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  • देश में क्रेडिट कार्ड का चलन बढ़ा… जानिए कितने Card बनवा सकता है एक व्यक्ति

    देश में क्रेडिट कार्ड का चलन बढ़ा… जानिए कितने Card बनवा सकता है एक व्यक्ति


    नई दिल्ली।
    लोग अपने आज के खर्चो (Expenses) को पूरा करने के साथ ही अपने आने वाले कल के लिए बचत (Savings) भी करते हैं, लेकिन इस बीच लोगों में एक चलन तेजी से बढ़ा है और वो है क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का चलन।

    खासतौर पर नौकरीपेशा लोग क्रेडिट कार्ड (Credit Card) काफी बनवा रहे हैं। वो भी एक बैंक (Bank) के लिए नहीं बल्कि, कई अलग-अलग बैंकों को अलग-अलग क्रेडिट कार्ड बनवाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति कितने क्रेडिट कार्ड बनवा सकता है? शायद नहीं, तो चलिए जानते हैं इसको लेकर नियम क्या हैं…

    क्रेडिट कार्ड बनवाने के फायदे क्या हैं?

    – क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है जिससे आसानी से बड़ा लोन मिल सकता है
    – इमरजेंसी में मदद मिलती है
    – पैसे न होने पर एकदम आप खर्चा कर सकते हैं और उसे आराम से EMI में भर सकते हैं
    – डिस्काउंट, कैशबैक जैसी सुविधाएं मिलती हैं आदि


    क्रेडिट कार्ड बनवाने के नुकसान क्या हैं?

    – अनावश्यक खर्चे की आदत लग सकती है
    – अगर समय पर पैसे नहीं भरे, तो सिबिल स्कोर खराब हो सकता है जिससे भविष्य में लोन नहीं मिल पाता या दिक्कतें आती हैं आदि


    कितने क्रेडिट कार्ड बनवा सकता है एक व्यक्ति?

    – दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई का इसको लेकर कोई लिमिट तय नहीं है
    – एक व्यक्ति जितने बैंक के चाहे उतने क्रेडिट कार्ड बनवा सकता है
    – हालांकि, क्रेडिट कार्ड की पेमेंट को लेकर नियम जरूर सख्त हैं
    – क्रेडिट कार्ड आप जितने बैंक के मर्जी बनवा लें, लेकिन पेमेंट आपको सभी की समय पर करनी होती है
    – अगर पेमेंट मिस हुई या आप पेमेंट नहीं कर पाते
    – ऐसे में आप लोन डिफॉल्टर घोषित किए जा सकते हैं
    – इसलिए क्रेडिट कार्ड तो बनवा लें, लेकिन पेमेंट का ध्यान जरूर रखें

  • August Financial Rules: अगस्त में लागू होंगे कई बड़े बदलाव, टैक्स से लेकर बैंकिंग तक बदलेंगे नियम

    August Financial Rules: अगस्त में लागू होंगे कई बड़े बदलाव, टैक्स से लेकर बैंकिंग तक बदलेंगे नियम


    नई दिल्ली। अगस्त 2026 की शुरुआत आम लोगों और टैक्सपेयर्स के लिए कई महत्वपूर्ण वित्तीय बदलाव लेकर आई है। इस महीने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तारीख से लेकर बैंकिंग नियमों, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों, रेलवे टिकट व्यवस्था और क्रेडिट-डेबिट कार्ड शुल्क में कई बदलाव लागू किए गए हैं। ऐसे में इन नए नियमों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि किसी तरह के जुर्माने या अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके।

    अगस्त का सबसे बड़ा वित्तीय अपडेट आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख को लेकर है। जिन करदाताओं को आईटीआर-3 या आईटीआर-4 दाखिल करना है और जिन पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं होता, उनके लिए 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न जमा करना जरूरी है। इसमें छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर, स्वरोजगार करने वाले पेशेवर और धारा 44एडी व 44एडीए के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्स स्कीम चुनने वाले लोग शामिल हैं।

