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  • MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन

    MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंदसौर जिले (Mandsaur district) की दलौदा तहसील में सोमवार शाम खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि (Crop Insurance Amount) को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उन्हें फसल नुकसान के बदले मात्र 55 से 60 रुपए प्रति बीघा तक की बीमा राशि मिली है, जो बेहद कम है। सैकड़ों किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर बीमा कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

    किसानों ने बताया कि उन्हें फसल नुकसान के बाद उचित मुआवजे की उम्मीद थी, लेकिन इतनी कम राशि मिलने से वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बीमा कंपनी के अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए बीमा राशि का दोबारा मूल्यांकन कर उचित भुगतान करने की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान ग्राम बेहपुर के किसानों ने एक अलग ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदसौर जिले के अधिकांश गांवों में खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि वितरित हो चुकी है, लेकिन बेहपुर के किसानों को अब तक कोई राशि नहीं मिली है।

    बेहपुर के किसानों के अनुसार, वर्ष 2025 में उनके गांव में खरीफ फसल को भारी नुकसान हुआ था। उनके आसपास के गांवों के किसानों को बीमा राशि मिल गई है, लेकिन बेहपुर के किसानों को इस लाभ से वंचित रखा गया है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है।

    मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि बीमा कंपनी को निर्देश दिए जाएं कि ग्राम बेहपुर सहित जिन किसानों को अब तक फसल बीमा राशि नहीं मिली है, उन्हें जल्द से जल्द पात्रता के अनुसार भुगतान किया जाए। साथ ही, जिन किसानों को बेहद कम राशि मिली है, उनके मामलों की पुनः जांच कर उचित मुआवजा दिया जाए। इस संबंध में तहसीलदार बृजेश मालवीय ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

  • फसल खराब हुई तो अब मिलेगा ज्यादा मुआवजा, सरकार ने बढ़ाई बीमित राशि; 31 जुलाई तक करा सकते हैं बीमा

    फसल खराब हुई तो अब मिलेगा ज्यादा मुआवजा, सरकार ने बढ़ाई बीमित राशि; 31 जुलाई तक करा सकते हैं बीमा


    मध्य प्रदेश। खरीफ सीजन में खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य सरकार ने इस बार प्रमुख खरीफ फसलों की बीमित राशि बढ़ा दी है। इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा या अन्य कारणों से खराब होती है। नई व्यवस्था के तहत धान, मक्का और सोयाबीन की फसल पर मिलने वाले बीमा क्लेम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे नुकसान की भरपाई पहले की तुलना में बेहतर तरीके से हो सकेगी।

    सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार धान की बीमित राशि में प्रति हेक्टेयर 4100 रुपए, मक्का में 2350 रुपए और सोयाबीन में 3910 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर सीधे क्लेम राशि पर पड़ेगा। अनुमान है कि धान उत्पादक किसानों को लगभग 10 प्रतिशत, मक्का किसानों को करीब 7 प्रतिशत और सोयाबीन उत्पादकों को लगभग 5 प्रतिशत तक अधिक क्लेम मिल सकेगा।

    हालांकि बीमित राशि बढ़ने के साथ बीमा प्रीमियम में भी मामूली वृद्धि होगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों के लिए कहीं अधिक लाभदायक साबित होगा। फसल को नुकसान होने की स्थिति में अतिरिक्त क्लेम किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करेगा और अगली फसल की तैयारी के लिए भी सहारा देगा।

    सरकार ने फसल बीमा का लाभ समझाने के लिए उदाहरण भी दिया है। आगर-मालवा जिले में मक्का की थ्रेशोल्ड उपज 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर निर्धारित है। यदि किसी किसान की उपज केवल 30 क्विंटल रहती है तो वर्ष 2025 में 34,650 रुपए की बीमित राशि के आधार पर उसे 8,663 रुपए का क्लेम मिलता था। इस वर्ष बीमित राशि बढ़कर 37 हजार रुपए होने से समान नुकसान की स्थिति में किसान को लगभग 9,250 रुपए का क्लेम मिलेगा।

    इसी तरह सागर जिले में असिंचित धान की बीमित राशि बढ़ने से प्रति हेक्टेयर मिलने वाला क्लेम लगभग 322 रुपए तक बढ़ जाएगा। पहले जहां नुकसान की स्थिति में 6,238 रुपए मिलते थे, अब वही राशि बढ़कर करीब 6,560 रुपए हो जाएगी। दतिया जिले में सोयाबीन किसानों को भी राहत मिलेगी, जहां बीमित राशि बढ़ने के कारण क्लेम में लगभग 467 रुपए प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए बीमा सामान्यतः अनिवार्य रहता है। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता है तो उसे संबंधित बैंक में निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित रूप से इसकी सूचना देनी होगी। वहीं गैर-ऋणी किसानों के लिए बीमा पूरी तरह स्वैच्छिक है और वे अपनी इच्छा से योजना का लाभ ले सकते हैं।

    राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के बीमा के लिए 31 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित की है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि समय रहते बीमा कराकर अपनी फसल को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के खिलाफ सुरक्षित करें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।

  • PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत

    PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत


    नई दिल्ली। खेती-किसानी में मौसम के साथ-साथ जंगली जानवरों का खतरा भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। कई बार खेतों में घुसकर नीलगाय, जंगली सूअर और दूसरे वन्य जीव पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब किसानों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए जंगली जानवरों और जलभराव से खराब होने वाली फसलों को भी बीमा कवर में शामिल करने का फैसला किया है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी कि खरीफ 2026 सीजन से यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत अगर किसी किसान की फसल जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाने या भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से खराब होती है, तो उसे भी बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाएगा। लंबे समय से किसान इस तरह के नुकसान को योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे।

    सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था का फायदा देशभर के हजारों किसानों को मिलेगा। अब तक फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान को ही प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब खेती को प्रभावित करने वाले दूसरे बड़े जोखिमों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

    कैसे मिलेगा बीमा क्लेम?
    नई गाइडलाइन के अनुसार, फसल खराब होने की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी। किसान मोबाइल ऐप या संबंधित पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ खेत की जियो-टैग फोटो भी अपलोड करनी होगी, ताकि नुकसान की पुष्टि की जा सके। इसके बाद अधिकारी मौके पर जांच करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा जारी किया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन जंगली जानवरों से हुए नुकसान को योजना में शामिल किया जाएगा और किन जिलों में यह सुविधा लागू होगी, इसका फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो हर साल जंगली जानवरों या जलभराव के कारण भारी नुकसान झेलते हैं। सरकार का कहना है कि खेती को सुरक्षित और किसानों की आय को मजबूत बनाने के लिए योजनाओं में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और यह कदम उसी दिशा में अहम माना जा रहा है।