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  • सुनील ग्रोवर की 'सनफ्लावर 2' से लेकर 'हाथरस' तक, ये क्राइम शोज उड़ा देंगे होश..

    सुनील ग्रोवर की 'सनफ्लावर 2' से लेकर 'हाथरस' तक, ये क्राइम शोज उड़ा देंगे होश..

    नई दिल्ली । डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन के कई दमदार विकल्प उपलब्ध हैं। यदि आप वीकेंड पर रोमांच और रहस्य से भरपूर सीरीज देखना चाहते हैं, तो जी5 पर मौजूद सात हिंदी क्राइम थ्रिलर और डॉक्यूसीरीज बेहतरीन चुनाव साबित हो सकती हैं। इन शोज की खास बात यह है कि इनमें से कई कहानियां वास्तविक घटनाओं से प्रेरित हैं, जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करतीं बल्कि समाज के कई गंभीर पहलुओं पर भी सोचने के लिए मजबूर करती हैं। दमदार अभिनय, मजबूत कहानी और शानदार प्रस्तुति के चलते इन सीरीज को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

    इस सूची में शामिल ‘सतरंगी बदले का खेल’ एक ऐसे युवक की कहानी है, जो अपने पिता की हत्या के बाद न्याय और प्रतिशोध की राह पर निकल पड़ता है। इस सीरीज को लगभग 6.9 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसमें बबलू महतो का किरदार दिन में पारंपरिक लोक कलाकार के रूप में जीवन बिताता है, जबकि रात के अंधेरे में अपने पिता के हत्यारों तक पहुंचने की गुप्त योजना बनाता है। वहीं, वास्तविक घटनाओं पर आधारित ‘हाथरस: 16 डेज’ इस सूची की सबसे संवेदनशील डॉक्यूमेंट्री सीरीज मानी जाती है, जिसे करीब 8.1 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। यह सीरीज वर्ष 2020 के चर्चित हाथरस मामले के बाद न्यायिक प्रक्रिया, सामाजिक माहौल और पीड़ित परिवार के संघर्ष को विस्तार से सामने लाती है।

    सच्ची घटनाओं पर आधारित अपराध कथाओं में रुचि रखने वालों के लिए ‘हनीमून से हत्या’ भी एक शानदार विकल्प है। लगभग 7.2 आईएमडीबी रेटिंग वाली यह छह एपिसोड की डॉक्यूसीरीज उन मामलों को सामने लाती है, जहां वैवाहिक रिश्तों में पैदा हुए तनाव ने भयावह अपराध का रूप ले लिया। दूसरी ओर, रहस्य और हल्के हास्य का मिश्रण पेश करने वाली ‘सनफ्लावर 2’ को करीब 7.6 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। सुनील ग्रोवर अभिनीत यह सीरीज एक हाउसिंग सोसाइटी में हुई हत्या की गुत्थी को बेहद दिलचस्प अंदाज में पेश करती है, जहां हर किरदार शक के दायरे में नजर आता है।

    सस्पेंस और मनोवैज्ञानिक खेल पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘बिच्छू का खेल’ भी एक लोकप्रिय सीरीज है, जिसे लगभग 7.4 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसकी कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो खुद हत्या की बात स्वीकार करता है, लेकिन कानून को उसे दोषी साबित करने की खुली चुनौती देता है। वहीं, मुंबई के अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि पर बनी ‘मुर्शिद’ को करीब 7.5 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसमें एक पूर्व गैंगस्टर की कहानी दिखाई गई है, जिसे परिस्थितियां फिर से अपराध की दुनिया में लौटने के लिए मजबूर कर देती हैं। सूची की आखिरी सीरीज ‘नक्सलबाड़ी’ है, जिसे लगभग 7.1 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। यह एक एसटीएफ अधिकारी के मिशन पर आधारित है, जो नक्सल प्रभावित इलाके में आतंक और हिंसा के नेटवर्क को खत्म करने की चुनौती का सामना करता है। दमदार कहानी, रहस्य, रोमांच और प्रभावशाली अभिनय के कारण ये सभी सीरीज ओटीटी पर क्राइम थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती हैं।

  • बंगाली फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर आउट क्रांति और अपराध की उलझी कहानी

    बंगाली फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर आउट क्रांति और अपराध की उलझी कहानी


    नई दिल्ली: बंगाली सिनेमा के दर्शकों के लिए एक नई और दिलचस्प पेशकश के रूप में फिल्म ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर जारी कर दिया गया है। इस टीजर ने रिलीज होते ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है क्योंकि इसमें एक ऐसी कहानी की झलक दिखाई गई है जो समाज, अपराध और क्रांति के बीच की जटिल रेखा को दर्शाती है। फिल्म की कहानी 1960 के दशक के कोलकाता की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो उस समय के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

    टीजर में अभिनेता जीत एक बिल्कुल नए और प्रभावशाली अवतार में नजर आ रहे हैं। उनका किरदार अनंत सिंह नाम के एक रहस्यमयी शख्स के इर्द गिर्द घूमता है, जिसे समाज का एक हिस्सा अपराधी मानता है जबकि कुछ लोग उसे गरीबों का मसीहा समझते हैं। यह द्वंद्व ही फिल्म की कहानी को और गहराई देता है और दर्शकों के मन में कई सवाल खड़े करता है।

    फिल्म में अनंत सिंह के अतीत और वर्तमान को भी समानांतर रूप से दिखाया गया है। कहानी के अनुसार वह कभी स्वतंत्रता सेनानी रहा था और मास्टरदा सूर्य सेन के नेतृत्व में भारत की आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल था। लेकिन आजादी के बाद जब वह उन आदर्शों को टूटते हुए देखता है, जिनके लिए उसने अपना सब कुछ समर्पित किया था, तो उसके भीतर गहरा मोहभंग पैदा होता है। यही मोहभंग उसे एक अलग राह पर ले जाता है, जहां वह समाज के भ्रष्ट और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अपनी लड़ाई शुरू करता है।

    टीजर में दिखाया गया है कि कैसे अनंत सिंह समाज के उन लोगों को निशाना बनाता है जो कमजोर और वंचित वर्ग का शोषण करते हैं। उसके इन कदमों से शहर में एक ओर डर का माहौल बनता है तो दूसरी ओर लोगों के बीच जिज्ञासा भी बढ़ती है। इसी बीच इंस्पेक्टर दुर्गा रॉय की एंट्री होती है, जो अनंत सिंह की तलाश में एक सख्त अभियान शुरू करती हैं। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि क्या अनंत सिंह वास्तव में एक अपराधी है या फिर वह एक क्रांतिकारी है जो व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहा है।

    फिल्म का टीजर अपने विजुअल्स और कहानी के अंदाज से दर्शकों को 1960 के दशक के कोलकाता में ले जाता है, जहां सामाजिक असमानता, भ्रष्टाचार और सत्ता की खामियां साफ दिखाई देती हैं। कहानी का यह पहलू इसे सिर्फ एक थ्रिलर नहीं बल्कि एक विचारोत्तेजक फिल्म भी बनाता है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है।

    कुल मिलाकर ‘केउ बोले बिप्लोबी केउ बोले डाकात’ का टीजर एक मजबूत और गहन कहानी की झलक पेश करता है, जिसमें जीत का किरदार, रहस्यमयी कथानक और सामाजिक संदेश मिलकर इसे एक बहुप्रतीक्षित फिल्म बनाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म अपने पूरे स्वरूप में दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है