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  • बारिश ने छीनी भारत की जीत की उम्मीद अभिषेक और श्रेयस की शानदार पारियां भी नहीं दिला सकीं नतीजा

    बारिश ने छीनी भारत की जीत की उम्मीद अभिषेक और श्रेयस की शानदार पारियां भी नहीं दिला सकीं नतीजा


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 श्रृंखला का पहला मुकाबला रोमांचक होने से पहले ही बारिश की भेंट चढ़ गया। चेस्टर ले स्ट्रीट में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 189 रन का मजबूत स्कोर बनाया था लेकिन लगातार बारिश और गीले मैदान के कारण इंग्लैंड अपनी पारी शुरू भी नहीं कर सका। काफी देर तक मौसम साफ होने का इंतजार किया गया लेकिन हालात में सुधार नहीं होने पर अंपायरों ने मैच को बिना किसी परिणाम के समाप्त घोषित कर दिया। इस तरह श्रेयस अय्यर और अभिषेक शर्मा की शानदार पारियां भी टीम को जीत नहीं दिला सकीं।

    भारतीय टीम की शुरुआत हालांकि बेहद खराब रही। दूसरे ही ओवर में संजू सैमसन केवल एक रन बनाकर आउट हो गए जबकि ईशान किशन बिना खाता खोले रन आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद ऐसा लग रहा था कि भारत बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच पाएगा लेकिन अभिषेक शर्मा और कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी संभालते हुए शानदार साझेदारी की और टीम को मुकाबले में वापस ला दिया।

    अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का परिचय दिया। उन्होंने केवल 24 गेंदों में 59 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें छह चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। उन्होंने मात्र 20 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इंग्लैंड के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। उनकी यह पारी भारतीय पारी की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

    दूसरे छोर पर कप्तान श्रेयस अय्यर ने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने 47 गेंदों में 68 रन बनाए जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था। उन्होंने 38 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और मध्यक्रम को मजबूती प्रदान की। उनके आउट होने के बाद शिवम दुबे ने तेजी से रन जुटाते हुए केवल 21 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए और भारत का स्कोर 189 रन तक पहुंचा दिया। इंग्लैंड की ओर से साकिब महमूद सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए।

    भारत के 190 रन के लक्ष्य का पीछा करने के लिए इंग्लैंड मैदान पर उतर ही नहीं पाया। लगातार होती बारिश के कारण पूरा मैदान कवर से ढका रहा और ग्राउंड स्टाफ की तमाम कोशिशों के बावजूद खेल दोबारा शुरू नहीं हो सका। कट ऑफ समय तक भी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर मैच अधिकारियों ने मुकाबला रद्द करने का फैसला लिया।

    इस मुकाबले में एक बार फिर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला। आयरलैंड दौरे के बाद इंग्लैंड श्रृंखला के पहले मैच में भी उनका डेब्यू टलने से प्रशंसकों में निराशा देखने को मिली। अब उम्मीद की जा रही है कि आगामी मुकाबलों में टीम प्रबंधन उन्हें मौका दे सकता है।

    बारिश के कारण भले ही पहला मुकाबला बेनतीजा रहा लेकिन भारतीय बल्लेबाजों की लय टीम के लिए सकारात्मक संकेत है। अब दोनों टीमें मैनचेस्टर में होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले की तैयारी करेंगी जहां श्रृंखला की पहली जीत हासिल करने के लिए दोनों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

  • विराट कोहली ने रचा इतिहास, T20 में 50+ साझेदारियों के मामले में बने विश्व नंबर-1, बाबर आजम और क्रिस गेल को पीछे छोड़ा

    विराट कोहली ने रचा इतिहास, T20 में 50+ साझेदारियों के मामले में बने विश्व नंबर-1, बाबर आजम और क्रिस गेल को पीछे छोड़ा

    नई दिल्ली ।  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली आईपीएल 2026 के 67वें मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ बड़ी पारी नहीं खेल पाए, इसके बावजूद वह एक वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करने में कामयाब रहे। एसआरएच ने पहले बैटिंग करते हुए आरसीबी के सामने जीत के लिए 256 रनों का टारगेट रखा था, इस स्कोर का पीछा करते हुए विराट कोहली महज 15 के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। हालांकि जाते-जाते वह एक वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर गए। यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है मेंस टी20 सबसे ज्यादा 50 प्लस पार्टनरशिप में शामिल होने वाले बल्लेबाज का।
    256 रनों के टारगेट का पीछा करते हुए विराट कोहली और वेंकटेश अय्यर ने महज 3.4 ओवर में ही 50 रन बोर्ड पर लगा दिए थे। पहले विकेट के लिए दोनों के बीच 4.3 ओवर में 60 रनों की साझेदारी हुई।

    मेंस टी20 क्रिकेट में यह 211वां मौका है जब विराट कोहली किसी 50 प्लस पार्टनरशिप का हिस्सा रहे हो। इससे पहले यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के बल्लेबाज ऐलेक्स हेल्स के नाम था, वह 210 बार फिफ्टी प्लस पार्टनरशिप में इनवोल्व रहे थे। इस लिस्ट में डेविड वॉर्नर, बाबर आजम और क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों का नाम भी शामिल है।

