Tag: crop damage
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उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा
नई दिल्ली । उत्तराखंड में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदला कि हरिद्वार से लेकर ऊधम सिंह नगर तक लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार 9 अक्टूबर को तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया। आसमान से गिरे बड़े-बड़े ओलों की वजह से कई गाड़ियों और मकानों के शीशे टूट गए जबकि सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें और कृषि उपज प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक बढ़ गई। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए।हरिद्वार में शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए और बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गई। शुरुआत में बारिश की रफ्तार कम रही लेकिन कुछ ही देर में इसकी तीव्रता बढ़ने लगी। बारिश के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी ओलावृष्टि का असर देखने को मिला। अचानक हुई इस मौसमी घटना से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कई जगह खड़े वाहनों के शीशे टूट गए जबकि मकानों की खिड़कियों और सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा। तेज बारिश और ओलों के कारण लोगों को काफी परेशानी हुई। मौसम में आए बदलाव के बाद तापमान नीचे जाने से ठंडक भी बढ़ गई।हरिद्वार के अलावा ऊधम सिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसका असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है और किसानों की फसलों तथा कृषि उपज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसान चिंतित हैं। फसल को नुकसान होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि प्रभावित खेतों और संपत्तियों को हुए कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द नुकसान का आकलन करने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती है।ओलावृष्टि से नुकसान की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र का रुख किया। मुख्यमंत्री शुक्रवार को हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। इसी दौरान उन्हें ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में ओलावृष्टि और उससे हुए नुकसान की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपना हेलिकॉप्टर प्रभावित क्षेत्र की ओर मोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए हालात का जायजा लिया और फिर जमीन पर पहुंचकर प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने नुकसान का सही आकलन कर निर्धारित समय के भीतर किसानों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। धामी ने भरोसा दिलाया कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और प्रभावित लोगों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जाएंगे।दूसरी ओर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने हरिद्वार समेत प्रभावित क्षेत्रों में फसलों सब्जियों और संपत्तियों को हुए नुकसान का सही आकलन कराने की मांग की। साथ ही जिन लोगों को अधिक नुकसान हुआ है उन्हें उचित मुआवजा और सहायता देने की अपील की। अब प्रभावित लोगों की नजर प्रशासनिक सर्वेक्षण और राहत संबंधी फैसलों पर है। -

सीहोर में किसान की फसल पर चढ़ा दिए ट्रैक्टर: रोकने पर दबंग बोले- कोई पटवारी नहीं आएगा, यहीं से निकलेगी गाड़ी
सीहोर । सीहोर जिले के अहमदपुर थाना क्षेत्र के पीपलखेड़ा गांव में एक किसान की मेहनत पर दबंगों ने ट्रैक्टर चलाकर पानी फेर दिया। आपसी रंजिश के चलते गांव के कुछ लोगों ने खेत में जबरन ट्रैक्टर और खेती के उपकरण उतार दिए तथा बोई हुई फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया। जब किसान और उसके परिजनों ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने खुलेआम दादागिरी दिखाते हुए गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ही खेत में कई ट्रैक्टर कल्टीवेटर और बोनी मशीन के साथ लोग जबरन जुताई कर रहे हैं। किसान पक्ष के लोग ट्रैक्टर रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन आरोपी उन्हें धक्का देकर हटाने का प्रयास करते हैं। विरोध के दौरान एक युवक ट्रैक्टर के सामने जमीन पर बैठ जाता है ताकि फसल को बचाया जा सके लेकिन दबंग बेखौफ होकर कहते हैं कि ट्रैक्टर इसी रास्ते से जाएगा और जो होना है हो जाने दो। जब पीड़ित पक्ष पटवारी की मौजूदगी में फैसला कराने की बात करता है तो आरोपी साफ शब्दों में कहते हैं कि कोई पटवारी नहीं आएगा और ट्रैक्टर यहीं चलेगा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस धक्का मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति बन जाती है।
पीड़ित किसान मानसिंह ने अहमदपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि गांव के राजू महेंद्र चंदरसिंह अरविंद और योगेंद्र ने पुरानी रंजिश के चलते उनकी कृषि भूमि में घुसकर जानबूझकर ट्रैक्टर चलाया जिससे बोई हुई फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसान का कहना है कि विरोध करने पर आरोपियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और भविष्य में भी खेत को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।
घटना के बाद किसान ने पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद और आपसी रंजिश के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत
नई दिल्ली। खेती-किसानी में मौसम के साथ-साथ जंगली जानवरों का खतरा भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। कई बार खेतों में घुसकर नीलगाय, जंगली सूअर और दूसरे वन्य जीव पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब किसानों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए जंगली जानवरों और जलभराव से खराब होने वाली फसलों को भी बीमा कवर में शामिल करने का फैसला किया है।केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी कि खरीफ 2026 सीजन से यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत अगर किसी किसान की फसल जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाने या भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से खराब होती है, तो उसे भी बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाएगा। लंबे समय से किसान इस तरह के नुकसान को योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे।
सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था का फायदा देशभर के हजारों किसानों को मिलेगा। अब तक फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान को ही प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब खेती को प्रभावित करने वाले दूसरे बड़े जोखिमों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
कैसे मिलेगा बीमा क्लेम?
नई गाइडलाइन के अनुसार, फसल खराब होने की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी। किसान मोबाइल ऐप या संबंधित पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ खेत की जियो-टैग फोटो भी अपलोड करनी होगी, ताकि नुकसान की पुष्टि की जा सके। इसके बाद अधिकारी मौके पर जांच करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा जारी किया जाएगा।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन जंगली जानवरों से हुए नुकसान को योजना में शामिल किया जाएगा और किन जिलों में यह सुविधा लागू होगी, इसका फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो हर साल जंगली जानवरों या जलभराव के कारण भारी नुकसान झेलते हैं। सरकार का कहना है कि खेती को सुरक्षित और किसानों की आय को मजबूत बनाने के लिए योजनाओं में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और यह कदम उसी दिशा में अहम माना जा रहा है।
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भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता
भिण्ड । भिण्ड जिले में मौसम का अचानक बदलता मिजाज किसानों की चिंता का कारण बन गया है। पिछले एक सप्ताह से सुबह तेज धूप और शाम को बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। इस बदलते मौसम से खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार गेहूँ की फसल पर नकारात्मक असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि यह अचानक बदलते मौसम ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों को प्रभावित किया है।कल देर शाम तेज हवाओं के साथ बादल घिर आए और रात में बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिले के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई। हालांकि देर रात मौसम साफ होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन खेतों में फसल पर इसका असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई जगह गेहूँ के बाल कमजोर हुए और जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उनका नुकसान होने की संभावना है।
किसानों का कहना है कि गेहूँ की कटाई का समय करीब है और ऐसी बारिश फसल के बर्बाद होने का जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे मौसम के अनुसार आवश्यक कदम उठाएं और किसानों को समय पर जानकारी प्रदान करें ताकि वे अपनी फसल की रक्षा कर सकें। इसके अलावा किसानों ने सुझाव दिया है कि मौसम के अनुकूल तकनीकी सहायता और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, जिससे कटाई के दौरान नुकसान को कम किया जा सके।
मौसम विभाग ने भी भिण्ड जिले में अगले कुछ दिनों के लिए बारिश की संभावना जताई है। किसानों को सतर्क रहने और खेतों में सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और बारिश के चलते फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा।
भिण्ड जिले में गेहूँ किसानों की मुख्य फसल है और यह क्षेत्रिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता से किसान परेशान हैं और वे अपने फसल के सही मूल्य और उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। किसान संगठन और स्थानीय प्रशासन भी इस स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और किसानों को सलाह और मदद प्रदान करने में जुटे हैं।
कुल मिलाकर भिण्ड जिले में बदलते मौसम और लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूँ की फसल पर पड़ने वाले असर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मदद और समय पर जानकारी की मांग की है। विशेषज्ञ भी सुझाव दे रहे हैं कि किसानों को अपने खेतों में आवश्यक सुरक्षा उपाय करना चाहिए ताकि फसल की बर्बादी कम से कम हो। ऐसे में आगामी दिनों में मौसम की स्थिति और प्रशासन की मदद दोनों ही किसानों की चिंता को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं, जिससे किसानों की मेहनत पानी में चली गई।
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर रबी की मुख्य फसल गेहूं को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके खेतों में जलभराव की वजह से 10 से 12 एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है और यदि बारिश अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है। संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण करीब 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जमीन लीज पर लेने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें जमीन का किराया देना पड़ रहा है।
बरनाला में भी ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान हरदीप सिंह ने बताया कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं लखबीर सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसानों का कहना है कि बिना किसी मदद के वे इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे और सरकार से त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने तबाही मचा दी है। यहां खड़ी फसलें गिर गई हैं और कट चुकी फसल भी पानी में भीगकर खराब हो गई है। एक किसान ने बताया कि उसकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, साथ ही सरसों की फसल भी नष्ट हो गई है। अन्य किसानों ने कहा कि सारी फसलें पानी में गिरकर खराब हो गई हैं और यदि सरकार से कोई सहायता मिलती है तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। किसान आर्थिक दबाव में हैं और कई परिवार कर्ज में डूबने की स्थिति में हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों से किसानों को त्वरित मुआवजा देने और राहत कार्यों को शीघ्र प्रभावी बनाने की अपील की जा रही है।
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पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं,
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर रबी की मुख्य फसल गेहूं को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके खेतों में जलभराव की वजह से 10 से 12 एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है और यदि बारिश अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है। संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण करीब 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जमीन लीज पर लेने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें जमीन का किराया देना पड़ रहा है।
बरनाला में भी ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान हरदीप सिंह ने बताया कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं लखबीर सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसानों का कहना है कि बिना किसी मदद के वे इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे और सरकार से त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने तबाही मचा दी है। यहां खड़ी फसलें गिर गई हैं और कट चुकी फसल भी पानी में भीगकर खराब हो गई है। एक किसान ने बताया कि उसकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, साथ ही सरसों की फसल भी नष्ट हो गई है। अन्य किसानों ने कहा कि सारी फसलें पानी में गिरकर खराब हो गई हैं और यदि सरकार से कोई सहायता मिलती है तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। किसान आर्थिक दबाव में हैं और कई परिवार कर्ज में डूबने की स्थिति में हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों से किसानों को त्वरित मुआवजा देने और राहत कार्यों को शीघ्र प्रभावी बनाने की अपील की जा रही है।
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एमपी में 4 दिन बारिश-ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद, अब बढ़ेगी गर्मी, नया सिस्टम होगा सक्रिय
भोपाल। मध्य प्रदेश में बीते 4 दिनों करीब 98 घंटे से सक्रिय मजबूत मौसम प्रणाली के कारण 45 जिलों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिला। इनमें से 17 जिलों में ओलावृष्टि भी हुई, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। अब यह सिस्टम आगे बढ़ चुका है और मौसम साफ होने के साथ तेज गर्मी बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने अगले 4 दिनों तक कहीं भी आंधी या बारिश की संभावना नहीं जताई है। हालांकि मार्च के आखिरी सप्ताह में एक नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस के असर से मौसम में फिर बदलाव हो सकता है।मौसम विभाग के मुताबिक 26 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे प्रदेश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी या बादल छाने की स्थिति बन सकती है। शनिवार को भी कुछ जिलों में मौसम बदला रहा और राजधानी भोपाल में बादल छाए रहने से दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
तापमान की बात करें तो पचमढ़ी में सबसे कम 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रीवा और दतिया में 28.2 डिग्री, नौगांव और सतना में 28.3 डिग्री, सिवनी में 28.4 डिग्री, टीकमगढ़ और सीधी में 28.6 डिग्री, दमोह और उमरिया में 29 डिग्री, श्योपुर में 29.4 डिग्री तथा मंडला और खजुराहो में 29.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल का तापमान 29.4 डिग्री, जबलपुर 29.5 डिग्री, इंदौर 30.6 डिग्री, ग्वालियर 28.4 डिग्री और उज्जैन 31.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
तेज आंधी और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर फसलों पर पड़ा है। केला, पपीता और गेहूं की फसलें प्रभावित हुई हैं। धार और खरगोन समेत कई जिलों में किसानों को भारी नुकसान हुआ है, जिसके चलते अब मुआवजे की मांग उठने लगी है।
पिछले चार दिनों में इंदौर, धार, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, बुरहानपुर, खंडवा, भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, ग्वालियर, मऊगंज, श्योपुर, मुरैना, दतिया, अशोकनगर, रतलाम, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, कटनी, उमरिया, मैहर, सतना, अनूपपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा और मंडला समेत कुल 45 जिलों में आंधी-बारिश दर्ज की गई।
वहीं अलीराजपुर, बड़वानी, विदिशा, बैतूल, झाबुआ, खंडवा, आगर-मालवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सिवनी, छतरपुर, शिवपुरी, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना और मंडला जिलों में ओले गिरे।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस साल अप्रैल और मई महीने सबसे अधिक गर्म रह सकते हैं। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी का असर रहेगा।
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आसमान से आफत मध्यप्रदेश में ओलावृष्टि से खेत तबाह किसान मुआवजे की राह तकते
मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट बदलते हुए किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है बीती रात कई जिलों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है खासतौर पर डबरा और रायसेन जिलों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है जहां किसानों को अपनी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा हैडबरा और भितरवार अंचल में अचानक तेज हवा गरज और बेर के आकार के ओलों के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं सहित रबी सीजन की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है किसानों के अनुसार करीब 50 प्रतिशत तक फसलें बर्बाद हो चुकी हैं तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण फसलें जमीन पर गिर गई हैं जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा
गांवों में किसानों की चिंता साफ तौर पर देखी जा सकती है सेकरा जागीर सहित कई क्षेत्रों के किसान अपनी फसलों का नुकसान देख मायूस हैं किसान दीपक आकाश अमर सिंह बृजमोहन सुघर सिंह और लक्ष्मण सिंह जैसे कई कृषक बताते हैं कि अब तक कोई सरकारी अमला सर्वे के लिए नहीं पहुंचा है ऐसे में वे सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं यह प्राकृतिक आपदा उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बनती जा रही है
इधर रायसेन जिले के सुल्तानगंज तहसील क्षेत्र में भी मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया नई गढ़िया गोपई उमरहारी और गुलवाड़ा जैसे गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है यहां चने और बेर के आकार के ओले गिरने से खेतों में खड़ी गेहूं और चना फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है
जिस समय किसान फसल की कटाई की तैयारी कर रहे थे उसी दौरान मौसम के इस बदलाव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया तेज ठंडी हवाएं और काले बादलों ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया और खेतों में खड़ी तैयार फसलें अब बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं
बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा बल्कि स्थानीय बाजारों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला सुल्तानगंज और बेगमगंज क्षेत्रों में चांद रात को लेकर सजी दुकानों पर भी बारिश ने खलल डाल दिया जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों और व्यापारियों दोनों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि जल्द सर्वे कराकर नुकसान का आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे इस संकट से उबर सकें
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भोपाल-उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश और तेज आंधी, श्योपुर में 1 इंच पानी गिरा, फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू
मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। फरवरी के महीने में सक्रिय हुए नए सिस्टम के कारण प्रदेश में तीसरी बार बारिश और ओलों का दौर शुरू हो गया। पिछले 24 घंटों में भोपाल, उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें धार, श्योपुर, शिवपुरी, इंदौर, आगर-मालवा, राजगढ़, खरगोन, मुरैना, सीहोर, दतिया, ग्वालियर, गुना, रतलाम, बड़वानी, मंदसौर, शाजापुर, देवास, विदिशा, अशोकनगर, टीकमगढ़ और निवाड़ी छतरपुर जिले शामिल हैं।श्योपुर के नालछा में सबसे ज्यादा 1 इंच पानी गिरा। वहीं तेज आंधी की रफ्तार 63 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंची। भोपाल, सीहोर और आगर में 37 किलोमीटर, शाजापुर में 35 किलोमीटर, गुना में 31 किलोमीटर, राजगढ़ में 30 किलोमीटर और धार, नीमच, शिवपुरी में 28 किलोमीटर प्रति घंटे की गति दर्ज की गई।
इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में खड़ी फसलें आड़ी हो गई हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि से भी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित फसलों का समय पर सर्वे और उचित मुआवजा किसानों की राहत के लिए जरूरी है।
मौसम का हाल बताते हुए मौसम विभाग ने कहा कि प्रदेश में खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ 10.0°C और पचमढ़ी 10.2°C में भी कड़ाके की ठंड महसूस की गई।
प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ है। उन्होंने कहा कि बारिश और ओलों से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारियों को तुरंत सर्वे का निर्देश दे दिया गया है। प्रभावित खेतों का दौरा कर वास्तविक नुकसान का आंकड़ा तैयार किया जाएगा, ताकि किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जा सके।
कृषि मंत्री ने कहा, “जहां-जहां भी ओलावृष्टि और तेज बारिश की वजह से फसलें आड़ी हुई हैं या दाने खराब हुए हैं, वहां समय पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वे का काम पूरी पारदर्शिता और तेजी के साथ पूरा किया जाए, ताकि किसानों को राहत राशि में किसी भी तरह की देरी न हो।
प्रदेश में मौसम विभाग ने भविष्य के 48 घंटों में भी अनियमित वर्षा और आंधी की संभावना जताई है, जिससे किसानों और आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। इस बीच प्रशासन और कृषि विभाग सतत निगरानी रखकर किसानों की मदद करने के लिए सक्रिय हैं।
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ग्वालियर में सात गांवों में ओलावृष्टि से 250 हैक्टेयर फसल बर्बाद, सर्वे टीम ने पहुंचकर किया नुकसान का आकलन
ग्वालियर चीनोर क्षेत्र के सात गांवों में दो और तीन फरवरी की रात हुई ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ है प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने के लिए सात दल गठित किए हैं इन दलों में राजस्व विभाग कृषि विभाग और पंचायत के कर्मचारी शामिल हैंगुरुवार तक सर्वे दलों ने सात सौ से अधिक किसानों के खेतों का दौरा किया और लगभग 250 हैक्टेयर फसल प्रभावित पाई गई फिलहाल खेतों में गेहूं और सरसों की फसल पकी नहीं है बालियां ही निकल रही हैं ऐसे में क्राप कटिंग विधि से नुकसान का आकलन नहीं किया जा सकता इसलिए टीम नेत्रांकन विधि से फसल में दिख रहे नुकसान का आंकलन कर रही है
सर्वे में खेत-दर-खेत जाकर नुकसान का मापन किया जाता है टीम रैंडम रूप से कुछ हिस्से चुनती है और वहां पौधों की स्थिति देखकर नुकसान तय करती है यदि नुकसान 33 प्रतिशत या उससे अधिक होता है तो किसान मुआवजे का हकदार बनता है कम नुकसान होने पर शासन की ओर से राहत राशि नहीं मिलती
ओलावृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित गांव कछौआ रहा अकेले यहां चार सौ किसानों के खेतों का सर्वे किया गया अन्य छह गांवों में प्रभावित किसानों की संख्या 300 थी कुल मिलाकर सात सौ किसानों के खेतों तक सर्वे दल पहुंच चुके हैं चीनोर तहसील के अन्य प्रभावित गांवों में बड़की सराय सिकरौदा भौरी खुर्दपार्क जुझारपुर और कछौआ शामिल हैं
कलेक्टर सहित प्रशासन के अफसर भी मैदान में उतर गए थे और सर्वे दलों को नुकसान का आकलन करने के आदेश दिए गए राजस्व विभाग के अफसरों के मुताबिक ओलावृष्टि से फसल नुकसान की सही स्थिति दो से तीन दिन में सामने आएगी सर्वे अंत में पंचनामा तैयार किया जाता है जिसमें किसान का नाम खसरा नंबर फसल का नाम ओलावृष्टि का समय तीव्रता कुल रकबा और क्षतिग्रस्त हिस्से का विवरण दर्ज किया जाता है सर्वे के दौरान पशु हानि होने पर उसका भी विवरण लिखा जाता है ताकि पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिया जा सके