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  • आयुष्मान भारत के आठ साल पूरे, 60 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर, जानें बड़े आंकड़े

    आयुष्मान भारत के आठ साल पूरे, 60 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर, जानें बड़े आंकड़े

    नई दिल्ली । आयुष्मान भारत योजना के बुधवार को आठ साल पूरे हो गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना से जुड़े लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए इसके अब तक के सफर और उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत देश के 60 करोड़ से अधिक लोगों को सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री के अनुसार आयुष्मान भारत की शुरुआत आठ साल पहले इस उद्देश्य के साथ की गई थी कि देश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। योजना के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल में इलाज कराने के दौरान आर्थिक सहायता मिली है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है। उनके अनुसार, इस वजह से यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल हो गई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि योजना की वजह से इलाज पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत संभव हुई है। इसका लाभ विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलने की बात कही गई। स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों के करीब पहुंचाने की दिशा में भी योजना के तहत काम किए जाने का उल्लेख किया गया।

    आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भी इस अवसर पर उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन केंद्रों पर अब तक 500 करोड़ से अधिक बार लोगों की विजिट दर्ज की जा चुकी है। इन केंद्रों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी योजना के आठ वर्ष पूरे होने पर इसके विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि आठ साल पहले स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बदलने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल ने बड़ी संख्या में लोगों को लाभ पहुंचाया है।

    योजना के तहत अब तक 48.54 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 13 करोड़ से अधिक लोगों को इलाज का लाभ मिलने की बात कही गई। योजना के दायरे में आने वाले लाभार्थियों को देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

    आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 39 हजार से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। इन अस्पतालों के माध्यम से दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के अस्पताल में भर्ती और इलाज संबंधी लाभ का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है।

    केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी आयुष्मान भारत योजना के आठ वर्ष पूरे होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि योजना ने करोड़ों परिवारों के लिए बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने में मदद की है।

    उन्होंने यह भी कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज के खर्च की चिंता कम करने में योजना सहायक रही है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी इस पहल ने बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक सहारा उपलब्ध कराया है।

    आयुष्मान भारत योजना के आठ वर्ष पूरे होने के मौके पर सामने आए आंकड़े इसके विस्तार को दर्शाते हैं। 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का स्वास्थ्य कवर, 48.54 करोड़ से अधिक कार्ड और 13 करोड़ से अधिक लोगों को उपचार का लाभ योजना के अब तक के क्रियान्वयन से जुड़े प्रमुख आंकड़े हैं।

  • सिर्फ ₹20 सालाना में ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, जानिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें

    सिर्फ ₹20 सालाना में ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, जानिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना देश में उपलब्ध कम प्रीमियम वाली सरकारी दुर्घटना बीमा योजनाओं में शामिल है। इस योजना की सबसे खास बात इसका बेहद कम सालाना प्रीमियम है। इसके लिए पात्र व्यक्ति को केवल 20 रुपये प्रति वर्ष का भुगतान करना होता है। अगर इस रकम को रोजाना के खर्च के हिसाब से देखा जाए तो यह करीब 5.5 पैसे प्रतिदिन बैठती है। यानी इसका दैनिक खर्च 50 पैसे से भी काफी कम है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमित व्यक्ति को दुर्घटना से जुड़े मामलों में आर्थिक सुरक्षा मिलती है। योजना के अंतर्गत अधिकतम 2 लाख रुपये का बीमा कवर उपलब्ध है। यदि बीमित व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो 2 लाख रुपये की बीमा राशि का प्रावधान है।

    दुर्घटना के कारण आंशिक रूप से दिव्यांग होने की स्थिति में बीमा कवर की राशि 1 लाख रुपये है। इस तरह योजना दुर्घटना से होने वाली मृत्यु के साथ-साथ पूर्ण और आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान करती है।

    इस योजना का लाभ लेने के लिए आयु संबंधी पात्रता भी तय है। 18 वर्ष से लेकर 70 वर्ष की उम्र तक के व्यक्ति इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति का बैंक या डाकघर में बचत खाता होना जरूरी है। योजना का लाभ लेने वाले व्यक्ति के खाते से निर्धारित प्रीमियम की राशि ऑटो-डेबिट माध्यम से तय समय पर काटी जाती है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की बीमा अवधि एक जून से अगले वर्ष 31 मई तक रहती है। यह वार्षिक आधार पर नवीनीकृत होने वाली योजना है। यानी योजना के तहत बीमा कवर एक साल की अवधि के लिए रहता है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इसे आगे जारी रखा जा सकता है।