    T20 में सबसे ज्यादा 50 प्लस पार्टनरशिप का हिस्सा रहने वाले बल्लेबाज-
    211 – विराट कोहली*
    210 – एलेक्स हेल्स
    200 – डेविड वॉर्नर
    196 – बाबर आजम
    191 – क्रिस गेल
    कौन जीता कल का SRH vs RCB मैच?
    सनराइजर्स हैदराबाद ने शुकवार को आईपीएल 2026 के 67वें मुकाबले में 55 रन से जीत हासिल की लेकिन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) को अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंचने से नहीं रोक सकी। सनराइजर्स हैदराबाद की टीम अभिषेक शर्मा (56 रन) की आक्रामक बल्लेबाजी, ईशान किशन (79 रन) के बेखौफ अंदाज और हेनरिक क्लासेन (51 रन) की ताकतवर हिटिंग की बदौलत चार विकेट पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा करने में कामयाब रही।
    आरसीबी को शीर्ष दो में रहने के लिए 166 रन का स्कोर बनाना था और 178 रन से ज्यादा रन का स्कोर बनाने से उसका शीर्ष स्थान तय था। कप्तान रजत पाटीदार (56 रन) और कृणाल पंड्या (नाबाद 41) के बीच चौथे विकेट के लिए 58 गेंद में 84 रन की भागीदारी से आरसीबी ने 20 ओवर में चार विकेट पर 200 रन बनाकर हारने के बावजूद पहला स्थान सुनिश्चित किया।
    आरसीबी (प्लस 0.783), गुजरात टाइटन्स (प्लस 0.695) और सनराइजर्स हैदराबाद (प्लस 0.524) के 18-18 अंक हैं लेकिन नेट रन रेट से क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।अब पहले क्वालीफायर में आरसीबी का सामना 26 मई को धर्मशाला में गुजरात टाइटन्स से होगा। वहीं सनराइजर्स हैदराबाद 27 मई को एलिमिनेटर में खेलेगी।

  • पहलवानी के माहौल में पले दीपक पूनिया ने कम उम्र से ही कुश्ती में अपनी अलग पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

    पहलवानी के माहौल में पले दीपक पूनिया ने कम उम्र से ही कुश्ती में अपनी अलग पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

    नई दिल्ली । पहलवानी की परंपरा और अखाड़े की मिट्टी में पले-बढ़े भारतीय पहलवान Deepak Punia की कहानी संघर्ष, अनुशासन और असाधारण प्रतिभा का ऐसा उदाहरण है, जिसने उन्हें कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर पहचान दिला दी। हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गांव में जन्मे दीपक का बचपन कुश्ती के माहौल में बीता, जहां उनके पिता सुभाष स्वयं एक पहलवान रह चुके थे और उन्होंने ही बेटे को पहलवानी की शुरुआती ट्रेनिंग दी। मात्र पांच साल की उम्र में अखाड़े से जुड़कर दीपक ने जिस तरह से अपनी क्षमता दिखानी शुरू की, उसने आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया। दंगलों में छोटी उम्र में ही जीत हासिल कर उन्होंने अपनी मजबूत नींव तैयार कर ली थी।

    धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने लगी और स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं के दौरान उनके खेल में निखार साफ दिखाई देने लगा। इसी दौरान उन्हें प्रसिद्ध कोचिंग सिस्टम और प्रशिक्षण सुविधाओं से जुड़ने का अवसर मिला, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। मिट्टी पर पारंपरिक कुश्ती से निकलकर मैट पर मुकाबला करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगातार अभ्यास से खुद को ढाल लिया। यह बदलाव उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी यात्रा शुरू हुई।

    साल 2016 उनके करियर का शुरुआती सुनहरा दौर रहा, जब उन्होंने जूनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप और अन्य जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में भी गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। 2019 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद वह वैश्विक स्तर पर सबसे चर्चित युवा पहलवानों में शामिल हो गए।

    ओलंपिक मंच पर पहुंचकर उन्होंने भारत की उम्मीदों को नई ऊंचाई दी। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने पुरुषों के 86 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक मुकाबले तक पहुंचकर मजबूत प्रदर्शन किया, हालांकि अंतिम मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए एक बड़ा संकेत था कि देश के युवा खिलाड़ी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।

    इसके बाद भी उनका करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जहां कभी चोट तो कभी तकनीकी कारणों ने उनकी राह मुश्किल की। कई महत्वपूर्ण क्वालीफाइंग इवेंट्स में चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार वापसी की कोशिश करते रहे। एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंचों पर उन्होंने भारत के लिए कई पदक जीतकर अपनी जगह मजबूत की।

    आज दीपक पूनिया को उन खिलाड़ियों में गिना जाता है, जिन्होंने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि अगर अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास हो, तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। युवा खिलाड़ियों के लिए वे आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं, जो यह दिखाते हैं कि संघर्ष से ही सफलता की असली कहानी लिखी जाती है।