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  • पार्थिव पटेल के साथ खेलकर शुरू हुआ सफर, न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले जीत रावल ने लिया संन्यास

    पार्थिव पटेल के साथ खेलकर शुरू हुआ सफर, न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले जीत रावल ने लिया संन्यास


    नई दिल्ली। भारतीय मूल के न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज जीत रावल ने पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। 38 वर्षीय रावल का क्रिकेट सफर कई मायनों में खास रहा। गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे रावल ने अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए न्यूजीलैंड का रुख किया और वहां अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे। हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत लंबा नहीं रहा लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। क्रिकेट से विदाई के बाद अब वह चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपना काम जारी रखेंगे।

    जीत रावल का जन्म 22 सितंबर 1988 को अहमदाबाद में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि उनका बेटा एक दिन न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए खेले। इस सपने को साकार करने के लिए परिवार ने बड़ा फैसला लिया और न्यूजीलैंड में बस गया। रावल ने वहां क्रिकेट में अपनी प्रतिभा दिखाई और न्यूजीलैंड की अंडर-19 टीम तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में ऑकलैंड और नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स की ओर से खेलते हुए लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। उनके लिए न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं थी बल्कि उनके पिता के वर्षों पुराने सपने का पूरा होना भी था।

    नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स क्रिकेट एसोसिएशन को दिए गए इंटरव्यू में रावल ने अपने संन्यास के फैसले पर संतुष्टि जाहिर की। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के लिए खेलना उनका और उनके पिता का बचपन का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता ने पूरे परिवार को न्यूजीलैंड ले जाने जैसा बड़ा कदम उठाया था। राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात रही। अब पेशेवर क्रिकेट को अलविदा कहते हुए वह अपने करियर के इस अध्याय को संतोष के साथ समाप्त करना चाहते हैं।

    रावल की कहानी का एक दिलचस्प पहलू भारत में बिताए उनके स्कूल के दिन भी हैं। न्यूजीलैंड जाने से पहले वह विद्यानगर स्कूल में पढ़ते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल से हुई थी। दोनों स्कूल क्रिकेट में साथ खेलते थे और पारी की शुरुआत करते थे। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि दोनों खिलाड़ी आगे चलकर अलग-अलग क्रिकेट सफर तय करेंगे। पार्थिव पटेल ने भारतीय टीम में अपनी पहचान बनाई जबकि रावल ने न्यूजीलैंड की टेस्ट टीम का प्रतिनिधित्व किया।

    रावल ने नवंबर 2016 में 28 वर्ष की उम्र में न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उन्होंने देश के लिए 24 टेस्ट मैच खेले। टेस्ट की 39 पारियों में उनके बल्ले से एक शतक और सात अर्धशतकों की मदद से 1143 रन निकले। उन्हें न्यूजीलैंड की ओर से वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बावजूद घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।

    प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रावल ने 164 मैचों में 24 शतक और 50 अर्धशतक लगाते हुए 10432 रन बनाए। उनका सर्वाधिक स्कोर 256 रन रहा। लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 96 मैचों में 2714 रन बनाए जिसमें चार शतक और 13 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं 76 टी20 मुकाबलों में उन्होंने आठ अर्धशतकों के साथ 1484 रन बनाए। नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स के क्रिकेट जनरल मैनेजर इयान सैंडब्रुक ने भी उन्हें अनुभवी खिलाड़ी और शानदार नेतृत्वकर्ता बताते हुए उनकी तारीफ की। उनके मुताबिक टीम को रावल के अनुभव और शांत नेतृत्व की कमी खलेगी। क्रिकेट से संन्यास के बाद रावल अब चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपना पेशेवर सफर आगे बढ़ाएंगे।

  • इंग्लैंड के लिए नहीं खेल सके फिर भी करियर में मचाया धमाल, 32 की उम्र में 512 विकेट लेकर लिया संन्यास

    इंग्लैंड के लिए नहीं खेल सके फिर भी करियर में मचाया धमाल, 32 की उम्र में 512 विकेट लेकर लिया संन्यास


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट के अनुभवी तेज गेंदबाज क्रेग माइल्स ने महज 32 साल की उम्र में प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। करीब 15 साल लंबे करियर में 500 से ज्यादा विकेट लेने वाले माइल्स ने यह फैसला अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देते हुए लिया। उनके संन्यास की खबर सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में उनकी उपलब्धियों के साथ उनके इस फैसले की भी चर्चा हो रही है। माइल्स ने ग्लूस्टरशायर काउंटी क्लब की वेबसाइट पर एक भावुक खुले पत्र के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी।

    क्रेग माइल्स ने जून 2026 में विटैलिटी ब्लास्ट के दौरान ग्लूस्टरशायर के लिए अपना आखिरी मुकाबला खेला था। इसके बाद वह क्रिकेट से दूर हो गए। इस दौरान उन्होंने अपने करियर और मानसिक स्थिति को लेकर काफी विचार किया। लगातार क्रिकेट खेलने के दबाव और खुद से रखी गई ऊंची उम्मीदों ने उनके लिए मुश्किलें बढ़ा दी थीं। आखिरकार उन्होंने महसूस किया कि अब अपनी मानसिक सेहत को नजरअंदाज करके खेल को जारी रखना सही नहीं होगा।

    माइल्स ने बताया कि क्रिकेट छोड़ने का निर्णय उनके लिए आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में भी उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था लेकिन तब वह खराब फॉर्म या मुश्किल दौर को खेल का हिस्सा मानकर आगे बढ़ जाते थे। इस बार परिस्थितियां अलग थीं। उन्हें महसूस होने लगा था कि वह उस मानसिक स्थिति में नहीं हैं जहां अपने तय किए हुए स्तर के मुताबिक ट्रेनिंग और प्रदर्शन कर सकें।

    तेज गेंदबाज ने अपने करियर में खुद से काफी ऊंचे मानक तय किए थे। जब प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं होता था तो वह अपनी क्षमता पर सवाल उठाने लगते थे। लगातार आत्मसंदेह और मानसिक दबाव ने उनके लिए खेल को पहले जैसा सहज नहीं रहने दिया। ऐसे में उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनाने के बजाय पूरी तरह संन्यास लेने का फैसला किया ताकि अपनी सेहत और जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर ध्यान दे सकें।

    क्रेग माइल्स का घरेलू क्रिकेट करियर शानदार रहा है। उन्होंने महज 16 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने ग्लूस्टरशायर के लिए लंबे समय तक बेहतरीन प्रदर्शन किया। 15 साल के करियर में उन्होंने 111 फर्स्ट क्लास मुकाबले 57 लिस्ट ए मैच और 71 टी20 मुकाबले खेले। इन सभी प्रारूपों को मिलाकर उनके नाम कुल 512 विकेट दर्ज हैं। इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद उन्हें इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला।

    माइल्स के करियर में वनडे कप और काउंटी चैंपियनशिप जैसे खिताब भी शामिल रहे। संन्यास के समय उन्होंने अपने करियर की उपलब्धियों पर गर्व जताया और कहा कि अब वह इन सफलताओं को पहले से बेहतर नजरिए से देख पा रहे हैं। ग्लूस्टरशायर के क्रिकेट निदेशक जॉन लुईस ने भी उनके फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करना कमजोरी नहीं बल्कि साहस और मजबूत चरित्र की निशानी है।

    क्रेग माइल्स का फैसला यह संदेश भी देता है कि खेल में उपलब्धियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 512 विकेट और लंबा घरेलू करियर उनके प्रदर्शन की गवाही देते हैं। अब वह क्रिकेट के मैदान से बाहर एक नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे।