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  • भारत के खिलाफ मैदान में उतरेंगे भारतीय मूल के नील पटेल, ऑस्ट्रेलिया U-19 टीम में चयन से चर्चा में युवा बल्लेबाज

    भारत के खिलाफ मैदान में उतरेंगे भारतीय मूल के नील पटेल, ऑस्ट्रेलिया U-19 टीम में चयन से चर्चा में युवा बल्लेबाज


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट की लोकप्रियता पूरी दुनिया में फैली हुई है और भारतीय मूल के कई खिलाड़ी अलग अलग देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। अब इसी सूची में एक नया नाम जुड़ गया है। भारतीय मूल के 16 वर्षीय बल्लेबाज नील पटेल को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ होने वाली अंडर 19 सीरीज के लिए अपनी 16 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। उनकी इस उपलब्धि ने क्रिकेट जगत में उत्सुकता बढ़ा दी है क्योंकि बेहद कम उम्र में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट में ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंडर 19 दौरे की शुरुआत 13 सितंबर से होगी। इस दौरे में दोनों टीमों के बीच सीमित ओवरों के मुकाबलों के साथ साथ लाल गेंद से भी मैच खेले जाएंगे। इस सीरीज को भविष्य के सितारों की परीक्षा माना जा रहा है और नील पटेल उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन पर सभी की नजरें रहेंगी।

    नील पटेल न्यू साउथ वेल्स के लिए ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में खेलते हैं। शुरुआत से ही उन्होंने अपनी बेहतरीन तकनीक धैर्य और लंबी पारी खेलने की क्षमता से प्रभावित किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स क्रिकेट क्लब की ओर से खेलते हुए उन्होंने महज 16 वर्ष की उम्र में सिडनी प्रीमियर क्रिकेट के फर्स्ट ग्रेड मुकाबलों में एक कैलेंडर वर्ष के दौरान 1000 से अधिक रन बनाकर इतिहास रच दिया। इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ियों में उनका नाम शामिल हो गया है।

    हाल ही में नील ने फर्स्ट ग्रेड क्रिकेट में अपना पहला शतक भी लगाया। नई गेंद के सामने संयम के साथ बल्लेबाजी करना और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। यही कारण है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें एडिलेड में आयोजित अंडर 19 टैलेंट कैंप के लिए भी चुना था जहां उन्होंने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।

    नील केवल बल्लेबाज ही नहीं बल्कि उपयोगी गेंदबाज भी हैं। जरूरत पड़ने पर वह टीम के लिए गेंद से भी अहम योगदान देते हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता उन्हें ऑस्ट्रेलियाई अंडर 19 टीम का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो आने वाले वर्षों में वह ऑस्ट्रेलिया की सीनियर टीम तक भी पहुंच सकते हैं।

    भारत के खिलाफ होने वाली यह सीरीज नील पटेल के करियर की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। भारतीय जूनियर टीम हमेशा मजबूत मानी जाती है और ऐसे में उनके सामने खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर होगा। भारतीय मूल होने के कारण भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की नजर भी उन पर रहेगी। हालांकि इस सीरीज में वह ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनकर भारत के खिलाफ मैदान में उतरेंगे।

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की घोषित अंडर 19 टीम में केसी बार्टन हेडन बारबुलोविक एली ब्रेन विल बायरम ब्लेक कैटल जैक ज़ोस्नेक स्पेंसर ग्रीन कॉनर ग्रेगरी चार्ली हेंडरसन ज़ेड होलिक मैथ्यू लॉफ नील पटेल जैकब पिट्ज़ पैट्रिक सुलिवन थियो त्सिंगोस और थॉमस वासिओ शामिल हैं। अब सभी की निगाहें इस युवा टीम और खासकर नील पटेल पर टिकी रहेंगी कि वह भारत के खिलाफ अपने प्रदर्शन से कितना प्रभावित कर पाते हैं।

  • क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने महिला खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का किया ऐलान

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने महिला खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का किया ऐलान


    नई दिल्ली। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 2026-27 सीज़न के लिए अपनी महिला टीम की सेंट्रल चैंपियनशिप की घोषणा कर दी है। इस बार 18 खिलाड़ियों की सूची में युवा और उभरते रायपुर के स्थान पर चयनकर्ता ने की भविष्य की टीम तैयार करने के संकेत दिए हैं।

    नए ज्वालामुखी का उद्भव, आइंसवर्थ को बिना आरंभ अवसर

    इस सांस्कृतिक सूची में दो नए नाम विशेष चर्चा में हैं—लूसी हैमिल्टन और क्लो आइंसवर्थ।
    हैमिल्टन ने हाल ही में शानदार प्रदर्शन करते हुए हॉस्टल में शुरूआत कर चयन से प्रभावित किया। लगभग तीन टी अलग-अलग में उन्होंने कहा, परीक्षण और 20 में अपना आकलन दर्ज किया गया।

    वहीं 20 साल की तेजतर्रार टीम आइंसवर्थ को अभी तक इंटरनेशनल रिज्यूमे का मौका नहीं मिला है, लेकिन घरेलू क्रिकेट और विमेंस बिग बैश लीग में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें सेंट्रल सेंट्रल चैंपियनशिप दी गई है। यह उनके कैथोलिक बोर्ड के कथन को अलग करता है।