    यदि करदाता तय समय सीमा तक अपना आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं तो आयकर कानून की धारा 234एफ के तहत अधिकतम 5 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, यदि कोई टैक्स बकाया है तो देरी की स्थिति में धारा 234ए के तहत ब्याज भी देना पड़ सकता है।

    आरबीआई की बैठक पर रहेंगी सबकी नजरें

    अगस्त में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक भी होने वाली है। यह बैठक 3 अगस्त से 5 अगस्त तक चलेगी और 5 अगस्त को नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी। हालांकि तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन रेपो रेट और ब्याज दरों को लेकर आरबीआई का रुख आने वाले समय में होम लोन की ईएमआई, बैंक लोन और फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है।

    रेलवे में तत्काल टिकट बुकिंग का नया नियम

    भारतीय रेलवे ने 1 अगस्त से रिजर्वेशन काउंटरों पर तत्काल टिकट बुकिंग के लिए टोकन सिस्टम लागू कर दिया है। इसका उद्देश्य टिकट काउंटरों पर भीड़ को नियंत्रित करना और बुकिंग प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है।

    इसके अलावा रेलवे ने यात्रियों के लिए एक नई डिजिटल सुविधा भी शुरू की है। अब यात्री टिकट बुक करते समय ही अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान कर सकेंगे। इससे यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने से पहले अलग से पार्सल कार्यालय जाने की परेशानी नहीं होगी।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता

    तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की है। अगस्त से दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 202 रुपए और कोलकाता में 209 रुपए तक सस्ता हो गया है। हालांकि घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    क्रेडिट और डेबिट कार्ड नियमों में बदलाव

    अगस्त से कई बैंकों ने अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़े शुल्क और सुविधाओं में बदलाव किए हैं। एक्सिस बैंक ने अपने प्रीमियम बर्गंडी मैग्नस क्रेडिट कार्ड के नियमों में संशोधन किया है। 28 अगस्त से डायनेमिक करेंसी कन्वर्जन (डीसीसी) शुल्क 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा टोल भुगतान और गिफ्ट कार्ड खरीद पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स बंद किए जाएंगे। घरेलू एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नियमों में भी बदलाव किया गया है।

    एक्सिस बैंक के प्रेस्टिज डेबिट कार्ड पर मिलने वाले बीमा लाभ के लिए अब ग्राहकों को बीमा घटना से 30 दिन पहले कम से कम एक पात्र डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन करना होगा। पहले यह अवधि 90 दिन थी। वहीं डेबिट कार्ड पर डीसीसी शुल्क 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत किया जाएगा।

    कोटक महिंद्रा बैंक ने भी डेबिट कार्ड पर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए डीसीसी शुल्क बढ़ा दिया है। अब ग्राहकों को विदेशों में होने वाले लेनदेन पर 3.5 प्रतिशत प्लस जीएसटी शुल्क देना होगा, जबकि पहले यह शुल्क 1 प्रतिशत प्लस जीएसटी था।

    बैंकिंग सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव

    अगस्त से कुछ बैंकों ने एसएमएस अलर्ट और अन्य सेवाओं के शुल्क में भी संशोधन किया है। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने एसएमएस अलर्ट शुल्क को बदलते हुए प्रति संदेश 30 पैसे कर दिया है। हालांकि इसके लिए मासिक सीमा भी तय की गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अगस्त में लागू हुए ये बदलाव टैक्स, बैंकिंग खर्च, यात्रा और रोजमर्रा के वित्तीय फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों और टैक्सपेयर्स को अपने बैंक और वित्तीय संस्थानों से नए नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए, ताकि अतिरिक्त शुल्क और असुविधा से बचा जा सके।

  • क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर हो सकता है बंद, बैंक नियमों को लेकर जानें अहम अपडेट

    क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर हो सकता है बंद, बैंक नियमों को लेकर जानें अहम अपडेट

    नई दिल्ली । आज के समय में क्रेडिट कार्ड वित्तीय लेन-देन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका सही तरीके से उपयोग न करना ग्राहकों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। कई लोग सुविधा के तौर पर क्रेडिट कार्ड लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक उसका उपयोग नहीं करते। ऐसी स्थिति में बैंक और वित्तीय संस्थान इसे निष्क्रिय मानकर बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार यदि किसी क्रेडिट कार्ड का उपयोग लगातार कई महीनों तक नहीं किया जाता है तो उसे “डेड कार्ड” की श्रेणी में रखा जा सकता है और बैंक उसे बंद भी कर सकते हैं।

