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  • बंदर’ फिल्म के किरदार से जुड़ा बॉबी देओल का निजी अनुभव, बहनों की शादी को लेकर मन में रहता था असुरक्षा का भाव

    बंदर’ फिल्म के किरदार से जुड़ा बॉबी देओल का निजी अनुभव, बहनों की शादी को लेकर मन में रहता था असुरक्षा का भाव

    नई दिल्ली । अभिनेता बॉबी देओल इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘बंदर’ को लेकर चर्चा में हैं, जो अपने विषय और प्रस्तुति के कारण लगातार सुर्खियां बटोर रही है। फिल्म के ट्रेलर रिलीज के बाद दर्शकों में इसे लेकर उत्साह और अधिक बढ़ गया है। इसी बीच बॉबी देओल ने अपने किरदार और निजी जीवन से जुड़ा एक ऐसा भावुक पहलू साझा किया है, जिसने उनके अभिनय को और भी गहराई प्रदान की है। उन्होंने बताया कि फिल्म में निभाया गया उनका रोल केवल एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह उनके बचपन की कई भावनाओं और अनुभवों से भी जुड़ा हुआ है, जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक अपने भीतर महसूस किया है।

    बॉबी देओल ने कहा कि वह ऐसे परिवार और सामाजिक वातावरण में बड़े हुए हैं, जहां बहनों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर मन में एक स्थायी चिंता बनी रहती थी। उन्होंने स्वीकार किया कि पुरुष-प्रधान सोच वाले समाज में पले-बढ़ने के कारण उनके भीतर हमेशा यह डर रहा कि उनकी बहनों की शादी के बाद उनका जीवन कैसा होगा और क्या उन्हें सही सम्मान और सुरक्षा मिल पाएगी। इसी कारण उनके मन में एक जिम्मेदारी और भावनात्मक दबाव हमेशा बना रहता था, जो उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया था।

    अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उनकी कई बहनें हैं और परिवार के इस माहौल ने उनके सोचने के तरीके को गहराई से प्रभावित किया। बहनों की शादी को लेकर उनके मन में अक्सर असुरक्षा और चिंता के भाव आते थे, जिन्हें वह उस समय पूरी तरह समझ भी नहीं पाते थे, लेकिन वे लगातार उनके साथ बने रहते थे। इसी भावनात्मक पृष्ठभूमि ने फिल्म ‘बंदर’ में उनके किरदार को निभाते समय एक अलग ही वास्तविकता प्रदान की, क्योंकि वह उस डर और जिम्मेदारी को अभिनय से अलग नहीं कर पाए।

    फिल्म ‘बंदर’ में बॉबी देओल एक ढलते हुए पॉप स्टार समीर मेहरा की भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब उस पर गंभीर आरोप लगते हैं। इसके बाद वह मीडिया ट्रायल और कानूनी लड़ाई के जटिल दौर में फंस जाता है, जहां उसे अपनी प्रतिष्ठा और पहचान दोनों को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कहानी उसके मानसिक दबाव, सामाजिक छवि और सिस्टम के साथ टकराव को गहराई से दर्शाती है।

    इस फिल्म का निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है, जबकि इसकी कहानी अभिषेक बनर्जी और सुदीप शर्मा ने मिलकर तैयार की है। फिल्म निर्माण से जुड़े अन्य प्रमुख नामों में निकिल द्विवेदी और Zee Studios का समर्थन शामिल है, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर आकार दिया है। फिल्म को वर्ष 2026 की बहुचर्चित परियोजनाओं में गिना जा रहा है और इसके ट्रेलर ने पहले ही दर्शकों के बीच मजबूत चर्चा पैदा कर दी है।

    ‘बंदर’ की रिलीज 5 जून 2026 को निर्धारित है और इसके साथ ही बॉबी देओल एक बार फिर अपने अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार के जरिए दर्शकों के सामने नजर आएंगे। फिल्म को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं और दर्शक इसके रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • कोर्ट रूम में ही भिड़ गए कपिल सिब्बल और ASG राजू, जानिए पूरा मामला

    कोर्ट रूम में ही भिड़ गए कपिल सिब्बल और ASG राजू, जानिए पूरा मामला

    नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार (19 जनवरी) को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रेल मंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की कथित लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम मामले को रद्द करने की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी। लालू यादव की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मामले में पैरवी कर रहे थे, जबकि सीबीआई की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू पक्ष रख रहे थे लेकिन कोर्ट रूम कुछ ऐसा हुआ कि दोनों आपस में ही उलझ गए और दोनों के बीच खूब बीच तीखी बहस हुई। लालू यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कथित लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

    किस बात पर हुआ विवाद?
    इस दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति (सैंक्शन) जरूरी है, जो नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने खुद पहले इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, ऐसे में अब उसी के खिलाफ दलील देना गलत है।

    इस पर सीबीआई की ओर से पेश ASG एसवी राजू ने सिब्बल की दलीलों पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि वह नए मुद्दे उठा रहे हैं और कानून की गलत व्याख्या कर रहे हैं। ASG राजू ने कहा, “सिब्बल ने नए मुद्दे पर बहस की है। मुझे सही कानून बताना है। मिस्टर सिब्बल गुमराह करने वाली दलीलें देते हैं और मुझे बहस नहीं करने देते।”

    कोर्ट में बढ़ा तनाव, तीखी बहस
    ASG राजू के इस आरोप पर कपिल सिब्बल नाराज हो गए और उन्होंने तपाक के कहा, “आपने ऐसा कहने की हिम्मत कैसे की कि मैंने अदालत को गुमराह किया है। मैंने कभी किसी कोर्ट को गुमराह नहीं किया।

    आप होंगे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, लेकिन जज नहीं हैं।” इसके जवाब में ASG राजू ने कहा, “हां, आपने कोर्ट को गुमराह किया है, यह मेरी दलील है और मैं बताऊंगा कि आपने कैसे गुमराह किया और आप मुझे बताने नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अदालत के सामने सही कानून रखना उनका कर्तव्य है और वह अपनी बात पर कायम हैं।
    जज ने किया हस्तक्षेप
    बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने राजू की पेशेवर मर्यादा पर भी सवाल उठाए, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, ASG राजू ने अपेक्षाकृत शांत लहजे में कहा कि वह सिब्बल का सम्मान करते हैं, लेकिन कानूनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस ररविंदर डुडेजा ने कोर्ट रूम में स्थिति को संभालते हुए कहा, “माहौल को थोड़ा शांत होने दीजिए।” इसके बाद कोर्ट ने दिन की सुनवाई समाप्त कर दी।
    आगे क्या फैसला हुआ?

    हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करें। ये दलीलें अधिकतम पांच पन्नों की होंगी और एक सप्ताह के भीतर जमा करनी होंगी। इसके बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
    क्या है लैंड-फॉर-जॉब्स मामला?

    सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उनके परिवार और करीबी लोगों के नाम पर जमीन ली गई। सीबीआई ने इस मामले में 2022 में केस दर्ज किया और बाद में लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लालू यादव ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जरूरी पूर्व अनुमति के बिना शुरू की गई, इसलिए पूरा मामला रद्द किया जाना चाहिए।