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  • अनिका की जिंदगी के लिए जुटे 8.23 करोड़ रुपए, अब सिर्फ 77 लाख की दरकार; 9 करोड़ पूरे होते ही शुरू होगा इलाज

    अनिका की जिंदगी के लिए जुटे 8.23 करोड़ रुपए, अब सिर्फ 77 लाख की दरकार; 9 करोड़ पूरे होते ही शुरू होगा इलाज


    मध्यप्रदेश । इंदौर की मासूम अनिका शर्मा की जिंदगी बचाने की मुहिम अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती दिखाई दे रही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही अनिका के इलाज के लिए अब तक 8 करोड़ 23 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं। परिवार को अब सिर्फ शेष राशि मिलने का इंतजार है, ताकि कुल 9 करोड़ रुपए पूरे होते ही बच्ची का इलाज शुरू कराया जा सके।

    पिछले कई महीनों से अनिका के माता-पिता सरिता शर्मा और प्रवीण शर्मा अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। महंगे इलाज और विदेश से आने वाले विशेष इंजेक्शन की व्यवस्था करना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन समाज, दानदाताओं और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

    अनिका SMA टाइप-2 बीमारी से पीड़ित है, जो बच्चों की मांसपेशियों और शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। इस बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका से विशेष इंजेक्शन मंगवाया जाना है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यही कारण है कि परिवार लंबे समय से क्राउड फंडिंग के जरिए राशि जुटाने में लगा हुआ है।

    इलाज के लिए सिर्फ धनराशि जुटाना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि अनिका की उम्र और वजन भी महत्वपूर्ण मानदंड थे। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि इलाज के लिए निर्धारित वजन सीमा से बच्ची का वजन अधिक न हो जाए। इसके लिए माता-पिता ने बेहद सावधानी बरतते हुए अनिका को नियंत्रित और विशेष लिक्विड डाइट पर रखा। लगातार निगरानी और चिकित्सकीय सलाह के चलते वे अब तक उसका वजन नियंत्रित रखने में सफल रहे हैं।

    अनिका की मदद के लिए समाज के हर वर्ग से लोग आगे आए हैं। इंदौर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया। कई संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं ने सहायता राशि उपलब्ध कराई, जबकि कुछ लोगों और संगठनों ने मदद का आश्वासन भी दिया है। अब परिवार को इन्हीं स्वीकृत सहायता राशियों के मिलने का इंतजार है।

    इस अभियान को देशभर में पहचान दिलाने में कई चर्चित हस्तियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अभिनेता सोनू सूद, वरिष्ठ कलाकार रजा मुराद, बिग बॉस की आवाज के रूप में प्रसिद्ध विजय विक्रम सिंह सहित कई सेलिब्रिटी वीडियो संदेशों के माध्यम से लोगों से सहयोग की अपील कर चुके हैं। इन अपीलों का सकारात्मक असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े।

    हाल ही में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और “SMA Man of India” के नाम से पहचाने जाने वाले प्रतीक क्वात्रा ने ट्रू होप फाउंडेशन के साथ मिलकर अनिका के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई। इस सहायता राशि का चेक परिवार को सौंप दिया गया है, जिससे इलाज की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है।

    अनिका के माता-पिता का कहना है कि जिन लोगों और संस्थाओं ने सहायता का आश्वासन दिया है, यदि वे जल्द राशि उपलब्ध करा दें तो 9 करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा हो जाएगा और उनकी बेटी को जीवन देने वाला इलाज समय पर मिल सकेगा। परिवार को उम्मीद है कि समाज का सहयोग उनकी बेटी के जीवन में नई उम्मीद लेकर आएगा।

  • 3 साल की अनिका के लिए समय से दौड़: 13.5 किलो से पहले लगना है 9 करोड़ का इंजेक्शन, अब भी चाहिए 3.40 करोड़

    3 साल की अनिका के लिए समय से दौड़: 13.5 किलो से पहले लगना है 9 करोड़ का इंजेक्शन, अब भी चाहिए 3.40 करोड़


    इंदौर। तीन साल दो महीने की मासूम अनिका शर्मा इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन जंग लड़ रही है। वह दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप 2 से पीड़ित है। डॉक्टरों ने साफ कहा है कि उसे 9 करोड़ रुपए का विशेष इंजेक्शन 13.5 किलो वजन होने से पहले लगना जरूरी है। फिलहाल उसका वजन 10.5 किलो है। अगर वजन तय सीमा से ऊपर चला गया तो इलाज का यह आखिरी मौका भी हाथ से निकल सकता है।

    अनिका के माता पिता पिछले तीन महीनों से उसका वजन नियंत्रित रखने के लिए सख्त डाइट फॉलो करवा रहे हैं। मां सरिता शर्मा बताती हैं कि बच्ची को रोटी चावल या वजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ नहीं दिए जा रहे। उसे पपीता सीमित फ्रूट जूस चाय बिस्किट और मखाना बादाम अखरोट से बना हलवा दिया जाता है ताकि पेट भी भरे और वजन भी न बढ़े। कई बार अनिका सुबह से शाम तक भूखी रह जाती है क्योंकि वह रोज एक जैसा खाना खाकर परेशान हो चुकी है।