    निकोला कैरी की वापसी, अनुभव का मिलान महत्वपूर्ण

    निकोला कैरी की भी क्लासिक लिस्ट में वापसी हुई है। उन्होंने 2023 में खुद को थिएटर से बाहर घरेलू क्रिकेट और विदेशी लीग में अपने स्टेडियमों को उजागर किया था। हाल ही में भारत की सीरीज के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने सेलेक्शन पोर्टफोलियो को प्रभावित किया, जिसके बाद उन्हें फिर से टीम में जगह मिल गई।

    हीली आउट, कुछ बड़े नाम भी लिस्ट से गायब

    पूर्व कैप्टन एलिसा हीली को इस बार क्लैन्सल से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि उन्होंने क्रिकेट टेस्ट से संन्यास ले लिया है। इसके अलावा इस सूची में टेस फ्लिंटॉफ और टायला व्लामिन्क के अलावा कोई भी शामिल नहीं है। व्लामिन्क चोट अभी भी लगातार जारी हैं, जबकि फ्लिंटॉफ को राष्ट्रीय टीम में ज्यादा अंक नहीं मिले।

    चयन रणनीतिक का फोकस भविष्य पर

    चयनकर्ता शॉन फ्लेगलर ने स्पष्ट किया कि अभी भी उत्कृष्ट खिलाड़ी का चयन दौड़ में है। इस बार टीम चयन में युवा खिलाड़ियों को भविष्य की मजबूत टीम तैयार करने पर जोर दिया गया है।

    18 खिलाड़ियों की संगीतमय सूची

    इस सूची में ऐलिस पेरी, बेथ मूनी, एशले गार्डनर, मेगन शट्ट, ताहलिया मैकग्राथ, एनाबेल सदरलैंड जैसे अनुभवी नाम भी शामिल हैं, जो टीम की जगहें बनाते हैं।

  • उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच

    उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड SCG में खेला जाने वाला एशेज सीरीज का टेस्ट मैच उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। इस भावुक मौके पर ख्वाजा ने न सिर्फ अपने संन्यास की घोषणा की बल्कि अपने लंबे करियर के दौरान झेले नस्लीय भेदभाव मीडिया की आलोचना और टीम मैनेजमेंट के दोहरे मानदंडों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने कहा कि उन्हें पूरे करियर में कई बार उनके पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम पहचान के कारण अलग नजर से देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चोटिल होने की स्थिति में भी उनकी सच्चाई जाने बिना उन पर सवाल खड़े किए गए और उन्हें अक्सर आलसी स्वार्थी या टीम के लिए पूरी तरह समर्पित न होने वाला खिलाड़ी बताया गया।

    ख्वाजा ने कहा जब मैं चोटिल होता था तो लोग बिना पूरी जानकारी के मुझ पर उंगलियां उठाते थे। मुझे ऐसा महसूस कराया गया कि मैं टीम के लिए उतना प्रतिबद्ध नहीं हूं जितना बाकी खिलाड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि यह नजरिया सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था बल्कि उनकी पहचान से भी जुड़ा हुआ था।उन्होंने हाल ही में पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और एक वैकल्पिक ट्रेनिंग सेशन में शामिल न होने पर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। ख्वाजा के मुताबिक कई खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या शराब पीते हैं लेकिन उन्हें ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं जब उन्होंने ऐसा किया तो इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए गए।

    ख्वाजा ने साफ शब्दों में कहा कि यह दोहरा मापदंड उन्हें हमेशा खलता रहा। उन्होंने कहा कि अगर वही काम कोई और करता तो उसे मजाक या सामान्य व्यवहार मान लिया जाता लेकिन उनके मामले में इसे चरित्र से जोड़ दिया गया।संन्यास की घोषणा के दौरान ख्वाजा के साथ उनकी पत्नी रेचल बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे। पत्नी से लंबी बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब सही समय आ गया है। ख्वाजा ने कहा कि उन्हें संतोष है कि वे अपने करियर को SCG जैसे ऐतिहासिक मैदान पर अपनी शर्तों पर खत्म कर पा रहे हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एशेज सीरीज की शुरुआत में एडिलेड टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना उनके लिए एक बड़ा संकेत था। हालांकि बाद में जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अहम पारियां खेलीं और टीम के लिए योगदान दिया। ख्वाजा ने साफ किया कि वे जबरदस्ती टीम में बने रहने के पक्ष में नहीं थे और अगर जरूरत पड़ी होती तो वे उसी समय संन्यास लेने के लिए तैयार थे।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी ख्वाजा क्रिकेट से पूरी तरह दूरी नहीं बनाएंगे। वे आगे भी ब्रिस्बेन हीट के लिए बिग बैश लीग और क्वींसलैंड के लिए शेफील्ड शील्ड में खेलते नजर आएंगे। उनका मानना है कि क्रिकेट अभी भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।

    इस मौके पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा कि उस्मान ख्वाजा ने मैदान के अंदर और बाहर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। उनका योगदान सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने विविधता समावेशिता और साहस की मिसाल भी पेश की है।कुल मिलाकर उस्मान ख्वाजा का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी का विदाई नहीं है बल्कि यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में मौजूद उन मुद्दों की ओर भी इशारा करता है जिन पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है।