    इस बीमा योजना को सरकारी स्तर पर किफायती दुर्घटना बीमा सुविधा के तौर पर उपलब्ध कराया गया है। योजना के तहत बीमा सेवाएं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों के माध्यम से उपलब्ध होती हैं। इसका उद्देश्य कम प्रीमियम में दुर्घटना से संबंधित बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को समझने के लिए इसके प्रीमियम और कवर के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण है। केवल 20 रुपये सालाना प्रीमियम के बदले पात्र व्यक्ति को दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। वहीं आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में 1 लाख रुपये का कवर निर्धारित है।

    इस योजना की पात्रता में उम्र और बचत बैंक खाते की शर्त प्रमुख है। 18 से 70 वर्ष के बचत बैंक खाताधारक इस योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। योजना की अवधि एक जून से 31 मई तक रहती है और प्रीमियम की राशि बैंक खाते से ऑटो-डेबिट के जरिए काटी जाती है।

  • मानसिक स्वास्थ्य बीमारियों पर हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज की नई तस्वीर: अस्पताल में भर्ती से लेकर थेरेपी तक बदलते नियम, पॉलिसी चुनने से पहले समझें हर शर्त

    मानसिक स्वास्थ्य बीमारियों पर हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज की नई तस्वीर: अस्पताल में भर्ती से लेकर थेरेपी तक बदलते नियम, पॉलिसी चुनने से पहले समझें हर शर्त

    नई दिल्ली । भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अब कई बीमा कंपनियां मानसिक बीमारियों के इलाज को अपनी पॉलिसी के दायरे में शामिल कर रही हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि इसके बावजूद कवरेज की वास्तविक स्थिति और शर्तें हर पॉलिसी में अलग-अलग हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं के लिए सही योजना का चयन करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    पिछले कुछ वर्षों में नियामक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान मानने पर जोर दिया गया है। इसी बदलाव के चलते बीमा कंपनियों को मानसिक बीमारियों के इलाज को भी हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाने पड़े हैं। इसके बावजूद अधिकांश पॉलिसियों में यह सुविधा मुख्य रूप से तभी उपलब्ध होती है जब मरीज को अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया जाए।

    विशेषज्ञों के अनुसार कई बीमा योजनाओं में इन-पेशेंट ट्रीटमेंट यानी अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में ही खर्च का कवरेज दिया जाता है। इसमें डॉक्टर की फीस, दवाइयां, कमरे का किराया और अन्य चिकित्सा खर्च शामिल हो सकते हैं। हालांकि डे-केयर या सीमित अवधि के उपचार के लिए कवरेज कुछ चुनिंदा पॉलिसियों में ही मिलता है, जो पूरी तरह कंपनी की शर्तों पर निर्भर करता है।

    मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई सामान्य उपचार जैसे काउंसलिंग, नियमित थेरेपी सेशन या मनोवैज्ञानिक से फॉलो-अप विजिट अक्सर अधिकांश पॉलिसियों में कवर नहीं होते। इससे उन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है जिन्हें लंबे समय तक थेरेपी या मेंटल हेल्थ सपोर्ट की आवश्यकता होती है। इसके अलावा कई योजनाओं में क्लेम की अधिकतम सीमा और कमरे के किराए पर भी कैपिंग लागू होती है, जिससे कुल प्रतिपूर्ति राशि सीमित हो जाती है।

    बीमा पॉलिसियों में कुछ विशेष परिस्थितियों को अपवाद के रूप में भी शामिल किया जाता है। नशे की लत से जुड़े इलाज या स्वयं को नुकसान पहुंचाने जैसी स्थितियों में कई कंपनियां कवरेज नहीं देतीं। इसके साथ ही मानसिक बीमारियों से जुड़े मामलों में वेटिंग पीरियड भी लागू किया जा सकता है, जिसके दौरान पॉलिसीधारक क्लेम नहीं कर सकता।

    बाजार में उपलब्ध विभिन्न पॉलिसियों के बीच अंतर को देखते हुए उपभोक्ताओं के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे बीमा खरीदने से पहले सभी नियमों और शर्तों को ध्यान से पढ़ें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल कम प्रीमियम के आधार पर निर्णय लेना आगे चलकर आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की कठिनाइयों का कारण बन सकता है।

    बदलते समय के साथ कई कंपनियां अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक व्यापक रूप से शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, जिसमें थेरेपी और रिकवरी सपोर्ट भी शामिल हो सकता है। ऐसे में पॉलिसीधारकों के लिए यह जरूरी है कि वे समय-समय पर अपनी पॉलिसी की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार बेहतर विकल्प चुनें, ताकि भविष्य में इलाज के दौरान आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।