    इलाज के लिए जो इंजेक्शन लगना है वह अमेरिकी कंपनी बनाती है और बेहद महंगा है। दिल्ली स्थित AIIMS से मिले प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार इलाज के दो मापदंड थे पहला दो साल की उम्र से पहले इंजेक्शन लगना चाहिए था जो निकल चुका है; दूसरा 13.5 किलो वजन से पहले इंजेक्शन लगना अनिवार्य है। अब यही अंतिम उम्मीद बची है।

    परिवार नवंबर से क्राउड फंडिंग अभियान चला रहा है। अब तक 5 करोड़ 60 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं लेकिन 3 करोड़ 40 लाख रुपए अभी और चाहिए। अनिका के पिता प्रवीण शर्मा बताते हैं कि इंदौर के अलावा रतलाम बदनावर बड़नगर में कैंप लगाकर सहयोग मांगा गया है और अब खंडवा व उज्जैन में अभियान की तैयारी है। कई लोगों और हस्तियों ने भी वीडियो संदेश जारी कर मदद की अपील की है।

    बीमारी की गंभीरता समझाते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. हेमंत जैन बताते हैं कि एसएमए एक दुर्लभ न्यूरो मस्क्यूलर जेनेटिक बीमारी है जिसमें रीढ़ की हड्डी की मोटर नर्व सेल्स धीरे धीरे नष्ट होने लगती हैं। दिमाग से मांसपेशियों तक सिग्नल नहीं पहुंच पाते जिससे बच्चा शरीर पर नियंत्रण खोने लगता है। समय के साथ बैठना चलना निगलना और सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है।

    डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी की पहचान गर्भावस्था में भी संभव है। समय रहते इलाज मिल जाए तो स्थिति बेहतर हो सकती है लेकिन देरी होने पर नष्ट हुई कोशिकाएं दोबारा जीवित नहीं की जा सकतीं। इंजेक्शन केवल नई कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है।

    अनिका की मां कहती हैं अगर उसका वजन बढ़ गया तो हमारी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। परिवार को अब भी समाज से उम्मीद है कि शेष राशि जुटाकर मासूम की जिंदगी बचाई जा सके।

  • मंथन: जब 5 लाख किसानों ने 2-2 रुपये जोड़कर बनाई देश की पहली 'क्राउड फंडेड' फ़िल्म, कान्स तक गूंजी थी सफलता

    मंथन: जब 5 लाख किसानों ने 2-2 रुपये जोड़कर बनाई देश की पहली 'क्राउड फंडेड' फ़िल्म, कान्स तक गूंजी थी सफलता


    मुंबई। अक्सर फ़िल्मों के बजट करोड़ों में होते हैं और उनके पीछे बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हाथ होता है, लेकिन 1976 में एक ऐसी फ़िल्म आई जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘मंथन’ भारतीय सिनेमा की वह क्रांतिकारी फ़िल्म है, जिसे किसी फ़ाइनेंसर ने नहीं बल्कि गुजरात के 5 लाख किसानों ने अपने दो-दो रुपये के चंदे से बनाया था। करीब 10 लाख रुपये के बजट में तैयार हुई यह फ़िल्म भारत की पहली ‘क्राउड फंडेड’ फ़िल्म कहलाई, जिसकी शुरुआत में गर्व से लिखा गया गुजरात के 5 लाख किसान इस फ़िल्म को प्रस्तुत कर रहे हैं।

    श्वेत क्रांति की वह अनकही दास्तान फ़िल्म की कहानी गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन और डॉ. वर्गीज कुरियन के ‘श्वेत क्रांति’ के संघर्ष पर आधारित थी। विजय तेंदुलकर और श्याम बेनेगल द्वारा लिखित यह कहानी एक ऐसे समाज को दिखाती है जहाँ गरीब किसान डेयरी मालिकों के शोषण और जाति प्रथा की बेड़ियों में जकड़े हुए थे। फ़िल्म में गिरीश कर्नाड ने डॉ. राव डॉ. कुरियन से प्रेरित का किरदार निभाया, जो गाँव में सहकारिता का अलख जगाने पहुँचते हैं। वहीं, दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने ‘बिंदु’ नामक एक आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी ग्रामीण महिला का किरदार निभाकर अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।

    कलाकारों का दिग्गज जमावड़ा और नेशनल अवॉर्ड का सफर ‘मंथन’ केवल अपनी फंडिंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जबरदस्त स्टारकास्ट के लिए भी जानी जाती है। नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा और अमरीश पुरी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने इस फ़िल्म को जीवंत बना दिया। इस फ़िल्म की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस साल इसने दो नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए बेस्ट फीचर फ़िल्म और बेस्ट स्क्रीनप्ले। प्रीति सागर के गाने मेरो गाम काठा पारे ने न केवल फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड जीता, बल्कि यह आज भी अमूल के विज्ञापनों की पहचान बना हुआ है।

    48 साल बाद भी कायम है चमक मई 2024 में इस फ़िल्म ने तब एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं, जब इसकी रिलीज के 48 साल पूरे होने पर इसे प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया। यह इस बात का प्रमाण है कि किसानों के छोटे से सहयोग से शुरू हुई यह यात्रा आज भी वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक है। ‘मंथन’ आज भी हमें याद दिलाती है कि यदि नीयत साफ़ हो और उद्देश्य नेक, तो जनता का छोटा-सा चंदा भी इतिहास रचने की ताकत रखता है।