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  • वैभव सूर्यवंशी का धमाका: MVP के साथ ऑरेंज कैप भी जीती, IPL 2026 में छाए

    वैभव सूर्यवंशी का धमाका: MVP के साथ ऑरेंज कैप भी जीती, IPL 2026 में छाए

    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 का सीजन समाप्त होने के बाद पुरस्कारों की घोषणा में राजस्थान रॉयल्स के युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। उन्हें इस सीजन का ‘मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ (MVP) चुना गया। इसके साथ ही उन्होंने 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप भी अपने नाम की, जो उनके शानदार प्रदर्शन का बड़ा प्रमाण रहा।

    वैभव सूर्यवंशी ने सीजन के बाद कहा कि लगातार मैचों का दबाव रहता है, इसलिए हर मुकाबले में एक जैसी रणनीति के साथ खेलना आसान नहीं होता। उन्होंने यह भी माना कि फिटनेस और निरंतरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

    सीजन में गेंदबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां कगिसो रबाडा ने 29 विकेट लेकर पर्पल कैप पर कब्जा जमाया। रबाडा पूरे सीजन में सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए।

    अन्य पुरस्कारों की बात करें तो पंजाब किंग्स को फेयरप्ले अवॉर्ड मिला। वहीं मनीष पांडे को ‘कैच ऑफ द सीजन’ के लिए सम्मानित किया गया, जिन्होंने एक शानदार कैच लेकर सबका ध्यान खींचा।

    भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने इस सीजन में सर्वाधिक 172 डॉट बॉल फेंकने का रिकॉर्ड बनाया, जिसके लिए उन्हें विशेष सम्मान मिला। वहीं साई सुदर्शन ने 75 चौके लगाकर ‘मोस्ट फोरस’ का अवॉर्ड जीता।

    वैभव सूर्यवंशी ने केवल ऑरेंज कैप ही नहीं, बल्कि ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’, ‘सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन’ (237.3 स्ट्राइक रेट) और ‘सुपर सिक्सेस ऑफ द सीजन’ (72 छक्के) जैसे कई बड़े अवॉर्ड भी अपने नाम किए।

    फाइनल मुकाबले की बात करें तो अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हराकर खिताब अपने नाम किया। गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 155 रन बनाए, जिसके जवाब में विराट कोहली की नाबाद 75 रनों की पारी ने आरसीबी को जीत दिलाई।

    इस तरह आईपीएल 2026 न केवल टीमों की जीत का गवाह बना, बल्कि व्यक्तिगत प्रदर्शन के कई नए रिकॉर्ड भी इस सीजन में बने।

  • सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार

    सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर आप किसी दूसरे देश से हों और वहां क्रिकेट प्रमुख खेल न हो, तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सलीम दुर्रानी की कहानी इस कठिन रास्ते को पार करने वाले खिलाड़ियों में अद्वितीय है।

    अफगानिस्तान से जामनगर तक का सफर

    सलीम दुर्रानी का जन्म 11 दिसंबर 1934 को खैबर दर्रा, अफगानिस्तान में हुआ। उनके पिता अब्दुल अजीज दुर्रानी पेशेवर क्रिकेटर थे। 1935 में कराची के दौरे पर अब्दुल अजीज की बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से प्रभावित होकर नवानगर (आज का जामनगर) के जाम साहिब दिग्विजयसिंह रणजीतसिंह ने उन्हें सब-इंस्पेक्टर की नौकरी का ऑफर दिया। इसी अवसर पर दुर्रानी परिवार जामनगर में बस गया। सलीम केवल तीन साल के थे जब वह भारत आ गए। 1947 के बंटवारे के बाद उनके पिता पाकिस्तान चले गए, जबकि उनका परिवार जामनगर में रहा।

    ऑलराउंडर की भूमिका और टेस्ट करियर

    दुर्रानी एक ऑलराउंडर थे। वह धीमे बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज और बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। उनके छक्के मारने की क्षमता उन्हें खास बनाती थी। अफगानिस्तान में जन्मे और भारतीय टीम के लिए खेलते हुए, दुर्रानी 1960 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद 1973 तक 29 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उन्होंने 50 पारियों में 1 शतक और 7 अर्धशतक बनाकर 1202 रन बनाए और 75 विकेट लिए।

    महत्वपूर्ण जीतों में अहम भूमिका

    1961-62 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की सीरीज जीत में दुर्रानी ने कोलकाता और चेन्नई में क्रमशः 8 और 10 विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई। एक दशक बाद, 1970 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की पहली जीत में भी उन्होंने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स जैसे दिग्गजों को आउट किया, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ।

    अर्जुन पुरस्कार और जीवन सम्मान

    सलीम दुर्रानी पहले क्रिकेटर थे जिन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता। 2011 में उन्हें सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड का सर्वोच्च पुरस्कार है।

    विदाई: 88 साल की उम्र में

    सलीम दुर्रानी ने 2 अप्रैल 2023 को 88 वर्ष की उम्र में कैंसर से अंतिम सांस ली। उनका क्रिकेट और भारतीय खेल जगत में योगदान आज भी याद किया जाता है।