    बैंकिंग नियमों के अनुसार आमतौर पर तीन से बारह महीने तक यदि किसी कार्ड पर कोई लेन-देन नहीं होता है तो उसे निष्क्रिय माना जाता है। इस दौरान यदि कार्ड से कोई खरीदारी, भुगतान, स्टेटमेंट जनरेशन या अन्य गतिविधि नहीं होती है तो बैंक उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कई मामलों में ग्राहक को सूचना दिए बिना भी कार्ड को निष्क्रिय किया जा सकता है, हालांकि अधिकांश बैंक पहले नोटिस जारी करते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्रेडिट कार्ड को सक्रिय बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि यह सीधे व्यक्ति के क्रेडिट इतिहास और क्रेडिट स्कोर से जुड़ा होता है। यदि कार्ड लंबे समय तक उपयोग में नहीं रहता है तो इसका असर क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ सकता है। इससे भविष्य में लोन या अन्य वित्तीय सेवाएं लेने में कठिनाई आ सकती है। क्रेडिट स्कोर को मजबूत बनाए रखने के लिए समय-समय पर कार्ड का उपयोग करना और उसका भुगतान समय पर करना जरूरी माना जाता है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई ग्राहक बारह महीने तक अपने क्रेडिट कार्ड का उपयोग नहीं करता है तो बैंक उसे निष्क्रिय मान सकता है। इसके अलावा कुछ बैंक छोटी गतिविधियों जैसे पिन परिवर्तन या स्टेटमेंट चेक करने को भी सक्रियता में शामिल करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से लेन-देन ही आधार माना जाता है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर छोटे लेन-देन कर अपने कार्ड को सक्रिय रखें।

    क्रेडिट कार्ड बंद होने का एक और बड़ा प्रभाव यह होता है कि इससे व्यक्ति की कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट भी कम हो जाती है। इसका सीधा असर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर पड़ता है, जो क्रेडिट स्कोर निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि यह अनुपात बिगड़ता है तो स्कोर में गिरावट आ सकती है।

    इसके अलावा बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन के लिए भी निष्क्रिय खातों और कार्डों की निगरानी की जाती है। बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके सिस्टम में केवल सक्रिय और उपयोग में आने वाले खाते ही बने रहें, जिससे धोखाधड़ी और अनावश्यक जोखिम को कम किया जा सके।

    अंततः यह स्पष्ट है कि क्रेडिट कार्ड केवल एक सुविधा नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। इसका समझदारी से उपयोग न केवल वित्तीय सुविधा देता है बल्कि आपके क्रेडिट इतिहास को भी मजबूत बनाता है। लंबे समय तक इसे निष्क्रिय छोड़ना भविष्य में वित्तीय समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए समय-समय पर इसका उपयोग आवश्यक माना जाता है।

  • डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकारी बैंकों का आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि निजी बैंकों की वृद्धि केवल 2.7 प्रतिशत रही।

    केयरएज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसी अवधि में सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो निजी बैंकों की तुलना में काफी अधिक है।

    डिजिटल भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा योगदान ई-कॉमर्स का रहा है, जो कुल लेनदेन का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बना। इस बीच, एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस भी मजबूत हुआ और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ कार्ड धारकों तक पहुँच गया।

    इसके विपरीत विदेशी बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में इसका कारण उनकी प्रीमियम ग्राहक रणनीतियों से जोड़ा गया है।

    हालांकि, विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले। महीने-दर-महीने आधार पर खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष जनवरी में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के उच्च आधार प्रभाव के कारण कम रही।

    कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा।

    निजी क्षेत्र के बैंकों ने कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाई और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय उनके मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारियों को दिया गया है।

    वित्त वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई और कुल खर्च 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और सरकारी बैंकों ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।