसले की विस्तृत रिपोर्ट को अहम माना, जिसमें कहा गया था कि:

    परिसर में मिले 106 स्तंभ और 82 संरचनात्मक अवशेष प्राचीन मंदिर के प्रतीक हैं
    कई स्तंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां और आकृतियां पाई गईं
    परमार कालीन शिलालेख और अवशेष मिले हैं
    स्थल का मूल स्वरूप हिंदू मंदिर होने के संकेत देता है

    विवाद की पृष्ठभूम
    यह विवाद वर्षों से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच चला आ रहा था। हिंदू पक्ष का दावा था कि यह मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता था। वसंत पंचमी पर पूजा और नमाज को लेकर यहां अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती थी।

    सुरक्षा व्यवस्था
    फैसले से पहले प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी थी और भीड़ जुटाने पर रोक लगाई गई थी। सोशल मीडिया पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा किया गया था।

    हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद भोजशाला विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। हालांकि, प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे के निर्देश अभी केंद्र और ASI के फैसलों पर निर्भर करेंगे।