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  • बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर

    बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर


    काठमांडो। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाने के बाद अब राजधानी काठमांडो की आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। देश के प्रमुख सप्लाई रूट पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाईवे को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा, इसकी अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

    पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो की सप्लाई क्यों प्रभावित?

    काठमांडो के लिए नागढुंगा से भरतपुर तक पृथ्वी हाईवे का करीब 180 किलोमीटर हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग के जरिए राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचती हैं।

    बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं त्रिशूली कॉरिडोर और आसपास के राजमार्गों पर करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने बताया कि अधिकारी रास्ता बहाल करने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा सामान

    सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के मुताबिक शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से में बारी-बारी से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया था। वहीं गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

    हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को दोबारा बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन के बाद सड़कों पर जमा मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है और शाम पांच बजे तक अर्थमूवर मशीनों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी काठमांडो में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

    कालिमाटी बाजार में सब्जियों की आवक घटी

    पृथ्वी हाईवे बंद होने का असर काठमांडो के प्रमुख कालिमाटी फल एवं सब्जी बाजार में भी दिखाई दिया है। मंगलवार को यहां 775 टन सब्जियां, फल और मछली पहुंची थी। बुधवार को आवक 771 टन रही, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 477 टन रह गई।

    बाजार विकास बोर्ड के सूचना अधिकारी बिनय श्रेष्ठ के अनुसार पृथ्वी हाईवे से आने वाला सामान रास्ते में फंसा हुआ है। इस मार्ग से सब्जियों की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, हालांकि अन्य रास्तों से कुछ सामान बाजार तक पहुंच रहा है।

    चार-पांच दिन का ईंधन स्टॉक

    हाईवे बंद होने के कारण पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने फिलहाल लोगों को राहत दी है। निगम के मुताबिक थानकोट डिपो में मौजूद पेट्रोलियम उत्पाद चार से पांच दिन तक चलने के लिए पर्याप्त हैं।

    निगम के उप निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि इस अवधि के भीतर पृथ्वी हाईवे के खुलने की उम्मीद है। इसलिए लोगों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार भी जरूरी वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    कालाबाजारी पर सरकार की नजर

    आपदा के बीच सरकार को इस बात की भी चिंता है कि कहीं कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर सामान महंगा न कर दें। वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने लोगों से बाजार में कालाबाजारी या कृत्रिम कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है।

    विभाग और स्थानीय प्रशासन बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम तथा आपदा प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक समन्वय इकाई बनाई है। संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी इसी तरह की इकाइयां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रसुवा से धादिंग तक भारी तबाही

    बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता और प्रभावित लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

    बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इसे हाल के वर्षों की बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत अभियान के साथ-साथ राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    उपभोक्ता संगठनों ने मांगी सख्ती

    उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से वैकल्पिक मार्गों के जरिए जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने और संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

    उपभोक्ता अधिकार संरक्षण-नेपाल मंच के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिल्सिना ने कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और मनमाने तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि संकट के समय लोगों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि सरकार उनके साथ है और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी

  • ईरान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित मार्गों से देश वापसी का उच्च स्तरीय अलर्ट जारी

    ईरान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित मार्गों से देश वापसी का उच्च स्तरीय अलर्ट जारी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें सभी भारतीय नागरिकों से आग्रह किया गया है कि जितनी जल्दी संभव हो, तय किए गए सुरक्षित और अधिकृत मार्गों से देश छोड़ दें। इसके साथ यह चेतावनी भी दी गई है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बिना दूतावास की अनुमति और समन्वय के बढ़ने का प्रयास न करें। यात्रा के दौरान नागरिकों को लगातार दूतावास के संपर्क में रहने और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर तथा ईमेल आईडी का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    इससे पहले जारी की गई सलाह में नागरिकों को 48 घंटे तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी गई थी। हालात की संवेदनशीलता के मद्देनजर अब सरकार ने अधिक सतर्कता बरतते हुए देश छोड़ने पर जोर दिया है। यह कदम अमेरिकी और ईरानी तनाव के बीच क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया गया है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के लिए सीजफायर का ऐलान हुआ था, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित स्थिति नहीं माना जा रहा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के समय ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक थे, जिनमें छात्र, कामगार और पेशेवर शामिल हैं। अब तक करीब 1,800 नागरिक सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी नागरिकों की सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी हैं। अमेरिकी चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव ने हालात को और भी संवेदनशील बना दिया है।

