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  • सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया: 50 किलोमीटर के बाद गौशाला बनाएं, आवारा पशुओं की देखभाल CSR से हो

    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया: 50 किलोमीटर के बाद गौशाला बनाएं, आवारा पशुओं की देखभाल CSR से हो


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से कहा है कि सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों को आवारा जानवरों की समस्या से निपटने के लिए CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) के तहत गौशाला/पशु आश्रय बनाने के निर्देश दिए जाएं। कोर्ट ने कहा कि हर 50 किलोमीटर के बाद ऐसे आश्रय बनाकर आवारा पशुओं की देखभाल सुनिश्चित की जा सकती है। कोर्ट ने कई राज्यों पर जताया असंतोष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के निर्देशों के पालन पर नाराजगी जताई।
    कोर्ट ने विशेषकर पंजाब सरकार के दैनिक 100 कुत्तों के बधियाकरण प्रयास को अपर्याप्त बताया और इसे “ऊंट के मुंह में जीरे” जैसा बताया। NHAI को ऐप बनाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने NHAI से कहा कि वह एक ऐप विकसित करे, जिसमें आम लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा जानवरों को देखने पर सूचना (report) कर सकें।
    इससे तुरंत कार्रवाई संभव होगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। राज्यों की रिपोर्ट पर कोर्ट ने उठाए सवाल राजस्थान सरकार ने कहा कि उन्होंने बधियाकरण केंद्र बनाए हैं और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बाड़बंदी की गई है, लेकिन कोर्ट ने इस पर भी संदेह जताया कि केवल 45 वैन से कैसे काम चलेगा।
    न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि जयपुर के लिए ही लगभग 20 वैन की जरूरत होगी और विभिन्न शहरों में वैन की संख्या बढ़ानी होगी। कोर्ट का सख्त संदेश: समस्या बढ़ती जा रही है पीठ ने चेतावनी दी कि अगर आवारा कुत्तों की समस्या पर तुरंत नियंत्रण नहीं हुआ तो हर साल उनकी संख्या 10-15% बढ़ती जाएगी। कोर्ट ने कहा कि 100 कुत्तों का बधियाकरण रोज़ाना कोई बड़ी मदद नहीं है।
    AWBI की स्थिति: 250 से अधिक आवेदन लंबित भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने बताया कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 250 से अधिक बधियाकरण केंद्र और आश्रय खोलने के लिए आवेदन आए, लेकिन अभी तक कई आवेदन पर कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने AWBI से कहा कि वे अभ्यर्थियों के आवेदन को जल्द निर्णय दें। कोर्ट ने राज्यों को दिया चेतावनी का संकेत सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को कहा था कि यदि कुत्ते के काटने की घटनाओं में वृद्धि होती है तो राज्यों को भारी हर्जाना देना होगा और कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
    सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैंगौशाला, ऐप, CSR के तहत पहलऔर राज्यों को चेतावनी दी है कि इस समस्या को हल न किया गया तो कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना हो सकता है।
  • इंदौर की रेशम केंद्र गौशाला में भूख-प्यास से 20 गायों की मौत, कांग्रेस ने सरकार से की जांच की मांग

    इंदौर की रेशम केंद्र गौशाला में भूख-प्यास से 20 गायों की मौत, कांग्रेस ने सरकार से की जांच की मांग


    इंदौर । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में गोवंश संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। शहर के रेशम केंद्र स्थित गौशाला में करीब 20 गायों की मौत हो गई जिसे कांग्रेस ने सरकार की लापरवाही और गोवंश संरक्षण नीति की असफलता करार दिया है। मृत गायों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया गया है, जिसमें कई गायों के शव जमीन पर पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिनकी हालत बेहद दयनीय है। कांग्रेस का आरोप है कि ये गायें भूख और प्यास के कारण मरी हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिला था।

    कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को गंभीर लापरवाही और राज्य सरकार की नाकामी का परिणाम बताया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गोवंश संरक्षण की जो योजनाएं बनाई गई हैं वे अब तक प्रभावी साबित नहीं हुई हैं। कांग्रेस ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री को एक ईमेल भेजकर मामले की तत्काल जांच की मांग की है। ईमेल में यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और गौशाला की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।

    कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह घटना केवल लापरवाही का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सरकार की गोवंश प्रेम की राजनीति की असफलता को भी उजागर करती है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यदि गौशालाओं में सही प्रबंधन होता और सरकार की ओर से पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाते, तो इस प्रकार की घटनाएं नहीं होतीं। गौशाला में गायों की यह मौत न केवल इंदौर बल्कि पूरे राज्य में एक बड़ा मुद्दा बन गई है। गौवंश संरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। वहीं अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या इस बार गोवंश संरक्षण की नीति में सुधार किया जाएगा।