    एडवाइजरी में नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों से दूर रहें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि यात्रा के सभी मार्ग अधिकृत और सुरक्षित हों। किसी भी जोखिमपूर्ण गतिविधि से बचना अत्यंत आवश्यक है। सरकार स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

  • संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन

    संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) द्वारा पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) (PNG – Piped Natural Gas) को बढ़ावा देने और एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) (LPG – Liquefied Petroleum Gas) की सप्लाई को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, शनिवार तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।

    इस विषय पर मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन उपभोक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘कल तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपनी एलपीजी सरेंडर कर दी! उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद!!’ उन्होंने अन्य पीएनजी यूजर्स से भी अपील की कि वे उन लोगों की मदद के लिए अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ दें, जिनके पास अभी तक पीएनजी की सुविधा नहीं है।


    तीन महीने बाद बंद हो सकती है एलपीजी सप्लाई

    सरकार की योजना है कि जिन घरों में पीएनजी का एक्सेस यानी पाइपलाइन की पहुंच है, लेकिन उन्होंने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है तो वहां तीन महीने बाद एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रोक दी जाएगी। यह नियम उन जगहों पर लागू नहीं होगा जहां पीएनजी की सप्लाई तकनीकी रूप से संभव नहीं है, बशर्ते किसी अधिकृत संस्था द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) जारी किया गया हो।

    पश्चिमी एशिया से आयात में आ रही बाधाओं के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव है। सरकार का लक्ष्य पाइपलाइन वाले क्षेत्रों के लोगों को पीएनजी पर शिफ्ट करना है, ताकि वहां की एलपीजी को उन ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में भेजा जा सके जहां पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं है।


    गैस आपूर्ति में घरेलू और परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता

    – मौजूदा स्थिति को देखते हुए गैस क्षेत्र में आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया है।
    – पीएनजी और सीएनजी: घरेलू पीएनजी और परिवहन के लिए सीएनजी को 100% (पूर्ण आवंटन) गैस दी जा रही है।
    – औद्योगिक और वाणिज्यिक: इन उपभोक्ताओं को उनके औसत उपयोग का लगभग 80% गैस मिल रही है।
    – उर्वरक संयंत्र: इन्हें 70-75% क्षमता पर गैस की आपूर्ति की जा रही है। कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की व्यवस्था की जा रही है।

    एलपीजी की स्थिति और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
    भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी सामान्य है और कहीं से भी किसी कमी की सूचना नहीं है। प्रतिदिन 55 लाख से अधिक गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति को संकट-पूर्व के स्तर के लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है। इसमें हॉस्पिटैलिटी (होटल-रेस्तरां), खाद्य सेवाओं और प्रमुख उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    छापेमारी और जब्ती: सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हाल के दिनों में लगभग 2,900 छापेमारी की गई हैं और करीब 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा राज्यों का केरोसिन आवंटन भी बढ़ाया गया है।

    पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों के इंसेंटिव्स
    पीएनजी नेटवर्क (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) के विस्तार को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अकेले मार्च महीने में 2,90,000 से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस (IGL), महानगर गैस (MGL), गेल गैस (GAIL Gas) और बीपीसीएल (BPCL) जैसी कंपनियां लोगों को एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट होने के लिए कई तरह के इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन/छूट) भी दे रही हैं।

    सरकार की अपील
    केंद्र सरकार ने राज्यों से निगरानी तेज करने, दैनिक ब्रीफिंग आयोजित करने और गैस बुनियादी ढांचे के लिए अप्रूवल में तेजी लाने को कहा है। सरकार ने जनता से यह भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

  • पाकिस्तान में गहराता ऊर्जा संकट: इस तारीख के बाद गैस आपूर्ति ठप होने की चेतावनी

    पाकिस्तान में गहराता ऊर्जा संकट: इस तारीख के बाद गैस आपूर्ति ठप होने की चेतावनी

    इस्‍लामाबाद। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण कतर से LNG की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। पाकिस्तान में गैस सप्लाई को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है, जिसके मुताबिक आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
    सरकारी सूत्रों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा भंडार और आपूर्ति व्यवस्था को देखते हुए निर्धारित तारीख के बाद गैस की उपलब्धता लगभग खत्म होने जैसी स्थिति बन सकती है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
    पाकिस्तान में 14 अप्रैल के बाद लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) उपलब्ध नहीं रहेगी। सीनेट की पेट्रोलियम कमिटी को अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि कतर से पाकिस्तान का LNG आयात 2 मार्च से पूरी तरह निलंबित है। कतर अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है।
    मार्च महीने के लिए निर्धारित 8 LNG कार्गो में से केवल 2 ही पाकिस्तान पहुंचे हैं। वहीं, अप्रैल में आने वाले 6 कार्गो के भी देश में पहुंचने की कोई संभावना नहीं है। युद्ध के कारण प्रमुख संकरे समुद्री जलमार्गों से शिपिंग लगभग रुक गई है, जिससे दुनिया भर की लगभग 20% तेल और LNG आपूर्ति बाधित हुई है। इसके चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 2022 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
    महंगी बिजली और गैस की किल्लत
    इस कमी को पूरा करने के लिए पाकिस्तान अजरबैजान से स्पॉट मार्केट से LNG खरीदने पर विचार कर रहा है। लेकिन यह सौदा 24 डॉलर प्रति यूनिट पड़ेगा, जबकि कतर के साथ कॉन्ट्रैक्ट के तहत यह केवल 9 डॉलर प्रति यूनिट था। इससे बिजली उत्पादन काफी महंगा हो जाएगा। बिजली क्षेत्र को गैस की आपूर्ति 300 mmcfd से घटाकर 130 mmcfd कर दी गई है। इसके अलावा, सुई सदर्न गैस कंपनी (SSGC) ने एक उर्वरक संयंत्र की गैस आपूर्ति में 50% की कटौती की है।
    पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बढ़ने के कारण पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) के अनुसार, 7 मार्च से अब तक डीजल की कीमतों में लगभग 100% और पेट्रोल की कीमतों में लगभग 70% की वृद्धि हुई है। वैश्विक स्तर पर हाई-स्पीड डीजल 88 डॉलर से बढ़कर 187 डॉलर प्रति बैरल और पेट्रोल 74 डॉलर से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
    पाकिस्तान के पास मौजूदा ईंधन भंडार

    पेट्रोलियम सचिव मिर्जा नसीर-उद-दीन अहमद ने समिति को देश के मौजूदा स्टॉक की जानकारी दी:

    पेट्रोल: 27 दिनों का भंडार

    डीजल: 21 दिनों का भंडार

    कच्चा तेल: 11 दिनों का भंडार

    LPG: 9 दिनों का भंडार

    JP-1 (विमानन ईंधन): 14 दिनों का भंडार

    पाकिस्तानी सीनेटर मंजूर अहमद और सादिया अब्बासी ने सवाल उठाया कि जब देश के पास 28 दिनों तक का रिजर्व स्टॉक था, तो सरकार ने कीमतें क्यों बढ़ाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुराने स्टॉक पर दाम बढ़ाकर मुनाफा कमा रही है। पेट्रोलियम सचिव ने स्पष्ट किया कि कीमतों में यह बढ़ोतरी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि जमाखोरी को हतोत्साहित करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
    सरकार के आगामी कदम और भारत की स्थिति

    मोटरसाइकिल और रिक्शा चालकों के लिए पाक सरकार एक राहत पैकेज पर काम कर रही है। आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए शहबाज सरकार ने अस्थायी रूप से यूरो-5 (Euro-5) मानक से कम गुणवत्ता वाले तेल के आयात की अनुमति दे दी है। अधिकारियों ने समिति को यह भी बताया कि इस क्षेत्रीय संकट से भारत भी अछूता नहीं है; वहां भी पेट्रोल के लगभग 60% आयात पर असर पड़ा है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार

    पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार मौजूद है और फिलहाल किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, देश में इस समय कच्चे तेल का लगभग 25 दिनों का अतिरिक्त भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही पेट्रोलियम के शोधित उत्पादों का भी करीब 25 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। इस तरह कुल मिलाकर देश के पास सात सप्ताह से अधिक की आवश्यकता पूरी करने लायक भंडार है।

    अधिकारियों ने बताया कि कुल अतिरिक्त भंडार करीब 25 करोड़ बैरल, यानी लगभग 4,000 करोड़ लीटर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात लगातार जारी है। इसलिए मीडिया में चल रही यह खबर कि देश के पास केवल 25 दिन का कच्चा तेल ही बचा है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

    गौरतलब है कि भारत वर्तमान में छह महाद्वीपों के लगभग 40 देशों से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में देश की निर्भरता पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है। देश की रिफायनिंग कंपनियों की कुल शोधन क्षमता 25.8 करोड़ टन प्रतिवर्ष है, जो घरेलू मांग से काफी अधिक है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की वार्षिक मांग लगभग 21 से 23 करोड़ टन के बीच रहती है।

    इसके अलावा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण अनिवार्य किए जाने से हर साल लगभग 4.4 करोड़ बैरल, यानी करीब 60 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी आती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आयात पूरी तरह बंद भी हो जाए, तब भी देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान पर हुए हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इसके चलते कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।